मुन्नी बदनाम हुई मर्द के लिए


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प्रेषक : मुन्नी

हैल्लो दोस्तों.. मेरा नाम मुन्नी है और में गोवा में रहती हूँ। मेरी उम्र 19 साल है और में एक मध्यमवर्गीय परिवार से हूँ। मेरा रंग गोरा है और मेरी हाईट 5.4 इंच है। में सुंदर दिखती हूँ और बहुत से लड़को ने मुझे कई बार प्रोपज किया है लेकिन मैंने उन सभी को रिजेक्ट कर दिया। मेरा एक बॉयफ्रेंड था लेकिन उसके साथ मैंने कभी भी सेक्स नहीं किया था.. क्योंकि उसे अपने पैसे का घमंड था। मेरी सील तोड़ने का श्रेय जाता है मेरे पड़ोस वाले एक लड़के को.. उसकी शादी को हुए 2 साल हो गये है और उसका एक साल का बेटा है। उसकी वाईफ ठीक ठाक दिखती है। वो एक बॉडी बिल्डर है और हेंडसम दिखता है।

में जहाँ पर काम करती हूँ वो मुझे पहले अपने घर से ताकता रहता था। फिर उसने मेरे घर के पास में ही आकर घर किराए पर ले लिया और अपनी फेमिली के साथ रहने लगा। फिर उसे देखने के लिए मैंने अपने बॉयफ्रेंड के साथ ब्रेकअप कर लिया.. यह कहकर कि वो मुझे धोखा देने की कोशिश कर रहा है.. लेकिन हक़ीकत में.. में अपने पड़ोसी की दीवानी हो गयी थी। मेरे पड़ोसी का नाम मिस्टर बबलू है। तो बबलू मेरे घर के पास में रहने लग गया। में उसकी वाईफ को सबके सामने दीदी बुलाती हूँ और बबलू को जीजू लेकिन अकेले में में उसे बबलू बुलाती हूँ। हमारी बहुत अच्छी दोस्ती हो गयी और में अक्सर बबलू के साथ घर से ऑफीस और ऑफीस से घर आने लगी। बबलू मुझे मेरे ऑफीस खत्म होने के बाद मुझे मेरे ऑफीस से घर तक छोड़ा करता है। उसने जगह जगह से मेरी हर पसंद को पता कर लिया था और वो मुझे ऑफीस के बाद कॉफी पिलाने ले जाता है और उसके बाद मुझे चोकलेट खरीद कर देता है। में उसे पसंद बहुत तो करती ही थी और धीरे धीरे उसकी दीवानी भी हो गयी।

तभी एक दिन उसने मुझे प्रपोज़ किया और में सकपका गयी.. क्योंकि वो शादीशुदा था। फिर उसने मुझे समझाया यह कह कर कि वो अपनी वाईफ को बहुत जल्द तलाक दे देगा और मुझसे शादी करेगा और उसका बेटा हमारे साथ रहेगा और फिर वो अपनी बीवी को महीने के महीने 10000/- रुपये भेजता रहेगा। मेरी खुशी का अब कोई ठिकाना नहीं था.. तभी मैंने उससे मंजूर कर लिया। हम फिर ऑफीस के बाद रोज कोफ़ी पीने जाते और कभी कभी ऑफीस से छुट्टी करके घूमने जाते थे। तभी एक दिन जब ऑफीस में छुट्टी थी। हमने अपने घर वालो से यह बात छुपाई और उनसे कहा कि हम ऑफीस जा रहे है। फिर उस दिन हम एक गार्डन में घूमने गये वो हमारे घर और ऑफीस से बहुत दूर था और हमने उस दिन पूरे दिन भर बाहर रहने का प्लान बनाया था। हम फिर एक रिसोर्ट घूमने गये.. रिसोर्ट बहुत बड़ा था। हम वहीं पर ही खाना खाने बैठे थे और जब में चम्मच उठाने को झुकी तो बबलू की नज़र मेरी शर्ट के अंदर गई और वो मेरे बूब्स देखने की कोशिश कर रहा था। फिर जब हम खाना खा रहे थे.. तो में देख रही थी कि वो मेरे बूब्स बार बार देखता जा रहा है और हमने एक दो बार किस भी किया.. लेकिन बस उससे ज़्यादा नहीं और सेक्स तो कभी नहीं। में उसके साथ अकेले नहीं रहना चाहती थी। मुझे वापस जल्दी जाना था लेकिन बाहर बहुत बारिश होने लगी तो हमें वहीं पर रुकना पड़ा। फिर खाना खाने के बाद वो रिसेप्शन पर रूम बुक करने गया। होटेल में सिर्फ़ एक ही रूम खाली था बाकी सब भरे हुए थे और मजबूरी में हमें एक ही रूम शेयर करना था।

फिर वापस आकर उसने मुझे रूम में चलने कहा तो में मान गयी और रूम के अंदर जाते ही उसने दरवाज़े पर हमे परेशान ना करे का लेबल लगाया और दरवाज़ा बंद कर दिया। तभी बबलू ने मुझसे कहा कि वो मुझे बिना कपड़ो के देखना चाहता है। तभी में घबरा गयी और मैंने मना कर दिया। यह सब इतनी जल्दी हुआ कि में कुछ बोल नहीं पाई उसका बर्ताव भूखे जानवर वाला हो गया था। में डर गयी और मेरा दिमाग़ काम नहीं कर रहा था। फिर मैंने पहले अपनी शर्ट उतारी और बबलू मुझे ब्रा में ही घूर रहा था और मेरे पेट में अजीब सी गुदगुदी सी मच गयी।

तभी मैंने कहा कि क्या देख रहे हो? उसने कहा कि कितने सुंदर बूब्स है तेरे.. में शरमा गयी और बोली कि ऐसे मत देखो.. में जा रही हूँ कहकर में अपनी शर्ट पहनने लगी और उठने लगी। तभी उसने मुझे आगे बड़कर पकड़ लिया और कहने लगा कि.. नहीं मत जाओ प्लीज़.. आज इतनी मुश्किल से यह मौका मिला है इसे मत गावाओं। मुझे दिखाओ अपना बदन और में खा नहीं जाऊंगा तुम्हे। फिर मैंने कहा कि मुझे शरम आ रही है। तभी वो बोला कि शरमाना छोड़ो और मुझे देखने दो प्लीज। में ऐसा कुछ नहीं करूँगा जो तुम्हे पसंद ना हो और जो होगा तुम्हारी मर्ज़ी से होगा। अब उसकी बातें मुझे ठीक लगी और मैंने सोचा कि अगर कुछ उल्टा सीधा हुआ तो में चिल्ला दूँगी।

फिर में थोड़ी शांत हो गयी मगर मेरे दिल की धड़कन बहुत तेज़ हो रही थी और मैंने अपना मन मजबूत किया और उसके सामने नंगी होने लगी। फिर मैंने अपनी पेंट उतारी में पहली बार किसी मर्द के सामने सिर्फ़ ब्रा में थी और बात आगे भी बढ़ने वाली थी.. लेकिन समझ में नहीं आ रहा था कि में क्या करूं? एक मन कर रहा था भाग जाऊँ तो दूसरा कर रहा था कि इसे एंजाय करूं और मज़े लूँ और आगे भी बढ़ना चाहती थी। आज जो हो जाए होने दो और में इसी उलझन में खड़ी थी। फिर बबलू मेरे पास आया और मेरे ब्रा के ऊपर से ही मेरे बूब्स दबाने और सहलाने लगा। बबलू ने फिर अपनी शर्ट उतारी और फिर बनियान भी उतारकर मुझे अपनी बाँहों में भर लिया। मेरी धड़कन और बढ़ गई और लगा कि अब इससे वापस जाना संभव नहीं है। वो मेरे होंठो को किस करने लगा बबलू मेरे होंठ सक कर रहा था। इस बीच उसने मेरी ब्रा का हुक पीछे से खोल दिया। आह्ह्ह्हह में चीख उठी और उसने मेरी ब्रा उतार फेंकी। मेरी दोनों चूची आज़ाद हो गयी और उसने चूची देखकर कहा कि कितनी मज़ेदार चूची है.. निप्पल तो देखो एकदम रसमलाई है.. मन करता है खा जाऊँ। तभी मैंने कहा कि तो खा लो ना.. रोका किसने है? में उसकी तारीफों के शब्द से निढाल हो रही थी और मेरी निप्पल खुशी से कड़क हो गई थी। अब में सिर्फ़ पेंटी में उसकी बाहों में थी और वो मेरे होंठ चूस रहा था और मेरे निप्पल को चूसने लगा लेकिन मेरे निप्पल को कोई मर्द पहली बार चूस रहा था और यह मैंने अपने पति के लिए रखे थे। इस्स्स्सस अह्ह्ह्ह बहुत अच्छा लग रहा था और धीरे धीरे मेरी आँखें बंद हो रही थी।

फिर उसने अपने मुहं से खींचकर मेरी जीभ को अपने मुहं में ले लिया और मेरी जीभ सक करने लगा। यह सब मेरे लिए कुछ नया था और में उस पल को एंजाय करती जा रही थी। वो फिर धीरे धीरे मेरे पूरे शरीर को किस करते करते नीचे आने लगा। फिर उसने मेरे निप्पल पर अपने होंठ रख दिए बबलू फिर से मेरे निप्पल को किस किए जा रहा था। फिर उसने मेरे निप्पल को किस करके अपने मुहं में भर लिया और उसे चूसने लगा फिर वो मेरे दूसरे बूब्स को अपने दोनों हाथों से दबा रहा था। तभी मेरी चूत में एक अजब सी हलचल मचने लगी मुझे बहुत गीलापन महसूस हो रहा था और में भगवान को याद करने लगी।

बीच में वो मेरे निप्पल को दांतो से काट लेता.. जिससे मुझे एक हल्का सा शॉट लगता। फिर बबलू मेरी नाभि में ऊँगली डाल रहा था और मेरी हालत बहुत खराब हो रही थी। जिस लड़की को किसी ने कभी किस नहीं किया था.. आज एक मर्द उसके निप्पल चूस रहा था। वो मेरी नाभि में ऊँगली रगड़ कर फिर उसे सूंघ रहा था। फिर वो मेरी नाभि के ऊपर किस करने लगा और किस करते करते बबलू ने मेरी नाभि में अपनी जीभ घुसा दी और अंदर तक टेस्ट किया। में मदहोश होती जा रही थी। बहुत मज़ा आ रहा था.. भगवान इस में कितना मज़ा है.. मेरा हाथ अपने आप उसकी पेंट के ऊपर से उसके लंड को छूने लगा.. उसका लंड एकदम कड़क था और उसके चहरे पर एक मुस्कान आ गई और वो सब करते करते उसने मेरी पेंटी दाँत से पकड़ी और उतार दी। पेंटी मेरे पानी से गीली हो रही थी.. में उसे रोक भी नहीं पाई। तभी मेरी गीली पेंटी देख कर वो ज़ोर से हंसा और बोला.. मेरी जान तुम भी आज पूरी तरह से तैयार हो। दोस्तों ये कहानी आप कामुकता डॉट कॉम पर पड़ रहे है।

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मेरी पेंटी उतारने के बाद बबलू ने मुझे बिस्तर पर लेटा दिया और फिर वो अपनी पेंट और अंडरवियर उतारने लगा.. जैसे ही मैंने उसका लंड देखा में डर गयी और बबलू से कहा कि यार यह तो बहुत बड़ा है यह मेरी चूत में कैसे जाएगा? यह मैंने क्या कह दिया वो हँसने लगा और बोला कि सब चला जाएगा तुम देखो तो.. पहले इसे हाथ में लो और मैंने उसके लंड को हाथ से छूकर देखा.. मेरी इस हरकत से बबलू को बहुत अच्छा लगा.. एक तो उसका लंड पहले से ही खड़ा था और यह पहली बार था कि मैंने लंड देखा था और जब मैंने बबलू का लंड पकड़ा था तो वो बहुत गरम था। एकदम गरम रोड की तरह।

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उसका लंड छोड़ने की इच्छा ही नहीं हो रही थी और मन कर रहा था कि बस पकड़े ही रहूँ। फिर बबलू ने मुझे पैर से किस करना शुरू किया और वो धीरे धीरे ऊपर बढ़ता रहा.. मेरी जाँघो तक, मेरी चूत के पास लेकिन चूत को किस नहीं करता और आगे बढ़ जाता है। में उसका सर पकड़कर अपनी चूत पर लगाती मानो जैसे मुझे उसके मुँह से ही चुदवाना है। फिर उसने अपना मुँह मेरी चूत पर लगाया और चाटने लगा लेकिन मुझे उसका लंड चाहिए था और मैंने उसका लंड पकड़ना चाहा.. लेकिन बबलू मुझे लेटाकर मेरे पास में इस तरह लेटा था कि उसका लंड मेरे मुहं के सामने था और उसका मुहं मेरी चूत में। तभी बबलू मेरी झांटो के ऊपर से मेरी चूत सहला रहा था। फिर उसने मेरी चूत के होंठ खोले और बड़े प्यार से मेरी चूत को चाट रहा था। अब उसका लंड मेरे मुहं के सामने नंगा था और उसमे से अजीब सी महक आ रही थी। तभी मैंने उसके लंड के टोपे को ही मुहं में लिया और डरते डरते उस्मह्ह्ह अपनी जीभ फैर रही थी और लंड का टेस्ट बहुत अच्छा लगा.. में और ज़ोर जोर से उसका लंड चूसने लगी।

तभी बबलू ने मेरी चूत चाटते चाटते उसमे उंगली डाली और में थोड़ी मचल गयी। मुझे थोड़ा सा दर्द हुआ क्योंकि यह मेरे लिए बिल्कुल नया था। बबलू ने अपना आधा लंड मेरे मुहं में घुसा दिया और मुझे चूसने में दिक्कत हो रही थी.. क्योंकि मुझे लंड चूसना नहीं आता था और यह पहली बार था। मुझे फिर उसका लंड चूसना पसंद आने लगा और में लंड को लोलीपोप समझ कर चूसने लगी.. क्या मस्त स्वाद था उसका और उधर वो बहुत शौक से मेरी कुँवारी चूत का जायका लिए जा रहा था और उसकी जीभ मेरी कुँवारी चूत में साँप की तरह घुस रही थी। फिर में चाह रही थी कि वो अपनी जीभ अंदर ही रखे। तभी वो उठकर खड़ा हो गया और मेरे नंगे बदन को निहारने लगा। फिर वो मेरे पैरो को फैलाकर बीच में बैठ गया और अपने लंड को मेरी चूत में हल्के से रगड़ रहा था।

तभी में सारी शरम को त्याग कर बोली कि अब मत तड़पाओ प्लीज मेरी चूत में इस लंड को डाल दो। तभी मैंने महसूस किया कि मेरी चूत से कुछ निकलने वाला है और मैंने कहा कि रूको मुझे बाथरूम जाना है लेकिन बबलू ने मुझे रोक लिया और मेरी चूत में मुँह डाल कर मेरी चूत चूसने लगा। में कंट्रोल नहीं कर पाई और अचानक मेरी चूत से पहली चुदाई का पानी निकला और बबलू झट से मेरी चूत से निकला माल पूरा पी गया और मेरी चूत फिर चाटने लगा। मेरे मुँह से आवाज़े निकल रही थी.. आहह उफ्फ्फ्फ़ लेकिन में चुदाई चाहती थी और मैंने कहा कि चूसने से आगे तो बढ़ो.. मेरी चूत क्या तेरे चूसने के लिए है। में मस्ती में ना जाने क्या क्या बोलती जा रही थी।

वो फिर से मेरे ऊपर आया और मेरे कानो में कहा कि मुन्नी पहली बार में थोड़ा दर्द होगा.. तू बर्दाश्त कर लेना मेरी जान और बाद में तुझे जन्नत का मज़ा मिलेगा। तभी मैंने हाँ में सर हिलाया.. लेकिन में बहुत डर गयी.. में चुप रही और डर के मारे मैंने अपनी आँख ज़ोर से बंद कर ली। फिर बबलू ने मेरे हाथ अपने हाथों में भर लिए और वो अपना लंड मेरी चूत के मुँह पर रगड़ने लगा। उसका लंड थोड़ा सा अंदर गया और उसी पोज़िशन में वो लंड रगड़ता रहा। तभी उसने मेरी चूत पर अपना लंड रगड़ते रगड़ते अचानक से एक जोरदार धक्का मारा.. लेकिन सिर्फ़ उसके लंड का टोपा ही मेरी चूत के अंदर गया था। मुझे इतना दर्द हुआ लेकिन में चीख नहीं सकती थी.. क्योंकि बबलू ने मेरे होंठो पर अपने होंठ जो ले जाकर रखे हुए थे। फिर में कसमसाई मगर चुदती रही बिना रुके.. फिर उसने अगला धक्का मारा और उसका लंड और अंदर घुस गया और उस धक्के ने मेरी चूत और फाड़ डाली। मेरी हालत बहुत खराब हो गयी.. मेरे आँसू निकलने लगे.. में रोने लगी.. में रो रो कर उसे धक्के देने लगी.. लेकिन वो लंड को और अंदर घुसेड़ता रहा। फिर में रो रो कर बबलू की पीठ पर मुक्का मारती जा रही थी.. लेकिन वो नहीं रुका और उसकी चोदने की ताक़त और बढ़ती गई.. उसकी गांड लगातार और ज़ोर ज़ोर से हिल रही थी।

तभी उसने मेरे आँसू की परवाह किए बगैर तीसरा धक्का लगाया और मुझे ऐसा लग रहा था कि जैसे मेरी चूत को गरम लोहा चीरता हुए अंदर घुस गया हो। फिर में रूठे जा रही थी.. लेकिन बबलू पर कोई असर नहीं हुआ। में गाली देने लगी.. साले बबलू मदारचोद छोड़ मुझे.. मुझे जाने दे.. इतना दर्द हो रहा है और तू मुझे चोदे जा रहा है। तभी मुझे रोते देख बबलू भी थोड़ा ढीला पड़ गया और मैंने आराम महसूस किया मगर ये आराम भी बनावटी था। फिर बबलू बोला कि ठीक है में नहीं चोदूंगा.. तू आराम से रह। तभी बबलू थोड़ी देर लंड अंदर ही रख कर मेरे ऊपर लेटा रहा और मेरे बूब्स दबा रहा था। मेरे कंधों पर किस कर रहा था.. मेरी गर्दन पर किस कर रहा था और मेरा दर्द कुछ कम होता रहा और बबलू का लंड भी थोड़ा सा सिकुड़ने लगा। फिर बबलू ने मेरे अंदर फिर से धीरे धीरे धक्के मारने शुरू किया। फिर वो धक्के मारते मारते मुझे लगातार किस करता जा रहा था और उसका लंड मुझे अपनी चूत में अंदर बाहर होता महसूस हो रहा था। मुझे अब उसका लंड अच्छा लगने लगा था और आँख बंद करके में उससे चुदवाना चाह रही थी और में भी गरम होती जा रही थी और मैंने अचानक उसका जवाब देना शुरू कर दिया।

तभी में अपने आप बोलने लगी कि बबलू डार्लिंग चोदो मुझे आआआ चोदो ना.. अपना लंड मेरी चूत में डाले रहो.. फाड़ दो मेरी चूत.. साली बहुत तड़पाती थी। तेरा इतना मोटा लंड है अह्ह्ह मुझे बबलू का चोदना इतना अच्छा लग रहा था कि जब बबलू मेरी चूत के अंदर धक्के मारता था तो में अपनी गांड को उठा उठाकर उसके हर एक धक्के का जवाब देने लगी। फिर बबलू ने मुझे कस करके अपनी बाहों में भरकर किस करने लगा और साथ ही साथ मेरी चूत में धक्के लगाए जा रहा था। फिर मुझे अपने शरीर में अकड़न महसूस होने लगी और मैंने बबलू को कसकर पकड़ लिया। तभी हमारे बदन के टकराने से आवाज़ निकल रही थी और बहुत सेक्सी सीन था वो ठप, ठप, ठप, ठप और वो माहौल पूरा चुदाई से भरा था। तभी बबलू भी बोलने लगा कि आहह कितना मज़ा आ रहा है कुँवारी चूत चोदने में आआआ मस्त चूची है तेरी और चूत भी मस्त.. आज तेरी चूत की सील टूट गई आज तेरी चूत फटकर भोसड़ा बन गई है और वो इसी तरह से मस्त चुदाई की बातें करता जा रहा था और में सुन सुनकर मदहोश हो रही थी और पता ही नहीं लगा कि कैसे मेरा दर्द गायब हो गया और में मज़े से चुदवा रही थी अह्ह्हफ्फ्फ़ मुझे लगा कि मेरी फिर से चूत में से कुछ निकलने वाला है। में अकड़ गयी मेरा पानी निकलने वाला था। तभी मैंने बबलू को ज़ोर से पकड़ लिया और पानी छोड़ दिया। में चिल्लाई बबलू में गयी और मेरी चूत का फव्वारा निकल गया और में कुछ देर में ढीली पड़ गयी.. लेकिन बबलू अभी भी लगा रहा और उसने रुकने का नाम ही नहीं लिया और उसके धक्के और तेज तेज होते जा रहे थे.. लेकिन कुछ टाईम में ही उसका बदन भी अकड़ने लगा और वो चिल्ला कर मेरी चूत में जोर से अपना लंड दबा रहा था और फिर मैंने महसूस किया कि मेरी चूत में कुछ भर रहा है.. गरम गरम और गाढ़ा गाढ़ा और जब मेरी चूत भर रही थी मुझे बहुत ही अच्छा एहसास होने लगा।

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फिर बबलू मेरे अंदर ही झड़ गया और मेरे ऊपर ही थोड़ी देर लेटा रहा तभी कुछ देर बाद उसने मेरी चूत के अंदर से अपना लंड बाहर निकाला और मुझे चूस कर साफ करने को कहा। तभी उसने अपना लंड बाहर निकाला तो में देखकर डर गयी.. उसमें खून लगा था। मैंने बेडशीट पर अपना खून देखा तो में और डर गई कि यह क्या हो गया? में अब क्या करूँगी? लेकिन बबलू ने कहा कि यह सभी नॉर्मल बात है और पहली बार हर लड़की के साथ ऐसा ही होता है। हे भगवान अब में कुँवारी नहीं रही.. फिर में अपनी चूत चुदवा कर बहुत खुश थी। फिर वो मुझे अपने साथ बाथरूम में ले गया और फिर हम दोनों साथ में नहाने लगे.. नहाते वक़्त वो मेरे बदन के साथ शौक से खेल रहा था और किस करता जा रहा था। तभी थोड़ी देर नहाने के बाद फिर हमने अपने कपड़े पहने।

फिर हमने चेक आउट किया और बबलू ने एक रूम बॉय को 100 रु दिए और बेडशीट को जला देने को कहा। फिर हम वहाँ पर से निकल गये.. लेकिन मुझसे ठीक से चला नहीं जा रहा था और बबलू मुझे अपनी बाईक पर केमिस्ट के पास ले गया। फिर वहाँ से उसने मुझे 2 दवाइयाँ दिलाई.. ताकि में गर्भवती ना हो जाऊँ और दूसरी मेरे दर्द के लिए। फिर हम शाम तक घूमे, आइस्क्रीम खाई, मौज मस्ती की और शाम को वापस अपने घर आ गये। अब मैंने अपनी नौकरी बदल कर बबलू के ऑफीस में ही नई नौकरी कर ली है और बबलू मेरा पड़ोसी भी है। अब हम अक्सर चुदाई करते है ।।

धन्यवाद …

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