सेक्रेटरी की सास को जमकर चोदा


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प्रेषक : गुमनाम …

हैल्लो दोस्तों, मैंने अपनी सेक्रेटरी को बहुत बार मौके मिलने पर जमकर चोदा, जिसमें उसने भी हमेशा मेरा पूरा पूरा साथ दिया। दोस्तों एक तो वो बहुत गोरी हॉट सेक्सी और ऊपर से उसका वो कामुक बदन देखकर में अपने आपको नहीं रोक पाता था। मेरी उस कमजोरी को पहचानकर मेरी सेक्रेटरी ने मुझसे अपनी चुदाई करवाकर अपनी चूत को शांत किया और संतुष्टि को प्राप्त किया, जो उसको अपने पति से आज से पहले कभी भी नहीं मिला था और हम दोनों उस खेल में लगातार रात दिन जब भी हमे मौका मिलता लगे रहे, हमने इस तरह चुदाई का बहुत मज़ा लिया, लेकिन एक बार मेरी सेक्रेटरी की सास को पता चल गया कि हम दोनों के बीच में क्या खेल चल रहा है, वो मेरी नियत को बहुत अच्छी तरह से समझ गई और फिर उसके बाद क्या हुआ आप ही पढ़कर देखिए।

दोस्तों में कई बार अपनी सेक्रेटरी के घर पर चला जाता था, मेरी सेक्रेटरी सुनीता की सास जिसको में आंटी जी कहता था, वो भी घर पर ही रहती थी और में जब भी जाता मुझे देखकर आंटी के चेहरे पर एक अजीब सी मुस्कान आ जाती और वो उम्र में करीब 50 साल की थी और आंटी के पति करीब दस साल पहले गुजर चुके थे, इसलिए वो एक विधवा औरत थी, लेकिन फिर भी दोस्तों आंटी का गोरा गदराया हुआ बदन, इतना मस्त सेक्सी था कि आंटी को देखकर किसी का भी मन आंटी को जबरदस्ती पकड़कर उनकी चुदाई करने का हो जाए और में जब भी आंटी के सामने बैठता तो वो या तो मेरे सामने अपनी साड़ी का पल्लू गिरा देती या एक पैर दूसरे पैर पर रखकर ऐसे बैठती थी कि जिससे बहुत कुछ दिख जाए, ऐसे ही मुझे कई बार उसकी पेंटी भी दिख चुकी थी और वो हमेशा मुझे बहुत प्यार से देखती रहती, वो हमेशा बहुत हंस हंसकर बातें किया करती थी और वो कैसे भी करके मुझे अपनी तरफ आकर्षित करने की कोशिश भी किया करती थी। में उनके इरादों को ठीक तरह से समझ चुका था। एक दिन में सुनीता के घर गया तो आंटी जी मतलब उसकी सास उस समय कहीं बाहर गई हुई थी और सुनीता को घर में बिल्कुल अकेली देखकर मैंने तुरंत सही मौका देखकर उसको अपनी बाहों में भर लिया और में उसको प्यार करने लगा और उसके बूब्स को दबाने लगा और उसको चूमने लगा, जिसकी वजह से कुछ देर बाद वो गरम हो गई और अब उसके बूब्स को उसकी ब्रा के अंदर हाथ डालकर दबाने ही वाला था कि उसने मुझे एक हल्का सा धक्का देकर अपने से दूर कर दिया। अब में उसको चकित होकर देखने लगा कि उसने ऐसा क्यों किया। तभी सुनीता मुझसे कहने लगी कि अब बहुत हुआ बाकि का काम बाद में करेंगे, वरना में अपने होश खो बैठूंगी और वैसे भी अब मम्मी जी भी आने वाली है और वो बोली कि उसकी सास अब कभी भी आ जायेगी, क्योंकि उनको घर से बाहर गए हुए बहुत देर हो चुकी थी। फिर मैंने जोश में आकर सुनीता से कहा कि मेरी जान तुम क्यों इस बात की चिंता करती हो, अगर वो आज आ भी जायेगी तो में उसको भी बिना चोदे नहीं छोड़ूँगा, में तुम्हारी उस सास की भी तुम्हारे सामने यहीं पर पटककर बहुत जमकर ऐसी चुदाई करूंगा कि वो भी मुझे हमेशा पूरी जिंदगी याद रखेगी।

फिर सुनीता बोली कि हाँ मुझे पहले से ही मालूम है कि तुम्हारी गंदी नज़र मेरी सास पर भी है और तुम उसको भी चोदना चाहते हो और वैसे वो भी हमेशा तुम पर लाईन मारती रहती है, वो आप से उम्र में 10-12 साल बड़ी है। दोस्तों हम लोग अभी बातें करते करते अपने कपड़े ही निकाल रहे थे कि तभी दरवाजे की घंटी बज उठी और उसकी आवाज को सुनकर सुनीता एकदम से डर गई और उसने जल्दी से अपने कपड़े ठीक किए और में भी तुरंत एक शरीफ इंसान जैसे बन गया। तब सुनीता ने उठकर जाकर दरवाजा खोल दिया और उसकी सास ने सुनीता से पूछा कि दरवाजा खोलने में तुम्हें इतना समय क्यों लगा? लेकिन सुनीता अब उनके किसी भी सवाल का कोई भी जवाब ना दे सकी, वो एकदम से सकपका गई और बिल्कुल चुप रही। फिर आंटी ने अंदर आकर मुझे सोफे पर बैठा देख लिया और वो मुझसे कहने लगी कि अच्छा तो आप आए है तो सुनीता आपके साथ तो व्यस्त तो होगी ही और फिर दरवाजा कैसे जल्दी खोलती? अब में उनकी वो बातें सुनकर बहुत शरमा गया और में तुरंत वहां से उठाकर बाहर आकर अपने घर पर चला गया।

फिर एक दिन की बात है। में दोबारा अपनी सेक्रेटरी के घर पर गया, लेकिन तब मुझे पता चला कि वो उस समय अपने पति के साथ कहीं बाहर गई हुई थी और उसका छोटा बेटा, बहु मतलब कि सुनीता के देवर, देवरानी भी उस समय घर पर नहीं थे और आंटी उस समय घर में बिल्कुल अकेली थी। फिर सबसे पहले उन्होंने मुझे अंदर लेकर ठीक तरह से दरवाजा बंद किया और तब मैंने उनसे पूछा कि सुनीता कहाँ है? तो वो मुस्कुराती हुई कहने लगी कि वो दोनों एक साथ में कहीं बाहर गये है। फिर मैंने कहा कि तो फिर ठीक है, में अब चलता हूँ। तभी वो मुझसे कहने लगी कि हाँ आपको तो बस आपकी सेक्रेटरी में ही ज्यादा रूचि है, उसके घरवालों में नहीं। फिर मैंने कहा कि ऐसा कुछ भी नहीं है आंटी जैसा आप सोच रही है और फिर में उनसे यह बात कहते हुए सोफे पर बैठ गया। तब आंटी ने रसोई में जाकर मुझे पीने के लिए पानी लाकर दिया और वो मुझसे कहकर चाय बनाने चली गई और कुछ मिनट में वो चाय भी बनाकर ले आई। अब वो मेरे सामने वाले सोफे पर आकर बैठ गई। चाय पीते पीते में उसको देख रहा था और हम दोनों मेरे और उनके परिवार के बारे में इधर उधर की बातें भी कर रहे थे। फिर कुछ देर बाद उसने अपने कंधे से अपना पल्लू नीचे गिरा दिया, लेकिन इतनी सफाई से उसने वो काम किया था, जैसे कि वो पल्लू अपने आप ही नीचे गिर गया हो। दोस्तों ये कहानी आप कामुकता डॉट कॉम पर पड़ रहे है।

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दोस्तों तब में अपनी चकित नजरों से देखता ही रह गया, वाह क्या मस्त गोरे गोरे बूब्स थे, उसके वो दोनों बड़े आकार के उभरे हुए बूब्स उसके ब्लाउज और ब्रा में से बाहर आने के लिए जैसे बिल्कुल बेताब हो और मेरा लंड वो सेक्सी नजारा देखकर तुरंत खड़ा होने लगा था, लेकिन में अपने मन को काबू में करते हुए शांत रहने की कोशिश करता रहा और अब में उससे बातें करते करते उसके बूब्स को ही बार बार देख रहा था और मेरी नजर उसकी छाती से हटने को बिल्कुल भी तैयार नहीं थी और तभी ऐसे में उसने अपने एक पैर को दूसरे पैर पर इस तरह से रखकर वो बैठ गई कि उसकी साड़ी और उसके नीचे का पेटीकोट आधा ऊपर की तरह उठ गया और धीरे धीरे उसके दोनों पैर भी फैल गये थे, जिसकी वजह से मुझे अंदर से उसकी पेंटी भी साफ साफ दिखने लगी थी। फिर मैंने जैसे तैसे अपनी चाय को खत्म करके उस कप को अपने हाथ से उस सामने वाली टेबल पर रख दिया और अब वो मुझसे बातें करते करते हंस रही थी और उसको भी बहुत अच्छी तरह से पता था कि में उसके बदन को कहाँ कहाँ देख रहा हूँ। फिर मैंने उसको कुछ देर के बाद में बोला कि आंटी आप इस उम्र में भी बहुत सुंदर है। फिर वो बोली कि में अभी इतनी बूढ़ी नहीं हुई हूँ, जितना आपको लग रहा है। में अभी भी किसी जवान से कम नहीं हूँ। अब मैंने कहा कि हाँ आप अभी भी बहुत जवान ही दिखती है। तभी वो कहने लगी कि फिर भी तो आपको सिर्फ़ सुनीता में ही ज्यादा रूचि है। दोस्तों में उनके मुहं से यह बात सुनकर एकदम से शरमा गया और में एकदम अंजान बनकर उनसे पूछने लगा कि जी में आपकी बात का मतलब नहीं समझा आप क्या कहना चाहती है? तो वो बोली कि में सब कुछ बहुत अच्छी तरह से जानती हूँ कि आप और सुनीता के बीच में क्या और कैसे सम्बंध है। अब में कुछ नहीं बोला एकदम चुपचाप अपना सर नीचे झुकाकर बैठ गया। फिर थोड़ी देर बाद मैंने उनसे कहा कि आंटी आप भी बहुत अच्छी है और मुझे आप भी अच्छी लगती है, लेकिन आप सुनीता की सास है तो इसलिए में। फिर वो कुछ नहीं बोली और सिर्फ़ मेरी तरफ मुस्कुराती रही। फिर उसने मुझसे कहा कि यहाँ आओ। अब में उसके पास गया और उसी समय उसने मेरा एक हाथ पकड़कर मुझे अपनी तरफ खींचकर उसकी गोद में बैठा दिया और फिर वो मुझे किस करने लगी। दोस्तों सच कहूँ तो में भी अब अपनी तरफ से कोई भी कसर छोड़ने के मूड में बिल्कुल भी नहीं था। फिर आगे बढ़ते हुए मैंने उसके बूब्स पकड़ लिए और में भी उसको किस करने लगा और फिर हम दोनों ही एक दूसरे के होंठो को बारी बारी से चूस रहे थे। फिर उसी समय आंटी ने अपने एक हाथ से मेरा लंड पेंट के ऊपर से सहलाना शुरू कर दिया और में उनके बूब्स को दबाने सहलाने के साथ साथ उनको किस करता रहा। फिर कुछ देर बाद आंटी ने मेरे होंठ छोड़ दिए और वो मुझसे पूछने लगी कि तुमने मुझे इतने दिनों तक क्यों तड़पाया, कब से में ऐसे ही दूर से तुम्हें देखकर तड़प रही थी?

अब में तुरंत उठकर खड़ा हो गया और वो भी उठ गई और उन्होंने अपनी साड़ी को उतारकर वो मुझे अब सुनीता के बेडरूम में ले गई और मैंने बिना देर किए आंटी के ब्लाउज को खोल दिया और ब्रा को भी झट से निकालकर एकदम गोरे मुलायम बूब्स को सहलाने लगा। फिर कुछ ही देर में बूब्स की निप्पल उठकर खड़ी हो गई और वो भी बहुत हॉट हो गई थी। फिर में एक बूब्स के निप्पल को अपने मुहं में लेकर चूसने लगा और दूसरे बूब्स की निप्पल को में मसलने लगा। तभी आंटी ने जोश में आकर अपने हाथों से मेरे सर के बालों को सहलाना शुरू कर दिया था और बारी बारी से दोनों बूब्स को चूसने दबाकर उनका रस निचोड़ने के बाद वो अब मेरे भी कपड़े खोलने लगी थी। फिर मैंने और आंटी ने मिलकर मेरे सारे कपड़े उतार दिए, जिसकी वजह से में भी अब आंटी के सामने पूरा नंगा खड़ा था। तभी वो मेरा तनकर खड़ा लंड देखकर एकदम चकित हो गई और वो अब अपने मुहं पर अपना एक हाथ रखकर कहने लगे, हाए राम यह क्या सुनीता इतना बड़ा मोटा लंड कैसे ले लेती है? मैंने आज तक इतना दमदार बलशाली लंड नहीं देखा, यह दिखने में ऐसा है तो इससे चुदाई का मज़ा भी कैसा होगा? फिर उसने मुझे बेड के एक कोने में बैठाकर वो मेरी गोद में लेट गई और मेरे लंड को किस करने लगी और किस करते करते वो अब लंड को अपने मुहं में लेकर चूसने भी लगी थी। फिर उसी समय मैंने सही मौका देखकर अपना एक हाथ लंबा करके उसका पेटीकोट भी खोल दिया। तभी उसने अपने पैरों से उस पेटिकोट को अपने बदन से दूर हटा दिया और फिर उसने अपने हाथों से अपनी गीली पेंटी को भी हटा दिया, जिसकी वजह से मेरे सामने उसकी नंगी गीली कामुक चूत थी, जिसको देखकर में अपने होश पूरी तरह से खोकर में अपना एक हाथ उसकी चूत पर रखकर चूत को सहलाने लगा। कुछ देर बाद मैंने अपनी एक ऊँगली को उसकी चूत में डाल दिया और फिर में बहुत ही धीरे धीरे अंदर बाहर करने लगा। दोस्तों वो जोश में आकर मेरे लंड से अपने मुहं की चुदाई कर रही थी और में अपनी उंगली से उसकी चूत की चुदाई कर रहा था। दोस्तों मैंने देखा कि उसकी चूत एकदम साफ थी और वो अपनी चूत को एकदम साफ रखती थी और उसकी चूत पर एक भी बाल नहीं था, जिसको देखकर में बड़ा चकित था कि वो अपनी चूत का इस उम्र में भी इतना घ्यान रखती है।

फिर वो मेरा लंड अपने मुहं से बाहर निकालकर मुझसे बोली कि वाह मज़ा आ गया आज मुझे कितने सालो के बाद ऐसा मज़ा आ रहा है। में उस मज़े को अपने किसी भी शब्दों में बोलकर नहीं बता सकती कि आज में क्या और कैसा महसूस कर रही हूँ, सुनीता की किस्मत बहुत अच्छी है कि वो तुम्हारे इस लंड से बहुत समय से अपनी चूत की चुदाई के मज़े ले रही है, क्योंकि मेरे बेटे ने उसको अब तक ऐसा चुदाई का मज़ा नहीं दिया, इसलिए उसको आपका लंड पसंद आ गया, तुम्हारे इस लंड में बहुत दम है और आज मुझे भी दिखा दो वो जोश जिसके लिए सुनीता यह लंड लेने के लिए हमेशा पागल हो जाती है। अब वो मुझसे इतना कहकर उसी समय बेड पर तुरंत एकदम सीधी लेट गई और मुझसे कहने लगी कि अब तुम मुझे और मत तड़पाओ, जल्दी से डाल दो अपना पूरा लंड और मेरी इस प्यासी चूत की आग को बुझा दो, में बहुत सालों से तरस रही हूँ, प्लीज अब जल्दी करो, मैंने बहुत सालों से कोई भी लंड नहीं लिया है और आज तुम मुझे वो सुख दे दो, तुम मेरी जमकर मस्त चुदाई करो। अब में आंटी के ऊपर आ गया और मैंने अपने लंड को आंटी की चूत से सटा दिया और एक हल्का सा धक्का दिया, जिसकी वजह से लंड फिसलता हुआ अंदर चला गया, तो वो कराह उठी आईईईई ऊईईईईई आह्ह्ह मैंने बहुत साल से नहीं लिया और आपका बहुत लंबा है, थोड़ा ध्यान से आराम से करना। अब मैंने अपने लंड को आंटी की चूत में धीरे धीरे अंदर बाहर करना शुरू कर दिया था और आंटी की गीली चूत में लंड बड़े आराम से आगे पीछे हो रहा था और कुछ देर बाद मैंने धीरे धीरे अपने धक्कों की स्पीड को पहले से ज्यादा बढ़ा दिया, आह्ह्ह वाह क्या मस्त मज़ा आ रहा है, ऊईईईईईईई वाह क्या मस्त दमदार लंड है, प्लीज अब ज़रा ज़ोर से करो। फिर मैंने आंटी के दोनों बूब्स को पकड़कर अब में अपनी पूरी ताक़त से अपने लंड को में अंदर बाहर करने लगा था और वो जोश में आकर कुछ बोल रही थी सस्स्स्स्स्स् आह्ह्हह्ह उहहहह्ह्ह। फिर वो बैठने लगी और आंटी ने मेरा पैर उसके पीछे किया, लंड अब भी चूत के अंदर ही था। तभी वो मुझसे बोली कि बैठो और में आंटी के सामने अपना मुहं करके ऊपर बैठा हुआ था और में फिर से लंड को अंदर बाहर करने लगा, वो क्या मस्त मज़ा ले रही थी और मुझे आज पहली बार उम्र में मुझसे बहुत बड़ी औरत को चोदने का बड़ा मज़ा आ रहा था। में बैठे बैठे अपने लंड को अंदर बाहर करते हुए आंटी के बूब्स को चूसने लगा। फिर आंटी ने मेरा शरीर पीछे से पकड़कर अपनी छाती से पूरा सटा दिया और थोड़ी देर बाद उन्होंने मुझे धीरे से धक्का देकर लेटा दिया और अब वो मेरे ऊपर आ गई और अब मानो वो मेरे ऊपर कूदने लगी थी, मेरा लंड बहुत जोश में तना हुआ सरिये की तरह आंटी की चूत में अंदर बाहर हो रहा था, जैसे इंजन में पिस्टन अंदर बाहर हो रहा हो और वो मुझ पर ऐसे कूद रही थी कि आंटी के बूब्स भी उछल रहे थे, लेकिन थोड़ी ही देर बाद वो झड़ गई और फिर वो मुझ पर उल्टी लेट गई और मेरा लंड अब भी अंदर ही था। फिर मैंने उनको कहा कि आंटी यह बिल्कुल भी ठीक नहीं कि आप मुझे बीच में ही अधूरा छोड़ दो, में अभी भी झड़ा नहीं हूँ, प्लीज मेरा कुछ करो।

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तभी वो बोली कि में कब तुमसे मना कर रही हूँ और वैसे भी अभी तक तुम्हारा लंड तो मेरी चूत के अंदर ही है, तुम भी शुरू हो जाओ और अब मैंने उनको बेड के किनारे पर लेटा दिया, आंटी के दोनों पैरों को पूरा फैलाकर में खड़े खड़े ही धक्के देकर आंटी को चोदने लगा। मैंने इसमें बहुत समय लिया। अब वो मुझसे बोल रही थी, वाह क्या लंड है यह तो थकता ही नहीं, चुदाई में इतना समय लेते हुए मैंने आज तक किसी को ना ही देखा और सुना है, यह तो इतनी देर बाद भी झड़कर ठंडा होने का नाम ही नहीं लेता, वाह इसमें तो बहुत जोश है। दोस्तों अब में आंटी कि बातें सुनकर और भी जोश में आ गया, में अपनी स्पीड बढ़ाकर धक्के देने लगा, जिसकी वजह से वो पूरी हिल जाती, लेकिन फिर थोड़ी देर बाद मैंने अपने लंड का वीर्य आंटी की चूत में डाल दिया और वो ऐसे ही लेटी रही। थोड़ी देर बाद मैंने अपने लंड को बाहर निकालकर बाथरूम में जाकर मैंने अपने लंड को साफ किया और वापस आकर में उनके पास में आकर बैठ गया।

फिर वो बोली कि अब तुम कपड़े पहन लो, वरना अभी वो दोनों भी आ जाएँगे, उनके आने का समय हो चुका है और मैंने आंटी के कहने पर कपड़े पहने और फिर आंटी ने भी अपने कपड़े पहन लिए। फिर आंटी ने हम दोनों के लिए चाय बनाई और हम दोनों इधर उधर की बातें करते हुए चाय पी रहे थे। फिर कुछ देर बाद सुनीता और उसके पति भी आ गए और उसके बाद में कुछ देर बैठकर अपने घर चला आया। दोस्तों अब तो सुनीता भी बहुत अच्छी तरह से जानती है कि उसकी सास और देवरानी को भी में बहुत बार चोदकर उनके साथ मज़ा ले रहा हूँ और इस बात को पूरे घर में सिर्फ़ नहीं जानते तो सुनीता के पति और उसका देवर जिसकी पत्नी को भी में बहुत जमकर चोद चुका हूँ और उसको भी मेरी चुदाई चोदने का तरीका बहुत अच्छा लगा और सबसे ज्यादा उसको मेरा मोटा लंबा लंड पसंद आया, जिसने हर बार उसको चोदकर उसकी चूत की खुजली को मिटा दिया और पूरी तरह संतुष्ट किया ।।

धन्यवाद …

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