मकान मालिक की बहु की चुदाई


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प्रेषक : राज कुशवाह …

हैल्लो दोस्तों, मेरा नाम पिंकू है और में इलाहाबाद का रहने वाला हूँ, मेरी उम्र 25 साल है। मेरी कामुकता डॉट कॉम पर यह पहली स्टोरी है तो अब में आप लोगों को ज्यादा बोर ना करते हुए सीधे स्टोरी पर आता हूँ। ये बिल्कुल सच्ची स्टोरी है, यह सब तब हुआ जब में इंजिनियरिंग की तैयारी करने कानपुर गया था, उस समय मेरी उम्र 19 साल थी तो मैंने एक रूम किराये पर लिया। मुझे वो रूम मेरे एक दोस्त ने दिलाया था, वह रूम मेरी कोचिंग से काफ़ी दूर था लेकिन मुझे उस शहर के बारे में ज़्यादा मालूम नहीं था, तो में वही पर ही रहने लगा।

उस घर में आंटी, अंकल और उनका बेटा और अंकल का छोटा भाई जिनकी बीवी मर गई थी और अंकल के दो बेटे जिनकी शादी हो गई थी रहते थे। उनका बड़ा बेटा दुकान चलाता था और छोटा बेटा एक स्कूल में टीचर था। बड़ी भाभी ज़्यादा सुंदर तो नहीं थी, लेकिन वो एक्टिव रहती थी और छोटी भाभी तो बहुत सुंदर थी, लेकिन वो आलसी थी इसलिए भैया और भाभी में अक़्सर लड़ाई होती रहती थी, इस कारण छोटी भाभी अक्सर उदास रहती थी। बड़े भैया और भाभी ऊपर पहले फ्लोर पर रहते थे और अंकल, आंटी और उनका छोटा भाई ग्राउंड फ्लोर पर रहते थे और मेरा रूम भी ग्राउंड फ्लोर पर ही था। छोटी भाभी का फिगर बहुत सुंदर था, उनकी गांड, उनके बूब्स मुझे बहुत अच्छे लगते थे, उनकी उम्र लगभग 22 साल के करीब थी। छोटी भाभी अक्सर सलवार सूट पहनती है, छोटी भाभी अक्सर पारदर्शी कपड़े पहनती है क्योंकि उन्हें सेक्सी दिखना काफ़ी पसंद है। भाभी आलसी थी तो आंटी और भैया अक्सर उन्हें डाटते रहते थे। भाभी ने मुझे यह बाद में बताया कि वो भैया से ज़्यादा खुश नहीं रहती थी, क्योंकि भैया भाभी को संतुष्ट नहीं कर पाते थे।

अब जब भी में छत पर होता, तो भाभी अक्सर छत पर आ जाती और हम लोग कुछ देर तक इधर उधर की बातें करते, मुझे भी भाभी से बात करना बहुत अच्छा लगता था। फिर एक दिन रात को करीब 1 बजे मेरी नींद खुली तो मुझे बाहर से कुछ हल्की-हल्की आवाज़ आ रही थी। फिर मैंने ध्यान से सुना तो यह आवाज़ मेरे बगल के कमरे से आ रही थी, जिसमें छोटे भैया और भाई रहते है। फिर में अपने रूम से बाहर आया तो मैंने देखा कि भैया के रूम की खिड़की ढंग से बंद नहीं थी, तो मैंने खिड़की से ध्यान से अंदर देखा तो अब मुझे बेडरूम का सारा नज़ारा दिख गया। अब भाभी टॉपलेस थी और भैया उनके बूब्स चूस रहे थे और अपने एक हाथ से उनकी चूत को सहला रहे थे, भाभी के बूब्स बहुत सुंदर और काफ़ी बड़े थे, अब में यह सब देखकर काफ़ी उत्तेजित हो गया था।

फिर भैया ने अपना एक हाथ भाभी की सलवार के अंदर डाल दिया और सहलाने लगे। अब भाभी मौन करी रही थी और भैया के लंड को उनके पजामे के ऊपर से सहला रही थी। फिर भैया ने भाभी की सलवार और पेंटी एक साथ उतार दी, अब भाभी पूरी नंगी हो गई थी। अब भाभी को ऐसे देखकर मेरा भी लंड खड़ा हो गया और में भी मेरे लंड को सहलाने लगा। फिर भैया ने अपना पजामा उतारा, अब भैया सिर्फ़ चड्डी में थे, फिर वो भाभी के ऊपर चढ़ गये और भाभी को किस करने लगे और अपने एक हाथ से भाभी की चूत में उंगली करने लगे। अब भाभी मौन कर रही थी, अब भाभी काफ़ी गर्म हो गई थी तो उन्होंने अपने पैर फैला दिए। फिर भैया ने अपनी चड्डी उतार दी और भाभी के दोनों पैरो के बीच में आ गये और अपने लंड को भाभी की चूत पर रगड़ने लगे। अब भाभी काफ़ी एग्ज़ाइट्मेंट में थी और भैया के लंड का पूरा मज़ा ले रही थी।

अब भैया ने थोड़ा जोर लगाकर अपना पूरा लंड भाभी की चूत में डाल दिया, तो भाभी ने आहह्ह्ह्ह के साथ भैया का पूरा लंड अपनी झाट वाली चूत में ले लिया। फिर भैया ने धक्के लगाने शुरू किए और ये क्या? भैया मात्र 20-25 धक्को में झड़ गये और भाभी प्यासी रह गई। फिर उसके बाद भाभी ने बहुत कोशिश की, लेकिन भैया का लंड खड़ा ही नहीं हुआ। फिर 5 मिनट के बाद में भी अपने रूम में आ गया, अब मुझे नींद नहीं आ रही थी। फिर 30-35 मिनट के बाद मुझे किचन में किसी के चलने की आवाज़ आ रही थी, तो में बाथरूम के बहाने बाहर आया और देखा तो बाथरूम की लाईट जल रही थी और बाथरूम का दरवाजा अंदर से बंद था। तो मैंने दरवाजे के छेद से देखा, तो अंदर भाभी थी और वह अपनी चूत में गाजर डाल रही थी। तो में समझ गया कि भैया की चुदाई से भाभी की प्यास नहीं बुझी है और वो अपने आपको शांत करने के लिए ही गाजर अपनी चूत में डाल रही है।

फिर उसके बाद में अपने रूम में चला आया और सोने की कोशिश करने लगा, लेकिन अब मुझे नींद नहीं आ रही थी तो मैंने भाभी की चूत को याद करके मूठ मारी और सो गया। अब भाभी मुझे पूरी सेक्स की देवी लगने लगी थी और अब मैंने सोच लिया था कि अब मुझे भाभी की चुदाई करनी है। फिर एक दिन भैया स्कूल गये हुए थे तो में मैच देखने के बहाने भाभी के बेडरूम में चला गया। अब भाभी भी मेरे साथ मैच देख रही थी, अब में सोफे पर बैठा था और भाभी बेड पर बैठी थी। फिर जब एक इन्निंग ख़त्म हो गई, तो भाभी बोली कि चाय पीओंगे? तो मैंने हाँ कह दिया, तो करीब 10 मिनट के बाद भाभी चाय बनाकर ले आई। फिर उन्होंने एक कप मुझको दिया और एक कप खुद लेकर मेरी बगल में बैठकर चाय पीने लगी। अब मेरी नज़र भाभी की चूचीयों पर थी और अब भाभी को भी यह सब मालूम था। फिर हमने थोड़ी देर तक इधर उधर की बातें की, फिर भाभी ने मुझसे पूछा कि तुम्हारे कोई गर्लफ्रेंड है क्या? तो मैंने कहा कि पहले थी अब नहीं है।

फिर मैंने भाभी से पूछा कि तुम्हारे कोई बॉयफ्रेंड था क्या? तो भाभी शर्मा गई। फिर मैंने ज़ोर देकर पूछा तो उन्होंने बताया कि हाँ जब वो कॉलेज में पढ़ती थी तो उनके एक बॉयफ्रेंड था। तो मैंने पूछा कि भाभी अगर बुरा ना मानो तो एक बात पूँछू, तो भाभी बोली कि पूछो में बुरा नहीं मानूंगी। तो मैंने पूछा कि आपने शादी से पहले सेक्स किया था। तो उन्होंने बताया कि कॉलेज टाईम में अपने बॉयफ्रेंड के साथ उन्होंने दो बार सेक्स किया था, एक बार कॉलेज में और एक बार उनके घर पर, जब घर के सारे लोग किसी शादी में गये हुए थे। अब में उनकी बातें सुनकर उत्तेजित हो गया और मैंने भाभी की जाँघ पर अपना एक हाथ रख दिया, तो भाभी कुछ नहीं बोली और हम मैच देखते रहे। फिर थोड़ी देर के बाद में अपना एक हाथ उनकी जाँघ पर फैरने लगा। तो जब भी उन्होंने मुझसे कुछ नहीं कहा, तो अब मेरी हिम्मत और बढ़ गई और मैंने भाभी को किस कर दिया और ऊपर से उनके बूब्स सहलाने लगा, अब मुझे बहुत आनंद आ रहा था।

फिर थोड़ी देर में मुझे आंटी के आने की आवाज़ सुनाई दी, तो हम अलग हुए और भाभी ने अपने कपड़े ठीक किए और फिर मैच ख़त्म हो गया और में अपने रूम चला आया। फिर उसके बाद जब भी हमें मौका मिलता तो में भाभी को किस करता और उनके बूब्स दबाता, लेकिन में अब उन्हें चोदना चाह रहा था, लेकिन यह मुमकिन नहीं हो पा रहा था। अब में भाभी को किस करने और बूब्स दबाने के बाद काफ़ी उत्तेजित हो जाता और बाथरूम में जा कर भाभी को याद करके मुठ मार लेता। फिर आख़िरकार वो दिन आ ही गया जिसका मुझे काफ़ी दिनों से इंतजार था। अब आंटी के भाई का अचानक देहांत हो गया तो घर के सारे लोग चले गये, सिर्फ़ भैया और भाभी को छोड़कर। फिर अगले दिन भैया सुबह स्कूल चले गये, तो अब भाभी घर पर अकेली थी। फिर कुछ देर के बाद भाभी मेरे रूम में आ गई, फिर मैंने भाभी को किस किया, उसके बूब्स दबाए। अब में काफ़ी एग्ज़ाइट्मेंट में था, तो भाभी बोली कि सब कुछ मिलेगा लेकिन सब्र करो। फिर में उनके टॉप को उठाकर उनके बूब्स चूसने लगा, क्योंकि भाभी ने ब्रा नहीं पहनी हुई थी।

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फिर थोड़ी देर तक भाभी के बूब्स चूसने के बाद मैंने भाभी की चूत और गांड को उनकी सलवार के ऊपर से सहलाई। तो उसके बाद भाभी बोली कि मुझे भी तो अपना खिलौना दिखाओ या सिर्फ़ मेरे ही खिलोने से खेलते रहोगे। तो मैंने कहा कि ये खिलौना तो आप ही के लिए है, आप जब चाहो, जहाँ चाहो, इससे खेल सकती हो। फिर भाभी मेरे लंड को सहलाने लगी और मेरा पजामा और चड्डी उतारकर चूसने लगी, अब मुझे बहुत मज़ा आ रहा था। फिर 20 मिनट के बाद मेरा निकलने वाला था, तो भाभी बोली कि मेरे मुँह के अंदर की छोड़ दे बाहर मेरे कपड़े खराब हो जाएगे, तो मैंने ऐसा ही किया। अब भाभी मेरा पूरा वीर्य पी गई, फिर उसके बाद भाभी बोली कि भैया के लिए खाना भी भेजना है, क्योंकि स्कूल का चपरासी लंच लेने आएगा और फिर भाभी किचन चली गई और भैया के लिए खाना बनाने लगी।

फिर मैंने कहा कि भाभी आज में आपकी मदद करूँगा, तो भाभी मुस्करा दी, फिर में किचन में गया और भाभी की मदद करने लगा। अब भाभी आटा गूथ रही थी, तो मैंने इतनी देर में सब्जी काट दी। फिर भाभी ने एक चुल्हें पर सब्जी चढ़ा दी और एक पर रोटी बनाने लगी। अब में भाभी की गांड देख रहा था और मन ही मन खुश हो रहा था कि आज तो इनकी गांड में मेरा लंड डालूँगा, क्योंकि भैया स्कूल के बाद कोचिंग पढ़ाने चले जाते है और उसके बाद रात को 8 बजे ही आते है। फिर मैंने घड़ी देखी तो इस समय 11 बज रहे थे, तो में खुश हो गया कि हमारे पास चुदाई का पर्याप्त समय है। अब ये सब सोच ही रहा था कि मेरा लंड खड़ा हो गया, अब में भाभी के पीछे आ गया और उनकी गांड सहलाने लगा। तो फिर भाभी ने मेरी तरफ देखा और मुस्कुरा दी, तो मैंने अपना लंड भाभी के दोनों चूतड़ों के बीच में रखकर उन्हें अपनी बाँहों में ले लिया और उनके बूब्स दबाने लगा। तो भाभी ने कहा कि थोड़ी देर रुक जाओं खाना बनाने के बाद आराम से कर लेना, लेकिन अब मुझसे कंट्रोल नहीं हो रहा था।

फिर मैंने भाभी को छोड़ दिया और उनके पीछे आकर बैठ गया और भाभी के सलवार का नाड़ा खोल दिया और उनकी गांड को पेंटी के ऊपर से ही चाटने लगा और भाभी रोटिया बनाती रही। फिर मैंने भाभी की पेंटी को भी नीचे सरका दिया, अब उसकी नंगी और सफेद गांड मेरे सामने थी। अब में अपना मुँह भाभी के दोनों चूतड़ों के बीच में ले जा कर चाटने लगा, अब मुझे कसम से बहुत मज़ा आ रहा था। फिर मैंने अपनी एक उंगली भाभी की गांड में डाल दी, तो अब भाभी मुझे मना करने लगी और मुझे हटाने लगी। लेकिन अब में कहाँ मानने वाला था, अब मैंने भाभी को ज़ोर से पकड़ा हुआ था, तो भाभी हार कर फिर से खाना बनाने लगी और में फिर से अपनी उंगली को उनकी गांड में अंदर बाहर करने लगा। फिर उसके बाद डोर बेल बजी, तो भाभी ने मुझे हटाया और अपने कपड़े ठीक किए और दरवाजा खोला तो बाहर स्कूल का चपरासी था और वो भैया के लिए खाना लेने आया था।

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फिर भाभी ने एक टिफिन में खाना पैक किया और उस चपरासी को दे दिया। फिर उस चपरासी ने बताया कि आज रात भैया नहीं आयेगे, क्योंकि वो आज रातभर स्कूल के मिड-टर्म की कॉपियां चेक करेगें, क्योंकि उन्हें कल स्टूडेंट्स को दिखाना है और वही पर सो जायेगे और कल सुबह आयेगें। अब में यह सुनकर बहुत खुश हो गया, फिर मैंने और भाभी ने एक साथ लंच किया। फिर भाभी बोली कि पहले थोड़ी देर आराम करते है, फिर उसके बाद चुदाई का कार्यक्रम शुरू करेगें क्योंकि अभी वो बहुत थकी है, तो में भी मान गया। फिर हम दोनों भाभी के बेडरूम में चले गये, अब भाभी बेड पर लेट गई और में उनके बगल में लेट गया और फिर हम बातें करने लगे, फिर भाभी को नींद आ गई और भाभी सो गई। लेकिन अब मुझे नींद कहाँ आने वाली थी, फिर में थोड़ी देर तक तो लेटा रहा उसके बाद में उठा और अपने रूम में आ गया और पढ़ने की कोशिश करने लगा। लेकिन अब मेरा मन तो भाभी की चूत और गांड में ही था, तो मेरा पढाई में कहाँ से मन लगता।

फिर करीब 20 मिनट के बाद मैंने किताब बंद की और फिर में भाभी के रूम चला गया। अब भाभी बेख़बर हो कर सो रही थी, तो में उनके बगल में लेट गया और उनके बूब्स को अपने हाथ से सहलाने लगा। अब मेरा लंड खड़ा हो गया था, फिर भाभी ने करवट ली और वो अपना मुँह दूसरी साईड में करके सो गई। अब भाभी की गांड मेरे लंड के ठीक सामने थी, तो मैंने भी अपना लंड भाभी के दोनों चूतड़ों के बीच में लगा दिया और अपना एक हाथ उनके बदन पर घुमाने लगा। फिर मैंने भाभी के सलवार का नाड़ा खोल दिया और उनकी सलवार को नीचे करने लगा, तो बड़ी मुश्किल से उनकी सलवार नीचे गई। फिर मैंने भाभी की पेंटी भी उतार दी, अब भाभी मेरे सामने बिल्कुल नंगी लेटी हुई थी और अब उनकी चमकदार गांड ठीक मेरे लंड के सामने थी। फिर में भाभी के बदन से खेलने लगा और अपना लंड उनकी गांड पर रगड़ने लगा।

फिर मैंने अपना लंड भाभी की गांड के मुँह पर रखकर एक जोरदार धक्का मारा तो मेरा लंड उनकी गांड से फिसल गय, लेकिन भाभी जाग गई और मेरी तरफ देखकर मुस्कुराकर बोली, तू नहीं सुधरेगा। फिर मैंने भाभी की टॉप और ब्रा भी उतारकर अलग कर दी। फिर भाभी ने भी अपना टॉप और ब्रा उतारने में मेरा सहयोग किया। फिर भाभी ने मेरे सारे कपड़े उतार दिए, अब हम दोनों बिल्कुल नंगे थे। अब भाभी मेरा लंड सहला रही थी और में भाभी की चूत सहला रहा था। फिर मैंने भाभी से कहा कि मुझे आपकी चूत चाटनी है, तो भाभी ने कहा कि मुझे भी तुम्हारा लंड चूसना है। फिर हम 69 पोज़िशन में आ गये, अब भाभी भी मेरा लंड बड़ी मस्ती से चूस रही थी और में भी बहुत तेज़ी से भाभी की चूत चाट रहा था, अब भाभी की चूत बिल्कुल लाल हो गई थी। फिर मैंने भाभी से बोला कि मुझे आपकी गांड भी चाटनी है, तो भाभी बोली कि नहीं जो करना है अभी चूत के साथ कर, हम गांड का खेल रात में खेलेगें क्योंकि अभी तक मेरी गांड वर्जिन है, तो मैंने कहा कि ठीक है।

फिर भाभी बोली कि अब अपना लंड मेरी चूत में डाल दो, तो में भाभी के दोनों पैरो के बीच में आ गया और अपना लंड भाभी की चूत पर रगड़ने लगा। तो फिर थोड़ी देर के बाद भाभी बोली कि बहन के लंड क्यों अपनी भाभी को तड़पा रहा है? अब अपना लंड डाल भी दे। अब भाभी के मुँह से ऐसी गाली सुनकर में भी जोश में आ गया और फिर मैंने एक जोरदार धक्का मारा तो मेरे 6 इंच के लंड का आधा भाग भाभी की चूत में अंदर चला गया। तो भाभी ने कहा कि आराम से डाल, क्या आज अपनी भाभी की चूत को फाड़ ही डालेगा क्या? तेरे भैया का तो छोटा सा है और एक ही बार में अंदर चला जाता है और इतना दर्द भी नहीं होता है। तो मैंने कहा कि लेकिन भैया तो बहुत जल्दी झड़ जाते है, तो भाभी बोली कि तुझे कैसे पता है? तो मैंने उन्हें उस दिन की चुदाई की सारी घटना बताई। तो भाभी कहने लगी कि हरामजादे तू बहुत पहले से ही अपनी भाभी पर नज़र डाले हुए है, तो मैंने मुस्करा दिया।

फिर मैंने एक जोरदार धक्का मारा तो मेरा पूरा लंड भाभी की चूत में अंदर चला गया, अब भाभी आह आह्ह्ह की आवाजो के साथ मज़े लेने लगी। फिर मैंने लगातार धक्के लगाने शुरू कर दिए, अब भाभी को भी बहुत मज़ा आ रहा था और वो आह्ह्ह और आह आह आह की आवाज़ निकाल रही थी। फिर 15 मिनट की चुदाई के बाद मैंने भाभी से कहा कि अब डॉगी स्टाइल में करते है, तो भाभी भी मान गई और बेड पर अपने घुटनों के बल आ गई। फिर मैंने 20 मिन तक इसी पोज़िशन में उनकी चुदाई की, इस दौरान भाभी 2 बार झड़ गई थी। फिर मैंने भाभी से कहा कि अब मेरा निकलने वाला है, तो भाभी ने कहा कि मेरी चूत में ही डाल दे। फिर मैंने 3-4 धक्के और तेज-तेज़ मारे और अपना सारा वीर्य भाभी की चूत में ही डाल दिया और भाभी के ऊपर ही गिर गया। अब में और भाभी कुछ देर तक उसी पोज़िशन में रहे, फिर हम दोनों बाथरूम में गये और एक दूसरे को साफ किया।

अब भाभी की चूत को देखकर मेरा लंड फिर से खड़ा हो गया था, फिर हमने बाथरूम में एक बार फिर से चुदाई की। फिर हम नाहकर ड्राईग रूम में आ गये, अब मुझे भाभी बहुत खुश नज़र आ रही थी। फिर मैंने घड़ी में देखा तो 6 बज चुके थे, फिर मैंने भाभी से रात का खाना बनवाया और फिर मैंने भी खाना बनाने में भाभी की मदद की। फिर हमने जल्दी ही खाना खा लिया और हम फिर से बेडरूम में चले गये और टी.वी देखने लगे। फिर थोड़ी देर के बाद हमने फिर से चुदाई शुरू कर दी, उस रात हमने सुबह 3 बजे तक चुदाई की और फिर सुबह 6 बजे भैया आ गये और में भैया के आने से पहले ही अपने में आ गया था ।।

6धन्यवाद …

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