मेरी सेक्सी टीचर नशीली चूत


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प्रेषक : अभिषेक …

हैल्लो दोस्तों, मेरा नाम अभिषेक है, में लखनऊ का रहने वाला हूँ और मेरी उम्र 22 साल है। में दिखने में सुंदर गोरा रंग मेरा गठीला बदन होने की वजह से में बहुत अच्छा आकर्षक लगता हूँ इसलिए हर एक लड़की मुझे देखकर मेरी दीवानी हो जाती है। अब में असली बात पर आता हूँ, दोस्तों लंड जिसकी कल्पना सबसे ज़्यादा कुंवारी लड़कियाँ करती है और हर रात उसके रंगीन सपने देखकर अपनी चूत में उंगली को डालकर उसकी खुजली शांत को करने की कोशिश करती है। दोस्तों ऐसा बिल्कुल भी नहीं है कि सिर्फ़ कुँवारी कन्या ही किसी दमदार लंड को तरसती है, एक जवान शादीशुदा औरत भी अच्छे तगड़े, मोटे लंड को पाने के लिए हमेशा बेकरार रहती है। खैर यह तो हुई हमारी सामान्य ज्ञान की बात है और अब ज़रा गुप्त ज्ञान की बातें भी हो जाए। दोस्तों यह बात उन दिनों की है जब में 12th बोर्ड की परीक्षा देकर फ्री हुआ था और मेरा रिज़ल्ट आने में अभी पूरे तीन महीने का समय बचा हुआ था। यह वो समय होता है जब हर एक लड़का अपने आकार में बड़े हुए लंड के प्रति आकर्षित रहता है और साथ साथ बढ़ती हुई काली काली घुंघराली झांटे उसका मन जल्दी से किसी नशीली चूत का रसपान करने को प्रेरित करती है। दोस्तों मैंने अपने उस फ्री समय को सही इस्तेमाल करने के लिए एक इंग्लीश स्पीकिंग कोर्स के लिए जाना शुरू कर दिया और उन्ही दिनों हमारे घर से थोड़ी दूर पर एक नई इंग्लीश कोचिंग का सेंटर खुला था जहाँ में अपना भी दाखिला लेने के लिए पहुंच गया।

दोस्तों मेरे लंड की किस्मत बहुत अच्छी थी क्योंकि वहाँ जाते ही मेरा सामना एक बड़ी ही कमसिन, मदमस्त, जवान, सुंदर औरत से हुआ और मुझे पता चला कि वो वहां की एक मेडम है जो बच्चो को पढ़ाने का काम करती है। दोस्तों उसके कामुक गोरे गोरे तनबदन को देखते ही मेरा तो लंड अंडरवियर में ही उचकने लगा था और उसकी खुशबूदार सांसो ने मेरे मन में जोश का तूफान पैदा कर दिया था। मेरा मन तो उसको तुरंत ही उसी जगह पकड़कर उसकी चुदाई करने को कर रहा था, लेकिन में क्या करता? क्योंकि में वहां तो पढ़ने गया था इसलिए में अपने मन को जैसे तैसे समझाकर शांत करने लगा, लेकिन सच कहूँ तो दोस्तों मेरा दिल उस मेडम की सुंदरता को पहली नजर में देखकर ही उसके लिए पूरी तरह से पागल हो चुका था। मेरे मन में उसके लिए ना जाने कैसे कैसे गलत विचार उसके साथ बहुत कुछ करने की इच्छा होने लगी थी। फिर मुझसे पूछने बात करने के समय मुझे दाखिला देते हुए वो भी मुझे आँखों ही आँखों में तौल रही थी। दोस्तों वो 27 साल की भरे हुए गोरे बदन वाली बहुत सुंदर आकर्षक मेडम थी, जो किसी भी बूढ़े लंड को भी जोश मस्ती से भरकर खड़ा होने पर मजबूर कर दे और वो शादीशुदा होने के बाद भी कुंवारी लड़कियों को अपने सामने फीका कर दे, वो इतनी सुंदर थी। दोस्तों उसके दोनों बूब्स आकार में बहुत बड़े उभरे हुए, एकदम गोलमटोल थे और उसके गद्देदार मोटे कूल्हे उभार लिए संगमरमर की मूरत से तराशे हुए हिलते हुए ऐसे लगते थे जैसे वो कह रहे हो कि आजा मेरे राजा आकर तू इस गांड को बजा दे। उसके गोरे जिस्म का हर एक अंग मुझे अपनी तरफ खींच रहा था।

फिर मैंने अपना दाखिला वहां पर लेकर उससे पूछा कि मुझे कब और कितनी बजे से आना है मेडम? वो मुस्कुराकर मुझसे कहने लगी कि कल सुबह सात बजे आप आ जाना। फिर मैंने दोबारा पूछा कि मुझे अपने साथ में क्या लेकर आना है? वो बोली कि तुम बस एक कॉपी अपने साथ में लेकर आ जाना। फिर में उनसे पूरी बात करके अपने घर वापस आ गया, लेकिन अब भी मेरी आखों के सामने वो द्रश्य ही बार बार नजर आ रहे थे। में उसी के बारे में सोच सोचकर पूरी रात बस सुबह होने का इंतज़ार में सो ना सका और उस पूरी रात भर मेडम की हसीन मुस्कान और उनका वो सुंदर चेहरा बार बार मेरे सामने आ रहा था और में बार बार उनके ब्लाउज में क़ैद उन दोनों कबूतरों के बारे में सोच रहा था जो बाहर आने के लिए बहुत बेताब नजर आ रहे थे, में सोच रहा था कि उनकी चूत कैसी होगी? गुलाबी चूत पर काले रंग का एक छोटा सा सिंघाड़ा होगा, उनकी चूत का लहसुन मोटा होगा या पतला? वो बहुत मुलायम भी होगा और उनकी चूत के रस मीठा या नमकीन होगा, उनकी चूत के रस में कितना नशा होगा? उनकी चूत की फांके गुलाब की पंखुड़ियों को फैला दूँ तो क्या होगा? चूत के अंदर का वो द्रश्य दिखने में कैसा होगा? दोस्तों यह सभी कल्पना उसके विचार मुझे और भी मदहोश कर रहे थे, जिसकी वजह से मेरा लंड फूलकर लंबा और मोटा हो गया था और मेरी अंडरवियर में मेरे लंड ने गीला पानी छोड़ दिया।

फिर अगले दिन सुबह जल्दी से में उठकर नहाकर अपनी इंग्लिश कोचिंग में ठीक समय से पहुंच गया, मैंने जाकर देखा कि उस क्लास में और भी कुछ हसीन गोरी लड़कियाँ थी और कुछ सुंदर शादीशुदा औरतें भी थी जो दिखने में बड़े अमीर घर की थी, जो अपनी धाक जमाने के लिए इंग्लीश सीखना चाह रही थी जिसकी वजह से अपनी बैठक की रंगीनियों का मज़ा पूरी तरह से उठाया जा सके। अब में पीछे की एक सीट पर जाकर बैठ गया, थोड़ी देर के बाद मेरी वो मेडम वहां पर आ गई और शुप्रभात के साथ उनकी नजर मेरे ऊपर पड़ते ही वो मुझसे बोली कि तुम यहाँ पर आगे आकर बैठो। फिर उनके कहने पर में आगे की सीट पर जाकर बैठ गया और उसके बाद वो सभी को अपना परिचय देते हुए बोली मेरा नाम निशा है। अब आप लोग भी अपना अपना परिचय दीजिए और फिर हम सभी ने अपना अपना परिचय दे दिया और फिर उसके बाद वो पीछे दीवार पर लगे बोर्ड की तरफ मुड़कर उसके ऊपर कुछ लिखने लगी और जैसे ही वो मुड़ी तो उनकी गांड ठीक मेरे सामने थी और अब मन एक बार फिर से उनकी गांड मारने के विचारों में खो गया। दोस्तों में क्या करूँ? यह मेरी 18 साल की जवानी कहाँ शांत रहती? वो बहुत सुंदर हल्के रंग की साड़ी पहने हुए थी और हल्के गुलाबी रंग के ब्लाउज के नीचे उनकी काली रंग की ब्रा साफ नजर आ रही थी और साड़ी के पल्लू से उनके बूब्स की गोलाईयां मेरे मुहं में पानी ला रही थी। एक अजीब सा लालच मेरे मन में जाग रहा था, दोनों बूब्स के बीच की गहरी लाइन ब्रा के ऊपर से लंड को मस्ती दिला रही थी। फिर वो वापस पीछे मुड़कर हम सभी को बोलने लगी और ग्रामर के बारे में समझाने लगी और वो अब मेरे एकदम पास चली आई। उस समय में बैठा हुआ था और वो मेरे इतने पास आकर खड़ी थी कि उनका खुला पेट वाला हिस्सा मेरे मुहं के एकदम पास आ चुका था।

अब में उनकी गोल गोल गहरी नाभि को देखकर खुश था उसकी महक मेरी नाक के नथुनों में एक मीठा जहर घोल रही थी, जिसकी वजह से में धीरे धीरे मदहोश होने लगा था। फिर तभी अचानक ही उनका पेन हाथ से निकलकर मेरे सामने आकर टपक गया, जिसको लेने के लिए वो जैसे ही नीचे झुकी तो उनके दोनों बूब्स मेरे मुहं के सामने आकर पसर गये। उस द्रश्य को देखकर मेरी हालत पहले से भी ज्यादा खराब होने लगी थी और उस दिन हमारी क्लास ऐसे ही चलती रही, लेकिन मेरा मन दिमाग तो बस उनके विचारों में खोया हुआ था और मेरा ध्यान बिल्कुल भी पढ़ाई में नहीं था, जिसके चलते में पागल हो चुका था। फिर जब हमारी पढ़ाई खत्म हुई और जब हम सभी उठकर जाने लगे और तभी मेडम ने मुझे रुकने के लिए कहा और में अपनी कुर्सी पर बैठा ही रहा। फिर सभी के बाहर चले जाने के बाद मेडम मेरे पास आ गई और वो मुझसे कहने लगी कि तुम बड़े ही अच्छे लग रहे हो। फिर मैंने उनको अपनी तारीफ के लिए धन्यवाद कहा, अब वो मुझसे पूछने लगी कि तुम अभी क्या करते हो? मैंने कहा कि अभी मैंने 12th के पेपर दिये है इसलिए अब में एकदम फ्री हूँ। अब मेडम शरारती हंसी हंसती हुई बोली अच्छा इसका मतलब यह है कि अब तुम बालिग हो चुके हो? मैंने झट से कहा कि हाँ मेडम में बालिग हो चुका हूँ। फिर वो कुछ देर सोचकर मुझसे कहने लगी कि तुम्हारा केला तो बहुत बड़ा है। दोस्तों में उनके कहने का मतलब को ठीक तरह से समझ तो गया था कि मेडम मेरे लंड की तरफ इशारा कर रही है, लेकिन में फिर भी उनके सामने बिल्कुल अंजान बना रहा।

अब मैंने उनसे पूछा कि आप मुझसे किस केले की बात कर रही है? वो मुस्कुराते हुए कहने लगी कि अरे यार अब इतने भी तुम अंजान मत बनो मेरे राजा, तुम्हारा लंड जो बहुत बड़ा है और जो इस पेंट के नीचे से फूलकर बाहर हवा खाने को बहुत बेताब नजर आ रहा है। शायद इसने अभी तक किसी चूत का स्वाद नहीं चखा? दोस्तों में असल में अपनी क्लास जल्दी पहुंचने के चक्कर में नहाकर पेंट के नीचे अंडरवियर को पहनना भूल ही गया था, जिसकी वजह से मेरा मोटा लंड तनकर पेंट में अपनी छाप छोड़ रहा था। अब अपनी मेडम को एकदम फ्री खुलकर बातें करते हुए देखकर मैंने भी कह दिया कि हाँ मेडम इसने अभी तक किसी की चूत का स्वाद नहीं चखा है। फिर वो बोली कि शनिवार की सुबह 6 बजे क्या तुम मेरे घर आ सकते हो, में अपने घर में अकेली ही रहती हूँ, क्योंकि मेरे पति इस शहर से बाहर रहकर नौकरी करते है और हमारे अभी तक कोई औलाद नहीं है, तुम मेरे घर आ जाओगे तो मुझे तुम्हारा साथ मिल जायेगा।

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फिर मैंने तुरंत ही हाँ भरकर कह दिया कि में आ जाऊंगा, वैसे में बहुत अच्छी तरह से जानता था कि मेडम को मेरा साथ क्यों चाहिए था? उनको अपनी चूत की खुजली मेरे लंड से मिटानी थी और फिर जब पति बाहर रहकर गांड मरवाये तो पत्नी दिन भर जब बच्चों को पढ़ाकर अपने घर लौटकर आए तो उसको अपनी चूत की चुदाई करने को कोई लंड तो चाहिए ना? इसमे कुछ गलत नहीं है क्योंकि हर एक औरत की और हर एक कुंवारी लड़की की चूत में गरमी चढ़ती है और उसकी चूत की आग को सिर्फ़ और सिर्फ़ एक लंड ही शांत कर सकता है। फिर अपने घर आने के बाद में पूरी रात अपनी मेडम का विचार उनके बारे में सोचकर सो ना सका और मैंने पहले से ही सुबह पांच बजे का घड़ी में अलार्म लगा दिया था, मेरी मम्मी भी सुबह अलार्म की आवाज़ से उठ गई और वो मुझे उठकर तैयार होता देख मुझसे पूछने लगी कि तू इतनी सुबह उठकर कहाँ जा रहा है? मैंने उनसे कहा कि आज से हर सुबह में अब जल्दी उठकर घूमने निकल जाऊंगा और फिर वहीं से में अपनी क्लास जाकर पढ़ाई करके वापस आ जाऊंगा। दोस्तों अब में उनसे क्या कहता कि में अपनी प्यासी मेडम की चूत की खुजली को शांत करने जा रहा हूँ? दोस्तों ये कहानी आप कामुकता डॉट कॉम पर पड़ रहे है।

फिर सुबह घर से चाय पीकर में तुरंत एक टेक्सी करके अपनी मेडम के घर के पते पर एक कॉपी को अपने साथ लेकर पहुंच गया। फिर मैंने दरवाजे की घंटी बजाई तो थोड़ी देर के बाद मेडम काले रंग की मेक्सी पहने मुस्कुराकर दरवाज़ा खोलती हुए मुझे नजर आई। मैंने देखा कि उनकी मेक्सी के ऊपर वाले दो बटन खुले हुए थे और मेक्सी के अंदर ब्रा नहीं पहने होने की वजह से मुझे उनके दोनों बूब्स साफ नजर आ रहे थे और उन्होंने नीचे पेटिकोट भी नहीं पहना था, क्योंकि उन्होंने मेरा हाथ कमर पर रखकर मुझे अंदर बुलाया जिसकी वजह से उनका बदन मेरे हाथ में आ गया था। दोस्तों सामने से खुली हुई छाती मेरे दिल की धड़कनो को बढ़ा रहा था, वो मुस्कुराकर बोली कि अब ऐसे ही तुम खड़े खड़े मेरी सूरत को देखते रहोगे या मुझे अपनी बाहों में उठाकर बिस्तर पर भी ले चलोगे? देखो मेरी जवानी कब से तुम्हारे इस मोटे लंड की आग में जल रही है? क्या अब तुम मेरी जवानी के मज़े नहीं लेना चाहोगे?

फिर मैंने तुरंत ही अपनी कॉपी को पास पड़ी टेबल पर फेंक दिया और मेडम को झट से अपनी बाहों में उठा लिया, उनके खुले बाल मेरे हाथ पर थे और उन्होंने मेरे होंठो को अपने होंठो में कैद कर लिया। दोस्तों उनका बेडरूम सामने ही था। मौसम थोड़ा गरम था इसलिए में उनको पहले बाथरूम में ले आया जहाँ उनको थोड़ा सा नहलाकर मालिश करके गरम कर सकूँ। अब मैंने मेडम को बाथरूम में खड़ा कर दिया और फिर उनकी काली मेक्सी के ऊपर से उनका पूरा बदन दबाया सहलाया और उसके बाद उनके दोनों हाथों को पूरा ऊपर करके मैंने उनकी काली मेक्सी को धीरे से उतार दिया। अब वो पूरी नंगी होकर मेरे सामने खड़ी थी। उनका वो पूरा दूधिया बदन, गोरे मोटे बूब्स और हल्के काले घुंघराले बालों के बीच गुलाबी मुलायम चूत को देखकर में अपने होश खो बैठा। फिर मैंने पानी को चालू कर दिया और पानी ऊपर से नीचे आते हुए उनके हर एक अंग को भिगो रहा था, मैंने उनको चूमना, चाटना शुरू कर दिया, होंठो से होंठो पर उसके बाद गाल सभी जगह पर में अपनी जीभ को फेरकर मज़ा देता गया और उसके दोनों बूब्स को बार बार दबाकर निप्पल को मुहं में भर लिया और तब मुझे महसूस हुआ कि उनके गुलाबी रंग कके निप्पल मोटे और बहुत मुलायम भी थे।

फिर कुछ देर बाद अपनी जीभ को बाहर निकालकर गोल गोल निप्पल पर घुमाकर चाटकर मज़े किए। वो जोश में आकर आहहह्ह्ह ऊउह्ह्ह्ह सस्सईईईई मुझे बड़ा मज़ा आ गया हाँ तुम और चूसो मेरे निप्पल कब से यह तरस रहे थे कि कोई इनको ऐसे प्यार दे और इनका रस पिये। फिर मैंने अब कसकर बूब्स को दबाना शुरू किया। मैंने दबा दबाकर निप्पल को एकदम लाल कर दिया और दोनों निप्पल को अपनी जीभ से सहलाया और खुजली की। फिर कुछ देर बाद मेडम भी अपनी जीभ को बाहर निकालकर मेरी जीभ के साथ मस्ती करने के बाद मुझसे अपने निप्पल को चूसने के मज़े लेने लगी थी और अब उनके निप्पल जोश में आकर आकार में बड़े हो गये थे और फिर में कुछ देर बाद नीचे उनकी नाभि पर आ गया था। अब मुझे उनकी एकदम गोल नाभि की गहराई नापने में बस दो मिनट लगे, इससे पहले दोनों बूब्स की मसाज और निप्पल का चूसना दस मिनट तक उनको प्यार के नशे में डुबाता चला गया और इस क्रिया से मेरा लंड भी नागराज की तरह फुंकारता हुआ खड़ा होकर सात इंच का हो चुका था, जिस पर अब मेडम का हाथ पहुंच गया था।

फिर मैंने धीरे से मेडम को बाथरूम के फर्श पर लेटा दिया, जिसकी वजह से उनकी चूत खुलकर मेरे सामने आ सके और में उनकी गुलाबी पंखुड़ियों वाली चूत में अपनी उंगली को डाल सकूँ और में धीरे से उनकी चूत का रस पीने के इरादे से नीचे गया। फिर मैंने देखा कि उनकी झांटो पर पड़ी पानी की बूँदो ने मुझे उनके झांटों पर चाँदी की तरह चमकती बूँदो को पीने की चाह जगा दी और इसलिए में उनकी काली मुलायम घुँगराली झांटों को अपने होंठो में कैद करके अपने होंठो से पीने लगा। फिर उनकी जब झांटे खिंचती तो वो आहह्ह्ह ऊऊऊऊऊहह आइईईई करने लगी थी जिससे मेरा लंड और कड़क हो जाता। फिर उनकी झांटों से पानी को साफ करने के बाद मैंने दोनों उंगलियों से उनकी चूत की गहराई को नापना शुरू किया, मतलब मैंने अपनी दोनों उंगलियाँ चूत के अंदर गुलाबी छेद में गहराई तक डाल दिया।

फिर जीभ पास लाकर उनकी चूत का सिंघाड़ा अपने मुहं में क़ैद कर लिया, करीब दस मिनट तक उनकी नशीली चूत का रस अपनी जीभ से पीता रहा और में उनकी गरम चूत में अपनी जीभ चलता रहा। में ऊपर से नीचे फिर नीचे से ऊपर और फिर जीभ को खड़ा करके अंदर बाहर भी करने लगा था। दोस्तों अपनी जीभ से चूत का रस चाटते समय मैंने अपनी एक उंगली को नीचे सुंदर आकर्षक दिख रही गांड के छेद पर लगा दिया। फिर यह सब काम करने के बाद उनको जोश में लाकर चुदाई के लिए तैयार करके मैंने अपना अंडरवियर उतार दिया। अब मेडम मेरे लंबे मोटे लंड को चकित होकर देखते ही बाथरूम के फर्श से उठकर मेरे ऊपर मेरे मुहं की तरफ अपनी चूत को करके 69 पोज़िशन में लेट गयी और उन्होंने मेरा लंड तुरंत ही अपने मुहं में डाल लिया।

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अब में मेडम की चूत में अपनी जीभ को डालकर उनका रस चाट रहा था और मेडम को मेरे लंड का गुलाबी टोपा बहुत मज़ा दे रहा था, इसलिए वो छोटे बच्चों की तरह उसको बड़े मज़े से चूस रही थी, क्योंकि उनको लंड बहुत दिनों के बाद नसीब हुआ था और उनको मेरा तना हुआ लंड बहुत मज़ा दे रहा था। अब वो दस मिनट तक मेरा लंड अपने होंठो में कैद करके उनको चूसकर मज़े लेती रही और उन्होंने अपनी जीभ से मेरे लंड के टोपे को चाट चाटकर लाल कर दिया था और मेरा लंड जोश मस्ती में आकर तनकर लोहे के सरिये की तरह पूरा खड़ा हो गया था, लेकिन मेडम उसका पीछा छोड़ ही नहीं रही थी। अब मैंने उनको बोला कि मेडम में अब झड़ने वाला हूँ फिर उन्होंने मुझे खड़ा कर दिया और वो खुद भी मेरे ऊपर से हट गई उसके बाद वो मुझसे बोली हाँ अब आओ मेरे राजा तुम मेरी जीभ पर गिरा दो। अब वो मेरे लंड के पास आकर अपने मुहं को पूरा खोलकर अपनी जीभ को बाहर निकालकर नीचे बैठ गई थी।

फिर मैंने अपने हाथ से हिलाकर जल्दी से अपना सारा गरम गरम वीर्य उनकी जीभ पर निकाल दिया, जिसके बाद उन्होंने अपनी दोनों आखों को बंद करके जन्नत का मज़ा लिया। वो मेरे गरम वीर्य की आखरी बूँद तक लंड को पागलों की तरह चाटती ही रही और उन्होंने मेरा लंड नहीं छोड़ा और जब उनका मन भर गया तो उन्होंने अपनी मर्जी से लंड को छोड़ दिया। फिर उन्होंने अपना मुहं पानी से धोया और उसके बाद वो मुझसे बोली अब तुम मुझे बेडरूम में लेकर चलो मेरे राजा, मुझसे अब बिल्कुल भी रहा नहीं जाता, यह सब करके तुमने मेरे अंदर की आग को पहले से ज्यादा भड़का दिया है। दोस्तों वैसे तो में भी उनकी चूत की चुदाई करने को बड़ा बेताब था इसलिए मैंने तुरंत ही उनको अपनी गोद में उठा लिया और कमरे में लाकर झट से बेड पर एकदम सीधा लेटा दिया, उसके बाद उनके दोनों गोरे पैरों को पूरा फैला दिया जिसकी वजह से उनकी गुलाबी चूत मेरे सामने पूरी खुल जाए और मुझे उनकी चूत को चाटने में थोड़ी भी कठिनाई ना हो। फिर वो एक बार फिर से मेरे लंड को अपने हाथ से पकड़कर आगे पीछे करके हिलाने लगी और उनके यह काम करने से मेरा लंड एक बार फिर से तनकर खड़ा होने लगा।

फिर मैंने उनकी नशीली चूत को धीरे धीरे चाटकर अपने थूक से बिल्कुल चिकना किया। वैसे भी पहले से उनकी चूत मक्खन सी मुलायम और मलमल सी चिकनी थी इसलिए अब वो गरम गरम मलाई से भरपूर चूत मुझे अब जन्नत सी लग रही थी, जिसकी चुदाई करना अब बहुत ज़रूरी हो गया था। फिर मेरे लपलप करके उनकी चूत को चाटने से वो अपने मुहं से सीईईईइ ऊओह्ह्ह अहह्ह्ह कर रही थी और वो मुझसे बोली मेरे राजा जल्दी से तुम अब अपना यह सात इंच का शेर मेरी प्यार की गुफा में डाल दो और तुम जल्दी से मेरी इस चूत की खुजली को शांत कर दो, में इसकी वजह से बहुत तड़प रही हूँ। फिर मैंने जल्दी से उनकी गोरी गदराई हुई जाँघो को दूर दूर किया और उसके बाद अपने लंड को एक हाथ से पकड़कर अपना टोपा चूत के मुहं पर टिकाकर चूत के दाने को सहलाया और उसके बाद धीरे से ज़ोर लगाया जिसकी वजह से मेरा लंड फच की आवाज़ के साथ उनकी गरम गरम चूत के अंदर तक समा गया। अब वो अपनी दोनों आँखों को बंद करके मस्त होने लगी थी और में उससे बोला कि निशा तुम बहुत गरम, मस्त माल हो, वो मेरे मुहं से यह बात सुनकर मुस्कुराने लगी। फिर मैंने अपने लंड को अंदर बाहर करने की गति को बढ़ा दिया, जिसकी वजह से अब मेरा लंड जल्दी जल्दी उस चूत के अंदर, बाहर आने जाने लगा और मेरा लंड पूरे जोश के साथ अब अंदर बाहर आ जा रहा था और मेरे हर एक धक्के से निशा के बूब्स भी हिल रहे थे और मैंने लपककर दोनों बूब्स को अपने हाथ में भरकर उनको मसलना, दबाना भी शुरू कर दिया था और उनके निप्पल को भी अपने होंठो में भरकर में चूसने लगा। दोस्तों निशा की उस जवानी को लूटकर करीब दस मिनट तक गरम मेरा लंड लोहे सा उसकी चूत को फाड़ता रहा और लगातार तेज धक्को से उसकी चुदाई के में मज़े लेता रहा। फिर मैंने उसकी चूत से अपने लंड को बाहर निकाला और अपना गरम वीर्य उसकी चूत के ऊपर और नाभि के छेद में डाल दिया। दोस्तों मैंने देखा कि अब वो एकदम शांत हो चुकी थी और मेरा वो पहला प्यार करीब एक घंटे में खत्म हो गया था। मुझे सेक्स की इस क्लास बहुत मस्त मज़ा मिला था वो बड़ा ही अनोखा मज़ा था, जिसको में किसी भी शब्दों में लिखकर नहीं बता सकता ।।

धन्यवाद …

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