प्यारी दीदी के साथ मजे


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प्रेषक : सन्नी …

हैल्लो मेरे प्यारे दोस्तों, कामुकता डॉट कॉम के चाहने वालो मेरा नाम सन्नी है। अब सबसे पहले में सभी चूत वालियों और लंड वालों को बहुत धन्यवाद देता हूँ, क्योंकि मुझे उम्मीद है कि मेरी पिछली कहानियों को आप सभी लोगों ने पढ़कर बहुत पसंद किया होगा और यह आप सभी के प्यार का ही नतीजा है कि मुझे और भी सत्य कथा को लिखने का हौसला मिला। अब आज एक बार फिर से में आप सभी लोगों के पास अपनी एक सच्ची घटना को लेकर आया हूँ और मुझे पूरी उम्मीद है कि मेरी पिछली कहानियों की तरह यह कहानी भी आप लोगों को जरुर पसंद आएगी। दोस्तों मेरा एक बहुत पक्का दोस्त है, जिसका नाम रंजीत है। वो पटियाला में ही अपनी बड़ी बहन और माँ के साथ रहता है और वो किसी प्राइवेट बैंक में नौकरी करता है, उसके परिवार में सिर्फ तीन लोग ही है। एक रंजीत दूसरी उसकी मम्मी और तीसरी उसकी बड़ी दीदी है, उसकी मम्मी 48 साल की है और बड़ी बहन 28 की, जिनकी शादी हो चुकी है, लेकिन उनका पति पिछले पांच साल से जर्मन में ही काम करता है। दोस्तों जैसा कि आप सभी लोग बहुत अच्छी तरह से जानते है कि गाँव में शादियाँ छोटी ही उम्र में हो जाती है, जिसमे खासतौर पर लड़कियों की शादी तो उसके बदन के बढ़ते हुए आकार को देखकर तुरंत ही हो जाती है।

दोस्तों मेरे दोस्त की मम्मी की शादी भी 15 साल की उम्र में हुई थी, यह बात खुद मुझे अपने दोस्त से पता चली और इसी तरह उसकी बड़ी बहन की भी 18 साल की उम्र में शादी हो गयी। उसकी बड़ी बहन का नाम अवनीत कौर है, में और मेरा वो दोस्त रंजीत कॉलेज के जमाने के दोस्त है और अक्सर हम दोनों एक दूसरे के घर आते जाते थे, उसकी बड़ी बहन बड़े ही खुले विचार की है और वो शुरू से ही मुझे रंजीत की तरह ही मानती है। दोस्तों उस दिन शनिवार का दिन था, में अपने कमरे में आराम कर रहा था, तभी कुछ देर बाद अचानक से अवनीत मेरे घर आ गई। दोस्तों वैसे तो वो अक्सर हमारे घर आती रहती थी और मेरे लिए कुछ ना कुछ जरुर लेकर आती थी और उस दिन भी वो बाजार से खरीदारी करके आई थी। दोस्तों अवनीत दीदी 28 साल की बहुत ही सुदंर और कामुक चेहरे वाली औरत होने के साथ ही उनका फिगर 38-28-36 इंच का, उनके बड़े आकार के गोरे उभरे हुए बूब्स और उस मटकती हुई गांड को देखकर किसी का भी लंड तनकर खड़ा हो सकता था, क्योंकि वो बहुत ही हॉट सेक्सी थी।

फिर जैसे ही वो कमरे में आई तब वो मुझसे कहने लगी क्यों रोहित आजकल तुम घर नहीं आ रहे हो क्या बात है? मैंने उनको कहा कि दीदी आजकल मुझे काम की वजह से कई कई महीनों बाहर रहना होता है और इस वजह से में इतने दिनों से आपसे मिलने नहीं आ सका। अब वो कहने लगी कि हाँ मुझे अच्छे से पता है कि तुम क्या काम करते हो और तुम्हे क्यों समय नहीं मिलता? अच्छा चल अब मुझे पानी तो पीला दे। फिर मैंने उनको कहा कि हाँ दीदी आप मुझे माफ करना में अभी लेकर आता हूँ। फिर उसके बाद मैंने तुरंत फ्रिज से पानी की एक बोतल निकालकर दीदी को लाकर दे दी। अब दीदी पानी को पीकर कहने लगी उउफ्फ आज बाहर कितनी गरमी है, मैंने हाँ भरते हुए उनको कहा कि हाँ दीदी यह गरमी तो कम होने का नाम ही नहीं ले रही, उसके बाद हम दोनों बैठकर ऐसे ही बातें हंसी मजाक करने लगे और उसी बीच मैंने दीदी से पूछा रंजीत और मम्मी कैसी है? उन्होंने कहा कि वो दोनों तो आज सुबह ही हमारे गाँव किसी काम की वजह से चले गए में अकेली घर में बैठी बोर हो रही थी और इसलिए में तुम्हारे पास चली आई, क्योंकि तुम्हारे साथ रहकर मुझे बात करने अपना समय बिताने में बड़ा मज़ा आएगा, वरना में अकेली घर में रहकर क्या करती?

दोस्तों इतने में ही बाहर जोरदार बारिश होने लगी, जिसकी वजह से हम दोनों के चेहरे खुशी से खिल उठे और हमे उस तेज गरमी से थोड़ी राहत मिल गई, बाहर बड़ा ही सुहाना मौसम हो गया। अब हम दोनों बाहर पानी को देखकर बातें हंसी मजाक करने लगे और हमे बहुत देर हो गई थी, लेकिन पानी अब भी रुकने का नाम नहीं ले रहा था। फिर हमारे देखते ही देखते पानी की रफ्तार अब पहले से भी ज्यादा हो चुकी थी और यह सब देखकर दीदी की परेशानी भी अब बढ़ चुकी थी। अब वो बढ़ते पानी उस तेज हवाओ-तूफान को देखकर डरते हुए मुझसे कहने लगी अरे यार, अब में अपने घर कैसे जाउंगी? देखो बाहर कितना तेज पानी है और यह इतनी देर बरसने के बाद भी अब बंद होने का नाम नहीं ले रहा। अब में उनके चेहरे पर उस परेशानी चिंता को साफ तरह से समझकर उनको बोला कि अवनीत दीदी अब जब तक यह बारिश नहीं रुक जाती, तब तक आपको यहीं मेरे घर में रुकना पड़ेगा। फिर मैंने कुछ देर शांत रहकर कहा कि वैसे भी आप इस खराब मौसम में अपने घर अकेली ही रहोगी, यहाँ मेरे पास रहने से आपका टाइम पास भी हो जाएगा और दीदी हो सकता है कि सुबह तक यह बारिश थम जाए आप आराम से मेरे साथ रहो कल सुबह जल्दी उठकर चली जाना।

अब वो चिंतित होकर कहने लगी, लेकिन में यहाँ उफफ्फ़ क्या करूँ मुझे कुछ भी समझ नहीं आता? अब मैंने दीदी से पूछा क्यों क्या हुआ दीदी आपको मेरे घर रुकने में कोई परेशानी है तो आप मुझे बता सकती? और अगर आप कहे तो में आपको आपके घर छोड़कर भी आ सकता हूँ, उसके बाद आप ही अपनी परेशानी को सम्भालना वहां आप अकेली ही पूरी रात इस खराब मौसम में रहना कोई आपको सुनने वाला नहीं होगा। अब वो मेरी पूरी बात को सुनकर कहने लगी हुआ क्या अब तो मुझे यहीं पर रुकना पड़ेगा और क्या? मैंने दोबारा उनसे पूछा आपको यहाँ रात रहने में कौन सी परेशानी है? तब वो बोली अरे यार मुझे रात रहने में कोई आपत्ति नहीं है, लेकिन में रात को क्या पहनकर रहूंगी मेरे पास रात में सोने के लिए कपड़े कहाँ है? अब मैंने उनको कहा हाँ यह तो आपके सामने एक बहुत बड़ी परेशानी है, आप एक काम करना आप मेरी लुंगी और कुर्ता पहन लेना बस कुछ घंटो की तो बात है। अब वो मेरी बात को सुनकर सेहमत होकर बोली हाँ यही ठीक रहेगा कहने लगी और उसके बाद उन्होंने मुझसे पूछा अच्छा अब तुम मुझे यह बताओ कि खाने का क्या करना है? तब मैंने कह दिया कि दीदी खाना तो आपको बनाना पड़ेगा मुझे भी तो पता चले आपके हाथ के बने खाने का स्वाद कैसा है? अब दीदी हंसते हुए बोली चलो ठीक है आज में तुम्हारे लिए यह भी कर देती हूँ।

अब तक शाम के आठ बजे का समय हो चुका था, उस समय दीदी रसोई में हमारे लिए खाना तैयार कर रही थी और में कमरे में बैठकर टीवी देख रहा था। फिर कुछ देर बाद अवनीत दीदी ने मुझे आवाज़ देकर बुलाया “रोहित यहाँ तो आ” में उनके पास चला गया और बोला “हाँ दीदी बताओ क्या बात है? वो बोली “अरे घी कहाँ है? मैंने उन्हे घी का डब्बा उतारकर दिया और फिर में वहीं पर खड़ा हो गया, मैंने देखा कि दीदी उस समय लुंगी और सफेद रंग का बहुत पतला कपड़े सूती कुर्ते में थी, जो पसीने से पूरा भीग चुका था, क्योंकि रसोई में बड़ी गरमी थी। दोस्तों उस भीगे हुए लुंगी और कुर्ते से उनके बदन का सारा नक्शा मुझे साफ नज़र आ रहा था, उनकी गांड को देखकर मेरे अंडरवियर के अंदर हलचल हुई। अब मुझे उनके कूल्हों का रंग साफ देखकर पता चला कि उन्होंने पेंटी नहीं पहनी थी, वाह यह सब देखकर मेरा लंड एकदम तनकर खड़ा हो गया और उनके लिए मेरे मन में अब बड़े ही बुरे बुरे विचार आने लगे थे। फिर वो मेरे दोस्त की बड़ी बहन है, यह बात सोचकर में वापस बाहर जाने लगा, उसी समय वो मुझसे बोली कहाँ जा रहे हो यहीं रहो ना? में अकेली बोर हो रही हूँ, चलो कुछ बातें करते है खाना भी बन जाएगा और बोरियत भी नहीं होगी।

अब मैंने कहा कि हाँ ठीक है दीदी और बताओ यहाँ आपको कोई परेशानी तो नहीं है? दीदी बोली नहीं कोई समस्या नहीं है, में बड़े आराम से हूँ अच्छा रोहित ज़रा तू मुझे एक बात तो बता, तू ऑफिस में अपने काम पर ध्यान देता है या लड़कियों पर? क्या दीदी आप भी बस कैसे भी कुछ भी कह देती हो? अब वो पूछने लगी क्यों क्या तेरे ऑफिस में कोई सुदंर लड़की नहीं है? मैंने कहा कि हाँ है ना दीदी बहुत सी है, लेकिन में सिर्फ अपने काम पर ही ध्यान देता हूँ। फिर वो बोली चल हट तू अब मुझे ही पागल बना रहा है, में बहुत अच्छी तरह से जानती हूँ कि लड़को की लड़कियों को देखकर क्या हालत होती है? और वो भी अगर लड़का तुम्हारे जैसे सुंदर हो तो। अब मैंने कहा, लेकिन में ऐसा बिल्कुल भी नहीं हूँ जैसा आप सोच रही हो। फिर वो मुझसे पूछने लगी अच्छा चल यह बता तुझे कोई लड़की तो अच्छी लगती होगी? मैंने तुरंत कहा कि नहीं दीदी मुझे कोई लड़की पसंद अब तक नहीं आई। अब वो बोली कि नहीं में तेरी यह बात नहीं मान सकती कि एक जवान लड़का है, जिसको कोई लड़की अच्छी नहीं लगती यह तो हो ही नहीं सकता? अब मैंने उनको कहा कि आप जाने भी दो ना आप मेरी बड़ी बहन जैसी हो और बहन, भाई के बीच में ऐसी बात नहीं होती।

अब वो कहने लगी कि अरे यार तुम शहर में रहते हो और बातें कर रहे हो पुराने जमाने की, अरे पागल आजकल तो भाई बहन एक दोस्त की तरह होते है, जो आपस में अपने मन की सारी बातें बिना किसी संकोच या झिझक के एक दूसरे को बता देते है। अब अच्छा चल तू यह बता क्या तू बियर या कुछ पीता है? मैंने कहा कि हाँ दीदी कभी कभी दोस्तों के साथ में भी पी लेता हूँ। अब दीदी मुझसे पूछने लगी क्या अभी वो तेरे पास है? मैंने कहा कि हाँ फ्रिज में चार बोतल रखी हुई है क्या आप भी पीती हो? हाँ रे जब गरमी ज्यादा होती है, तब तेरे जीजाजी मुझे भी पीला देते है कभी कभी तो वो मुझे व्हिस्की भी पीला देते है। अब मैंने उनको कहा कि तुम बहुत बदल गयी हो और वो यह बात सुनकर हंसते हुए हाँ बोली अरे बेटा यह सब शहर में रहने का असर है। फिर मैंने उनको कहा कि अब आप नहा लो फिर उसके बाद हम साथ में बैठकर बियर पीते हुए बातें करते रहेंगे और फिर वो हाँ ठीक है कहकर अपनी गांड को मटकाती हुई नहाने चली गयी। अब में अपने लंड को पकड़कर मसल रहा था और मन ही मन सोच रहा था कि आज दीदी बड़ी खुलकर बातें कर रही है, हो सकता है कि आज मुझे उनके साथ चुदाई करने का मौका मिल जाए?

अब में सोचने लगा, अवनीत दीदी जब नहाकर मेरी लुंगी और कुर्ता पहनेगी वो भी बिना पेंटी के तो शायद रात को लुंगी हट जाए या खुल जाए तो मुझे उनकी चूत के दर्शन हो जाए। तभी दीदी नहाकर आ गई, मैंने तुरंत अपने लंड को अंडरवियर में सेट किया और उनको पूछा दीदी क्या आप नहा ली? वो बोली हाँ अब तू भी जाकर नहा ले। फिर में बोला कि हाँ जी ठीक है और उसके बाद में बाथरूम में जाकर अपने कपड़े उतारकर जैसे ही में कपड़े टाँगने के लिए खुटी की तरफ घुमा, तब में देखकर एकदम हैरान रह गया, क्योंकि मैंने देखा कि दीदी की ब्रा और पेंटी वहाँ लटकी हुई थी। अब मुझे वो द्रश्य देखकर कुछ अजीब सा लगा और फिर मैंने सोचा कि शायद उन्होंने अपनी पेंटी तब उतारी होगी जब वो पहली बार पेशाब करने आई थी। अब मैंने उस पेंटी को उतारकर अपने हाथ में लिया और में उसको सूंघने लगा वाह दोस्तों में बिल्कुल सच कहता हूँ, उसकी चूत की महक से में एकदम पागल हो गया। अब में दीदी के विचारों में मुठ मारने लगा और कुछ देर बाद जब मेरा लंड झड़ गया, तब में जल्दी से नहाकर बाहर आ गया। फिर वो मेरी तरफ शरारती हंसी हंसते हुए मुझसे कहने लगी चल अब हम दोनों नहा चुके है, तू जल्दी से बियर खोल। अब मैंने दो बोतल बियर खोली और एक उनको दी और एक मैंने खुद ने ले ली।

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अब दीदी पलंग पर अपने दोनों पैरों को लंबा करके सिरहाने से अपनी पीठ को लगाकर बैठी हुई थी, में उनको बहुत ध्यान से देखने लगा। तभी वो मुझसे पूछने लगी क्यों क्या बात है रोहित? तू मुझे ऐसे क्या देख रहा है? में उनके मुहं से यह बात सुनकर एकदम से सकपका गया और में कहने लगा कि कुछ नहीं दीदी, में देख रहा था कि आप मेरे कपड़ों में बहुत अच्छी लग रही हो। अब वो कहने लगी अच्छा बेटा तुझे तो लड़कियाँ अच्छी नहीं लगती, फिर में तुझे कैसे अच्छी लगने लगी? ओह ओ दीदी आप कोई लड़की थोड़ी हो यह शब्द कहकर में एकदम से चुप हो गया। अब वो यह बात सुनकर गुस्से से पूछने लगी, अरे में लड़की नहीं तो क्या मर्द हूँ? मैंने कहा कि अरे नहीं दीदी मेरा वो मतलब नहीं था। अब वो पूछने लगी तो फिर तेरा क्या मतलब था? अब में आपको कैसे बताऊ? आप मेरी बड़ी बहन जैसी हो। फिर वो कहने लगी अरे यार फिर वही बेकार सी बातें तूने शुरू कर दी, अब हम दोस्त है देख तू आज मेरे साथ बैठकर बियर पी रहा है, मुझसे अब कैसी शरम खुलकर बोल में तेरी किसी भी बात का बिल्कुल भी बुरा नहीं मानने वाली। फिर वो यह बात बियर की बोतल को खाली करके मुझसे बोली और उसके बाद दीदी फिर मुझसे कहने लगी।

अब पहले तू दूसरी बोतल खोलकर मुझे दे दे। फिर मैंने उनको कहा कि हाँ ठीक है, में एकदम हैरान रह गया और बियर का घुठ भरकर दीदी मुझसे बोली हाँ अब तू बोल। दोस्तों अब तक में उनके साथ बहुत खुल चुका था और मेरा डर कुछ कम हो चुका था। फिर में उनको बोला वो क्या है कि दीदी? आप तो शादीशुदा हो और मुझसे बड़ी उम्र मतलब 28 से ऊपर की एक सुदंर औरत हो और आप अच्छी भी लगती हो और वैसे मुझे ज्यादा उम्र की सुडोल बदन वाली औरते अच्छी लगती है। अब दीदी मेरी यह बातें सुनकर बहुत हैरानी से मेरी तरफ देख रही थी, वो बियर का एक घुठ लेकर बोली, लेकिन भाई अच्छा यह बताओ अपने से बड़ी उम्र की औरतों में तुम्हे ऐसा क्या नज़र आता है, जो तुम्हे वो इतनी अच्छी लगती है? मैंने कहा कि दीदी में सोचता हूँ कि खैर अब आप जाने दो वरना आप मेरी बात को सुनकर बुरा मान जाओगी और मेरे विचार जानकर आप सोचोगी कि में कितना गंदा हूँ। अब वो बड़े चाव से पूछने लगी, अरे नहीं यार हर आदमी की अपनी एक पसंद होती है और अब तो तुम्हारी बातों में मुझे भी बड़ा मज़ा आ रहा है, बोलो ना प्लीज आगे बताओ? वो मेरा एक हाथ पकड़कर बोली।

फिर में कहने लगा दीदी बड़ी उम्र की औरतों का बदन खासकर उनके कुल्हे और छाती बहुत भरे हुए होते है और इस वजह से मुझे शुरू से ही बड़े कुल्हे और छाती वाली औरते बड़ी अच्छी लगती है। अब वो मेरी पूरी बात को सुनकर हंसकर बोली अरे यार तू हिन्दी में बताना कि तुझे बड़े कुल्हे और बूब्स वाली औरते बहुत पसंद है। दोस्तों उनके मुहं से यह बात सुनकर में उन्हे एकदम चकित होकर देखता ही रह गया, उनके मुहं से वो शब्द सुनकर मेरे लंड ने ज़ोर का झटका दिया और उसके बाद में उनसे बोला दीदी आज आप मुझे एकदम बेशरम बनाकर छोड़ोगी। अब वो हंसते हुए कहने लगी, दोस्तों में बेशरमी अच्छी होती है पागल, दिल की कोई भी बात कभी छुपानी नहीं चाहिए। अब वो झूमते हुए मुझसे पूछने लगी क्या कभी किसी बड़ी उम्र की औरत के साथ तूने कुछ किया भी है? या बस तू उनके विचारों में ही डूबा रहता है। अब मैंने कहा कि नहीं दीदी अब तक तो मैंने ऐसा कुछ भी नहीं किया, लेकिन में क्या करूँ दीदी मुझसे काबू ही नहीं होता, जब भी में कोई 28-35 की सुदंर सी औरत देखता हूँ मेरा मन मचल उठता है और अब तो मेरा पहले से ज्यादा बुरा हाल है, क्योंकि अब तो किसी रिश्तेदार की औरत को देखकर भी मेरा बुरा हाल हो जाता है और इसलिए में तुम्हारे पास भी नहीं आता।

अब वो मुझसे पूछने लगी क्यों मेरे यहाँ कौन है जो तेरी नियत को खराब करे? उसी समय मैंने झट से कह दिया कि आपकी माँ की वजह से में पागल हो जाता हूँ। फिर वो मेरे मुहं से यह बात सुनकर चकित होकर कहने लगी क्या तुझे में भी पसंद हूँ और मेरी माँ भी? हे भगवान तुझे में इतनी अच्छी लगती हूँ और तू मेरे बारे में क्या सोचता है? अब मेरी तो गांड ही फट गयी फिर भी मैंने अपने मन की बात बताई और मैंने कहा कि दीदी मैंने तो पहले ही आपसे कहा था कि आप बुरा मान जाओगी। अब वो कहने लगी अरे नहीं मेरे प्यारे भाई में तो यह बात सोचकर हैरान हूँ कि अब भी मेरे अंदर ऐसी क्या बात है जो तुम जैसा जवान लड़का मुझे इतना पसंद करता है बताओ ना प्लीज? फिर में कहने लगा कि दीदी आप मुझे बहुत सेक्सी लगती हो आपके बड़े आकार के बूब्स और कुल्हे देखकर मेरा बुरा हाल हो जाता है और आप मेरे लंड की तो पूछो ही मत, यह आपके रसीले होंठ बड़ी-बड़ी आंखे आपको एकदम कामुक बनाती है। अब दीदी में सच कहता हूँ में क्या कोई 70 साल का बुड्ढा भी आपके इस जिस्म को देखे तो वो भी पागल हो जाए, में एक ही साँस में वो सभी बातें बोल गया।

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फिर वो खुश होकर पूछने लगी क्या में सच में तुझे इतनी अच्छी लगती हूँ? मैंने कहा कि हाँ दीदी में सच ही कह रहा हूँ, में आपके बूब्स को चूसना और आपकी गांड में अपने लंड को डालकर मस्त मज़े करना चाहता हूँ और में क्या कोई भी भाई आपके जैसी हॉट सेक्सी बहन को एक बार जरुर चोदना चाहेगा, यह देखो मेरे लंड का क्या हाल हो गया? यह कहते हुए मैंने अपनी लुंगी को एक ही झटके से उतार दिया। अब दीदी मेरे तनकर खड़े लंड को देखकर चकित होकर मुझसे बोली वाह तेरा लंड तो तेरे जीजाजी से भी बड़ा और मोटा भी है वो क्या अब तक जितने भी लंड मैंने अपनी इस चूत के अंदर लिए है यह सबसे अच्छा है। अब आज इसको में अपनी चूत में जरुर लेकर रहूंगी, मेरे राजा तू इसको मेरे हाथ में तो दे उउफफफ्फ़ वाह कितना चिकना है। अब वो मेरे लंड को पकड़कर सहलाने लगी उनका नरम मुलायम हाथ लगते ही में पागल हो गया। फिर में उनको बोला कि दीदी आप अपने भी कपड़े उतार दो ना प्लीज। अब वो मेरी आँखों में झाँककर मुझसे कहने लगी, जिसको जरुरत हो वो खुद ही उतार ले। अब यह बात सुनकर मैंने उन्हे तुरंत पकड़कर खड़ा कर दिया और उनका कुर्ता उतार दिया, लुंगी एक ही झटके में खुल गयी, जिसकी वजह से अब मेरी अवनीत बहन पूरी नंगी मेरे सामने थी और हम दोनों एक दूसरे को बड़े प्यार से देख रहे थे।

फिर दीदी ने हाथ आगे करके मुझे अपने बदन से चिपका लिया, इस तरह मेरा लंड उनकी चूत से और उनके बूब्स मेरी छाती से चिपक गए, वो मेरे गालों को चूमती चाटती जा रही थी। अब वो जोश में आकर कहने लगी वाह तू कहाँ था अब तक? पागल मुझे पता होता तो में तुझसे पहले ही चुदवा लेती मेरे भाई चोद दे आज तू अपनी बहन को और बन जा बहनचोद, वाह कितने दिनों के बाद आज मुझे कोई जवान लंड मिलेगा आह्ह्ह आज तो बस रातभर तू चोद मुझे जैसे चाहे वैसे चोद। अब मैंने उनको कहा हाँ दीदी आज में आपको जी भरकर चोदूंगा सबसे पहले तो में तुम्हारी चूत को चाटूँगा और फिर उसके बाद चुदाई करूंगा। तभी वो कहने लगी हाँ मेरे राजा तुम मेरी चूत को चाटो और में तुम्हारा लंड चूसती हूँ। अब हम दोनों एक दूसरे को चूमते प्यार करते रहे और थोड़ी ही देर के बाद दीदी मुझे पलंग पर ले गई और उन्होंने मुझे नीचे लेटा दिया, उस समय मेरा लंड तना हुआ था। फिर वो अपने दोनों पैरों को मेरे मुहं की तरफ करके मेरा लंड चूमने लगी और फिर उसने कुछ देर बाद मेरे लंड को अपने मुहं में ले लिया। दोस्तों उसके मुहं का गीलापन और उस गरमी को महसूस करके में सिसक पड़ा, उसकी चूत ठीक मेरे मुहं के पास थी।

दोस्तों उउफ़फ्फ़ वाह क्या मस्त मधहोश कर देने वाली चूत थी? वो बड़ी मस्त मोटे होठों वाली फूली हुई रसभरी चूत अब मेरे सामने थी जो मुझे अपनी तरफ आकर्षित किए जा रही थी। फिर सबसे पहले तो मैंने उसकी चूत पर एक चुम्मा किया जिसकी वजह से वो उछल पड़ी और फिर उसके बाद अपनी पूरी जीभ को बाहर निकालकर मैंने उसकी चूत पर घुमाना शुरू किया। अब दीदी कहने लगी वाह कितना प्यारा लंड है तेरा मज़ा आ गया, तभी मैंने दीदी से कहा कि हाँ दीदी आपकी चूत भी बड़ी नमकीन है मेरा मन करता है कि में इसको खा जाऊं। फिर वो कहने लगी हाँ तो खा ले ना साले तुझे किसने रोका है? में कहने लगा हाँ मेरी जान दीदी, मेरी रंडी बहन आज में जरुर खा जाउंगा तेरी इस चूत को तू भी मेरा लंड चूस साली। तभी वो बोली साले मादरचोद तू मुझे रंडी बोल रहा है, रंडी की औलाद साले तेरी माँ की चूत, ले आज में तेरा सारा रस चूस जाउंगी है और उसी समय दीदी बोली अब तू चोद दे मुझे मेरी चूत में बहुत खुजली हो रही है। अब तू अपने इस मोटे लंड से मेरी चूत की प्यास को तू बुझा दे मेरे हरामी भाई और यह बात कहकर दीदी सीधी होकर लेट गई।

अब मैंने एक तकिया उनकी गांड के नीचे लगा दिया और में उनके पैरों के बीच में बैठ गया, उसके बाद अपना लंड हाथ से पकड़कर में चूत पर रगड़ने लगा। अब दीदी सिसकियाँ लेकर कहने लगी अरे बहनचोद तू क्यों मुझे इतना तड़पा रहा है चोद ना साले कुत्ते चोद मुझे, तू क्या देख नहीं रहा कि में अपनी चूत की इस खुजली से मरी जा रही हूँ। फिर मैंने उनको बोला कि हाँ तो यह लो दीदी और अपना लंड उसकी चूत के मुहं पर रखकर मैंने एक ज़ोर का झटका मार दिया जिसकी वजह से लंड का टोपा उसकी चूत में घुस गया, वो दर्द से तड़प उठी और बोली ऊइईईई माँ में मर गई साले कुत्ते में तेरी बहन जैसी हूँ तू क्या थोड़ा आराम से धक्का नहीं दे सकता और तूने मुझे क्या रंडी ही समझ लिया है? मेरे प्यारे भाई थोड़ा धीरे धीरे धक्के देकर आराम से चोद, में कहीं भागी नहीं जा रही हूँ। अब मैंने एक और ज़ोर का झटका मारकर अपना पूरा का पूरा लंड उसकी चूत में डाल दिया और में धक्के मारते हुए दीदी से बोला साली रंडी तू नखरे तो ऐसे कर रही है, जैसे पहले कभी तेरी चूत चुदी ही ना हो।

अब तक पता नहीं तू अपनी चूत में कितने लंड खा चुकी होगी और मेरे लंड से तेरी जान निकली जा रही है, तू अब अपना यह नाटक करना बंद कर और वैसे में भी क्या करूँ तेरी चूत है ही ऐसी प्यारी कि में अपने को रोक नहीं पा रहा हूँ। फिर वो सिसकियाँ लेते हुए कहने लगी ऊईईई हाँ गांडू ऊऊह्ह्ह्ह लंड तो मैंने बहुत खाए है, लेकिन तेरा लंड उऊईईइ माँ आह्ह्ह सीधा मेरी चूत की बच्चेदानी पर ठोकर मार रहा है और पहला धक्का भी तो तूने बड़ी ज़ोर से मारा था, चल अब चोद मुझे और आज में देखती हूँ कि कितना दम है तेरे इस लंड में आईईईईईई। अब में उसके बूब्स को दबाते मसलते हुए धक्के देकर उसकी चुदाई करने लगा, उसके रसभरे होठों को चूसते हुए में दीदी से पूछने लगा, दीदी अब तक कितने लंड से तुम अपनी चुदाई करवा चुकी हो? तभी दीदी बोली अरे मेरे राजा भैया अब तो मुझे ठीक तरह से गिनती भी नहीं याद नहीं है, तेरे जीजा जी बहुत चुदक्कड़ आदमी है। अब भी वो रोज मुझे चोदते है और मुझे भी उन्होंने अपनी तरह बना लिया है वो चुदाई करते समय मुझसे कहते है कि चूत और लंड का मज़ा हर आदमी और औरत को दिल खोलकर लेना चाहिए।

फिर में उनके मुहं से यह बात सुनकर और भी उत्तेजित हो गया में उसकी चूत में धक्के मारते हुए दीदी से पूछने लगा दीदी आपकी माँ कितनी बड़ी चुदक्कड़ है? दीदी कहने लगी हाँ मुझे पता है कि तेरी नज़र मेरी माँ पर है, में तेरे लंड से जरुर उसकी एक बार चुदाई करवा दूंगी और वैसे भी वो तेरे इस लंड को देखकर तो पागल ही हो जाएगी। अब में बड़ा ही चकित होकर पूछने लगा क्या सच दीदी? दीदी बोली तो सुन उूउउंम तू मेरे बूब्स भी चूसता जा हाँ ऐसे ही आईई तेरा लंड बहुत ही मज़ेदार है, मुझे तेरे साथ चुदाई करवाने में बहुत मज़ा आ रहा है, हाँ और चोद ज़ोर ज़ोर से चोद तू मुझे आज, तेरे जीजा को गांड मारने का बड़ा शौक है। अब मैंने उनको कहा दीदी तुम्हारे घर में तो बड़ा मस्त माहोल है, दीदी बोली हाँ ऊऊईईईईई उसके बाद मैंने दीदी से पूछना शुरू किया क्यों दीदी तुम्हारी मम्मी की चूत कैसी है क्या वो भी तुम्हारी ही तरह है? क्यों तुमने तो जरुर देखी होगी? वो कहने लगी अब में झड़ने वाली हूँ और ज़ोर से चोद साले कुत्ते मादरचोद तू आज चोद अपनी बहन को चोद फाड़ दे मेरी इस आईईईईई चूत को।

फिर में कहने लगा आह्ह्ह अब में भी झड़ने वाला हूँ, बोल क्या में तेरी इस चूत में ही अपना वीर्य निकाल दूँ या बाहर निकालूं? तब वो कहने लगी नहीं तू मेरे मुहं में आह्ह्ह निकाल दे तेरा रस में इसको पी जाउंगी। अब मैंने उसके मुहं से यह बात सुनकर तुरंत ही उसकी चूत से अपने लंड को बाहर निकाला और वो मेरे लंड पर टूट पड़ी और वो लंड को अपने मुहं में भरकर चूसने लगी और में उसके मुहं में धक्के मारते हुए कहने लगा हाँ खा जा साली मेरी रंडी बहन अपने भाई के लंड से चूस ले मेरा सारा रस और उसी समय मेरे लंड से निकली पिचकारी से दीदी के मुहं में वीर्य गिरने लगा, जिसको वो चूसने लगी। फिर दीदी ने मेरे लंड का सारा वीर्य उसकी एक एक बूँद को निचोड़ डाला और उसके बाद चटकारे लेते हुए अपने होठों से मेरा लंड आज़ाद करके बोली वाह रे बड़ा मज़ेदार है तेरा वीर्य साले मज़ा आ गया और फिर वो मेरे होठों को चूमकर बोली वाह मस्त मज़ा आ गया, मेरे राजा भैया साले। अब में बोला हाँ मेरी रंडी चुदक्कड़ रानी बहन मुझे भी बहुत मज़ा आया, तुझे चोद कर और हम दोनों ज़ोर ज़ोर से हंसने लगे। दोस्तों यह थी मेरी असली चुदाई की सच्ची घटना जिसमे मैंने चुदाई के मस्त मज़े लिए और हम दोनों ने उस खेल में एक दूसरे का पूरा पूरा साथ दिया मुझे उम्मीद है कि यह मेरी कहानी आप सभी को जरुर पसंद आएगी ।।

धन्यवाद …

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