मेरे प्रोफेसर की चुदक्कड़ बीवी


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प्रेषक : राकेश …

हैल्लो दोस्तों, मेरा नाम राकेश है और में गुजरात के अहमदाबाद शहर में रहता हूँ। में शादीशुदा हूँ और मेरे दो बेटे भी है। दोस्तों आज में जो कहानी आप लोगों को सुनाने जा रहा हूँ, यह घटना मेरे साथ उस समय घटी जब में एक बहुत बड़े कॉलेज में अपनी दूसरे साल की पढ़ाई कर रहा था और मैंने तब तक सेक्स के बारे में सिर्फ़ सुना ही था और मैंने सेक्स करते हुए देखा था, लेकिन वो सब मैंने ब्लूफिल्म में देखा और कभी भी सच में किसी को सेक्स करते हुए नहीं देखा था और आज में आप सभी कामुकता डॉट कॉम के चाहने वालों को अपना एक सच्चा सेक्स अनुभव बताने यहाँ पर आया हूँ और में उम्मीद करता हूँ कि उसको पढ़कर आप सभी को बहुत मज़ा आएगा।

दोस्तों मेरी लम्बाई 5.8 इंच है और मेरा बदन दिखने में एकदम ठीक-ठाक है और में पढ़ाई में भी बहुत अच्छा था, उस समय मेरे कॉलेज के एक प्रोफेसर मिस्टर पाटिल जो कि महाराष्ट्र के रहने वाले थे और मेरी उनसे शुरू से ही बहुत अच्छी पटती थी और वो हमेशा मेरी पढ़ाई के बारे में मदद किया करते थे और में उनके हर एक छोटे बड़े कामों को कर दिया करता था उनसे मेरी बहुत ज्यादा बातें और कभी कभी हंसी मजाक भी होता था और दोस्तों उनके परिवार में उनके अलावा सिर्फ़ उनकी पत्नी ही उनके साथ रहती थी, वो दोनों अपने उस जीवन में बड़े खुश थे। तो दोस्तों यहाँ से शुरू होती है मेरी वो कहानी, उस दिन जब में अपने कॉलेज पहुँचा तो कॉरिडर में मुझे मिस्टर पाटिल सर मिल गए और उनको देखकर मुझे ऐसा लग रहा था कि जैसे वो किसी को ढूंढ रहे थे, मैंने नज़दीक जाकर उनसे गुड मॉर्निंग किया। तभी वो तुरंत मुझे देखकर खुश होकर मेरी तरफ देखने लगे और फिर उन्होंने मुझसे कहा कि राकेश क्या तुम मेरा एक काम करोगे? तो मैंने तुरंत अपना सर हिलाकर उनसे कहा कि हाँ बताए सर मुझे क्या करना है? तभी वो मुझसे बोले कि यह जरूरी कुछ पेपर तुम मेरी पत्नी को मेरे घर पर जाकर दे देना, में यहाँ पर मीटिंग होने की वजह से नहीं जा सकता और यह उसको देना बहुत ज़रूरी है।

फिर मैंने उनकी पूरी बात सुनकर तुरंत हाँ कहा और फिर में सर के घर की तरफ चल दिया जो कि नज़दीक ही था और फिर मैंने उनके घर पर पहुंचकर दरवाजे पर लगी घंटी को बजाया और थोड़ी ही देर में दरवाजा खुला और तभी मेरा मुहं खुला का खुला रह गया क्योंकि वो नजारा देखकर मुझे ऐसा लगा था जैसे कोई अप्सरा मेरे सामने खड़ी हो और उनकी सुंदरता की तारीफ करने के लिए मेरे पास कोई भी शब्द नहीं थे और उनको देखकर मेरे मुहं से कोई आवाज़ नहीं निकल रही थी। में सिर्फ़ उनको अपनी चकित नजरों से देखता ही रह गया। मुझे ऐसे देखने और कुछ भी ना बोलने से वो दरवाजा बंद करने लगी और तभी में अपने होश संभालते हुए बोला कि एक मिनट मेडम मुझे पाटिल सर ने भेजा है आपको यह कवर देने के लिए। तब उन्होंने हंसते हुए दरवाजा दोबारा खोल दिया और फिर उन्होंने मुझे अपने घर के अंदर बुलाया और वो मेरी तरफ देखने लगी। में शरम के मारे नीचे देखने लगा तो उन्होंने मुझसे कहा कि तुम्हारा नाम क्या है? मैंने अपना नाम उनको बताया तो मेडम ने मुझे बैठने के लिए बोला और में बैठ गया। फिर उसके बाद वो मेरे लिए पानी लेने रसोईघर की तरफ चली गयी और में एक बार फिर से मेडम को पीछे से देखने लगा वाह क्या मस्त फिगर था उनका एकदम गोल सही आकार के आकर्षक बूब्स, उनकी वो मादक आँखें, उनके गोरे गाल, उनके रसीले होंठ, उनकी उभरी हुई टाइट गांड थी, वो साड़ी में बहुत सुंदर लग रही थी और उनको देखकर मेरा लंड कुछ ही देर बाद पेंट के अंदर टाइट होने लगा था और मेडम जब वापस आई तो मुझे बिल्कुल भी पता नहीं कि उनके दिमाग़ क्या चल रहा था? वो मेरे पास आकर मुझसे बोली राकेश आपके पास थोड़ा समय हो तो आप रुक जाए तो में यह फॉर्म आपको भरकर दे देती हूँ आप प्लीज सर को दे देना, तो मैंने कहा कि हाँ ठीक मेडम में जब तक आप कहें यहीं पर रुक जाता हूँ और फिर वो मेरे पास सोफे पर आकर बैठ गयी और उसके बाद वो नीचे झुककर वो फॉर्म भरने लगी। उन्होंने उस समय गहरे गले का ब्लाउज पहन रखा था और उसकी वजह से और उनके इतना ज्यादा नीचे झुककर काम करने की वजह से उनके गोरे गोरे बूब्स के बीच की सुंदर दरार मुझे बहुत अच्छी तरह से दिख रही थी, जिसकी वजह से मेरा पूरा ध्यान उनके गोरे सेक्सी जिस्म पर था और में उनकी मादक खुशबु में जैसे खो सा गया था। मेरी नजर अब उनके बदन से हटने को तैयार ही नहीं थी और कुछ देर बाद यह बात मेडम ने भी देख ली और उन्होंने मुझे हल्का सा स्माइल देते हुए वो पेपर भरकर मेरे हाथ में दे दिए।

दोस्तों में एकदम सच कहता हूँ कि में किसी भी शब्दों में आप लोगों को बता नहीं सकता कि में तो उनके गोरे मुलायम हाथ का स्पर्श अपने हाथ पर पाते ही जैसे बिल्कुल पागल हो गया और में जब उठकर वहां से जाने लगा तो मेडम मुझसे बोली कि राकेश अगर तुम्हारे पास टाइम हो तो तुम मुझसे मिलने आ जाया करो, वैसे भी में पूरे दिन यहाँ पर अकेली बोर हो जाती हूँ। दोस्तों मेरे लिए यह शब्द मानो एक तरह का खुला न्योता हो गया और मैंने तुरंत उनकी बात पर हाँ कह दिया और मैंने उनका फोन नंबर ले लिया और उसके बाद में वहां से चला आया, लेकिन में बस उनके ही सपने देखता रहा। मैंने उनके बारे में बहुत कुछ सोचा और फिर उसके दूसरे दिन मैंने बहुत हिम्मत करके उनको फोन किया तो मेडम ने मुझे तुरंत ही अपने घर पर बुला लिया और में भी उनके कहने पर तुरंत ही उनके घर पर चला गया। घर पर जाते ही मेडम ने हंसते हुए मुझे अंदर आने के लिए कहा और बैठने का इशारा किया तो में उनके कहने पर बैठ गया और उन्होंने मुझसे पूछा कि राकेश तुम क्या लेना पसंद करोगे ठंडा या गरम? में उनकी बात का मतलब पूरी तरह से समझ गया और अब में उनसे बोला कि कुछ गरम मिल जाए तो मज़ा आ जाएगा। फिर मेरी बात को सुनकर मेडम ने मेरी तरफ हंसकर कहा कि थोड़ा सा इंतजार करो में अभी देती हूँ, उस समय मेरी नज़र मेडम के बूब्स पर थी क्योंकि उन्होंने आज एकदम टाइट टॉप और स्कर्ट पहन रखी थी उसमे वो और भी ज्यादा हॉट सेक्सी लग रही थी।

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फिर वो मुझसे इधर उधर की बातें करने लगी, लेकिन में तो सिर्फ़ मेडम को ही देख रहा था और मेरा पूरा ध्यान उनके उस मादक जिस्म पर था जिसकी चुदाई के सपने में एक दिन पहले ही देख चुका था और अब मुझे कैसे भी करके उसको पाना था और उसकी जमकर चुदाई करनी थी। फिर कुछ ही देर बाद मेरे शरीर के अंदर पता नहीं कुछ कुछ होने लगा था जिसकी वजह से मेरा लंड घड़ी घड़ी पेंट में हलचल कर रहा था वो अपने असली आकार में आकर तनकर खड़ा था और यह सब मेडम भी धीरे से अपनी चोर नजर से देख रही थी। अब में मन ही मन में सोच रहा था कि कैसे में मेडम की चुदाई करूं? उस काम को करने के लिए में उनसे क्या कहूँ? तभी मेडम ने मुझसे पूछ लिया क्यों राकेश क्या तेरी कोई गर्लफ्रेंड है या नहीं? तो मैंने हंसते हुए अपना जवाब उनको दिया कि मुझे अभी तक कोई आप जैसी मिली ही नहीं जिसको में अपनी गर्लफ्रेंड बना सकता। फिर वो मेरी बात को सुनकर हंस पड़ी और तुरंत वो बोली कि हाँ ठीक है आज से में तेरी गर्लफ्रेंड बोल क्या तू तैयार है? दोस्तों में उनके मुहं से यह बात सुनकर एकदम से चोंक पड़ा और मुझे उनके कहे शब्द और मेरे कानों पर बिल्कुल भी विश्वास नहीं हुआ कि वो आगे होकर मुझसे यह सब क्या कह रही है और तभी वो मेरी तरफ देखकर हंसने लगी और मुझसे पूछने लगी क्यों क्या हुआ तुमने मुझे तुम्हारा कोई भी जवाब नहीं दिया, क्या तुम्हे में अच्छी नहीं लगी? फिर में उनसे बोला कि आपको कौन पागल ना कहेगा? लेकिन मेरी आपसे एक शर्त है। फिर मेडम मुझसे पूछने लगी कि वो क्या? तब मैंने उनसे बहुत हिम्मत करके कह दिया कि मेडम आपको मेरे साथ वो सब करना पड़ेगा जो काम हमेशा एक बॉयफ्रेंड अपनी गर्लफ्रेंड के साथ करता है। फिर वो मुझसे बिल्कुल अंजान बनकर पूछने लगी और बोली कि राकेश में तुम्हारे कहने का मतलब नहीं समझी। अब मैंने उनसे पूछा कि क्या में आपको एक किस कर सकता हूँ? वो मुस्कुराकर बोली कि क्यों नहीं हाँ कर सकते हो उनके चेहरे से मुझे साफ साफ पता चल रहा था कि वो मुझसे अब क्या चाहती है उनके मन में क्या क्या चल रहा है? दोस्तों उनके मुहं से यह बात सुनकर मेरी तो ख़ुशी का कोई ठिकाना ही नहीं रहा और मैंने बिल्कुल भी समय ना गवाते हुएँ आगे बढ़कर मेडम को अपने और भी पास खींचकर उनके होंठो पर एक हल्का सा लीप किस ले लिया और में वापस उनसे दूर हो गया। वो सब करना मेरे लिए तो स्वर्ग की सेर करने जैसा था, क्योंकि वो सब मेरा पहला अनुभव था और मेरा लंड अब मेरी पेंट में बिल्कुल पागल हो रहा था। में जाने क्या क्या सोचने लगी। तभी मेडम मुझसे बोली क्यों बस इतना ही? इसके आगे क्या तुम कुछ भी नहीं करोगे? लो कर लो बात फिर क्या था? और फिर वो खुद ही उठकर मेरी गोद में आकर बैठ गयी और अब वो मुझसे अपनी शरारती हंसी के साथ पूछने लगी कि बोलो और क्या करते है गर्लफ्रेंड के साथ मुझे बताओ?

फिर मैंने उनकी बात का कोई भी जवाब नहीं दिया और में मेडम को किस करने लगा। उनके मस्त और नाज़ुक स्तन मेरी छाती को स्पर्श करने लगे और में एकदम उत्तेजित हो गया और एक हाथ से में उनके स्तन को सहलाने लगा और ज़ोर ज़ोर से दबाने लगा, वो मेरी बाहों में अपने पूरे बदन को मेरे लिए ढीला छोड़ने लगी और उनकी कामुकता को देखकर में कुछ ज्यादा ही जोश में आकर अपने हाथ उनके बूब्स पर चलाने लगा और उनकी नरम गुलाबी होंठो को चूसने लगा और अपनी जीभ को उनके मुहं में अंदर तक डालकर घुमाने लगा और अब मेडम भी पूरे जोश में आ चुकी थी और उनके मुहं से अह्ह्ह्हह्ह उफ्फ्फफ्फ्फ़ की आवाज़ें निकलने लगी थी। फिर कुछ देर बाद मेरा दूसरा हाथ मेडम की गांड पर अपने आप फिरने लगा। दोस्तों तब मैंने महसूस किया कि मेडम की गांड बड़ी मस्त एकदम सुडोल थी और फिर मैंने किस करते हुए अपना एक हाथ मेडम के कपड़ो के अंदर डाल दिया, लेकिन तभी अचानक से मुझे एक जोरदार झटका लगा और मैंने महसूस किया कि मेडम ने ब्रा नहीं पहनी थी उससे साफ पता चलता था कि उनको भी मेरे साथ यह सब करना था और वो अपनी चुदाई मेरे साथ करने के लिए पहले से ही तैयार थी और इसलिए ही उन्होंने मुझसे फोन पर उनके घर पर आ जाने के लिए कहा और यह सभी बातें मन ही मन सोचकर में बहुत खुश हुआ और मेरे अंदर अब बहुत हिम्मत आ चुकी थी। दोस्तों ये कहानी आप कामुकता डॉट कॉम पर पड़ रहे है।

फिर मैंने महसूस किया कि मेरे हाथ का स्पर्श अपने बूब्स पर पाते ही मेडम जैसे बिल्कुल पागल हो गई थी, वो कहने लगी ओह्ह्ह्हह आह्ह्हह्ह प्लीज इन्हें और ज़ोर से दबाओ। में कई दिनों से इस काम के लिए तड़प रही हूँ ओहह्ह्ह्हह प्लीज तुम मुझे अब और ना तड़पाओ, मुझे वो सुख वो मज़ा तुम आज मुझे दे दो जिसके लिए मैंने तुम्हे यहाँ पर बुलाया है, प्लीज मेरी यह इच्छा आज तुम पूरी कर दो और यह बात कहते हुए उन्होंने अपने कपड़े तुरंत उतार दिए और अब मेरे सामने मस्त गोरे गोरे दो स्तन जिन पर हल्की गुलाबी निप्पल तनकर खड़ी थी। अब मैंने भी ज्यादा टाइम खराब किए बिना में उन पर टूट पड़ा और मैंने सीधे एक बूब्स को अपने मुहं में ले लिए और चूसने लगा और मेरे दोनों हाथ अब मेडम की गांड और जाँघ पर फिरने लगे। फिर कुछ देर बाद मैंने उसकी स्कर्ट को पूरा ऊपर उठा दिया और अब में अपना एक हाथ उसकी जाँघ पर रगड़ने लगा और सहलाने लगा और धीरे धीरे मेरे हाथ अब मेडम की नंगी चूत की तरफ बढ़ने लगे, क्योंकि मेडम ने कपड़ो के नीचे पेंटी भी नहीं पहनी थी और वो अपनी चुदाई के सपने लेकर मेरा इंतजार कर रही थी। दोस्तों वाह क्या मस्त चूत थी उनकी, में उसको देखकर अपने आप पर बिल्कुल भी काबू नहीं कर सका में झट से नीचे झुक गया और उनकी प्यासी चूत को चाटने लगा मुझे ऐसा करने में बहुत मज़ा आ रहा था और अब वो लगातार मोन कर रही थी अब वो अपनी चूत को अपने एक हाथ से फैला रही थी और दूसरे हाथ से मेरे सर को अपनी चूत पर दबा रही थी में उनके जोश को देखकर पागलों की तरह चूत को पूरा अंदर तक चाट और चूस रहा था और वो आहहहह ऊईईईईई हाँ प्लीज थोड़ा और चाटो मज़ा आ गया करने लगी थी और करीब पांच मिनट चूत को चूसने के बाद मेडम ने अपनी चूत का पानी मेरे मुहं पर छोड़ दिया और में वो पूरा पानी पी गया, वो अब बिल्कुल निढाल होकर पड़ी हुई थी। तो कुछ देर बाद मैंने अपना लंड मेडम की चूत के मुहं पर रख दिया और धीरे से धक्का लगाया। चूत गीली होने की वजह से मेरा थोड़ा लंड फिसलकर पूरा अंदर चला गया और मेडम के मुहं से अहहह्ह्ह्हह उफ्फ्फ्फ़ माँ मर गई निकल गया। फिर मैंने कुछ देर रुकने के बाद एक और ज़ोर का धक्का लगा दिया, जिसकी वजह से उनकी एक जोरदार चीखने की आवाज के साथ मेरा पूरा लंड मेडम की चूत को चीरकर अंदर चला गया और मेडम ने मुझे ज़ोर से अपनी बाहों में जकड़ लिया और तब मैंने देखा कि उनकी आखों से आंसू बाहर आने लगे थे, वो उस दर्द से छटपटा रही।

फिर में कुछ देर रुक गया और जब वो शांत हुई तब में मेडम को करीब 15 मिनट तक लगातार ज़ोर ज़ोर से धक्के देकर चोदता रहा। अब मेडम का दर्द कम होने के बाद वो मुझसे बोल रही थी हाँ और चोदो मुझे आअहह उफ्फ्फ्फ़ वाह मज़ा आ गया। तुम बहुत अच्छी तरह से चोदते हो उईईईइ हाँ थोड़ा और अंदर करो। में ऐसी चुदाई इस सुख को पाने के लिए कितने दिनों से तड़प रही हूँ। आज राकेश तुम मेरी पूरी आग को बुझा दो, तुम मुझे जमकर चोदो। फिर में ज़ोर ज़ोर से धक्के देकर चोदने लगा और मेडम ज़ोर ज़ोर से आअहह स्स्ईईईइ कर रही थी और अब करीब दस मिनट के बाद में झड़ने वाला था, इसलिए मैंने मेडम को पूछा कि में अपना वीर्य कहाँ डालूं? तो मेडम ने मुझसे कहा कि तुम अपना पूरा माल मेरी चूत में ही डाल दो। फिर में ज़ोर ज़ोर से धक्के देकर चोदने लगा और कुछ देर धक्के देने के बाद मैंने महसूस किया कि मेडम ने अपना पानी छोड़ दिया था और फिर मैंने अपने धक्को की स्पीड को भी बढ़ा दिया और करीब दस मिनट के बाद मैंने अपना भी पूरा वीर्य मेडम की चूत में ही निकाल दिया।

तब मैंने देखा कि मेडम अपनी इस चुदाई से बहुत खुश थी और उन्होंने मुझे किस किया और कहा कि जानू आज से तुम मुझे जब चाहो चोद सकते हो, में आज से बस तुम्हारी हूँ, तुमने मुझे आज वो मज़े दिए जिसके लिए में बहुत समय से तरस रही थी, तुम बहुत अच्छे हो तुमने मुझे वो मज़ा दिया जिसको में अपनी पति से चाहती थी, लेकिन वो इसके लिए तैयार बहुत कम तैयार होते है उनको चुदाई करने का ज्यादा शौक नहीं है। फिर उसके बाद हम दोनों ने अपने कपड़े पहने में बहुत खुश होकर उनको कुछ देर चूमकर अपने घर पर आ गया, लेकिन यह उनके साथ मेरी पहली चुदाई होने के साथ मेरा उनके साथ हमेशा का काम हो गया। मैंने उनको बहुत बार चोदा और जब वो मुझे फोन करके बुलाती तो में ख़ुशी ख़ुशी चला जाता और बहुत मज़े करता ।।

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धन्यवाद …

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