प्यारी रानी की कहानी


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प्रेषक : संजय …

हैल्लो दोस्तों, मेरे प्यारे गरम लंड वालों और तड़पती चूत वाली महिला लड़कियों आप सभी को मेरा नमस्कार। दोस्तों आज में आप सभी कामुकता डॉट कॉम पर सेक्सी कहानियों को पढ़ने वालों को अपनी एक सच्ची दास्तान सुनाने जा रहा हूँ, यह एक बहुत ही गरमागरम जोश मनोरंजन से भरपूर घटना है। दोस्तों मुझे तो आप सभी पहले से ही जानते है, मेरा नाम संजय है और में ठाणे (मुंबई) का रहने वाला हूँ। दोस्तों वैसे एक बात का मुझे बड़ा दुःख है कि आज तक में यह सोचता था कि मुंबई की औरतें या लड़कियाँ सेक्स के मामले में बड़ी अनुभवी है और अच्छी चुदाई के लिए हमेशा तैयार रहती है, लेकिन आज तक मैंने मुंबई के बाहर की चूत को ज़्यादा चोदा। फिर हर बार उन्होंने मेरा पूरा पूरा साथ दिया और मैंने उनके साथ बड़े ही मस्त मज़े किए। अब में सीधा अपनी आज की कहानी पर आता हूँ। तो में आप सभी को अपने बारे में बता रहा था कि में 40 साल का मस्त आदमी हूँ, एकदम मजबूत और मेरा लंड चुदाई करने के लिए हमेशा तड़पता रहता है, मेरे लंड की लंबाई आठ इंच से ज़्यादा नहीं है और मोटाई भी तीन इंच के करीब होगी। अब अपनी पत्नी को चोद चोदकर मेरा लंड बहुत बोर हो गया था और वो भी इस बात से बड़ी परेशान होने लगी, क्योंकि यह आज भी उसकी हालत खराब कर देता है और इसलिए मेरा यह मस्ताना लंड कुछ ज़्यादा ही उतावला हो गया है और यह कुछ नया खोज रहा था।


दोस्तों हमारे घर में नौकरानियाँ काम करती है, लेकिन कोई भी सुंदर नहीं थी और मेरी पत्नी बड़ी ही होशियार थी, वो सभी नौकरानियां चुन चुनकर काली और भद्दी-भद्दी रखती थी, क्योंकि वो अच्छी तरह से जानती थी कि मेरे मियाँ को चूत का बड़ा शौक है, उसको अच्छी तरह से पता है कि मेरे लंड को अच्छी गरम चूत की खुशबू अगर मिली तो वो उसको चोदे बिना नहीं छोड़ेगा। अब में भी बड़ा मायूस हो गया था और जैसा कि मैंने पहले भी बताया कि दिल्ली, पूना या दूसरे शहर जाकर चुदाई करने में सबसे बड़ी यह समस्या है कि में नौकरी करूँ या चुदाई करूँ? फिर मेरे मन में आता कि में किसी तरह मेरे आस पास की भाभी को कभी अपने साथ में लेकर एकाध घंटे के लिए बाहर ले जाऊं, लेकिन उसकी भी गुंजाइश नहीं थी, क्योंकि मेरी पत्नी की नजर मेरे ऊपर हमेशा लगी रहती थी। अब ऐसे में मेरे घर कोई नौकरानी काम करने को तैयार नहीं थी, क्योंकि सभी को मेरी पत्नी एक-दो महीने में भगा देती थी। फिर आख़िर में जब कोई नहीं मिली, तो एक को रखना ही पड़ा, जो कि 23-24 साल की मस्त जवान कुँवारी लड़की थी, उसकी शादी टूट चुकी थी और उसका रंग सांवला था, लेकिन वो ज़्यादा सांवली नहीं थी, वो बहुत ही नमकीन और क्या मस्त जवान थी? वो सुंदर ऐसी कि देखकर ही लंड खड़ा हो जाए, उसके बूब्स इतने गोलमटोल और बाहर की तरफ निकलते हुए थे कि ब्लाउज में समाए ही नहीं।


फिर मैंने कई बार उसको साईड से देखा था, उसके बड़े आकार के बूब्स ब्लाउज को फाड़कर बाहर निकलते हुए नजर आते थे। दोस्तों वो हमेशा बड़े गले का ब्लाउज पहनती जिसकी वजह से उसके दोनों बूब्स के बीच की घाटी मुझे ऐसी नजर आती मानो अभी में अपना लंड उसके बीच में रखकर रगड़ दूँ और कभी-कभी काम करते समय उसकी साड़ी का पल्लू नीचे सरक जाता। फिर मुझे देखकर ऐसा लगता था कि उसका ब्लाउज फाड़कर उसके बूब्स बाहर निकल आएंगे और बस अब में किसी अच्छे मौके की तलाश में था, क्योंकि वो चुदाई करने के लिए एकदम मस्त माल थी। अब में उसको सोच सोचकर कई बार उसके नाम की मुठ भी मार चुका था, मेरी मन से बहुत इच्छा थी कि कब मुझे वो मौका मिले? और कब में उसकी कुंवारी चूत में अपना लंड दबाकर घुसा दूँ? फिर में उसकी टाईट चूत में अपना फौलादी लंड डाल दूँ और वो दर्द की वजह से ज़ोर चीखे। फिर में कई बार जानबूझ कर उसके सामने सिर्फ़ बरमुडा पहनकर जाता जिसकी वजह से मेरा लंड उसमे से खड़ा साफ नजर आता। फिर वो भी अपनी चोर नजरों से मुझे देखती रहती थी और में उसके बदन को चोरी चोरी से नापता रहता। अब में मन ही मन में सोचता था कि इसके मुलायम से हाथ में, या छोटे से मुँह में मेरे लंड का मोटा टोपा कैसा लगेगा? मैंने आँख बंद करके अपने मन में कई बार उसको नंगा कर दिया था।


फिर उसकी गुलाबी चूत को कई बार सोच सोचकर मेरा लंड पूरे उफान पर आ जाता और गीला हो जाता था और खड़ा होकर फड़फडाने लगता था। फिर में बड़ी मुश्किल से अपने लंड को काबू में करता और मेरे हाथ मचलते रहते थे कि कब में उसकी गोलमटोल बूब्स को दबाऊं? और मेरे होंठ उसके रसभरे होंठो को चूसने के लिए तरसते रहते और जीभ उसके निप्पल और चूत को चाटने के लिए लपलपाती रहती थी। फिर एक बार चाय लेते समय जब मैंने जानबूझ कर उसको पहली बार छुआ तब मानो मेरे शरीर में करंट सा लगने लगा था और फिर मेरा लंड लुंगी से बाहर निकल आया। अब यह सब देखते ही वो शरमाते हुए खिलखिला पड़ी और तुरंत बाहर भाग गयी। अब मैंने मन ही मन में कहा कि मौका आने दे मेरी रानी में तुझे तो बहुत जमकर चोदूंगा और अपना लंड तेरी चिकनी चूत में डालकर भूल जाऊँगा और तू अपनी चूत में मेरे लंड को कस लेगी कभी जुदा ना होने के लिए और तेरे बूब्स को चूस चूसकर अपनी प्यास बुझाऊँगा और दोनों बूब्स को ज़ोर ज़ोर से दबा दबाकर पूरे मज़े लूँगा और तेरे बूब्स को पूरी तरह से लाल कर दूँगा और तेरे निप्पल को काटूँगा और फिर तू दर्द की वजह से चिल्लाएगी और तेरे होंठो को तो में खा ही जाऊँगा। दोस्तों रानी उसका प्यारा सा नाम था, कहते है कि भगवान के घर में देर है, लेकिन अंधेर नहीं।


एक दिन रविवार के दिन सुबह के समय ही अचानक मेरे साले का फोन आया और उसने बताया कि उसकी माँ मतलब कि मेरी सास बहुत बीमार है और उसको किसी अस्पताल में भरती किया गया है। फिर मेरी पत्नी ने मुझसे उसकी माँ से मिलने अस्पताल चलने के लिए कहा, लेकिन मैंने कहा कि में अचानक छुट्टी नहीं ले सकता और सोमवार को मेरी एक बहुत जरूरी मीटिंग भी है। अब वो सभी बातें मेरे मुहं से सुनकर मुझसे मेरी पत्नी ने कहा कि में तो अपने मयके जा रही हूँ। फिर मैंने भी उसको मना करना उचित नहीं समझा उसको कहा कि हाँ ठीक है तुम वहाँ जाकर मुझे फोन करना, अगर जरूरत हुई तो में बाद में अपना सभी काम खत्म करके आ जाऊंगा। फिर उसने अपना सभी जरूरी सामान पैक किया और मुझसे कहा कि रानी आएगी तो आप घर का सभी काम ठीक तरह से करवा लेना। फिर वो रविवार का दिन था, इसलिए मेरे बच्चे भी मेरी पत्नी के साथ अपनी नानी के घर चले गये और अब मेरे लंड महाराज तो उनके जाते ही खुशी से उछलने लगे थे। अब में यह मौका अपने हाथ से चूकने वाला नहीं था, क्योंकि यह दिन मेरी अच्छी किस्मत से बड़ी मुश्किल से मुझे मिला था, लेकिन शुरू कैसे करूं यह बात मुझे समझ नहीं आ रही थी?
अब में सोचने लगा कि कहीं वो चिल्लाने लगी तो? और गुस्सा हो गयी तो? दोस्तों तुम यह जान लो कि लड़कियाँ कितना ही शरमाये, लेकिन दिल में उनकी इच्छा रहती है कि कोई उन्हें छेड़े और चोदे। फिर मैंने दूसरे दिन अपने ऑफिस में फोन किया और कहा कि आज में ऑफिस नहीं आऊंगा और सीधा एक काम की वजह से बाहर जाऊंगा, मुझसे संपर्क करना हो तो मेरे मोबाईल पर फोन करे। फिर में रानी का इंतज़ार करने लगा, मेरा लंड शायद समझ गया था कि आज उसकी दिल की तमन्ना पूरी होने वाली है और इसलिए मेरा लंड एकदम टाईट होने लगा था। अब मैंने उसको किसी तरह से अपने काबू में रखा हुआ था। फिर सुबह ठीक 9 बजे रानी मेरे घर आ गई। फिर उसने मुझसे पूछा कि साहब मेडम कहाँ है? तब मैंने उसको कहा कि वो किसी जरूरी काम की वजह से अपनी माँ के घर गयी है। अब कुछ नहीं बोली और मेरी तरफ तिरछी नजर से देखने लगी और अपना काम करने जाने लगी। फिर मैंने रानी को बुलाया और उसको देखते हुए कहा कि रानी तुम कपड़े इतने कम क्यों पहनती हो? तब वो बोली कि क्यों साहब? क्या कम है? फिर मैंने जवाब दिया कि देखो ब्लाउज के नीचे ब्रा नहीं है, जिसकी वजह से सब कुछ साफ नजर आता है और इस वजह से तुझे बाहर के सभी लड़के छेड़ेंगे। अब वो कहने लगी कि बाबूजी में इतने कम पैसों में कहाँ से वो सब खरीद सकती हूँ?


फिर मैंने उसको कहा क्या तुझे पैसे चाहिए? तेरे यह दोनों कबूतर ब्रा में और भी सुंदर नजर आएंगे और वो मेरे मुहं से यह बात सुनकर शरमा गयी, लेकिन उसने मुझसे पूछ लिया क्या आप मुझे दिलवाओगे? तब मैंने कहा कि हाँ दिलवा तो में दूँगा, लेकिन पहले यह बता कि क्या आज तक किसी ने तुझे छेड़ा है या किसी लड़के या मर्द के साथ तुमने कुछ किया है? अब उसने जवाब दिया कि छेड़ते तो बहुत है, लेकिन मैंने किसी मर्द के साथ कभी कुछ नहीं किया है, मुझे किसी मर्द ने छुआ भी नहीं है साहब। अब मैंने उसके मुहं से उस बात को सुनकर उसको कहा कि इसका मतलब तू एकदम कुँवारी है। फिर वो कहने लगी कि हाँ जी साहब आप एकदम ठीक समझ रहे हो। अब में उसको बोला कि अगर में कहूँ कि तू मुझे बहुत अच्छी लगती है तो तू मुझसे नाराज तो नहीं होगी? तब वो बोली कि में नाराज क्यों होने लगी साहब? आप तो बहुत अच्छे हो। अब बस मेरे लिए यही उसका एक अच्छा आगे बढ़ने का इशारा था, जिसकी वजह से में बहुत खुश था और फिर मैंने उसी समय हिम्मत करके उसको पूछा कि अगर में तुम्हें थोड़ा प्यार करूँ तो तुम्हें बुरा तो नहीं लगेगा? तब वो अपने पैर की उंगलियों को जमीन पर मसलती हुई बोली कि आप तो बड़े वो हो साहब, लेकिन में तो आपकी नौकरानी हूँ इसलिए आप मुझसे क्यों प्यार करोगे?


अब मैंने आगे बढ़ते हुए उसको कहा कि तू ऐसा क्यों सोचती है? तू इतनी सुंदर है और तुझे देखकर मेरा क्या हाल होता है? यह तो तुने देखा है ना और में तुझे बहुत सारी ब्रा-पेंटी और श्रंगार करने का सामान भी खरीद कर दूँगा, तुझे कभी कोई जरूरत हो तो मुझसे कहना। अब वो मेरे मुहं से वो पूरी बात सुनकर कुछ नहीं बोली और वो शरमाकर नीचे देखने लगी। फिर मैंने उसको कहा कि तेरी उम्र अब प्यार करने की हो गयी है, तू कितनी जवान और सुंदर है? तुझे नहीं लगता कि कोई मर्द तुझे अपनी बाँहों में ले और बहुत अच्छे से तुझे प्यार करे? तेरे इस गदराए बदन को सहलाए और फिर तुझे बहुत रगड़े? फिर उसी समय उसने हाँ में अपना सर हिला दिया, में उसके बाद हिम्मत करके थोड़ा आगे बढ़ा और मैंने उसको कहा कि अच्छा तुम अब अपनी आंखे बंद कर लो और अभी खोलना नहीं। फिर उसने मेरे कहते ही अपनी दोनों आँखों को बंद किया और उसने हल्के से अपना मुँह ऊपर की तरफ कर दिया। अब मैंने मन ही मन में सोचा कि बेटा लोहा गरम है मार दे जल्दी से इसके ऊपर हथोड़ा। फिर मैंने धीरे से पहले उसके गालों को अपने हाथों में लिया और फिर अपनी एक उंगली से मैंने उसके गुलाबी होंठो को हल्के से सहला दिया जिसकी वजह से वो सिहर उठी और अब उसके होंठ खुलने बंद होने लगे थे।


फिर में थोड़ा नीचे झुका और बहुत हल्के से अपनी जीभ को बाहर निकालकर उसके होंठो को चाटने लगा और वो संभल पाती इसके पहले ही मैंने अपने होंठ उसके होंठो पर रख दिए थे, वाह क्या गजब की लड़की थी? क्या मस्त रसीले और नरम होंठ थे उसके? क्या मस्त स्वाद था? दुनियाँ की कोई भी शराब उसका उसके सामने मुक़ाबला नहीं कर सकती थी, मुझे उसकी वजह से ऐसा नशा छाया कि मेरे सबर के सारे बाँध टूट गये थे। फिर मेरे होंठो ने कसकर उसके होंठो को चूसा और चूसते ही रहे, मैंने अपने दोनों हाथों से उसको अपनी छाती से लगा लिया था। अब वो भी कसमसाकर मुझसे चिपक गयी, जिसकी वजह से अब उसके मुलायम बूब्स मेरी छाती में धँस गए थे। दोस्तों उसका बदन बहुत मस्त और बूब्स एकदम मुलायम किसी रबड़ की गेंद की तरह थे। अब मेरे दोनों हाथों ने ज़ोर से उसके बदन को दबोच लिया और में उसकी पीठ को सहलाने लगा था और मेरी जीभ उसकी जीभ का स्वाद लेने लगी थी। फिर इस दौरान उसने कुछ नहीं कहा और वो बस मेरे साथ वो सभी मज़े लेती रही। फिर अचानक से उसने अपनी आंखे खोली और वो कहने लगी कि साहब जी, अब बस करो वरना कोई देख लेगा। अब मैंने उसको कहा कि रानी अब तुम मुझे मत रोको, सिर्फ़ एक बार आज मुझे अपने मन का काम करने दो।

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फिर उसने बड़ी ही मासूमियत से मुझसे पूछा कि एक बार क्या साहब? अभी भी वो मेरी बाहों में थी। फिर मैंने उसके कान के पास जाकर उसको पूछा क्या तू मुझसे अपनी चूत चुदवाएगी? क्या तू एक बार अपनी मस्तानी कुँवारी चूत में मेरा लंड घुसवाएगी? देख मना मत करना, तू कितनी सुंदर है और यह कहकर मैंने उसको और भी ज़ोर से अपनी बाहों में जकड़ लिया और अपने एक हाथ से उसके एक बूब्स को में दबाने लगा था और फिर उसी समय अपने मुँह से उसके गालों पर गले पर होंठो पर और हर जगह पर में पागलों की तरह चूमने लगा था। दोस्तों उसके वाह क्या मस्त बूब्स थे? मानो वो कोई सख्त संतरे हो, दबाओ तो चिटक-चिटक जाए उफफ्फ वो पूरी की पूरी मलाई थी। अब उसके बूब्स मेरे हाथों में समा गये थे और वो गरम होकर लगातार आहें भरने लगी थी आहहह्ह्ह धीरे मुझे कुछ हो रहा है ऊऊईईईई। अब उसकी आवाज दबने लगी थी और उसके चेहरे पर एक मादकता सी छा गयी थी, तभी मैंने उसको पूछा कि रानी तुम्हे अब कैसा लग रहा है? मेरे प्यार से तुझे मज़ा आ रहा है कि नहीं? तब रानी ने जवाब दिया कि साहब जी मैंने यह सब कभी नहीं किया मुझे बहुत शरम आ रही है और मुझे डर भी लगता है।


फिर मैंने अपनी उखड़ी साँसों से उसको कहा कि हाए मेरी जान, रानी बस इतना बता कि अच्छा लगा या नहीं, मज़ा आ रहा है कि नहीं? मेरा तो लंड बड़ा बेताब है जानेमन तू मुझे और मत तड़पा। अब वो बोली कि साहब जी जो करना है जल्दी करो, वरना कोई आ जाएगा। अब वो मुझसे यह बात कहते हुए और भी ज़्यादा लिपटने लगी थी और बस फिर मैंने उसके फूल जैसे बदन को अपनी गोद में उठाया और बिस्तर पर ले गया और लेटा दिया। अब कसकर उसको चूमते हुए मैंने उसके ब्लाउज के बटन खोले और उसकी साड़ी को भी निकाल दिया, जिसकी वजह से अब वो सिर्फ़ पेटीकोट में थी, मैंने उसके पूरे बदन को चूमते हुए उसके पेटीकोट के ऊपर से ही उसकी चूत को सहलाया, ऊह्ह्ह्ह उसकी चूत बहुत ही मुलायम थी और उभरी हुई थी, शायद उसकी चूत पर बाल भी थे। फिर मैंने उसके पेटीकोट का नाड़ा खींच दिया, और उसने तुरंत ही अपनी गांड को ऊपर करते हुए उसको निकाल दिया था। फिर इस तरह मैंने उसके कपड़ो को उतारा, वाह क्या मस्य द्रश्य था? उसकी चूत पर छोटे आकार के बाल थे, लेकिन उसकी चूत एकदम गुलाबी थी। फिर मैंने उसको पूछा कि यहाँ के बाल क्यों नहीं साफ करती हो? तब उसने कहा कि आपको अच्छे नहीं लगते तो आप ही इनको साफ कर दो।

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अब में तो उसके मुहं से वो बात सुनकर एकदम खुश हो गया और फिर में बाथरूम में जाकर अपना शेविंग कीट ले आया। अब मैंने उसकी चूत और बगल में अच्छे से साबुन लगाकर उसके बाल पूरे साफ किए और फिर उसको अच्छे से साफ किया, वाह उसकी चूत सिर्फ़ एक गुलाबी दरार जैसी थी और उस ब्रश को रगड़ने से उसकी चूत ने बड़ा जूस बाहर निकाला। फिर मैंने हल्के से उसकी चूत को सहलाया और चूमा, तब उसके मुँह से आहह्ह्ह्ह ऊह्ह्ह्हह्ह आईईईईई की आवाज निकली और वो एकदम से मचल गयी थी। फिर मैंने अपने कपड़ों को जल्दी से उतार दिया जिसकी वजह से मेरा 8 इंच लंबा लंड फड़फडाते हुए बाहर निकल आया उसको देखकर उसकी आंखे चकित होकर बड़ी हो गयी और बोली कि बाप रे, आह्ह्ह यह क्या है? यह तो बहुत बड़ा है, इतना लंबा और मोटा, साहब आप इसको मेरी उसमे डालोगे तो में मर ही जाऊंगी, क्योंकि मैंने तो आज तक ठीक से उंगली भी नहीं डाली। अब उसका कहना सही था, उसकी कुंवारी चूत के होंठ एकदम चिपके हुए थे और इतनी गुलाबी चूत तो सुहागरात में मेरी पत्नी की भी नहीं थी। अब में तो उस सुंदर कामुक चूत को अपने सामने पहली बार देखकर एकदम पागल हो गया था और मेरा लंड जोश में आकर ज़्यादा लंबा और मोटा होने लगा था।


फिर मैंने उसको इशारा किया और कहा कि पकड़ ले इसको मेरी जान और यह बात कहते हुए मैंने उसके हाथ को अपने लंड पर रख दिया। अब उसके बदन को पहली बार नंगा देखकर तो मेरा लंड ज़ोर-जोर से उछलने लगा था और उसके बूब्स इतने मस्त थे कि पूछो ही मत। फिर मैंने उसकी चूत सहलाई और अब बाल साफ करने के बाद उसकी चूत एकदम ऐश्वर्या राय की चूत जैसी लग रही थी। ( यह मेरा सोचना था) अब मेरे हाथ उसकी चूत की तरफ बढ़ गये और उसकी चूत के होंठो को थोड़ा खोला, तब मुझे उसकी चूत का दाना नजर आने लगा था जिसको मैंने हल्के से अपने अंगूठे से दबा दिया और फिर उसकी चूत से निकलते हुए रस को दाने पर मलते हुए रगड़ने लगा था। अब वो मेरे इतना सब करने की वजह से सिसकियाँ लेने लगी थी और साथ ही मुझे कहने भी लगी आहह्ह्ह्ह ऊऊईईईई माँ बहुत अच्छा लग रहा साहब और करो। दोस्तों उसकी क्या मस्त गरम चूत थी? फिर मैंने अपनी एक उंगली को धीरे से उसकी चूत में अंदर डाला, अब उसकी चूत से रस बह रहा था जिसकी वजह से उसकी चूत गीली हो चुकी थी। फिर मैंने उसकी रसभरी गुलाबी चूत के होंठो को अपनी उंगलियों से अलग किया और फिर उसकी चूत को चूमा और फिर मैंने उसकी चूत के खुले होंठो से अपनी जीभ को अंदर डाल दिया।


अब वो मेरे यह काम करते ही सिसक उठी और कहने लगी कि आहह्ह्ह यह क्या कर रह हो साहब? ओह्ह्ह माँ मेरा क्या निकल रहा है? छोड़ दो मुझे में अब बाथरूम जाऊंगी। अब में समझ गया था कि वो पहली बार झड़ रही है और फिर वो मचलती रही, मैंने उसकी चूत के लाल छेद को देखा और मुझे उसकी चूत के अंदर का वो द्रश्य भी दिखाई दिया। अब में उसके दाने और उसकी जाँघ से उसकी पूरी चूत को मेरी जीभ से चाटने लगा, अब मेरा एक हाथ ऊपर उसके बूब्स पर था। फिर पांच-सात मिनट के बाद वो चिल्लाने लगी आह्ह्ह्ह साहब मेरी चूत और फिर उसने मेरे चेहरे से अपनी चूत को एकदम से चिपका लिया और फिर उसकी चूत से उसकी जिंदगी में पहली बार झड़ने वाला पानी बाहर निकल आया। दोस्तों में देखकर महसूस करके बड़ा चकित था कि उसके रस का क्या दबाव था? और पहली बार झड़ने का पानी भी बहुत मात्रा में बाहर आने लगा था, जिसकी वजह से मुझे तो बड़ा मस्त मज़ा आ गया था और उसकी चूत का पानी कुछ नमकीन सा कुछ मीठा सा था। अब में तो अपनी जीभ से लगातार उसकी चूत को चाटने लगा था और उसकी चूत को बहुत देर तक मैंने चाटा।


फिर में उठकर उसके बूब्स और निप्पल पर आ गया और उन्हें पूरा अपने मुँह में भरकर चूसने लगा और उसके निप्पल को भी चूसने लगा था और फिर से अपना एक हाथ उसकी चूत के दाने पर लगाया, उसकी चूत बड़ी गीली गरम भी थी। अब करीब पांच मिनट के बाद वो दोबारा से गरम हो चुकी थी और वो मुझसे कहने लगी कि साहब अब बर्दाश्त नहीं होता है, अब अपना अंदर डाल दो में अब नहीं रुक सकती हूँ, मेरी चूत में चिंटियाँ चल रही है, आहह ऊफ्फ्फ्फ अब आप जल्दी से इसका कुछ करो। फिर मैंने उसको कहा कि रानी अब में तेरी चूत की चुदाई करके इसकी सील को आज तोड़ दूंगा, जिसकी वजह से तुझे थोड़ा सा दर्द जरुर होगा, तू मेरे लिए वो सब बर्दाश्त करना और फिर मैंने अपना लंड उसकी चूत पर रगड़ना शुरू किया। अब वो कहने लगी आहह ऊह्ह्ह साहब अब क्यों तरसा रहे हो? मेरे बदन में आग लगी है, में इसकी वजह से मर ही जाऊंगी। फिर मैंने कुछ नहीं कहा और अपनी पत्नी की ड्रेसिंग टेबल से वैसलीन लेकर आया और उसकी चूत के छेद में अच्छे से लगाया और अपने लंड के टोपे पर भी बहुत सारा वैसलीन लगाया और फिर उसकी चूत के छेद पर अपना लंड रखकर धीरे से अंदर घुसाया।


अब मेरे हाथ उसके बूब्स को मसल रहे थे और मेरा मुँह उसके होंठो को चूस रहा था, तब वो बोली कि आह्ह्ह साहब जी धीरे, करो मुझे दर्द हो रहा है। फिर मैंने उसको पूछा क्यों रानी तुम्हे मज़ा आ रहा है? तब वो बोली कि साहब जी जल्दी करिए ना जो भी करना है। अब में उसको बोला कि हाए मेरी जान बोल क्या करूँ? तब वो बोली कि डालिए ना, कुछ करिए ना, फिर में उसको बोला कि रानी बोल क्या करूँ? और यह कहते हुए मैंने अपने लंड को थोड़ा और अंदर डाला। अब वो बोली कि अपना यह डाल दीजिए। फिर मैंने उसको पूछा कि बोल ना में इसको कहाँ डालूं मेरी जान? क्या डालूं? तब वो बोली कि आप ही बोलिए ना साहब जी, आप अच्छा बोलते है। अब मैंने उसको बोला कि अच्छा यह मेरा लंड तेरी चिकनी और प्यारी गुलाबी चूत में डाल दूँ? तब उसने कहा कि हाँ और फिर मैंने एक धक्का लगा दिया और उस दर्द की वजह से वो ज़ोर से चिल्ला उठी आईईईई में मर गयी, यह क्या कर दिया साहब? आहह बाहर निकालो मुझे बड़ा तेज दर्द हो रहा है, लेकिन मैंने उसकी एक भी बात ना सुनी और उसको कसकर पकड़ा और दूसरा धक्का लगा दिया। अब मेरा आधा लंड उसकी चूत के अंदर चला गया और उसकी की सील टूट चुकी थी।


तभी उसकी चूत ने अपना खून उगल दिया और वो मुझसे कहने लगी कि आहह में मर गयी, मेरी चूत फट गयी साहब अब आप मुझे छोड़ दो। अब वो छूटने की कोशिश कर रही थी, लेकिन मैंने उसको दबोच रखा था, उसकी आँखों से आँसू निकल आए थे। फिर में उसको चूमने लगा और उसके बूब्स पूरी छाती पर बहुत प्यार किया। अब में उसकी चूत से निकले खून से समझ गया था कि अब कोई समस्या नहीं है, लेकिन उसकी चूत बहुत टाईट नयी थी और इसलिए में थोड़ा सा रुक गया था। फिर मैंने उसको कहा कि अब यह तुझे चोदेगा और तब वो कहने लगी कि हाँ चोदिए ना साहब जी आपको किसने मना किया है? अब उसके मुँह से यह बात सुनकर तो मेरा लंड और भी जोश में आकर मस्त हो गया और फिर में उसको बोला कि हाए रानी क्या चूत है तेरी? तेरे क्या समय बूब्स है? तूने इतने दिनों से इनको कहाँ छुपाकर रखा था? पहले क्यों नहीं चुदवाया? तब वो भी बोली कि साहब जी आपका भी लंड बहुत मज़ेदार है, कितना मज़बूत है? एकदम कड़क और कितना मोटा है? मेरी चूत एकदम टाईट हो गयी, आपका लंड फँस गया है और अब आप ज्यादा देर मत कीजिए बस चोद दीजिए जल्दी से मुझे और फिर उसने अपने कुल्हे ऊपर कर लिए।


फिर मैंने उसके एक बूब्स को अपने मुँह में लिया और चूसने लगा, में अपने एक हाथ से उसके दूसरे बूब्स को दबाते हुए मसलते हुए उछल उछलकर ज़ोर-ज़ोर से चोदने लगा था, वाह अब मुझे जन्नत का असली मज़ा आ रहा था और ऐसा लग रहा था कि बस में वैसे ही धक्के देकर उसको चोदता ही रहूँ चोदता ही रहूँ उस प्यारी मासूम चूत की वैसे ही चुदाई करता रहूँ। अब मेरा लंड ज़ोर-ज़ोर से उसकी गुलाबी गीली गरम चूत को चोद रहा था, हाए रानी तू आराम से चुद रही है और तुझे अब मज़ा आ रहा है ना? बोल मेरी जान बोल। अब वो बोली कि हाँ साहब में चुद रही हूँ, बहुत मज़ा आ रहा है साहब, आप बहुत अच्छा चोदते है साहब, यह मेरी चूत आपके लंड के लिए ही बनी है ना साहब? साहब मेरे बूब्स को आप ज़ोर-जोर से दबाए ऊऊह्ह्ह्हह वाह मज़ा आ गया ऊऊफ्फ्फ्फ़ और अब वो तीसरी बार झड़ने के करीब थी। फिर इसके पहले वो दर्द में झड़ी थी, लेकिन इस बार उसको दर्द नहीं था और वो मज़े मस्ती जोश में आकर मुझसे कहने लगी हाँ और ज़ोर से चोदो ऊईईईई क्या लंड है आपका? मेडम के तो मज़े है। अब मैंने उसको कहा कि रानी अब यह लंड तेरे लिए ही है और अब मेरी गति बहुत तेज हो चुकी थी, मेरा लंड उसकी बच्चेदानी की गहराई तक जा रहा था।


फिर मैंने कुछ धक्के लगाए और उसको कहा कि रानी अब मेरा निकलने वाला है आईईईई और यह कहते हुए अपना पूरा लंड उसकी चूत में जड़ तक डाल दिया और फिर मैंने अपनी गरम-गरम पिचकारी को उसकी चूत में ही छोड़ दिया। अब उसकी पूरी चूत मेरे गरम रस से भर चुकी थी पहली बार उसकी चूत में किसी मर्द की क्रीम भरी थी और इसलिए वो दोबारा से एक बार और झड़ चुकी थी और मुझे उसने कसकर जकड़ लिया था। फिर हम दोनों साथ साथ ही झड़े, मैंने अपना सारा रस उसकी प्यारी-प्यारी नरम गुदगुदी चूत में भर दिया, हाए उसकी क्या मस्त चूत थी? क्या लड़की थी? गरम हलवा, नहीं उससे भी ज़्यादा स्वादिष्ट थी। फिर मैंने उसको पूछा कि रानी तेरा महीना कब हुआ था? तब वो शरमाते हुए बोली कि परसों ही खत्म हुआ है, आप बड़े वो है यह बात भी क्या कोई पूछता है? फिर मैंने उसको अपनी बाहों में भरकर उसके होंठो को चूमते उसके बूब्स को दबाते हुए कहा कि मेरी जान तू भी चुदवाते चुदवाते सब कुछ सीख जाएगी। अब में एकदम सुरक्षित था, क्योंकि अभी उसका गर्भवती होने का कोई डर नहीं था। दोस्तों दूसरी बार जब मैंने उसको चोदा तब मुझे पहली बार से ज़्यादा मज़ा आया, क्योंकि मेरा लंड भी देर से झड़ा था और उसकी चूत भी गीली थी। अब वो साली अपने कूल्हों को उछाल उछालकर बड़े मज़े लेते हुए पूरे जोश के साथ मुझसे अपनी चुदाई करवा रही थी।


अब मैंने उसके बूब्स को तो मसल मसलकर और चूस चूसकर पूरी तरह से निचोड़ ही दिया था, जाने कब मौका मिले? आज इसकी चूत चूस ही लो। दोस्तों उसकी चूत का स्वाद तो इतना मज़ेदार था कि कोई भी शराब में ऐसा नशा नहीं था और चोदते समय तो मैंने उसके होंठो को खा ही लिया था और में उसको बोला कि मज़ा ले मेरे लंड का मेरी जान तेरी चूत में और इसी को चुदाई कहते है, रानी तूने अपनी यह चूत अब तक कहाँ छुपा रखी थी? और फिर उसको यह सब कहते हुए में बस तेज धक्के देकर उसकी चुदाई किए ही जा रहा था और मज़ा लुट रहा था। अब वो भी कहने लगी, हाँ चोद दीजिए साहब जी, चोद दीजिए मेरी चूत को चोद दीजिए कह कहकर चुदवा रही थी। दोस्तों फिर चुदाई तो खत्म हुई, लेकिन मेरा मन नहीं भरा था। फिर मैंने उसको दबोचते हुए कहा कि रानी मौका निकालकर चुदवाती रहना, मेरा लंड तेरी चूत का दीवाना है, जानेमन में तुझे मालामाल कर दूँगा और यह बात उसको कहकर फिर मैंने उसको 500 रुपए दिए और उसको चूमते हुए मसलते हुए रवाना किया। फिर मैंने उसको दोबारा से बहुत बार चोदा और अब में उसको घर में नहीं होटल में ले जाता हूँ, क्योंकि वो इतनी सुंदर थी कि कोई भी उसको देखकर यह नहीं कह सकता था कि यह नौकरानी है।


फिर उसके बाद मैंने उसको ब्रा-पेंटी भी खरीदकर दिए और वो मेरी पत्नी से ज़्यादा सेक्सी लगती है और में आज भी उसको चोदता हूँ, क्योंकि मुंबई की औरतों को चुदवाना नहीं आता, वो टेक्सी वाले से या घर के नौकर से चुदवाती है जैसे में नौकरानी को चोद रहा हूँ। फिर उसके बाद में हम दोनों को जब कभी भी कोई मौका मिला, तब हमने चुदाई का भरपूर आनंद लिया और बड़े मज़े किए।
दोस्तों यह था मेरा चुदाई का अपनी नौकरानी के साथ एक सबसे मस्त सेक्स अनुभव में उम्मीद करता हूँ कि सभी पढ़ने वालों को यह जरुर पसंद आएगा ।।
धन्यवाद …

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