शादीशुदा की छोटी चूत के जलवे


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प्रेषक : विजय …

हैल्लो दोस्तों, किसी लड़की को गैर मर्द के साथ अकेला नहीं छोड़ना चाहिए, क्योंकि मर्द उसे पकड़कर चोदने की ही सोचेगा, कैसे इसकी चूत में अपना लंड डाल दूँ? यही ख्याल उसके मन में आते रहेंगे। दोस्तों मेरे साथ भी ऐसा ही हुआ था। फिर एक दिन में अपने घर में अकेला था, मेरी बीवी मायके गयी हुई थी और बच्चे स्कूल गये थे। मैंने घर में कुछ जरूरी काम करने के लिए ऑफिस से छुट्टी ले रखी थी।

फिर करीब 11 बजे डोर बेल बजी तो मैंने दरवाज़ा खोला तो सामने मानों एक अप्सरा खड़ी थी। वो 28-29 साल की ग़ज़ब की सांवली और सुंदर औरत साड़ी पहने हुए और हाथों में कागज और कलम लिए हुए कोयल की आवाज में बोली कि माफ़ कीजीएगा, क्या बहनजी है? तो मैंने कहा कि जी नहीं, इस वक़्त तो सिर्फ़ में ही हूँ, आप कौन है? अब उसके सिर पर पसीने की कुछ बूंदे थी तो वो बोली कि जरा एक गिलास पानी मिलेगा? तो मैंने कहा कि हाँ, क्यों नहीं? फिर वो जरा सा अंदर आई। फिर मैंने पानी का गिलास देते हुए उससे पूछा कि क्या बात है? आप कौन है? तो वो पानी पीकर बोली कि जी में एक सर्वे पर हूँ, क्या आप मेरे कुछ प्रश्नों का जवाब दे देंगे? तो मैंने कहा कि जी कोशिश कर सकता हूँ, आप प्लीज यहाँ बैठ जाइए, तो वो सोफे पर बैठ गयी। अब हमारे घर का दरवाज़ा अभी खुला ही था तो मैंने दूसरे सोफे पर बैठकर कहा कि हाँ पूछिए।

तो वो बोली कि जी मुझे एक कन्ज़्यूमर कंपनी ने सर्वे के लिए भेजा है, आप लोग अपने घर की जरूरत की चीज़ों को कहाँ से खरीदते है? और फिर वो इस तरह से सवाल पर सवाल पूछती रही और में उसके जवाब देता गया। हमारे कमरे की बड़ी खिड़की से तेज हवा आ रही थी और दरवाज़ा काफ़ी हिल रहा था। फिर कुछ देर के बाद मैंने पूछा कि इस तरह के मौसम में भी आप क्या सब घरों में जाकर सर्वे करती है? तो वो बोली कि जी जॉब तो जॉब ही है ना। तभी मैंने पूछा कि आप शादीशुदा होकर (उसके माथे पर सिंदूर था) भी जॉब कर रही है? अब वो भी थोड़ी सी खुल सी गयी थी और बोली कि क्यों शादीशुदा औरत जॉब नहीं कर सकती क्या? तो में बोला कि जी यह बात नहीं है, घर-घर जाना, जाने किस घर में कैसे लोग मिल जाएँ? तो तभी उसने जवाब दिया वैसे तो दिन के वक़्त ज़्यादातर हाउसवाईफ ही मिलती है, कभी-कभी ही कोई मेल मेंबर होता है।

फिर मैंने उससे पूछा कि तो आपको डर नहीं लगता है? तो वो बोली कि जी अभी तक तो नहीं लगा, फिर आप जैसे शरीफ आदमी मिल जाए तो क्या डर? अब एक बार तो शरीफ आदमी सुनकर मुझे थोड़ा अजीब लगा था। उसे क्या मालूम? में उसे किस नजर से देख रहा था? उसकी साड़ी पर ब्लाउज तना हुआ था और मेरे लंड पर खुजली सी होने लगी थी। अब मेरा जी चाह रहा था की काश इसे सिर्फ़ एक बार चूम सकता और उसके ब्लाउज के नीचे की उन चूचीयों को दबा सकता, उसके हाथों की उंगलियाँ लंबी-लंबी मुलायम सी थी। अब यह सब देख-देखकर मेरे लंड महाराज खड़े हो गये थे। अब मेरे मन में बहुत सारे ख्याल आ रहे थे, क्या गजब की अप्सरा है? इसकी तो चूत को हाथ लगाते ही शायद हाथ जल जाएगा। तभी वो बोली कि अच्छा थैंक्स, अब में चलती हूँ। तभी मानों मेरे ऊपर पहाड़ टूट गया और मैंने सोचा कि यह चली जाएगी तो हाथ से निकल ही जाएगी, अरे विजय साहब हिम्मत करो, आगे बढ़ो, कुछ बोलो ताकि ये रुक जाए, इसकी चूत में अपना लंड नहीं डालना है क्या? चूत में लंड? तो इस ख्याल ने मुझे बड़ी हिम्मत दी और में बोला कि माफ़ कीजिएगा अगर आप बुरा ना माने तो अपना नाम तो बता दीजिए? मैंने डरते हुए कहा। तो वो कोयल सी आवाज में बोली कि इसमें बुरा मानने की क्या बात है? प्रतिमा, प्रतिमा श्रीवास्तव।

फिर मैंने उससे कहा कि प्रतिमाँ जी आप जैसी सुंदर औरत को थोड़ा संभलकर रहना चाहिए। तो वो बोली कि सुंदर और में? तो में थोड़ा सा घबराया, लेकिन फिर हिम्मत करके बोला कि जी सुंदर तो आप है ही, आप बुरा मत मानियेगा, प्लीज, अब तो चाय पीकर ही जाइए। फिर वो बोली कि चाय लेकिन बनाएगा कौन? तो में बोला कि में जो हूँ, कम से कम चाय तो बना ही सकता हूँ। तभी वो हँसते हुए बोली कि ठीक है बनाइए। फिर मैंने हवा में हिलते दरवाज़े को हल्के-हल्के बंद कर दिया और उसका ध्यान हटाने के लिए कहा कि आप प्लीज वहाँ सोफे पर बैठ जाइए और टी.वी ऑन कर लीजिए।

फिर मैंने किचन में जाकर चाय के लिए बर्तन गैस पर रखा और पानी डाला और गैस ऑन किया और फ्रिज से दूध निकाला और थोड़ा सा दूध पानी में मिलाया। अब में चाय के उबलने का इंतजार कर रहा था और इधर मेरा लंड उबल रहा था। अब इतनी सुंदर औरत पास में बैठी थी और मुझे पता नहीं था कैसे आगे बढ़ूँ? तो तभी वो पीछे से आई और बोली कि क्या में आपकी कुछ मदद करूँ? फिर मैंने जवाब दिया कि बस देख लीजिए की चाय ठीक बन रही है या नहीं। फिर मैंने और हिम्मत करके कहा कि प्रतिमा जी, आप वाकई में बहुत सुंदर है और बहुत अच्छी भी, आपके पति बहुत ही खुशनसीब इंसान है। फिर वो बोली कि आप प्लीज अब बार- बार ऐसे ना कहिए और मुझे प्रतिमा जी क्यों कह रहे है? में तो आपसे छोटी हूँ। दोस्तों मेरे लिए यह हिंट काफ़ी था, क्योंकि अगर औरत नहीं चाहे तो उसे चोदना बड़ा मुश्किल है, आख़िर मुझे रेप तो करना नहीं था।

अब में समझ गया था कि यह अब चुदवाने के लिए तैयार है तो तभी में बोला कि ठीक है प्रतिमा जी, नहीं प्रतिमा तुम कितनी सुंदर हो, में बताऊँ? तो तभी वो बोली कि आपने कई बार कहा तो है, अब भी बताना बाकी है क्या? तो में बोला कि बाकी तो है और यह कहकर मैंने गैस बंद किया और उससे बोला कि बस एक बार अपनी आखें बंद करो, प्लीज, तो उसने अपनी आखें बंद की। फिर मैंने कहा कि अपनी आँखें बंद ही रखना और में उसको कंधो के पास से पकड़कर आहिस्ते-आहिस्ते कमरे में लाया और फिर मैंने हल्के से उसके गुलाबी-गुलाबी, नर्म-नर्म होंठो पर अपने होंठ रख दिए, तो मेरे शरीर में एक बिजली सी दौड़ गयी। अब मेरा लंड एकदम तन गया था और मेरी पेंट से बाहर आने के लिए तड़पने लगा था। फिर उसने तुरंत अपनी आखें खोली और शॉक से मुझे देखती रही और फिर दोस्तों कसकर और शर्माकर मेरी बाँहों में आ गयी, तो मेरी खुशी का ठिकाना ही नहीं रहा।

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अब मैंने उसे कसकर अपनी बाँहों में दबोच लिया था। अब मुझे ऐसा लग रहा था कि बस उसे ऐसे ही पकड़े रहूँ। फिर मैंने सोचा कि अब समय खराब नहीं करना चाहिए, पका हुआ फल है बस खा लो। फिर मैंने तुरंत उसे अपनी बाँहों उठाया (वो बहुत ही हल्की थी) और बेडरूम में लाकर बिस्तर पर लेटाया। अब उसने अपनी आँखें बंद कर रखी थी, अब वो बहुत शर्मा रही थी। अब साड़ी पहने हुए बिस्तर पर लेटी हुई, शरमाती हुई, आँखें बंद किए हुए, उसके ब्लाउज से उसके बूब्स ऊपर नीचे होते हुए देखकर में पागल हो गया था। फिर मैंने आहिस्ते से उसकी साड़ी को एक तरफ करके उसकी दाहिनी चूची को ऊपर से ही दबाया तो उसके शरीर में एक सिहरन सी दौड़ गयी और वो अपनी बंद आँखों से ही बोली कि प्लीज विजय साहब जल्दी से, कोई आ नहीं जाए। तो में बोला कि घबराओं नहीं प्रतिमा डार्लिंग, बस मज़ा लेती रहो, आज में तुम्हे दिखा दूँगा प्यार किसे कहते है? खूब चोदूंगा मेरी रानी। दोस्तों ये कहानी आप कामुकता डॉट कॉम पर पड़ रहे है।

अब में एकदम फॉर्म में था और यह कहते हुए मैंने उसकी चूचीयों को खूब दबाया और उसके होंठो को कस-कसकर चूसने लगा। फिर मैंने उससे पूछा कि चुदवाओगी ना? तो वो गजब की शरमाते हुए बोली हाँ विजय साहब, आप भी बहुत बेशर्म है। तो में बोला कि प्रतिमा रानी सेक्स में क्या शरमाना? और उसके नर्म-नर्म गालों को अपने हाथ में लेकर उसके होंठो का खूब रसपान किया। अब में उसके ऊपर चढ़ा हुआ था और मेरा लंड उसकी चूत के ऊपर था। अब मुझे उसकी चूत महसूस हो रही थी और उसकी चूचीयाँ गजब की तनी हुई थी, जो मेरे सीने में चुभ-चुभकर बहुत ही आनंद दे रही थी। फिर मैंने अपने दाहिने हाथ से उसकी लेफ्ट चूची को खूब दबाया और उत्तेजना में उसके ब्लाउज के नीचे अपना एक हाथ घुसाकर उसे पकड़ना चाहा। तभी बोली कि विजय ब्लाउज खोल दोना। अब उसका यह कहना था और मैंने तुरंत उसे घुमाकर उसके ब्लाउज के बटन खोल दिए और साथ ही साथ उसकी ब्रा के हुक खोल दिए और पीछे से ही अपने एक हाथ को उसकी ब्रा के नीचे से उसके बूब्स को पूरा समेट लिया, आह क्या फीलिंग थी? सख्त और नर्म वो दोनों बहुत गर्म थे मानों आग हो, उसके निपल्स एकदम तने हुए थे।

फिर मैंने जल्दी-जल्दी उसके ब्लाउज और ब्रा को हटाया और उसकी साड़ी को पूरा खोल दिया और उसके पेटीकोट के नाड़े को खोलकर उसे हटाया। अब उसे पिंक पेंटी पहने हुए नंगी लेटी हुई देखकर तो में बर्दाश्त ही नहीं कर सका था। फिर उसने शर्माकर अपने बूब्स को छुपाने की कोशिश की और अपनी दोनों टाँगों को क्रॉस करके अपनी चूत को भी छुपाया। फिर मैंने अपने कपड़े जल्दी-जल्दी उतारे, अब मेरा लंड तनकर बाहर आ गया था और ऊपर की तरफ होकर तड़पने लगा था। फिर मैंने उसका एक हाथ लेकर अपने फड़कते हुए लंड पर रख दिया। तभी वो बोली कि उफ़ कितना बड़ा और मोटा है? और आहिस्ता-आहिस्ता मेरे लंड को आगे पीछे हिलाने लगी। शादीशुदा औरत को चोदने का यही मज़ा है कुछ सिखाना नहीं पड़ता, वो सब जानती है और अगर महीने का ठीक दिन हो तो कंडोम की भी जरूरत नहीं पड़ती है। फिर मैंने आख़िर में उससे पूछ ही लिया कि प्रतिमा डार्लिंग कंडोम लगाऊं क्या? तो वो अपना मुँह हिलाते हुए मना करते हुए हँसते हुए खिलखिलाई सब ठीक है।

फिर मैंने उसके बदन से उस पिंक पेंटी को हटाया तो इतने में मैंने उसकी चूत को निहारा। उसकी चूत पर हल्के-हल्के बाल थे और बीच में सुंदर सा छोटा सा कट था, जो कुछ फूला हुआ था। फिर मैंने अपना एक हाथ उसके ऊपर रखा और हल्के से दबाया और मेरी उंगली ऐसे घुसी जैसे मक्खन में छुरी घुसी हो। अब उसकी चूत से रस बह रहा था और उसकी चूत एकदम गीली थी। अब में जैसे सब कुछ एक साथ कर रहा था कभी उसके होंठो को चूसता, तो कभी उसकी चूचीयों को दबाता, कभी अपने एक हाथ से तो कभी अपने दोनों हाथों से उसकी चूचीयाँ एकदम टाईट गोल और तनी हुई थी। कभी उसके सोने जैसे बदन पर अपने हाथ फैरता। फिर मैंने उसकी चूचीयों को खूब चूसा और अपनी उंगलियों से उसकी चूत में खूब अंदर बाहर करके हिलाया।

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फिर मैंने उससे कहा कि प्रतिमा अब में नहीं रह सकता। अब तो चोदना ही पड़ेगा, कस-कसकर चोदूंगा मेरी रानी। फिर मैंने पहली बार उसके मुँह से सुना चोद दीजिए ना विजय साहब, बस चोद दीजिए। तो मैंने मज़ा लेते हुए उससे पूछा कि क्या चोदूं जानेमन? एक बार फिर से कहो ना, तुम्हारे मुँह से सुनने में कितना अच्छा लग रहा है? तो वो बोली कि अब चोदिए ना इस इस चूत को। फिर मैंने कहा कि चूत नहीं बुर मेरी रानी, बुर सुनने में ज़्यादा अच्छा लगता है। अब में तेरी गर्म-गर्म और गुलाबी-गुलाबी चूत में अपना ये लंड घुसाऊंगा और कस-कसकर चोदूंगा। फिर मैंने अपना लंड उसकी चूत के मुँह पर रखा और हल्के से एक धक्का दिया। तो उसने अपने हाथों से मेरे लंड को पकड़ा और गाइड करती हुई अपनी चूत में डाल दिया। दोस्तों मानों में जन्नत में आ गया था। तो में बोल ही उठा उफ, क्या चूत है? प्रतीमा मज़ा आ गया। तब उसने भी उत्तेजित होकर बगैर झिझके कहा कि चोद दो विजय बस अब इस चूत को खूब चोदो। दोस्तों उसकी चूचीयाँ दबाते हुए, होंठ चूसते हुए, उसे ज़ोर ज़ोर से चोद-चोदकर ऐसा मज़ा मिल रहा था कि मुझे पता ही नहीं चला कि में कब झड़ गया?

फिर झड़ते-झड़ते भी में उसे बस चोदता ही रहा चोदता ही रहा और उससे बोला कि प्रतिमा बहुत टेस्टी चुदाई थी यार, तुम तो गजब की चीज हो। तभी वो मुझे कसकर पकड़ते हुए बोली कि मुझे भी बहुत मज़ा आया विजय साहब। अब उसकी चूचीयाँ मेरे सीने से लगकर एक अलग ही आनंद दे रही थी। दोस्तों फिर 20 मिनट के बाद पहले तो मैंने उसकी चूत को चाटा और उसने हल्के-हल्के मेरे लंड को चूसा और फिर हमने कस-कसकर चुदाई की और इस बार हमें झड़ने में काफ़ी समय भी लगा। मैंने शायद उसकी चूचीयाँ और चूत और होंठ और गाल के किसी भी अंग को चूसे बगैर नहीं छोड़ा था। मुझे इतना मज़ा पहले कभी नहीं आया था, बस वो गजब की चीज थी। फिर कपड़े पहनने के बाद मैंने उसे 500 रुपये दिए, जो कि उसने ना-ना करते हुए शरमाते हुए ले लिए। फिर मैंने उससे पूछा कि प्रतिमा अब तो तुम्हें और कई बार चोदना पड़ेगा। अपनी इस प्यारी सी चूत और प्यारी-प्यारी चूचीयों और प्यारे प्यारे होंठो और प्यारी-प्यारी प्रतिमा डार्लिंग के दर्शन करवाओगी ना? फिर मैंने उसका फोन नंबर ले लिया और उससे कह दिया कि जिस दिन घर पर कोई नहीं होगा में बता दूँगा। अब वो मुझसे फ्री हो गयी थी और बोली कि विजय चिंता मत करो होटल में चूत चुदवाएँगे और फिर मैंने उसे चूमते हुए भेज दिया। फिर हम दोनों को जब कभी भी कोई मौका मिला, तो हमने घर में होटल में खूब चुदाई की और खूब इन्जॉय किया ।।

धन्यवाद …

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