मेरी डार्लिंग डॉली आंटी


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प्रेषक : केशव …

हैल्लो दोस्तों, मेरा नाम केशव है। में 6 फुट लम्बा हेंडसम लड़का हूँ। में अभी ग्रेजुयशन फाइनल ईयर में हूँ और में हैदराबाद का रहने वाला हूँ। में लंबा एक्सरसाईज़ योगा की वजह से हूँ और मेरा लंड हेल्थी और फिट है। में 6 फुट का हूँ और मेरा लंड 7 इंच का है। मेरी कहानी काफ़ी मस्त है ताकि आपको हर पल का मजा और आनंद मिले। आप विश्वास रखिए इन्जॉय करोगे या करोगी। यह स्टोरी मेरी डॉली आंटी की है जो मेरे घर के पास में ही रहती है। डॉली आंटी की एक बड़ी शादीशुदा बेटी थी और एक मुझसे छोटा बेटा था, वो 35-26-36 वाली बड़ी कामुक और गांड मटकाकर चलने में नंबर वन थी। उसकी चाल से ही मौहल्ले के लंड खड़े होकर सलामी ठोकते थे, जो उसे एक बार देख ले तो उसका हाथ पेंट के टेंट को छुपाने लग जाए। डॉली को यह पता था, लेकिन उसे तो इसमें और भी मजा आता था।

यह बात पिछले 2 साल पहले की है, जब मेरे पापा ने मुझे डॉली आंटी के घर आम के पत्ते लाने भेजा था। उनके घर के बाहर आम का पेड़ था और डॉली और उनकी फेमिली हमारी फेमिली से क्लोज़ थी, वो मेरी माँ के और उनके पति मेरे पिता के काफ़ी क्लोज़ फ्रेंड्स थे। फिर जब में डॉली आंटी के घर गया तो उनके घर की बेल बजाई। अब बारिश ना होने की वजह से बाहर बहुत तेज धूप तेज़ थी, फिर डॉली आंटी ने दरवाज़ा खोला, वो साड़ी पहने थी और थोड़ी पसीने में भी। फिर वो बोली कि हाँ केशव आओ अंदर, तो मैंने उनसे कहा कि पापा ने आम के पत्ते लेने भेजा है। तो उन्होंने एक स्माइल दी और कहा कि हाँ ज़रूर वहाँ स्टूल रखी है चढ़ जाओ और ले लो जो लेने आए हो।

अब यह सुनकर में एकदम शॉक हो गया और फिर मेरी नज़र उनके गले की गली पर पड़ी, उनका ब्लाउज काफ़ी नीचे था और उनके बूब्स बाहर जैसे मुझे दबाने की भीख माँग रहे थे। अब उनके गले से पसीने की बूँद धीरे-धीरे उस गली में जा कर गायब हो गयी थी और मैंने जैसे एक घूँट पी लिया। फिर मैंने अपनी नज़र घुमा ली, लेकिन यह बात डॉली आंटी ने नोटीस कर ली थी। फिर वो मुझे अपने साथ घर के पिछवाड़े में ले गयी मगर उसे फॉलो करते-करते मेरा ध्यान उसके पिछवाड़े पर था। हाए अब मेरा मन तो कर रहा था कि उसकी गांड के गोलो को दबा दूँ, मार दूँ, खा जाऊं, लाल कर दूँ। फिर वो स्टूल ले आई और चढ़ने लगी, तो मैंने कहा कि आंटी में चढ़ता हूँ आप क्यों तक़लीफ़ कर रही हो? तो उसने कहा कि कोई बात नहीं तुम कभी और दिन चढ़ना, आज में चढ़ जाउंगी। अब ऐसी बातें करके डॉली आंटी मेरी हवस की आग में पेट्रोल डाल रही थी।

अब मेरा लंड तो उन्हें साड़ी में उनकी गली देखी थी तब से टाईट हो गया था। अब जीन्स की वजह से मुझे दर्द हो रहा था, मुझे ऐसी टाईट फिलिंग इतनी सख़्त कभी महसूस नहीं हुई थी। फिर जब आंटी ऊपर चढ़ी तो उनके बगल से एक जिस्मानी महक मेरी नाक में घुसकर मेरे दिमाग़ में चढ़ गई, अब मेरा दिमाग़ जैसे नशे में आ गया था। अब में जैसे मदहोश सा हो गया और उसी मदहोशी में जब मैंने अपना मुँह ऊपर किया तो उनके पसीने की बूँद उनकी कमर से मेरे चेहरे पर टपकी और गालों से नीचे होती हुई वो बूँद जैसे ही नीचे आई तो मैंने उसे अपनी जुबान से दबोच लिया। अब उनका यह नमकीन पसीना जैसे मुझे अमृत सा लगने लगा था। अब मदहोशी में मुझे पता ही नहीं चला कि वो पत्ते तोड़ रही थी और मुझे तिरछी नज़र से देख रही थी। उसे पता नहीं था मुझे क्या हो गया था? फिर डॉली आंटी ने मुझे नाम से पुकारा केशव क्या हुआ? कहाँ खो गये? फिर मैंने ऊपर देखा तो उनका पल्लू थोड़ा सरका हुआ था और मेरी नज़र उनके पसीने से भीगी साईड ब्लाउज पर पड़ी, जिससे उनके बूब्स की आउट लाईन काफ़ी साफ़-साफ़ नज़र आ रही थी।

अब इस बात से अंजान उन्होंने मुझसे पूछा कि क्या हुआ केशव सब ठीक तो है ना? कहीं धूप में चक्कर तो नहीं आ रहे। तो मैंने कहा कि नहीं डॉली आंटी आपके आम की खुशनुमा महक मुझे मदहोश सा कर गयी। अब डॉली आंटी शॉक हो गयी, फिर उन्होंने पूछा कि में समझी नहीं? तो मैंने कहा कि आंटी आपके आम के पेड़ से काफ़ी मीठी खुशबू आती है। तो वो बताने लगी कि हाँ इसी वजह से उन्हें वहाँ मधुमक्खी और कई तरह के कीड़े बहुत तंग कर रहे है। फिर उन्होंने अपनी कमर से लहंगा थोड़ा नीचे करके किसी कीड़े के काटने का निशान बताया, वो ज़्यादा बड़ा नहीं था बस उनकी कमर लाल सी हो गई थी और पसीने की नमकीन की वजह से उन्हें खुजली हो रही थी। अब यह देखकर तो मेरी पेंट में खतरनाक खुजली शुरू हो गयी, अब मुझे अपने लंड को किसी तरह से शांत करना था क्योंकि अब मुझसे दर्द सहन ही नहीं हो रहा था।

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फिर मैंने उनसे कहा कि आंटी आप खुजाओ मत नहीं तो यह और फैलेगा और बड़ा हो जाएगा। लेकिन उन्होंने कहा कि केशव पर यह खुजली इतनी सताती है कि रात में सोने ही नहीं देती, अब खुजा लूँ तो बड़ा हो जाएगा और ना करूँ तो रहा नहीं जाएगा। अब आंटी को अंदाज़ा नहीं था कि उनकी बातें मुझ पर क्या असर कर रही थी? अब मुझे तो ठीक से तैरना ही नहीं आ रहा था। फिर आंटी ने मुझे पत्ते दिए, तो मैंने उन पत्तो को बाजू में रख दिया और अब में उनको नीचे उतारने में मदद कर रहा था। अब मुझसे रहा नहीं जा रहा था, अब में आंटी को वही पेड़ से सटाकर चोदना चाहता था। लेकिन अब में उनकी गोरी कमर को पकड़कर नीचे उतारने ही वाला था कि उन्होंने मुझे रोका और कहा कि वहाँ हाथ मत लगाओ, जलन सी हो रही है। तो मैंने अपनी उंगलियों से वहाँ थोड़ा सा सहलाया, तो आंटी के मुँह से आहें निकल गयी आअहह हाँ केशव वहाँ देखो कितनी लाल हो गयी, अब चलो मेरा हाथ पकड़ो।

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फिर मैंने उनका एक हाथ पकड़ा और अपने दूसरे हाथ से उनकी कमर पकड़ी और हल्का सा दबा भी दिया और उन्हें नीचे उतार दिया। फिर वो पीछे पलटी और मुस्कुराई और पूछा कि क्या इस खुजली का कोई इलाज है? तो मैंने कहा कि हाँ है ना। आंटी आपके घर में दूध मलाई है? तो उन्होंने कहा कि हाँ है, लेकिन क्यों? फिर मैंने कहा कि अंदर चलिए में बताता हूँ। फिर क्या था? अब में फिर से उनके पिछवाड़े का यहाँ वहाँ होना देखता रहा। अब आंटी यह नहीं जानती थी कि उनकी साड़ी थोड़ी सी उनके पिछवाड़े में घुसी हुई थी। फिर मैंने उनसे दूध मलाई और हल्दी लाने को कहा, आप सभी को तो पता होगा की हल्दी कितनी लाभदायक होती है। फिर वो किचन में गयी और ले आई, फिर मैंने जब उनसे कप हाथ में लिया तो मेरा हाथ उनकी उंगलियों से टच कर गया, लेकिन आंटी ने कुछ नहीं कहा। फिर मैंने आंटी को सोफे पर बैठने को कहा, तो वो बैठ गयी। फिर जब मैंने उनसे कहा कि हल्दी और मलाई को अच्छे से मिलाकर आप लगा लो तो बहुत आराम मिलेगा या आप कहे तो में लगा दूँ। तो आंटी बोली कि हाँ केशव ऐसा करो तुम ही लगा दो, लेकिन यहाँ यह सब सोफे पर नहीं होगा ऊपर रूम में चलो।

फिर डॉली आंटी मुझे अपने रूम में ले गयी और वो बेड पर लेट गयी। फिर उन्होंने बिना कुछ कहे सुने अपना लहंगा कमर से नीचे कर दिया और झट से नीचे सरकाने में उनसे कुछ ज़्यादा ही सरक गया और में उनकी चूत जो शेव थी, लेकिन उनकी चूत के ऊपर कुछ बाल थे जो आंटी ने छोड़ दिए थे अब मुझे उसके दर्शन हो गये थे। अब आंटी की चूत के दर्शन मुझ पर कहर बरसी और उनकी चूत ने मेरी हालत और खराब कर दी। तो आंटी ने झट से सही किया और मेरे सामने थोड़ी सी शर्मा गयी और घबरा गयी। अब में वो मलाई हल्दी का पेस्ट उनकी खुजली वाली जगह पर लगाने वाला था। लेकिन मलाई ठंडी थी और जैसे ही पेस्ट उनकी स्किन को टच हुआ, तो आंटी के मुँह से आअहह निकल गयी। अब उनकी आआहह ने मेरी पेंट में आतंक मचा दिया था केशव आआहह बहुत अच्छा लग रहा है, आआआ ह्ह्ह्ह आराम आ रहा है, क्या कमाल का इलाज है तुम्हारा? आआहह हाईईई।

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फिर में पेस्ट लगाकर उठ गया और अपने हाथ धोने बाथरूम में चला गया और दरवाज़े को लॉक किया और अपनी पेंट को खोला, बस यहाँ ही मुझसे ग़लती हो गयी। अब मेरी पेंट में जो लंड क़ैद था, वो लाल पर्पल हो गया था, अब वो जैसे गुस्से में टाईट हो गया था। अब में मेरे लंड को शांत भी नहीं कर सकता था क्योंकि मेरा पानी जल्दी नहीं निकलता है और में बाथरूम में ज़्यादा टाईम भी रह नहीं सकता था क्योंकि आंटी शक करेगी। फिर मेरी नज़र घुमी तो वहाँ बाल्टी में अंकल आंटी के कपड़े थे, अब मुझे पता नहीं क्या हुआ? में जल्दी-जल्दी में उस बाल्टी में देखने लगा तो मुझे आंटी की ब्लू पेंटी मिली, उनकी पेंटी कॉटन की थी, अब उनकी पेंटी पानी में भीगी हुई थी।

फिर मैने उनकी पेंटी को अपने लंड पर लगाया तो मुझे थोड़ा सा आराम मिला और मेरी भी आआआहह निकल गयी। लेकिन अभी भी मेरा लंड गुस्से में था, उसे मेरी पेंट के अंदर जाना ही नहीं था, फिर जैसे तैसे करके मैंने थोड़ा बहुत दर्द सहकर उसे मेरी पेंट के अंदर घुसा दिया और पेंट का बटन खुला रखकर बेल्ट लगा दी। फिर में बाहर आया तो आंटी की नज़र मेरी पेंट पर पड़ी, जहाँ अच्छा सा टेंट बना था। अब आंटी के चेहरे पर एक सेक्सी सी स्माइल आ गई, जैसे वो समझ गयी ही कि उनकी वजह से मेरी हालत क्या हो गयी है? अंकल उनकी बेटी के ससुराल आउट ऑफ स्टेशन गये हुए थे और वो 4 दिन बाद आने वाले थे। अब मेरा लंड तो बस बाहर निकलकर ताबडतोड़ चुदाई करने की स्पीड में था। अब डॉली आंटी जिस तरह से मुझे निहार रही थी, उससे में यह तो समझ गया था कि वो नहीं चाहती कि में अपने घर जाऊं, लेकिन मेरी मजबूरी थी मेरे पापा घर पर मेरा इंतजार कर रहे थे। फिर में रूम से निकला ही था कि यह देखकर वो झट से उठी और मेरे पास आई और पूछने लगी कि क्या शाम को फ्री हो केशव? तुम्हारे अंकल बेटी के ससुराल गये है। आज तुमने मेरा बहुत ख्याल रखा आज मेरी तरफ से मेरे यहाँ डिनर की ट्रीट, ठीक है, तुम अपनी मम्मी से कहना कि आंटी ने कुछ काम से बुलाया है। फिर शाम को डिनर के बाद मैंने उनकी खूब चुदाई की और आंटी ने भी मस्त होकर चुदवाया ।।

धन्यवाद …

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