पड़ोसी भाभी की चुदासी जवानी


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प्रेशल : राहुल …

हैल्लो दोस्तों, मेरा नाम राहुल है, में कामुकता डॉट कॉम का नियमित पाठक हूँ और मैंने इस साईट की लगभग सभी कहानियाँ पढ़ी है, तभी मेरा भी मन हुआ कि क्यों ना में भी अपनी कहानी आप लोगों से शेयर करूँ। अब में आपको कुछ अपने बारे में बता दूँ, मेरा नाम राहुल है, में हिसार हरियाणा का रहने वाला हूँ। मेरा लंड नॉर्मल एशियन लंड है जो किसी भी औरत को संतुष्ट कर दे। अब में आपको ज़्यादा बोर ना करते हुए सीधा अपनी कहानी पर आता हूँ। ये बात आज से 5 महीने पहले की है, मेरे पड़ोस में ही एक परिवार किराए पर रहने आया था, उनके परिवार में भैया भाभी के अलावा उनका एक 3 साल का बेटा और भैया की माँ थे। में सुबह-सुबह बाल्कनी में बैठकर पेपर पढ़ता था। फिर कुछ ही दिनों में मैंने नोटीस किया कि वो भाभी लगभग रोज ही वॉक पर जाती थी।

सॉरी में आप लोगों को भाभी के बारे में तो बताना ही भूल गया, उनका नाम प्रीति था, उनकी उम्र कोई 31 या 32 साल होगी, उनका फिगर 34-30-36 था। (जो उन्होंने मुझे बाद में बताया था) वो वॉक पर बहुत ही टाईट शॉर्ट्स और टी-शर्ट पहनकर जाती थी, तब उनकी गांड ऐसे मटकती थी कि बस अभी भाभी को पकड़कर उनकी गांड में अपना लंड पेल दूँ और उनके बूब्स को बस खा ही जाऊं। वो अक्सर मेरे घर के सामने वाले पार्क में ही वॉक किया करती थी और कभी-कभी उनके बड़े-बड़े उठे हुए बूब्स और मस्त बड़ी गांड देखकर मुझसे कंट्रोल नहीं होता था, तो में बालकनी में ही अपना लंड निकालकर न्यूज पेपर के पीछे मूठ मार लेता था। फिर धीरे-धीरे हमारी बातचीत शुरू हुई। अब मेरा जब भी भाभी से आमना सामना हो जाता तो में बड़े ही अदब से नमस्ते करता था।

फिर धीरे-धीरे मेरी भैया से अच्छी पटने लगी थी, वो अक्सर अपने बिज़नेस के सिलसिले में बाहर ही रहा करते थे, वो हफ्ते में एक या दो बार ही घर आते थे, लेकिन जब भी आते तो हम उम्र होने और पड़ोसी होने के नाते मेरे साथ ही बैठते थे। मैंने एक दो बार उन्हें अपने ही घर में ड्रिंक्स भी ऑफर की और ऐसे ही धीरे-धीरे मेरा भी उनके घर आना जाना बढ़ता गया। अब इस सब के चलते मुझे ये भी समझ आने लगा था कि भाभी भैया के घर से बाहर रहने के कारण प्यासी ही रह जाती है। फिर एक दिन भैया ने भाभी को गिफ्ट देने के लिए नया लैपटॉप ख़रीदा, वो जानते थे कि में भी कंप्यूटर्स की अच्छी जानकारी रखता हूँ तो उन्होंने मुझे उसमें विंडोस इनस्टॉल करने को बोला, तो मैंने विंडोस इनस्टॉल करके दे दिया। फिर कुछ दिन बीतने के बाद एक दिन अचानक से ही दोपहर के टाईम भाभी मेरे घर आई।

फिर मैंने दरवाजा ओपन किया तो में उन्हें देखता ही रह गया, वो एक कॉटन की केफ्री (जिसमें उनकी गांड और जांघों की गोलाइयाँ साफ दिख रही थी) और टी-शर्ट पहने थी। फिर मैंने उन्हें अंदर आने बोला, तो वो बोली कि मुझे आपसे कुछ काम है मुझे एक मैल चैक करना है। तो मैंने अपने ड्रॉइग रूम में पड़े लैपटॉप की तरफ इशारा किया और बोला कि कर लो। तो वो बोली कि मुझे अभी इतना यूज करना नहीं आता की खुद सब कुछ कर सकूँ। तो मैंने उन्हें बोला कि आप बैठो में अभी आता हूँ, फिर मैंने उन्हें उनका मैल चैक करने में मदद की। अब वो भी बहुत खुश लग रही थी, फिर वो जाते-जाते बोली कि राहुल अगर आपके पास टाईम हो तो कभी-कभी मुझे भी थोड़ा बहुत इंटरनेट यूज करना सीखा दिया करो। तो मैंने भी बिना देर किए बोला कि जब आपका मन करे आ जाया करो, तो वो स्माइल देकर चली गयी। फिर अगले दिन दोपहर को लगभग 3 बजे के आसपास भाभी मेरे घर आई और बोली कि अभी अगर फ्री हो तो सीखना स्टार्ट करे, तो मैंने तुरंत हाँ कर दी।

फिर हम ड्रॉइग रूम में जा कर लैपटॉप चालू करके इधर उधर की बातें करने लगे। अब में साथ-साथ उन्हें न्यू मैल आई.डी बनाना बता रहा था। फिर उन्होंने जैसे ही जी-मैल ओपन करने के लिए एंटर किया तो मेरे लैपटॉप में एक पोप अप विंडो में एक एडल्ट एड खुल गया। अब जैसे ही भाभी की निगाह उस पेज पर पड़ी तो उनका चेहरा शर्म से लाल हो गया। अब में भी थोड़ा सकपका गया था, फिर मैंने जल्दी से भाभी के बराबर में बैठे हुए ही अपना हाथ आगे बढ़ाकर उस पेज को बंद करने की कोशिश की, तो मेरा हाथ उनके लेफ्ट बूब्स से रगड़ गया। ओह माई गॉड में बता नहीं सकता कि वो कैसा अनुभव था? अब मेरे पूरे बदन में अजीब सी सनसनी होने लगी थी, क्योंकि जिसे मैंने आज तक सिर्फ़ अपने सपनो में ही चोदा था या उनकी याद में मुठ मारी थी, आज में उन्ही का बूब्स रियल में टच कर पाया था। लेकिन इस बात को भाभी ने इग्नोर किया और हम फिर से मैल अकाउंट बनाने में लग गये।

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अब भाभी के बूब्स से मेरा हाथ रगड़ जाने की वजह से मेरा लंड भी अब शॉर्ट्स में फनफनाने लगा था। अब भाभी भी लैपटॉप की स्क्रीन की बजाए अब ज़्यादा ध्यान मेरे लंड पर लगाए बैठी थी। अब मुझे भी एक शरारत सूझी तो में जानबूझ कर सोफे पर थोड़ा सा भाभी की तरफ सरकते हुए बोला कि यहाँ से माउस पेड पर हाथ नहीं जा रहा था और इस बहाने से मैंने अपनी कोहनी को उनके बूब्स के साईड में ऐसे टच करके रगड़ना चालू किया जैसे कि ग़लती से हो रहा हो। फिर थोड़ी ही देर में भाभी की साँसें तेज होने लगी, अब में भी नॉर्मल बर्ताव करते हुए बीच-बीच में उनके बूब्स पर मेरी कोहनी को थोड़ा ज़ोर से रगड़ देता। अब भाभी कुछ नहीं बोल रही थी, वो बस ज़ोर-ज़ोर से साँसें ले रही थी और में भी इस बहाने से उनके बड़े-बड़े और बिल्कुल रुई जैसे सॉफ्ट बूब्स पर अपनी कोहनी रगड़ रहा था।

फिर थोड़ी ही देर में मेरा लंड भी पजामा फाड़कर बाहर आने को बेताब होने लगा। फिर मैंने सोचा कि लोहा गर्म है तो क्यों ना हथोड़ा मार ही दिया जाए? तो मैंने अपना राईट हाथ फोल्ड करके अपने लेफ्ट हाथ के नीचे से ले जाकर धीरे से भाभी के निपल पर अपनी एक उंगली फैरनी स्टार्ट की। अब भाभी भी मेरी इस हरकत पर अपना नीचे वाला होंठ अपने दांतों में चबाने लगी थी। अब मेरी हिम्मत और बढ़ी तो मैंने धीरे-धीरे उनके बूब्स को अपने हाथ में पकड़ लिया और दबाने लगा। अब हम दोनों अभी भी एक दूसरे से नज़रें नहीं मिला रहे थे, बस लैपटॉप में देखे जा रहे थे। तभी मुझे मेरे लंड पर भाभी का हाथ महसूस हुआ तो मैंने जैसे ही नीचे देखा, तो भाभी भी मेरी तरफ देखकर धीरे से बोली कि क्या अब सिर्फ़ मसलोगे ही या कुछ आगे भी करोगे? अब इतना सुनते ही में भाभी पर टूट पड़ा और उन्हें सोफे पर लेटाकर उनकी टी-शर्ट ऊपर करके उनके बूब्स को ज़ोर-ज़ोर से रगड़ने लगा। अब भाभी भी ज़ोर-ज़ोर से मेरे लंड को आगे पीछे कर रही थी, तो शायद उन्हें मेरे पजामे की वजह से कुछ परेशानी हो रही थी, तो उन्होंने धीरे से मेरा पजामा नीचे सरका दिया और मेरे लंड से खेलने लगी।

अब मैंने भाभी का एक बूब्स अपने मुँह में लेकर उसका रस निचोड़ना चालू किया और दूसरे बूब्स को अपने हाथ से ही मसल रहा था। अब भाभी भी पागल हुए जा रही थी और बोल रही थी कि पीले सारा दूध, राहुल आज मुझे पूरा का पूरा खा जाओ और सिसकारियाँ भर रही थी ऑश राहुल इसस्सस्स आअहह फुक मी, अब कंट्रोल नहीं हो रहा है। लेकिन मैंने भी सोचा कि क्यों ना भाभी को थोड़ा और तड़पाया जाये? और भाभी को सोफे पर ही लेटाकर भाभी की केफ्री खींचकर अलग कर दी, उन्होंने नीचे पेंटी नहीं पहनी थी। फिर मैंने उनकी दोनों टाँगों को फैलाया और मैंने पहली बार अपनी प्यारी भाभी की चूत के दर्शन किए। दोस्तों भाभी की क्या मस्त, क्लीन शेव चूत थी? और उसमें से जो फाकें लटक रही थी में उन्हें मसलने लगा। अब भाभी की चूत ने पहले से ही काफ़ी सारा पानी छोड़ रखा था, लेकिन जैसे ही मैंने भाभी की चूत पर अपना मुँह रखा, तो वो बिन पानी की मछली की तरह तड़पने लगी और मेरा सिर अपनी जांघों में ज़ोर से दबाने लगी।

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अब पूरा कमरा भाभी की सिसकारियों से गूंज रहा था हाआअए सीईईईई ओह राहुल, अब सहन नहीं हो रहा है प्लीज़ अब अपना लंड डालो। तो फिर मैंने भाभी की चूत से अपना मुँह हटाया और बोला कि पहले थोड़ी देर मेरा लंड तो चूसो, तो वो मना करने लगी और बोली कि गंदा है मुझे उल्टी आ जायेगी। फिर मैंने भी ज़्यादा फोर्स ना करते हुए सोचा कि कोई बात नहीं और उनकी टाँगें फैलाकर अपना लंड उनकी चूत पर सेट करके हल्के-हल्के धक्के लगाने लगा। अब मेरा लंड आसानी से उनकी चूत में चला गया था, ओह कैसी फीलिंग थी? यारों में बता नहीं सकता, कोई भी पराई चूत मारने में कितना मज़ा आता है बताया नहीं जा सकता। अब भाभी भी ज़ोर-ज़ोर से अपने चुत्तड उठा-उठाकर चुदाई में साथ दे रही थी।

फिर मैंने भाभी का नीचे वाला होंठ ज़ोर-ज़ोर से चूसना और काटना चालू कर दिया। अब पूरा रूम थप्प- थप्प, फुच-फुच की आवाज़ों से गूंज रहा था। अब में भी लगातार जोरदार चुदाई मे लगा हुआ था आखिर मुझे आज वो ही चूत मिली हुई थी जिसकी मुझे कब से तमन्ना थी। फिर थोड़ी देर ऐसे ही चुदाई करने के बाद मैंने भाभी को कुतिया बनाकर पीछे से उनकी चूत में अपना लंड डाल दिया। फिर 10-15 मिनट के बाद जब मुझे लगा कि अब मेरा माल निकलने वाला है, तो मैंने भाभी को बोला कि आप ऊपर आ जाओ। तो वो मुझे सोफे पर लेटाकर मेरे लंड पर उछलने लगी, अब उनकी चूचीयाँ हवा में उछल रही थी। फिर थोड़ी सी देर में ही हम दोनों एक साथ झड़ गये, फिर भाभी जल्दी से वॉशरूम में गयी और कपड़े पहनकर अपने घर चली गयी ।।

धन्यवाद …

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