सेक्सी नर्स का गांड चुदवाने का शौक


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प्रेषक : जीतू …

हैल्लो दोस्तों, मेरा नाम जीतू है और में रायपुर छत्तीसगढ़ का रहने वाला हूँ। दोस्तों में आज आप सभी को अपनी पहली सच्ची कहानी, एक घटना सुनाना चाहता हूँ, जिसमें मैंने अपने साथ काम करने वाली एक नर्स को चोदकर उसके साथ बड़े मस्त मज़े लिए और उसको बहुत जमकर चोदा और में उम्मीद करता हूँ कि यह मेरी कहानी आप लोगों को जरुर पसंद आएगी। अब में आप लोगों को ज्यादा बोर ना करते हुए सीधे अपनी उस कहानी पर आता हूँ। दोस्तों में एक प्राइवेट हॉस्पिटल में डॉक्टर हूँ और मेरी उम्र 26 साल है और में जिस हॉस्पिटल में काम करता हूँ, वहाँ मेरे साथ बहुत सारी मलयाली नर्स भी काम करती है, उनमें से सीनियर नर्स शादीशुदा है और ज़्यादातर उनके पति अरब देशों में अपनी नौकरी करते है। वैसे तो में बहुत शरीफ स्वाभाव का लड़का हूँ, लेकिन में क्या करूँ जवानी का गरम खून और उसके ऊपर आईसीयू में घंटों तक उन मलयाली सुंदरियों के बीच घिरे रहना, उस वजह से मेरा लंड कितने बार खड़ा हो ही जाता है, वैसे मेरे मासूम चेहरे से किसी को अंदाज़ा भी नहीं लगता होगा कि मेरा लंड खड़ा हो गया है और वैसे मेरे लंड का स्वाभाव भी बड़ा ही विचित्र है। दोस्तों आज तक कभी भी मेरा लंड किसी भी नर्स के बूब्स को देखकर खड़ा नहीं हुआ, मेरा लंड हमेशा से तीन चीज़ों से खड़ा होता है, पहला तो आँखों में मासूमियत और शरारत, दूसरा सेक्सी पर्फ्यूम की गंध और तीसरा उनके गोलमटोल कूल्हे। यह तीन चीज़ दोस्तों यदि किसी एक सुंदरी में हो तो फिर क्या कहना? फिर तो मेरा दिमाग़ एकदम बंद और लंड तनकर खड़ा हो जाता है।

दोस्तों मेरे हॉस्पिटल में अभी भी सभी नर्स सफेद रंग की स्कर्ट ही पहनती है और जब भी किसी मरीज का खून टेस्ट लेना हो या उसको दवाई देनी हो तो चार पांच नर्स आगे मरीज की तरफ झुककर काम करती है और में उनके पीछे खड़ा होकर उन्हें काम बताता रहता हूँ और उस समय सभी नर्स की पीठ मेरी तरफ होती है और झुकने से उनके कूल्हों का आकार उनकी उस टाईट स्कर्ट से साफ साफ दिखता है और अक्सर मेरा लंड इस नज़ारे से तीन चार इंच की दूरी पर रहता है। दोस्तों अक्सर ऐसे मौके पर में मन ही मन उनकी मोटी गांड को सहलाता हूँ और जोश में आकर स्कर्ट को ऊपर उठाकर पेंटी को खोलकर दोनों कूल्हों को सहलाकर अपने लंड को उनकी चूत में डाल देता हूँ और उस वजह से मेरा पूरा जिस्म गरम हो जाता है। दोस्तों मेरे मन में आता है कि काश मुझे जमाने का डर नहीं होता तो में पीछे से उनकी कमर को पकड़कर उन सबकी बारी बारी से खड़े खड़े जमकर चुदाई कर देता, लेकिन यारों वो सारा मामला सपनों तक ही था, लेकिन एक दिन वो सब कुछ एकदम बदल गया, जब लाली नाम की एक नर्स आईसीयू में आई, उसकी आँखें बिल्कुल नटखटी और शराबी थी, उसका पर्फ्यूम मुझे हमेशा बिल्कुल मदहोश कर देता था, उसके लंबे काले बाल थे और बूब्स बिल्कुल मस्त ज्यादा बड़े नहीं थे, लेकिन उसके वो दोनों कूल्हे बाहर निकले हुए थे और उसकी टाईट स्कर्ट से दोनों कूल्हों का आकार एकदम सेक्सी दिखता था और उसकी एक आदत भी थी कि वो कभी भी सीधी नहीं खड़ी रहती थी, वो हमेशा टेबल पर झुककर और वो अपनी गांड को टेबल से दूर और पैरों को सीधा करके खड़ी होती थी। यह उसका खड़ा रहना करीब आधा डॉगी पोज़िशन होता था, जिसकी वजह से हाल यह हो गया था कि मेरा लंड सिर्फ़ उसके पर्फ्यूम और पसीने की गंध से ही खड़ा हो जाता था और जब भी मेरा लंड खड़ा होता तो में डॉक्टर की कुर्सी पर बैठकर गहरी गहरी साँस लेता था। एक दिन दोस्तों मैंने एक सिंगल रूम वाले मरीज को दवा देने के लिए नर्स को बुलाया, तो लाली आ गई। में तब दीवार से सटकर खड़ा हुआ था और दवाई देने के लिए जब वो आई तो वो मेरे सामने खड़ी होकर झुक गई। अब मेरा फिर वही नजारा, लंड से तीन इंच आगे उसकी स्कर्ट में कसमसाती हुई गांड, मेरा लंड खड़ा हो गया और में गहरी साँस लेने लगा। फिर वो जानबूझ कर थोड़ा सा पीछे सरक गई और उसकी गांड बिल्कुल मेरे खड़े लंड को दबाने लगी, जिसकी वजह से मेरे पूरे जिस्म में बिजली दौड़ गयी, लेकिन फिर भी मैंने अपने पर काबू रखा, मेरा पूरा लंड धड़क रहा था और उसे भी मेरे लंड की धड़कने अपनी गांड पर महसूस हुई होगी। फिर करीब तीन मिनट तक ऐसे ही रहने के बाद वो वहाँ से हट गयी और मुझे बिल्कुल एक शरारती मुस्कान देकर बाहर चली गयी। अब में एक बार फिर से डॉक्टर की कुर्सी पर जाकर बैठ गया, में अब बहुत लंबी गहरी सांसे ले रहा था और जैसे तैसे करके मैंने अपने को कंट्रोल किया था।

दोस्तों उस समय रात के करीब 11.00 बजे थे और सभी नर्स अपने अपने मरीज के रूम में थी और में अकेला बीच के हॉल में डॉक्टर की कुर्सी पर बैठा हुआ था। तभी लाली आकर मेरे सामने की टेबल पर झुककर खड़ी हो गयी और अब वो मेरी आँखों में देखकर मुझे घूरने लगी थी और उस वजह से में भी अब बिल्कुल बेशरम होता जा रहा था। दोस्तों अब मुझे उसकी गंध से ऐसा लगता था कि जैसे हम दोनों एक जानवर है और वो भी पूरी तरह से गरमाये हुए। में भी उसकी आँखों में घूरने लगा और उसकी गंध का मज़ा लेने लगा। फिर उसने आँखें नीचे कर ली और मैंने हिम्मत की और अपनी ऊँगली से उसके होठों को में सहलाने लगा। तभी उसने एक झटके से अपने मुहं को खोलकर मेरी ऊँगली को तुरंत अंदर ले लिया और चूसने लगी। फिर में अपने दोनों हाथों से उसके कंधों, गले को और उसके चेहरे को सहलाने लगा, लाली अब सामने से हटकर मेरे पास में आकर वैसे ही झुककर खड़ी हो गयी। अब हम दोनों टेबल के पीछे थे और वो मेरे सामने एक खुली किताब को पढ़ने का दिखावा करने लगी और में अपने एक हाथ से उसकी पीठ को सहलाने के बाद उसकी गांड को भी सहलाने लगा और उसके बाद मैंने उसकी जांघ को सहलाया और स्कर्ट के अंदर से हाथ ऊपर ले गया और उसकी पेंटी के ऊपर से उसके उभरे हुए कूल्हों को दबाने लगा। अब हम दोनों लंबी गहरी सांसे ले रहे थे। तभी अचानक एक मरीज को पेशाब की ट्यूब डालने की ज़रूरत आ गयी, तो मैंने झट से अपना हाथ उसकी पेंटी के अंदर से बाहर निकाला और वो मुझसे तुरंत दूर हट गयी। दोस्तों उस रात को मुझे ऐसा लग रहा था कि मेरा लंड किसी भी समय दर्द से फट जाएगा। फिर मैंने उस मरीज के लंड को पकड़कर साफ किया और फिर उस मरीज के लंड को मैंने लाली की तरफ घुमा दिया और लंड को उसकी चूत की तरफ करके हिला दिया। मेरे ऐसा करने की वजह से वो शरमा रही थी। दोस्तों हमारे काम की जगह में एक नर्स का प्राइवेट कमरा होता है, जिसमें फोन भी लगा होता है और अंदर से लॉक करने की भी सुविधा होती है और अपने हाथ धोने के लिए हम लोग कभी कभी उसमें चले जाते है और में यह भी बता दूँ कि अक्सर रात में नर्स के पति के बाहर से फोन आते है और नर्स उस अपने रूम को अंदर से बंद करके उसमें बहुत गरमागरम बातें करती है। फिर में मरीज की पेशाब नली डालने के बाद नर्स के प्राइवेट रूम में जाकर आराम से हाथ धोने लगा। तभी लाली के पति का फोन आ गया और वो बिना मुझे देखे अंदर आकर दरवाजा बंद करके फोन उठाकर उससे बातें करने लगी और उसकी आदत के हिसाब से वो उसी तरह डॉगी की स्टाईल में थी, मतलब वो टेबल पर झुकी हुई थी और उसकी कमर 90 डिग्री पर मुड़ी हुई उसके पैर एकदम सीधे टेबल से दूर और वो कुर्सी खाली।

दोस्तों में बता दूँ कि हर नर्स अपने पति से कम से कम एक घंटे ज़रूर बात करती है और तब तक बाकी नर्स उनको अपनी तरफ से बिल्कुल भी परेशान नहीं करती। दोस्तों अब में लाली के साथ उस कमरे में बंद था और लाली फोन पर किस कर रही थी और वो मलयाली में अपनी मीठी सुरीली आवाज़ में कुछ बातें कर रही थी। फिर मैंने वो खाली पड़ी कुर्सी उठाई और में उसको उसकी गांड के पीछे रखकर उस पर बड़े आराम से बैठ गया। अब मैंने उसकी कमर को पीछे से पकड़कर उसकी गांड पर स्कर्ट के ऊपर से ही एक किस किया। तभी उसने एकदम चकित होकर मेरी तरफ मुड़कर देखा और उसके मुहं से आह निकल गई, लेकिन उसके पति ने उसका कुछ भी मतलब नहीं समझा होगा, क्योंकि वो लोग उस समय फोन एक दूसरे से सेक्स कर रहे थे। अब उसने अपने दोनों पैरों को सीधा कर लिया, जिसकी वजह से उसकी गांड अब मेरे चेहरे के सामने आ गयी। मैंने अपनी नाक उसकी गांड पर सटाकर उसकी गंध ली और साथ साथ उसकी दोनों मोटी गोरी जांघो को भी सहलाने लगा, जिसकी वजह से उसको अब हल्की सी गुदगुदी होने लगी थी और वो खिलखिलाकर हंसने लगी। अब मैंने उसकी स्कर्ट को ऊपर कमर पर करके उसकी कमर को कसकर पकड़ लिया, पेंटी पर किस करने लगा और उसके दोनों कूल्हों को अपने दाँतों से हल्के हल्के काटने लगा। अब वो कसमसाते हुए मेरी तरफ देखकर बोली तुम बहुत शरारती हो। दोस्तों ये कहानी आप कामुकता डॉट कॉम पर पड़ रहे है।

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दोस्तों उसके जैसी बेशर्म पत्नी मैंने पहले कभी नहीं देखी थी, जो मज़े से अपने पति को उल्लू बना रही थी। मैंने फिर पास में रखी कैंची से उसकी पेंटी को कमर के पास से काटा और फिर चूत के पास से भी उसकी पेंटी से उसके पसीने और पर्फ्यूम की बहुत जबर्दस्त गंध आ रही थी और अब उसकी उभरी हुई गांड मेरे सामने मक्खन की तरह मुलायम दिख रही थी और उसके दोनों कूल्हों को अपने हाथ से हटाने के बाद मैंने उसकी गांड भी देखी, मुझे तो उसकी गांड का छेद और चूत का छेद भी साफ दिख रहा था। अब वो भी मस्त होकर सिसकियाँ भरकर मलयाली में कुछ बातें किए चली जा रही थी। फिर मैंने भी उसके दोनों कूल्हों के बीच में अपनी नाक को डाल दिया और अब मेरा पूरा चेहरा उसकी झांटो के बीच था। अब मेरी नाक उसकी गांड के छेद पर और मुँह उसकी चूत पर था और मैंने दोनों हाथों से उसकी दोनों जांघो को कसकर पकड़ रखा था और अब में पागलों की तरह उसकी चूत और गांड को चाटने लगा और बीच में उसके कूल्हों को भी काट लेता और अब में पूरी तरह से डॉक्टर नहीं एक कुत्ता बन चुका था, जो एक गरमाई हुई कुतिया की चूत को लगातार चाट रहा था और तभी लाली ने फोन पर कहा कि तुम अब चोदो मुझे। फिर क्या था? मैंने तुरंत उस कुर्सी को पीछे धकेल दिया और में उसके पीछे उठकर खड़ा हुआ और मैंने अपनी पेंट की चैन को खोल दिया, लंड को बाहर निकाला और उसकी कमर को कसकर अपनी पकड़ में लिया और लंड को उसकी गीली चूत में हल्का सा धक्का देकर डाल दिया। फिर मैंने धीरे धीरे उसके दोनों कूल्हों को बहुत अच्छे से थपथपाया, जिसकी वजह से धीरे धीरे उसकी चूत ढीली होती चली गयी और मेरा लंड बहुत आराम से फिसलता हुआ उसकी चूत में चला गया। दोस्तों तब मैंने महसूस किया कि उसकी वाह क्या गरम गीला और रेशमी चूत का अहसास मुझे मेरे लंड पर हो रहा था, सही में मेरा लंड उसमें तपकर कुंदन हो रहा था। फिर मैंने अपनी पूरी ताक़त से लंड को लाली की चूत की गहराईयों में उतार दिया और उसकी चूत को दबाए हुए में अपनी कमर को ऊपर नीचे, दाएँ बाएँ, गोल गोल हिला हिलाकर नाचने लगा था और अब हम दोनों ही पूरी तरह से कामदेव के गुलाम हो गये थे।

फिर मैंने महसूस किया कि उसके पैर अब ढीले होने लगे थे। फिर मैंने उसकी कमर के नीचे से हाथ लगाकर उसको सहारा दिया और में अपनी कमर को हिला हिलाकर उसकी चुदाई करने लगा, तब में महसूस कर रहा था कि उसकी चूत की गरमी मेरे लंड से होते हुए मेरे सारे शरीर में फैल रही थी और हम दोनों की आँखें बंद थी और लाली सिर्फ़ ऊह्ह्ह्ह आहह्ह्ह्हह ही कर पा रही थी। मैंने उसको धक्के देने के साथ साथ उसकी गांड की मसाज के भी मज़े लिए। तभी मैंने देखा कि लाली का पूरा शरीर अब अकड़ने लगा था और उसकी चूत मेरे लंड पर बिल्कुल टाईट होकर चिपकने लगी थी और फिर उसकी चूत ने पानी छोड़ दिया, जिसकी वजह से मेरा लंड भी अब गंगा स्नान करके एकदम पवित्र हो चुका था। दोस्तों अब बारी थी उसकी चूत के गंगास्नान की। फिर मैंने उसकी कमर को पकड़कर एक जगह किया और में धमाधम लगातार अपने लंड से धक्के मारने लगा था। उसकी दोनों आँखें बंद थी और चूत ढीली, बेहद चिकनी मेरे लंड से धमाधम धक्के लग रहे थे और तब पांच मिनट बाद मेरे लंड ने भी पानी छोड़ दिया और हम दोनों बिल्कुल तृप्त हो चुके थे। फिर मैंने उसकी चूत से बाहर निकलकर टपकते हुए पानी को पास में रखी एक बोतल में रख लिया। करीब 40 मिनट बीत चुके थे और लाली की मलयाली चूत मेरे लंड की दोस्त बन चुकी थी, में वहीं कुर्सी पर बैठ गया और लाली मेरी तरफ अपना मुहं करके मेरी जांघ पर बैठ गयी। अब मैंने अपने सिकुड़े हुए लंड को सावधानी से उसकी चूत में डाल दिया और में पीछे की तरफ झुककर बैठ गया, वो मेरे लंड को अपने चूत में लिए हुए थी और उसकी स्कर्ट कमर के ऊपर थी और उसकी छाती मेरी छाती से सटी हुई थी और उसका चेहरा मेरे चेहरे के सामने था। अब वो धीरे धीरे फिर से फोन पर बातें कर रही थी। मैंने उसको अपने गले से लगा लिया और अपनी बाहों में कस लिया। उसके बाद में उसके दोनों कूल्हों के ऊपर अपना हाथ फेरने लगा और फिर स्कर्ट के अंदर से अपने हाथ को में उसकी नंगी पीठ पर रखकर सहलाने लगा। अब मैंने उसकी ब्रा के हुक को भी खोल दिया और उसके पूरे कपड़े को उतारकर अलग कर दिया और अपने कपड़े भी मैंने निकाल लिए और फिर से मैंने उसको अपने गले से लगाया और मैंने उसके गले, कंधे, पीठ, दोनों कूल्हों, दोनों जांघो, बहुत सहलाया और उसके साथ ही साथ मैंने उसके दोनों कान को अपनी जीभ से चाट चाटकर चूसा, उसके गाल को चूमा और वो बिल्कुल एक छोटे बच्चे की तरह मेरी छाती से चिपकी हुई थी। फिर मैंने उसको अपनी छाती से अलग किया और उसके दोनों छोटे छोटे निप्पल को चूमा और बहुत चूसा, साथ में उसकी दोनों बाहों को भी में सहलाता रहा और तब तक उसके फोन की बात भी अब ख़त्म हो चुकी थी और वो मेरे चेहरे को अपने दोनों हाथों में लेकर मेरे होठों को अपने होठों से किस करने लगी थी और कुछ देर बाद जोश में आकर उसने अपनी जीभ को मेरे मुहं में डाल दिया और फिर वो मुझसे चिपक गयी और उसने अपनी दोनों जांघो को मेरी कमर पर कस लिया।

अब में जोश में आकर उसकी जीभ को चूसने लगा और साथ में उसकी नंगी पीठ को सहलाकर उसकी गांड को भी सहलाने लगा था। उसके बाद मैंने अपने दोनों हाथों में बोतल से उसकी चूत का पानी बाहर निकालकर उसकी गांड पर में उसको मलने लगा। दोस्तों में क्या कहूँ में जोश में आकर किस कदर बिल्कुल पागल हो रहा था? ऊपर से हमारा फ्रेंच किस चल रहा था और छाती पर उसके दोनों बूब्स की गरमी, नरमी कहर ढा रही थी और नीचे से उसकी चूत के पानी से उसकी गांड की मालिश हो रही थी। अब मैंने अपनी एक ऊँगली को उसकी गांड के छेद पर रखकर हल्के से अंदर दबाया। तब मैंने महसूस किया कि वो बहुत टाईट थी। फिर मैंने वहीं पर अपनी ऊँगली को रखे रखे हल्के दवाब से उसकी मसाज कि तो कुछ देर बाद उसकी गांड का छेद अब ढीला होने लगा था। फिर मैंने झट से वहीं पास में रखी हुई क्रीम की ट्यूब उसकी गांड से लगाकर क्रीम को अंदर डाल दिया और फिर में उसकी गांड को थपथपाने लगा और फिर वहीं पर रखे टिश्यू पेपर को अपनी ऊँगली पर लपेटकर उसकी गांड के अंदर डाल दिया और मैंने बहुत अच्छे से उसकी गांड की सफाई कर दी। फिर जब गांड को थपथपाने से उसकी गांड ढीली हो गयी, तो मैंने क्रीम की एक पूरी ट्यूब की क्रीम को उसकी गांड के अंदर डाल दिया और इस दौरान मेरा लंड भी बिल्कुल तनकर चूत के अंदर फड़क रहा था। अब लाली मेरी छाती से चिपकी हुई मेरे कान को काट और चूस रही थी। उसी समय लाली मुझसे कहने लगी कि डॉक्टर आप नीचे क्या कर रहे है? में उससे बोला कि सिस्टर इसको नीचे नहीं कहते, इसको कहते है गांड। फिर वो बोली कि डॉक्टर आपने मेरी गांड को इतना साफ क्यों किया? मैंने फिर उससे आग्रह करके कहा कि आगे से सेक्स का मतलब होता है, चोदना और वेजाइना का मतलब होता है चूत और ब्रेस्ट्स का मतलब होता है बूब्स।

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फिर उसने नटखट चेहरा बनाकर मुस्कुराते हुए मुझसे कहा कि मुझे सब कुछ पता है, आप मेरी गांड को चोदना चाहते है। फिर मैंने उससे पूछा वो तुम्हें कैसे पता? तो बोली कि बहुत आसान है और मेरी चूत तो आप पहले से ही चोद चुके है। अब में उससे बोला कि सिस्टर आप बहुत सेक्सी हो, इसलिए में अब आपकी गांड भी मारना चाहता हूँ। तभी वो कहने लगी कि मेरी फ़्रेंड का पति भी मेरी गांड मारना चाहता है, लेकिन मेरे पति को यह गंदा लगता है। फिर मैंने उससे कहा कि यह बताओ मेरी लाली को गांड मरवाने में कैसा लगता है? तब वो हंसकर बोली कि वो तो डॉक्टर के मारने के बाद पता चला। तभी मैंने अपनी एक ऊँगली को लाली की गांड में डाल दिया और में अपनी ऊँगली से उसकी गांड को मारने लगा और उसकी गांड में ऊँगली डालकर में अंदर ही अंदर उसकी चूत में अपने खड़े लंड को भी दबाने लगा, जिसकी वजह से वो सिसकियाँ भरने लगी और ज़ोर से मेरी छाती से चिपक गयी। फिर मैंने कहा अच्छा अब बताओ कि लाली तुम्हें कैसा लग रहा है इस डबल चुदाई में? तो अच्छा बोलकर उसने मेरे गाल पर एक पप्पी दे दी। तब मैंने उससे बोला कि लाली जब तुम मेरे लंड को अपनी गांड में लोगी, तब तुम्हें और भी ज्यादा अच्छा लगेगा और तुम्हें बहुत मज़ा आएगा और अब तुम मेरे लिए डॉगी पोज़िशन में हो जाओ। फिर वो बोली कि हाँ ठीक है और फिर वो उस टेबल पर एक डॉगी की पोज़िशन में आ गयी और में भी उसके पीछे अपने घुटनों पर टेबल पर उसकी गांड के पीछे आ गया। फिर मैंने सबसे पहले उसकी पीठ सहलाई, कमर सहलाई और कमर के नीचे से अपनी दो ऊँगली उसकी चूत में डालकर मैंने अपनी ऊँगली से उसकी चुदाई करना शुरू कर दिया।

फिर वो सिसकियाँ लेते हुए मुझसे पूछने लगी, आह्ह्ह्ह उफफ्फ्फ्फ़ डॉक्टर आपका लंड कहाँ है? तब मैंने झट से अपने लंड को उसकी गांड के छेद पर रखकर उससे कहा कि लाली अब तुमको मेरा लंड अपनी गांड में लेना है, उससे पहले तुम एक बार अपना मुहं खोलकर एक लम्बी साँस लो और फिर उसके बाद धीरे धीरे तुम अपनी गांड को पीछे धक्का देकर मेरे लंड को पूरा अंदर ले लो। अब उसने हाँ ठीक है डॉक्टर कहकर धीरे से मेरा पूरा लंड अपनी गांड में ले लिया। अब मैंने उससे कहा कि तुम अब बिल्कुल बेशरमी से अपनी गांड को जैसे चाहो वैसे नचाओ और वो बिल्कुल मस्त होकर अपनी आखें बंद करके गांड को हिलाने लगी और में भी अपने लंड को उसकी गांड में डाले हुए धीरे धीरे धक्के लगाने लगा। करीब 15 मिनट तक हमारी वो गांड चुदाई चलती रही और साथ में मैंने उसकी चूत की भी अपनी ऊँगली से चुदाई जारी रखी। उसके बाद में लाली की गांड में झड़ गया और उसने मेरे हाथों में अपनी चूत का पानी छोड़ दिया, उसकी चूत के पानी को अपने हाथ में लगाकर मैंने उसके चेहरे पर लगा दिया और उसकी पेंटी को लाली की चुदाई की यादगार बनाकर मैंने अपने पास ही रख लिया और फिर में उसके बाद जाकर सो गया। फिर में जब दूसरे दिन सवेरे उठा तो मैंने देखा कि मेरा लंड एक बार फिर से खड़ा था, तो में उठकर नीचे चला गया और मैंने देखा कि अब उसके जाने का समय हो गया था और वो डॉक्टर रूम के सामने से निकलकर जा रही थी। फिर मैंने उसको झट से पकड़कर अंदर खींच लिया और बेड पर उसको पीठ के बल लेटा दिया, उसकी स्कर्ट को ऊपर उठाया और झट से अपने तनकर खड़े लंड को उसकी चूत में डालकर मैंने धक्के देकर चोदना शुरू कर दिया और करीब पांच मिनट में हम लोग खल्लास हो गये। दोस्तों उसके बाद से कई महीनो तक हम लोग एक दूसरे के साथ ऐसे ही लगातार जब भी हमे अच्छा मौका मिलता, मस्ती करते रहे और अब अक्सर वो मेरे साथ ड्यूटी वाले दिन कभी भी अपनी पेंटी नहीं पहनती और में जब भी मौका मिलता उसकी स्कर्ट को उठाकर उसकी नंगी गांड को कभी सहलाकर चोद देता, तो कभी चूत में ऊँगली डाल देता, कभी अपनी गांड में वो खुद ऊँगली डाल लेती और कभी टॉयलेट में हम लाली की चूत चोदते तो कभी गांड, जब वो अकेले मरीज को दवा देती तो में अपनी पेंट की चैन को खोलकर अपने लंड को बाहर निकाल लेता और वो अपनी स्कर्ट को ऊपर उठाकर अपनी चूत में मेरा लंड डाल लेती। दोस्तों इस तरह से मैंने लाली के साथ बहुत जमकर मज़े किए और कभी वो छुट्टियों में मेरे घर आ जाती और हम दोनों मिलकर उस दिन बहुत जमकर मस्त चुदाई करते और पूरे मज़े लेते ।।

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धन्यवाद …

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