मम्मी ने गैर मर्द से चुदवाया


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प्रेषक : विक्की

हेलो फ्रेंड्स में विक्की आज में आप सभी को एक कहानी सुनाने जा रहा हूँ। इस कहानी मे होली के अवसर पर मेरी मम्मी की चुदाई हुई। अब में आपको आगे की कहानी बताता हूँ। दोस्तों में 12th क्लास में पढ़ता हूँ और मेरी उम्र 18 साल की है। मेरे मम्मी-पापा मुंबई में रहते है। मेरी मम्मी दिखने में बहुत ही अच्छी है, मतलब बहुत ही सेक्सी है। उनकी उम्र 38 साल की है। उनका फिगर 32-29-36 है और बहुत ही अच्छा है। अब में आपको अपनी स्टोरी पर ले जाता हूँ। दोस्तों आज से दो महीने पहले की बात है। होली का समय था। मेरी दादी ने कॉल किया और उन्होंने कहा कि इस बार तुम सब होली पर गाँव आ जाओ तभी मम्मी ने कहा ठीक है। फिर जब पापा शाम को घर आए तो मम्मी ने पापा से कहा कि दादी का कॉल आया था। उन्होंने हम सब को गाँव बुलाया है।

पापा ने कहा कि वो नहीं जा पाएँगे, उनको ऑफीस के काम से बाहर जाना है। तभी मम्मी गुस्सा हो गई, उन्होंने कहा ठीक है आप मना कर दो फोन पर, में मना नहीं कर सकती। पापा ने कहा ठीक है में मना कर दूँगा। फिर उन्होंने दादी को कॉल किया और कहा कि हम लोग गाँव नहीं आ सकते। तभी दादी ने कहा कि ठीक है, कम से कम मेरी बहू और मेरे पोते को तो तुम गाँव भेज दो, पापा ने कहा ठीक है। फिर पापा ने मम्मी से कहा कि तुम विक्की को लेकर गाँव चली जाओ, में नहीं जा सकता। मम्मी ने कहा ठीक है। फिर पापा ने हमारा ट्रेन से रिज़र्वेशन करा दिया और हम गाँव पहुंच गये। वहाँ पर हमारा स्वागत हुआ हम दिन के 11 बजे गाँव पहुंच गये थे। फिर हम घर पर पहुंच कर खाना खाकर सो गये।

फिर शाम को जब हम उठे तो देखा कि हमारे घर के बगल में एक चाचा रहते है, उनका नाम सीबू था। वो आए हुए थे। में और मम्मी बैठ कर चाचा से बात करने लगे, बातों बातों में चाचा ने मम्मी से कहा कि भाभी बिलकुल सही समय पर आई हो, मम्मी ने कहा क्या मतलब? सीबू चाचा ने कहा देवर के लिए इससे अच्छी बात क्या हो सकती है कि उसकी भाभी होली पर आई हो, इस बार तो मज़ा आएगा। ये कह कर चाचा हँसने लगे और मेरी मम्मी भी उन्हे देख कर थोड़ा सा शरमा गई।

अब अगले दिन होली थी। सुबह से ही सारे लोग होली खेलने मिलने जुलने आये हुए थे। दिन के 12 बज चुके थे, मम्मी ने मुझसे कहा कि में नहाने जा रही हूँ। तभी मैंने कहा कि ठीक है। मम्मी आप नहा कर आ जाईये फिर मैं नहा लूँगा, मम्मी ने कहा ठीक है। ये कहकर मेरी मम्मी नहाने चली गई। में बाहर खेलने लगा, तभी मैंने देखा कि सीबू चाचा आए हुए है। फिर उन्होंने मुझसे पूछा कि बेटा तुम्हारी मम्मी कहाँ है? मैंने कहा कि मम्मी बाथरूम मे नहाने चली गई है। चाचा ने कहा कि ठीक है। हमारे गाँव में जो हमारा बाथरूम था, वो थोड़ी सी दूरी पर था और उसमें गेट भी कोई खास नहीं था। उसमें से सब कुछ साफ़ दिखता था। घर की सभी औरतें उसी बाथरूम मे जाकर नहाती थी। फिर चाचा मम्मी को रंग लगाने के लिए बाथरूम की तरफ चले गये। में भी उनके पीछे पीछे चला गया, तभी मैंने देखा कि मेरी मम्मी वहाँ पर नहा रही थी और अपने शरीर पर साबुन लगा रही थी।

फिर चाचा वहीँ पर चुपके से खड़े होकर मम्मी को नहाते हुए देखा रहे थे। मम्मी को ये बात पता नहीं थी। वो आराम से साबुन अपने शरीर पर लगा रही थी। स्थिति कुछ ऐसी थी कि मम्मी ने अपने पेटीकोट का नाडा अपने बूब्स से बाँध रखा था और उनका पूरा शरीर पानी से भीगा हुआ था और उन्होंने अपने पेटीकोट को अपनी जांघ तक उठा रखा था और वो बस साबुन मल रही थी। तभी मैंने चाचा की तरफ देखा। वो मम्मी को बहुत ही गंदी नज़र से देख रहे थे। फिर चाचा बाथरूम मे अंदर गये। उन्होंने मम्मी को पीछे से पकड़ लिया, चाचा के अचानक इस तरह से पकड़ने से मम्मी घबरा गई। चाचा ने कहा भाभी मुझसे रंग नहीं लगवाओगी क्या? मम्मी ने कहा मैंने रंग साफ कर लिया है, अब नहीं चाचा ने कहा, ऐसे कैसे भाभी आज तो होली है, बिना रंग के कैसे मज़ा आएगा। उन्होंने मेरी मम्मी को कसकर अपनी बांहों मे जकड़ रखा था और मम्मी के मना करने के बावजूद वो मम्मी को रंग लगाने लगे। चाचा मम्मी के पेटीकोट को धीरे धीरे ऊपर करते हुए, उनकी जांघों मे रंग लगा रहे थे।

तभी मम्मी ने कहा कि प्लीज बस करो अब तो रंग लगा लिया ना, अब रहने दो, फिर चाचा हँसने लगे। उन्होंने कहा अभी कहाँ भाभी अभी तो में आपके पूरे शरीर में रंग लगाऊंगा, ये कहते हुए चाचा ने मेरी मम्मी के पेटीकोट को पूरा पेट तक उठा दिया। शायद चाचा को भी ये पता नहीं था कि मेरी मम्मी ने पेंटी नहीं पहनी हुई है। अब चाचा ने मेरी मम्मी के पेटीकोट को उनके बूब्स तक चड़ा दिया और मम्मी के पूरे शरीर में रंग लगाने लगे। उनका हाथ मेरी मम्मी की गोरी गोरी जांघो को छू रहा था। मम्मी अपने हाथों से अपनी चूत छुपाने की कोशिश कर रही थी, लेकिन चाचा के सामने उनकी एक ना चली।

फिर मम्मी ने कहा नहीं नहीं प्लीज इसमें मत लगाओ, चाचा ने कहा अरे कुछ नहीं होगा भाभी लगाने दो प्लीज़, ये कह कर चाचा ने मम्मी का हाथ हटा दिया। मैंने देखा कि मम्मी की चूत पर पूरे झांट के बाल थे। तभी चाचा ने अपने हाथ में रंग भरा और अपना हाथ अंदर ले जाते हुए मेरी मम्मी की चूत में रगड़ने लगे। पहले कुछ देर तक मेरी मम्मी नॉर्मल मज़ाक में सब लेती रही क्योंकि गाँव में ऐसा ही होता है। लेकिन मैंने देखा कि मम्मी को अब बहुत मज़ा आने लगा। चाचा ने सोचा अच्छा मौका है और ये सोचकर उन्होंने अपनी दो उंगली मेरी मम्मी की चूत में घुसा दी, फिर मम्मी ने कहा अब रहने दो, चाचा ने पूछा कि क्या मज़ा नहीं आ रहा? मम्मी ने सर हिलाते हुए कहा हाँ फिर क्या था चाचा को हरी झंडी मिल गई। फिर चाचा अपनी उंगली मेरी मम्मी की चूत के अंदर बाहर करने लगे। कभी अपना हाथ बाहर निकाल कर मेरी मम्मी के पेट पर रगड़ते तो कभी पीछे ले जाकर उनकी गांड को मसलते। फिर कुछ देर तक ऐसा ही चलता रहा। थोड़ी देर बाद किसी के आने की आहट आई, तभी चाचा वहाँ से हट गये और वहाँ से चले गये। दोस्तों ये कहानी आप कामुकता डॉट कॉम पर पड़ रहे है।

मम्मी फिर से नहाने लगी फिर में भी वहाँ से चला गया। थोड़ी देर बाद मम्मी नहाकर घर में आ गई। मैंने मम्मी की तरफ देखा एक अजीब सी ख़ुशी देखी उनकी आँखो में, फिर हमने साथ मे बैठकर खाना खाया और में सोने चला गया, फिर शाम को जब मेरी आँखे खुली तो मैंने मम्मी की आवाज़ सुनी जो पास के कमरे से आ रही थी। तभी में ये देखने चला गया कि मम्मी किससे बात कर रही है। जब मैंने देखा तो पाया कि सीबू चाचा बैठे हुए है और वो मम्मी से कह रहे थे कि भाभी आज मेरे यहाँ पर चलो प्लीज, मम्मी उनसे मना कर रही थी और कहने लगी कि नहीं माँजी घर में है नहीं हो पाएगा। मुझे कुछ समझ मे नहीं आ रहा था। फिर चाचा ने कहा कि आप टेंशन मत लो में काकी (मेरी दादी) को में मना लूँगा, ये कहकर चाचा दादी के पास चले गये।

फिर उन्होंने कहा कि काकी में भाभी को गाँव घूमाने ले जा रहा हूँ, आपको कोई दिक्कत तो नहीं। दादी को चाचा की नियत के बारे में पता नहीं था इसलिए उन्होंने भी हाँ कर दी। फिर थोड़ी देर बाद मम्मी रेडी हो गई, उन्होंने मुझसे कहा कि बेटा में चाचा जी के साथ घूमने जा रही हूँ, तुम दादी के पास ही रहना। में समझ गया कि आज ये लोग क्या करेंगे फिर मेरी मम्मी चाचा के साथ चली गई। में भी थोड़ी देर बाद दादी से खेलने का बहाना करके चाचा के घर पर चला गया, तभी मैंने देखा कि चाचा के घर का गेट बंद था, इसलिए में पीछे की खिड़की पर चला गया और वहाँ से अंदर की तरफ देखने लगा। मम्मी और चाचा बेड पर बैठे हुए थे और चाचा ने मेरी मम्मी को अपनी बाँहों में ले रखा था और दोनों लिप किस कर रहे थे। चाचा मेरी मम्मी के गुलाबी होठों को चूस रहे थे। कभी ऊपर की लिप को चूसते तो कभी नीचे के लिप को, मम्मी ने अपने हाथ पीछे ले जाकर चाचा की गर्दन को पकड़ रखा था और उनका पूरा पूरा साथ दे रही थी उनके होंठ चूसने की आवाज़ मेरे कानो तक आ रही थी।

अब मम्मी ने अपना हाथ चाचा की पेंट में डाल दिया, चाचा ने कहा अरे भाभी रुक जाओ इतनी जल्दी क्या है? ये कहकर चाचा ने अपनी पेंट खोलकर अपनी जांघो तक कर दी, चाचा का लंड पूरा मुरझाया हुआ था और बिल्कुल काला था। मेरी मम्मी ने अपने हाथों से चाचा के लंड को सहलाया, उधर चाचा मेरी मम्मी को चूमे जा रहे थे। थोड़ी देर बाद चाचा ने मेरी मम्मी का ब्लाउज का हुक खोल दिया और मेरी मम्मी के गोल गोल बूब्स को ब्रा के ऊपर से चूमने लगे। चाचा कभी मेरी मम्मी की छाती को चूमते, तो कभी मेरी मम्मी के बूब्स पर किस कर रहे थे। अब चाचा ने अपने सारे कपड़े खोल लिए। उन्होंने मेरी मम्मी को अपने बेड पर लिटा दिया। चाचा मेरी मम्मी के पेरों के पास आकर बैठ गये, उन्होंने मेरी मम्मी के एक पैर को उठा लिया और उनके तलवे पर किस करने लगे।

मम्मी आआह्ह्ह की सिसकारीयां लेने लगी। अब मम्मी को बहुत मज़ा आ रहा था। चाचा मेरी मम्मी के तलवे को जीभ से चाट रहे थे। अब उन्होंने ने मेरी मम्मी की दोनों पायल खोल दी और पास में रख दी। अब धीरे धीरे चाचा ने मेरी मम्मी की साड़ी को उनकी जांघ तक उठा दिया और मेरी मम्मी के घुटने के नीचे वाले हिस्से को चूमने लगे, थोड़ी देर तक ऐसा ही चलता रहा। उधर मम्मी ने बेडशीट पकड़ रखा था और अपने होंठो को अपने दांतों से दबाए हुई थी। चाचा मम्मी की जाँघो को अपनी जीभ से चाट रहे थे, चूम रहे थे। अब चाचा मेरी मम्मी के ऊपर लेट गये उन्होंने मेरी मम्मी के होंठो पर किस किया और पूछा भाभी मज़ा आ रहा है क्या? मम्मी ने कुछ भी नहीं कहा, चाचा ने पूछा क्या हुआ? मम्मी ने कहा कि में ये सब नहीं कर सकती।

तभी चाचा ने पूछा क्यों क्या हो गया? आपका मन था तभी तो आप मेरे साथ आई है। मम्मी ने कहा नहीं में शादीशुदा हूँ, हमारा एक बेटा है में ये नहीं कर सकती। चाचा ने कहा इसमें कुछ बुरा नहीं है। भाभी क्या शादीशुदा ओरतें सेक्स नहीं करती। प्लीज़ भाभी मान जाओ ना और वैसे भी ये बात सिर्फ़ मेरे और आपके बीच में रहेगी और चाचा मम्मी को किस करने लगे। उन्होंने मेरी मम्मी की ब्रा खोल दी। अब मेरी मम्मी की नंगे बूब्स चाचा के सीने से टकराने लगे, चाचा ने अपने दोनों हाथों से मम्मी के बूब्स को पकड़ लिया और दबाने लगे। मम्मी आआआअ सस्सस्स करने लगी। अब चाचा ने मम्मी के एक बूब्स को अपने हाथ से दबाना स्टार्ट किया और दूसरे को चूसने लगे। चाचा के होंठ निप्पल पर पड़ते ही मम्मी तिलमिला उठी और उनकी पीठ पूरी ऊपर हो गई। चाचा ने अपना हाथ पीछे ले जाते हुए मेरी मम्मी की पीठ को कसकर जकड़ लिया और मेरी मम्मी के निप्पल को चूसने लगे।

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वो कभी मम्मी की छाती को चूमते, तो कभी उनके निप्पल अपने होंठो से चूसते। मम्मी की रसभरी सिसकारियां मेरे कानो में सुनाई दे रही थी। तभी चाचा ने तकिया मेरी मम्मी की पीठ पर टिका दिया, जिससे मम्मी के बूब्स और तन गये। उधर चाचा ने मेरी मम्मी की साड़ी उठाकर कमर तक कर दी थी। अब चाचा ने मम्मी के पूरे बदन को चूमना स्टार्ट किया। वो मेरी मम्मी के पेट को चूमने लगे और अपना एक हाथ मेरी मम्मी की चूत के इधर उधर फेरने लगे। अब मेरी मम्मी ये सब करवाने पर मजबूर थी। फिर चाचा ने अपनी दोनों हथेली मे मेरी मम्मी के बूब्स को पकड़ रखा था और मसल रहे थे और वो मेरी मम्मी के बदन को चूम रहे थे। फिर चाचा ने मेरी मम्मी की साड़ी को खोल दिया और उन्होंने मेरी मम्मी का ब्लाउज भी निकाल दिया, अब मेरी मम्मी सिर्फ़ पेटीकोट में थी।

तभी चाचा ने मम्मी के पेटीकोट को कमर तक उठा दिया। चाचा ने अभी तक मेरी मम्मी की पेंटी नहीं निकाली थी। मैंने देखा कि मम्मी ने अपने हाथों से अपनी चूत को छुपाने की कोशिश कर रही थी। तभी चाचा ने प्यार से मम्मी का हाथ हटा दिया और अपने हाथों से मेरी मम्मी की दोनों टांगो को फैला दिया और मेरी मम्मी की चूत को पेंटी के ऊपर से देखने लगे। अब धीरे धीरे चाचा मेरी मम्मी की जांघो को चूमने लगे चूमते चूमते चाचा का मुहं मेरी मम्मी की चूत के पास पहुंच गया। वो मेरी मम्मी की चूत को पेंटी के ऊपर से ही चूमने लगे, चाचा का स्पर्श होते ही मम्मी ने ज़ोर की सिसकारियां लेनी शुरू कर दी। चाचा कभी मेरी मम्मी की पेंटी को सूंघते, तो कभी उनकी चूत को चूमते, अब चाचा से रहा नहीं गया और उन्होंने मेरी मम्मी की पेंटी को सरका दिया और मेरी मम्मी की नंगी चूत को देखने लगे।

तभी मैंने देखा कि मेरी मम्मी की चूत पर बहुत सारे झांट के बाल थे। चाचा ने अपना एक हाथ मेरी मम्मी की चूत पर रख दिया और अपने हाथ से सहलाने लगे। मम्मी धीरे धीरे सिसकारियां लेने लगी। फिर चाचा ने मेरी मम्मी की पेंटी निकाल दी और मेरी मम्मी की पेटी को सूंघने लगे और अपनी दो उंगली उन्होंने मेरी मम्मी की चूत में घुसा दी और धीरे धीरे अंदर बाहर करने लगे, मम्मी अह्ह्ह्ह मर गई इस तरह की आवाजे निकालने लगी उईईईईईई ओफफफफ कर रही थी। चाचा धीरे धीरे उंगली करते रहे, फिर उन्होंने मेरी मम्मी से पूछा भाभी मज़ा तो आ रहा है ना मम्मी ने कहा बहुत मज़ा आ रहा है प्लीज़ और करो आआआअ प्लीज़ उईईईई चाचा उसी तरह धीरे धीरे अपनी उंगली मेरी मम्मी की चूत के अंदर बाहर करते रहे अब चाचा ने मेरी मम्मी की चूत को अपनी जीभ से चाटना शुरू कर दिया मम्मी की सिसकारिया तेज़ होने लगी चाचा ने अपनी दो उंगली से मेरी मम्मी की चूत को फैला दिया था।

मैंने देखा कि मेरी मम्मी की चूत बिल्कुल लाल थी। चाचा ने मम्मी से पूछा देख भाभी मेरा लगाया हुआ लाल रंग अभी तक आपकी चूत में लगा हुआ है। मम्मी ये बात सुनकर शरमा गई। चाचा ने कहा कोई बात नहीं आज में इसे चाटकर साफ कर दूँगा और ये कहकर वो मेरी मम्मी की चूत को चाटने लगे। मम्मी खुशी से पागल हो रही थी। फिर चाचा ने मेरी मम्मी के पेटीकोट का नाड़ा खोल दिया और पेटीकोट को मम्मी के बदन से अलग कर दिया। फिर मेरी मम्मी बिल्कुल नंगी चाचा के सामने थी, तभी चाचा गये और बगल की अलमारी से कंडोम निकालकर ले आए। उन्होंने मेरी मम्मी से कहा आप पहना दो, तभी मम्मी ने कंडोम का पेकेट फाड़ा। मैंने देखा कि चाचा का लंड मुरझा गया था। चाचा वहीं बेड के बगल में खड़े हो गये और मेरी मम्मी बेड पर बैठी थी। तभी मेरी मम्मी ने अपने हाथों में चाचा का लंड पकड़ा और सहलाने लगी। थोड़ी देर बाद मैंने देखा कि चाचा का लंड खड़ा होने लगा, अब चाचा का लंड तनकर खड़ा हो गया था। मेरी मम्मी ने अपने हाथों से चाचा के लंड पर कंडोम लगाया। फिर मम्मी लेट गई और चाचा सामने आकर अपने घुटनो के बल बैठ गये, उन्होंने मेरी मम्मी की चूत पर थोड़ा थूक लगाया। फिर एक हाथ से अपना लंड पकड़ कर मेरी मम्मी की चूत पर रगड़ने लगे। मेरी मम्मी चाचा की तरफ देख रही थी। तभी उन्होंने चाचा से कहा दर्द होगा धीरे से करना, चाचा ने कहा आप चिंता मत करो भाभी में बहुत प्यार से करूँगा, ये कहकर चाचा ने एक झटका दिया।

चाचा के लंड का टोपा मेरी मम्मी की चूत के अंदर चला गया। चाचा ने मेरी मम्मी के दोनों घुटनो को पकड़ा और फिर से एक और झटका दिया, मेरी मम्मी के मुहं से चीख निकल पड़ी। तभी मैंने देखा कि चाचा का लंड मेरी मम्मी की चूत में समा गया था। मम्मी को बहुत दर्द हो रहा था, चाचा थोड़ी देर तक ऐसे रुके रहे फिर जब मेरी मम्मी का दर्द कम हुआ तो चाचा ने अपनी कमर हिलाना शुरू किया। उनका आधा लंड मेरी मम्मी की चूत के अंदर बाहर हो रहा था। मेरी मम्मी ने अपने हाथों को पीछे करके बेड को पकड़ रखा था और आआआआअ सस्स्स्सस्स औहह ओफफफफफफफ्फ़ औहह ओईईईईईईई माआआ माआअ ओफफफफफफफफफ्फ़ आआआआअ सस्स्स्सस्स कर रही थी। मम्मी की ऐसी आवाज़ो से चाचा की कामुकता बढ़ती जा रही थी। मेरी मम्मी ने अपने दोनों हाथों से अपनी चूत को फैला लिया था और चूतड़ उठा उठा कर चाचा का साथ दे रही थी। चाचा धीरे धीरे मेरी मम्मी की चुदाई कर रहे थे। उन्होंने मेरी मम्मी से कहा वाह भाभी मज़ा आ गया, तेरी चूत में बहुत मज़ा है इधर चाचा के हर झटके पर मेरी मम्मी के बूब्स आगे पीछे हो रहे थे। अब चाचा ने मेरी मम्मी के घुटनों पर से हाथ हटा लिया ओर आगे की तरफ हो गये और अपना हाथ बेड पर रख दिया। फिर से एक और ज़ोर का झटका दिया चाचा का पूरा लंड मेरी मम्मी की चूत में समा गया। अब चाचा फिर से अपना लंड मेरी मम्मी की चूत के अंदर बाहर करने लगे। मम्मी धीरे धीरे पीछे होने लगी और चाचा चुदाई करते हुए आगे की तरफ बड़ने लगे। फिर चाचा मेरी मम्मी के ऊपर लेट गये और मेरी मम्मी को जकड़ लिया और मेरी मम्मी को चोदने लगे। मेरी मम्मी ने अपनी दोनों टाँगे फैला कर चाचा की पीठ पर रख रखी थी और सिसकारियां ले रही थी।

ऐसे ही चाचा कुछ देर तक मेरी मम्मी की चुदाई करते रहे, फिर चाचा ने एक ज़ोर का झटका दिया और मेरी मम्मी के ऊपर लेट गये में समझ गया चाचा का वीर्य निकल गया है। मेरी मम्मी और चाचा दोनों ही पसीने से लथपत हो चुके थे। चाचा मेरी मम्मी के होंठो पर किस कर रहे थे और अपनी कमर धीरे धीरे हिला रहे थे। फिर चाचा मेरी मम्मी के ऊपर से हट गये। मम्मी वहीं बेड पर लेटी हुई थी। मैंने देखा कि चाचा ने अपना कंडोम निकाला और खिड़की से बाहर फेंक दिया। फिर चाचा अपना लंड धोने बाथरूम मे चले गये।

तभी में जाकर कंडोम देखने लगा। मैंने अपनी लाइफ में पहली बार कॉंडम देखा था। उस कॉंडम में चाचा का वीर्य भरा हुआ था, तभी में फिर खिड़की के पास जाकर देखने लगा। चाचा अभी तक बाथरूम से आए नहीं थे। मैंने देखा कि मेरी मम्मी बहुत खुश नज़र आ रही थी और तेज़ तेज़ साँसे ले रही थी। तभी चाचा बाथरूम से आ गये और आकर मेरी मम्मी के पास मे लेट गये। चाचा ने मेरी मम्मी के होंठो पर किस किया और मेरी मम्मी से पूछा क्यों भाभी मज़ा आया ना? मम्मी ने कहा हाँ। चाचा ने मेरी मम्मी से पूछा क्या भाई साहाब (मेरे पापा) आपकी ऐसी ही चुदाई करते है? तो मम्मी ने कहा नहीं वो तो ऑफीस के काम में बिज़ी रहते है। आज बहुत दिनो बाद ऐसा मज़ा आया है। फिर मेरी मम्मी चाचा से चिपक गई और दोनों एक दूसरे को किस करने लगे। मम्मी ने चाचा से कहा बहुत देर हो गई है, अब मुझे घर जाना चाहिए नहीं तो सब ग़लत समझेंगे। चाचा ने कहा अरे भाभी थोड़ी देर और रुक जाओ ना कोई कुछ भी नहीं समझेगा। आपकी सास (मेरी दादी) तो वैसे भी बूड़ी हो गई है, वो क्या समझेंगी और बच्चा आपका बेटा उसे क्या पता की उसकी माँ मेरा बिस्तर गरम कर रही है। ये कहकर चाचा मेरी मम्मी को किस करने लगे और अपना हाथ पीछे ले जाते हुए मेरी मम्मी कि चूतड़ को मसलने लगे।

मेरी मम्मी अब चाचा की बॉडी पर लेट गई और चाचा अपने हाथों से मेरी मम्मी की चूतड़ को मसल रहे थे और मेरी मम्मी कि गांड के छेद में अपनी उंगली डाल रहे थे। अब चाचा ने मेरी मम्मी को उल्टा लिटा दिया, जिससे मेरी मम्मी की नंगी गांड चाचा के सामने थी। चाचा ने मम्मी के नीचे तकिया लगा दिया। जिससे मेरी मम्मी की चूतड़ और ऊपर उठ गये, चाचा अब धीरे धीरे मेरी मम्मी के चूतड़ पर किस करने लगे। में समझ गया कि अब चाचा मेरी मम्मी की गांड मारेंगे। उन्होंने अपने दोनों हाथों से मेरी मम्मी की गांड के छेद को फैला दिया और मेरी मम्मी की गांड चाटने लगे। चाचा कभी मेरी मम्मी की गांड को सूंघ रहे थे, तो कभी जीभ लगा कर चाट रहे थे, अब चाचा मेरी मम्मी के ऊपर चड़ गये।

तभी मैंने देखा कि चाचा ने अपने लंड पर तेल लगाया और अपना लंड मेरी मम्मी की गांड के छेद पर रख दिया था, उन्होंने एक झटका दिया मम्मी की चीख निकल पड़ी चाचा के लंड का टोपा मेरी मम्मी की गांड के छेद मे चला गया था। चाचा बार बार कोशिश कर रहे थे, लेकिन पूरा लंड अंदर नहीं जा पा रहा था। मेरी मम्मी ने अपना हाथ पीछे की तरफ करते हुए अपनी गांड को फैला दिया जिससे उनकी गांड का छेद थोड़ा और खुल गया। अब चाचा ने पूरी ताक़त लगाकर झटका दिया, उनका पूरा लंड मेरी मम्मी की गांड के अंदर चला गया और चाचा धीरे धीरे अपना लंड अंदर बाहर करने लगे। चाचा मेरी मम्मी के ऊपर लेटे हुए थे और उन्होंने अपने दोनों हाथ मेरी मम्मी के कंधे पर रख रखे थे और जोर जोर के धक्के दे रहे थे। मम्मी आहह मर गई ओफफफफफ कर रही थी। पूरे कमरे में थप थप पुचक पुक्क्कककक की आवाज़ आ रही थी।

चाचा के हर झटके पर मेरी मम्मी के चूतड़ हिले जा रहे थे। मेरी मम्मी ने चाचा से कहा धीरे धीरे करो प्लीज चाचा ने मेरी मम्मी से कहा भाभी जब मैंने तुझे देखा था, तभी मैंने सोच लिया था मुझे तेरी गांड मारनी है, चाहे कुछ हो जाए आज में तेरी गांड फाड़ दूँगा। ये कहकर चाचा मेरी मम्मी की गांड और जोर से मारने लगे और मम्मी ज़ोर ज़ोर से सिसकारियाँ लेने लगी। पूरे रूम में पलंग हिलने की आवाज़ गूँज रही थी। करीबन 20 मिनट तक ऐसे ही चाचा ने मेरी मम्मी की गांड मारी फिर चाचा ने अपना वीर्य मेरी मम्मी की गांड के छेद में ही गिरा दिया। कुछ देर तक चाचा ऐसे ही मेरी मम्मी के ऊपर लेटे रहे और मेरी मम्मी की पीठ चाटते रहे। मेरी मम्मी और चाचा पसीने से लतपत हो गये थे। फिर मम्मी उठी वो बाथरूम में गई और उन्होंने वहाँ पर शावर लिया और आकर अपने कपड़े पहन लिए चाचा नंगे ही बेड पर लेटे हुए थे। वो मेरी मम्मी को देख रहे थे। मम्मी ने चाचा से कहा कि प्लीज मुझे घर छोड़ दो, चाचा ने मम्मी से कहा भाभी आज रात मेरे पास ही रुक जाओ में पूरी रात तुझे चोदूंगा। मम्मी ने कहा अब नहीं बहुत हो गया, फिर चाचा ने कहा ठीक है में आपको छोड़ देता हूँ, लेकिन जब तक आप यहाँ पर हो में आपको रोज़ चोदूंगा।

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मम्मी ने चाचा की तरफ देखा और दोनों हँसने लगे, मम्मी ने कहा ठीक है में दस दिन और हूँ यहाँ पर आपका जब दिल चाहे बुला लेना। फिर दोनों एक दूसरे को किस करने लगे, फिर में वहाँ से घर चला गया। दादी ने पूछा कहाँ गये थे? तभी मैंने उनसे कह दिया खेलने गया था। फिर आधे घंटे बाद चाचा मेरी मम्मी को लेकर आ गये। दादी ने पूछा क्या घुमा दिया अपनी भाभी को? चाचा ने कहा हाँ काकी आज भाभी को बहुत घुमाया, ये कहकर चाचा और मेरी मम्मी दोनों मुस्कुराने लगे। फिर अगले दस दिन तक सीबू चाचा ने मेरी मम्मी को रोज़ चोदा, कभी अपने घर ले जाकर कभी खेत में ले जाकर उन्होंने मेरी मम्मी को चोद चोद कर पूरी रंडी बना दिया। लेकिन मेरी मम्मी भी इस चुदाई का पूरा मजा लेती थी। उन्होंने मेरी मम्मी की चूत, गांड, मुहं, एसी कोई भी जगह नहीं छोड़ी जहाँ पर उन्होंने मेरी मम्मी की चुदाई ना की हो और में चुपके से रोज़ मम्मी की चुदाई देखता रहा। मैंने मम्मी से इस बारे में कभी जिक्र नहीं किया कि मुझे सब पता है।

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धन्यवाद …

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