मधु को जन्मदिन का उपहार


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प्रेषक : राहुल …

हैल्लो दोस्तों, आज में आप सभी कामुकता डॉट कॉम के पढ़ने वालों को अपनी एक और कहानी सुनाने जा रहा हूँ, जो कि मेरी एक और दोस्त की है, वो कॉलेज में मेरे साथ ही अपनी पढ़ाई पूरी कर रही थी। दोस्तों उन दिनों हम दोनों बहुत अच्छे दोस्त तो नहीं थे, लेकिन हमारे बीच थोड़ी सी बातचीत होने की वजह से दोस्ती जरुर थी। दोस्तों उस लड़की का नाम मधु है, मधु बहुत ही होशियार और सुंदर लड़की थी, वो एक मध्यमवर्गीय परिवार से थी, लेकिन वो क्या मस्त सुंदर थी? उसकी लम्बाई करीब 6 फुट और गोरा रंग, कसा हुआ गढिला बदन और उस पर एकदम टाईट मध्यम आकार के बूब्स, जो कि उसके शरीर के हिसाब से बहुत ही फिट थे और वो हमेशा फिट रहती थी। दोस्तों वो अक्सर चूड़ीदार सलवार सूट पहनती थी, जो कि उस पर बहुत अच्छा लगता था। फिर कॉलेज की पढ़ाई ख़त्म हुई, अब हम सभी दोस्त जिसमे लड़कियाँ और लड़के थे हम सभी अलग अलग हो गये थे। अब कोई अपने काम करने में व्यस्त हो गए, तो किसी ने शादी कर ली और अब हर कोई सेटल हो गया था, जिसकी वजह से हम सभी एक दूसरे को करीब-करीब भूल ही गये थे।

अब मेरी भी शादी हो चुकी है और में भी अपने इस जीवन में अच्छी तरह से सेट हो चुका हूँ और बड़े अच्छे से में अपने इस जीवन को चला रहा था और में अपने काम की वजह से अधिकतर समय बाहर ही रहता हूँ और फिर इसी तरह एक दिन जब में अपने शहर के स्टेशन पर ट्रेन का इन्तजार कर रहा था और मेरी वो ट्रेन थोड़ी लेट हो गई थी। अब में ऐसे ही प्लेटफार्म पर टहल रहा था कि तभी मेरी नजर एक लड़की पर पड़ी, वो लंबी सी लड़की सलवार सूट पहने हुए थी और उसके कंधे पर एक लेपटॉप लटका हुआ था। फिर मैंने उसको बहुत ध्यान से देखा तब मुझे ऐसा लगा कि कहीं वो मधु तो नहीं, क्योंकि मुझे सब कुछ बदला सा लग रहा था, लेकिन मैंने उसको यह बात पूछने की हिम्मत नहीं कि, लेकिन मेरे दिल में इच्छा थी कि में उसको एक बार बात जरुर कर लूँ और फिर में उसके पास में जाकर खड़ा हुआ और देखने लगा। फिर जब मुझे पूरी तरह से विश्वास हो गया कि यह मधु ही है तब मैंने बात करते हुए उसको पूछा क्या तुम मधु हो? तब वो कुछ देर तक तो कुछ नहीं बोली। फिर मैंने कहा कि माफ करना, मैंने आपको मधु समझ लिया और उसको यह बात कहकर में जाने लगा था।

अब वो बोली कि हाँ में मधु ही हूँ और फिर उसने मुझे पहचान लिया। फिर मैंने उसको बात कि तुम यहाँ कैसे और इतने सालों के बाद? तब उसने बताया कि में यहीं रहती हूँ। फिर मैंने उसको कहा कि यहाँ रहते हुए इतने साल में कभी तुम मुझे दिखी ही नहीं और ना ही कभी मिली? तब उसने बताया कि कॉलेज के बाद वो इंजीनियरिंग करने बाहर चली गयी थी और उसके बाद उसने शादी कर ली। अब इसी बीच हमारी ट्रेन आ गई और हम दोनों ट्रेन में चढ़ गये, फिर हम दोनों एक साथ एक ही बर्थ में बैठे थे, लेकिन वो अब चुप ही थी। फिर मैंने उसको पूछा कि अभी तुम कहाँ जा रही हो? तब उसने बताया कि में एक बहुत बड़ी प्राइवेट कंपनी में नौकरी करती हूँ और मेरा ऑफिस इंदौर में है। अब मैंने उसको पूछा कि तुम्हारा ससुराल कहाँ है? तब उसने कहा कि मेरा ससुराल नागपुर में है। फिर मैंने उसको कहा कि यार कुछ समझ नहीं आ रहा है, तुम अभी जहाँ जा रही हो इंदौर और ससुराल नागपुर और तुम्हारे पति? तब उसके चेहरे पर एक बड़ी ही उदासी सी छा गई। फिर मैंने उसका उदास उतरा हुआ चेहरा देखकर उसको पूछा कि क्या हुआ? तब उसने बताया कि शादी के एक महीने ही वो ससुराल में रही थी और फिर उसके बाद उसका तलाक हो गया था।

फिर मैंने उसके तलाक का कारण नहीं पूछा और अब उसने मुझे बताया कि वो अब यहाँ अपनी मम्मी के पास ही रहती है और इंदौर में उसकी नौकरी है और वो हर दिन ऐसे ही आतीजाती है। अब उसने मुझसे पूछा कि तुम क्या कर रहे हो? तब मैंने उसको बताया कि मेरा अपने ही परिवार का अपना काम है, तुम अच्छे से जानती हो कि मेरा शुरू से ही मन पढ़ाई में कम ही लगता था। फिर मैंने कॉलेज की पढ़ाई को खत्म करके अपना यह काम पकड़ लिया और फिर उसके बाद मैंने भी शादी कर ली। अब उसने मुझसे पूछा कि तुम अभी कहाँ जा रहे हो? तब मैंने कहा कि में भी कुछ अपने काम की वजह से इंदौर ही जा रहा हूँ है और शाम को वापस आ जाऊंगा। फिर मैंने उसके ऑफिस का पता पूछा और फिर मैंने उसको पूछा कि शाम को तुम्हारी वापसी, कौन सी ट्रेन से है? अब हम इंदौर पहुँच गये थे और फिर स्टेशन के बाहर वो एक ऑटो में बैठकर उसके ऑफिस चली गई और में अपने काम से चला गया। फिर में दिनभर ही मधु के बारे में ही सोचता रहा और जब मेरा काम खत्म हो गया तब मैंने मन ही मन में सोचा कि अब क्या किया जाए? क्या वापस चला जाऊं या फिर मधु का ट्रेन तक इन्तजार करूँ? उस समय पांच बजे थे और मधु की ट्रेन सात बजे थी।

फिर मैंने फैसला किया कि में मधु के साथ ही वापस ट्रेन से जाऊँगा, क्योंकि मुझे उसका साथ भी मिल जाएगा। फिर मैंने करीब दो घंटे तक मधु का इंतजार किया और में 6 बजे ही स्टेशन पहुँच गया और बाहर ही खड़ा होकर मधु के आने का इन्तजार करने लगा था। फिर मैंने देखा कि थोड़ी ही देर के बाद ऑटो से मधु भी आ गई, में उसके पास चला गया। अब वो मुझे दोबारा देखकर एकदम चकित रह गई और कहने लगी कि क्या बात है? तब मैंने उसको झूठ कहा कि मेरा काम भी अभी खत्म हुआ है और इसलिए मैंने सोचा कि में तुम्हारे साथ ही घर चलूँ। फिर हम दोनों प्लेटफार्म पर आ गये, लेकिन ट्रेन लेट हो गई थी, जिसकी वजह से हम दोनों ने वहीं पर नाश्ता किया और चाय पी और ऐसे ही हमारे बीच बातें होती रही, कुछ कॉलेज की, कुछ अभी की, कुछ इधर उधर की। दोस्तों उस दिन मधु ने लाल रंग का चूड़ीदार सलवार सूट पहना हुआ था, जैसा कि वो शुरू से पहनती थी। फिर कुछ देर बाद ट्रेन भी आ गई थी और हम दोनों उसमे बैठकर रास्तेभर बातें ही करते रहे और उस समय हम दोनों ने अपना अपना मोबाईल नम्बर भी एक दूसरे से ले लिया था। फिर जब हम अपने शहर पहुँचे तब तक रात के करीब दस बज चुके थे और अब हम दोनों स्टेशन से बाहर आ गए।

अब मैंने मधु से पूछा कि अब तुम अपने घर कैसे जाओगी? तब उसने कहा कि ऑटो से, वैसे में हर दिन अपनी स्कूटी को स्टेशन आनेजाने के लिए काम में लेती हूँ, लेकिन आज सुबह वो स्टार्ट नहीं हो रही थी इसलिए में उसको वहीं छोड़कर आ गई। फिर उसी समय मैंने उसको कहा कि में तुम्हें तुम्हारे घर छोड़ देता हूँ, क्योंकि पहले से ही मधु जानती थी कि मेरा घर भी उसी तरफ है, हालाँकि पहले मेरा घर है और फिर उसके बाद मधु का घर था। अब वो बोली कि हाँ ठीक है, में अपनी मोटरसाइकिल को हमेशा स्टेशन के स्टैंड पर खड़ी रखता था। फिर वो मेरे पीछे मोटरसाइकिल पर बैठ गई और रास्ते में उसने मुझे बताया कि उसका भाई और भाभी चंडीगढ़ में रहते है, उसका भाई एयरफोर्स में है और भाभी एक प्राइवेट नौकरी करती है और माँ यहाँ अकेली है। फिर मैंने उसको पूछा कि और तुम्हारे पापा? तब उसने बताया कि पिछले साल पहले उनकी मौत हो गई और अब माँ अकेली है और इसलिए भी मुझे हर दिन ऐसे ही अपनी नौकरी के लिए आनाजाना पड़ता है, यहाँ खुद का मकान है और इंदौर में रहने पर आधी तनख्वाह किराए में चली जाएगी। अब ऐसे ही उसके साथ बातें करते हुए पता ही नहीं चला बहुत जल्दी उसका घर आ भी गया।

फिर मैंने बाहर से उसको छोड़कर कहा कि अब में चलता हूँ। तभी उसने कहा कि ऐसे कैसे चले जाओगे? कुछ देर के लिए अंदर भी तो आओ। अब मैंने उसको कहा कि फिर कभी आऊंगा, अभी बहुत रात हो गई है मुझे चलना चाहिए और फिर उसने यह बात सुनकर मुस्कुराते हुए मेरी तरफ अपना एक हाथ बढ़ा दिया। फिर मैंने भी अपने हाथ को आगे बढ़ाकर उससे अपना हाथ मिलाया और फिर में वापस अपने घर आ गया। दोस्तों में अब मधु से दोस्ती बढ़ाना चाहता था, जैसा कि आप लोग जानते है कि मुझे शुरू से लड़कियों से दोस्ती करने का बड़ा शौक है और अब मुझे मधु ही वो लड़की दिख रही थी जिसके साथ में अब बड़ी ही आसानी से दोस्ती कर सकता था। अब में हर दिन जिस समय मधु का ट्रेन का टाईम होता उस समय स्टेशन पर चला जाता और या कभी उसके घर चला जाता और उसको स्टेशन पर छोड़ देता, या कभी मधु मुझे फोन करती कि आज में स्कूटी नहीं लेकर आई हूँ तुम मुझे घर छोड़ दो। फिर कुछ दिनों के बाद दिन गुजर जाने के साथ ही हमारी दोस्ती भी बहुत गहरी हो गई और अब में हर रविवार को मधु के घर जाने लगा था और फिर हम दोनों साथ में बैठकर कई घंटो तक बातें करने लगे थे। फिर जब कभी मुझे इंदौर जाना होता, तब में मधु के साथ ही जाता और हम वापस भी साथ में ही आते थे।

फिर एक दिन मैंने मधु को सुबह के समय फोन किया और उसको जन्मदिन की बधाईयाँ देने लगा, उसके बाद मैंने उसको पूछा कि आज क्या विचार है या आज भी ऑफिस जाना है? तब उसने बताया कि आज उसके ऑफिस में एक बहुत ही जरुरी मीटिंग है और मेरे ऑफिस के दोस्तों ने मीटिंग के बाद एक बहुत ही अच्छी पार्टी का बंदोबस्त किया है, इसलिए तुम भी मेरे साथ ही चलो। फिर मैंने उसको कहा कि में तुम्हारी ऑफिस की पार्टी में क्या करूँगा? तब उसने कहा कि ऑफिस की पार्टी के साथ-साथ मेरे जन्मदिन का प्रोग्राम भी है और तुम वहां पर मेरे साथ नहीं होंगे तो मुझे मज़ा कैसे आएगा? तब मैंने कहा कि में तुम्हे अभी थोड़ी देर में बताता हूँ। अब उसने कहा कि कोई बहाना नहीं चलेगा, तुम्हें मेरे साथ चलना ही है, तुम जल्दी से मुझे स्टेशन पर मिलो। फिर मैंने कहा कि हाँ ठीक है, में स्टेशन पर आता हूँ और फिर हम बात करते है। फिर में कुछ देर बाद स्टेशन पर पहुँच गया और अभी ट्रेन के आने में बहुत समय बचा था, मधु ने मुझसे कहा कि तुम भी मेरे साथ में चलो। अब मैंने उसको पूछा कि वो तुम्हारी पार्टी कब है? तब उसने कहा कि आज रात को।

फिर मैंने उसको कहा कि जब पार्टी रात को है तो में अभी से तुम्हारे साथ वहां पर जाकर क्या करूँगा? और फिर मैंने उसको कहा कि ठीक है में शाम तक जरुर आ जाऊंगा और फिर मैंने उसको पूछा कि और फिर वहां से वापसी का क्या है? तब उसने कहा कि में आज रात वहीं अपनी एक दोस्त के घर रुक जाउंगी। फिर मैंने उसको कहा कि हाँ ठीक है, तो में रात की ट्रेन से वापस आ जाऊंगा। फिर में शाम को इंदौर पहुँच गया और फिर मैंने मधु को फोन करके पूछा कि अब मुझे यहाँ से कहाँ आना है? तब उसने मुझे बताया कि होटल में और फिर में उसकी बताई उस होटल में पहुँच गया। अब मैंने पहुंचकर देखा कि मधु अपने दोस्तों के साथ वहाँ पर पहले से थी और वो मेरा दरवाजे पर खड़ी इन्तजार कर रही थी। दोस्तों उस समय मधु ने जींस और टॉप पहना था और जब मैंने सुबह उसको देखा था, तब तो वो सूट में गई थी। दोस्तों वो उस समय सफेद रंग की जींस और सफेद ही रंग का टॉप पहने ठी उसमे वो बहुत ही सेक्सी लग रही थी, उसके उस टॉप में उसके बूब्स तने हुए लग रहे थे और बड़े आकार के गले की वजह से उसके उभरे हुए बूब्स मुझे बड़े आकर्षित सुंदर नजर आ रहे थे।

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फिर उसने मुझसे हाथ मिलाकर मेरा स्वागत किया और फिर हम होटल के अंदर आ गये, वहाँ एक छोटा सा कमरा था जो अलग पार्टी के लिए ही था। अब मैंने देखा कि वहाँ पर मधु के कुछ दोस्त थे जिसमे तीन लड़के और तीन लड़कियां, थी जो बहुत ही सुंदर थी और जबरदस्त सेक्सी बदन वाली थी। अब मेरा तो मन उस सुंदर द्रश्य को देखकर हुआ कि आज की रात में इन सभी हसिनाओं के साथ अपनी पूरी रात यहीं पर गुजार दूँ और एक एक को बारी बारी से चोदकर इनको पूरी तरह से संतुष्ट कर दूँ। अब उस कमरे में बड़ा ही तेज संगीत बज रहा था और धीमी लाईट की रौशनी चार चाँद लगा रही थी। फिर मधु ने अपने सभी दोस्तों से मुझे मिलवाया, मैंने देखा कि वो सभी लड़के बियर पी रहे थे और मुझे भी उन्होंने पीने के लिए कहा और जबरदस्ती बैठा लिया, लेकिन तब मैंने उनको साफ मना नहीं किया और उनके साथ ही बैठा रहा, लेकिन मेरा मन उन लोगों में नहीं लग रहा था। अब मेरा मन मधु की तरफ था और मेरी नजर भी उसी पर थी वो बहुत सुंदर सेक्सी नजर आ रही थी और बार बार हम दोनों एक दूसरे को देखकर मुस्कुरा रहे थे।

फिर कुछ देर बाद मधु ने केक को काटकर शेम्पियन की बोतल को खोल दिया और फिर सभी लोगों ने थोड़ी-थोड़ी पी, उसके बाद दोबारा से संगीत शुरू हो गया और सभी लोग नाचने लगे थे। अब मैंने देखा कि मधु भी उन लोगों के साथ पी रही थी और में वो सब देखकर बड़ा ही हैरान रह गया था, लेकिन में उसको कुछ भी नहीं बोला और वो पार्टी वैसे ही चलती रही। फिर कुछ देर बाद धीरे-धीरे एक-एक करके सभी लोग जाने लगे थे। अब सबसे आखरी में मधु, में और उसकी एक दोस्त जिसके घर मधु को जाना था, बस हम तीनो ही बचे थे। फिर मैंने कहा कि अब रात बहुत हो चुकी है तुम भी जाओ और में भी अब चलता हूँ। तभी मैंने देखा कि अब मधु ठीक से बात भी नहीं कर पा रही थी और ना ही वो ठीक से चल पा रही थी। फिर मधु की दोस्त ने मुझसे कहा कि इसको किसी ने कॉकटेल पीला दिया है और उस वजह से इसको अब नशा चढ़ गया है। अब में इसको इस हालत में अपने घर भी नहीं ले जा सकती हूँ, क्योंकि घर में मेरे परिवार के लोग है और वो सभी इन कामों से बहुत नफरत करते है। फिर मैंने उसको कहा कि वो सब तो ठीक है, लेकिन अब इसका क्या होगा?

फिर मैंने उसको कहा कि ठीक है में इसको अपने साथ वापस ले जाता हूँ, लेकिन तभी मुझे ध्यान आया और मैंने उस लड़की को कहा कि इस हालत में हम दोनों मधु के घर गये तो में इसकी मम्मी को क्या जवाब दूंगा? फिर मैंने उसकी दोस्त से पूछा कि अब इसका क्या किया जाए? तब उसने कहा कि इसको यहीं इसी होटल में एक कमरा लेकर रात को सुला देते है और सुबह आकार इसको सम्भाल लेंगे। फिर मैंने कहा कि हाँ ठीक है ऐसा करना एकदम सही काम रहेगा, वो बात सोचकर हमने नीचे जाकर एक कमरा किराए से बस उस रात के लिए ले लिया और फिर हम दोनों मधु को सहारा देकर उसी हालत में उस कमरे में ले गये। फिर उसी समय उसकी दोस्त ने मुझसे कहा कि अब वो जा रही है, रात बहुत हो गई है और मुझे अपने घर वालों को देर से आने का जवाब भी देना पड़ेगा। अब मैंने उसको कहा कि हाँ ठीक है। अब मुझे यह सब करना भी एक मुसीबत सा लगने लगा था और में मन ही मन में सोच रहा था कि में अब क्या करूँ? मैंने देखा कि मधु नशे की हालत में पलंग पर पड़ी थी और वो हर कुछ बातें बड़बड़ा रही थी। फिर मैंने सोचा कि में इसको इस हालत में कैसे अकेला छोड़ दूँ?

अब मैंने अपने घर फोन करके कह दिया कि में किसी काम की वजह से अटक गया हूँ और में कल सुबह तक वापस आ जाऊंगा। फिर कुछ देर बाद मधु अचानक से उठ गई और वो उल्टी जैसा करने लगी, तब में तुरंत उसको अपनी बाहों का सहारा देकर पकड़कर बाथरूम ले गया और फिर उसने बाथरूम में जाते ही जमकर उल्टियाँ करना शुरू कर दिया। अब में उसकी वो हालत देखकर बिल्कुल घबरा सा गया था और मैंने देखा कि उन उल्टियों में मधु का टॉप भी पूरा खराब हो चुका था। फिर में मधु को वापस कमरे में लेकर आ गया और मैंने ध्यान से देखा तो मधु का वो टॉप पूरा खराब हो गया। अब मैंने सोचा कि में अब क्या करूँ? और फिर मैंने मधु का टॉप उतार दिया और देखा कि वो सिर्फ़ काले रंग की ब्रा और जींस में थी। फिर मैंने उसके बाद मधु का मुँह साफ करवाया और उसको वापस पलंग पर लेटा दिया। अब मेरे सामने वो द्रश्य था जिसकी वजह से में अपने पूरे होश खो बैठा था, उस काले रंग की ब्रा में मधु को देखकर मेरा लंड जोश में आकर तनकर खड़ा हो गया था, लेकिन में मधु के साथ उस समय ऐसा कुछ भी नहीं करना चाहता था।

फिर में फ्रेश होकर आया और अब मैंने होटल का ही गाउन लपेट लिया और में सोने लगा था, लेकिन अब मेरे पास में लेटी हुई आधी नंगी मधु को देखकर मुझे नींद नहीं आ रही थी। अब में हिम्मत करके धीरे से मधु के बूब्स को सहलाने लगा था, लेकिन उसकी तरह से कोई भी विरोध नहीं था, शायद वो विरोध करने की स्थिति में ही नहीं थी। फिर मैंने मन ही मन में सोचा कि में अब मधु की जींस को भी उतार देता हूँ और देखता हूँ कि वो कैसी लगती है? और फिर मैंने उसकी जींस को भी उतार दिया। अब मैंने देखा कि उसने पेंटी भी काले रंग की पहनी हुई थी और उसमे वो बहुत ही सेक्सी लग रही थी। फिर कुछ देर बाद मेरा मन होने लगा कि में अब मधु को पूरा नंगा कर दूँ, लेकिन में डरता था कि कहीं वो चिल्लाने लग जाए तो क्या होगा? अब में वो बात सोचकर मधु के पास ही लेटकर उसके बूब्स को बारी-बारी से एक एक करके दबाने लगा था, जिसकी वजह से वो अब थोड़ी सी कसमसा रही थी। फिर में उसके और भी पास हो गया और मैंने अपना पूरा शरीर उसके बदन से बिल्कुल सटा दिया था और फिर में उसके नरम गुलाबी होंठो को चूमने लगा और फिर उसके बाद में होंठो को लगातार चूसने लगा था और उसके बूब्स को भी दबा रहा था।

फिर मैंने हिम्मत करके मधु की ब्रा को खोल दिया जिसकी वजह से अब उसके तने हुए मध्यम आकार के बूब्स पहली बार मेरे सामने पूरे नंगे थे। अब मैंने उसके बूब्स को चूसना शुरू किया, मधु अब बिल्कुल बेहोश नहीं थी उसको होश आ चुका था और अब वो समझ रही थी कि उसके साथ क्या हो रहा है? फिर में उसके पूरे बदन को चूमने लगा और धीरे धीरे नीचे आने लगा था। अब में मधु की गोरी गदराई हुई जांघो को चूम रहा था और फिर मैंने बिना देर किए अब उसकी पेंटी को भी उतार दिया, जिसकी वजह से अब मधु मेरे सामने पूरी नंगी थी। अब मैंने अपनी चकित नजरों से देखा कि उसकी चूत बिल्कुल साफ बिना बालों की एकदम चिकनी चूत थी और देखकर ऐसा लगा कि जैसे उसने आज ही अपनी चूत के बालों को साफ किया है। अब में उस मौके का पूरा पूरा फायदा उठाना चाहता था और फिर मैंने पूरी तरह से जोश में आकर मधु के दोनों पैरों को थोड़ा फैला दिया। अब में अपना तनकर खड़ा लंड मधु की चिकनी चूत में डालने की कोशिश करने लगा था। अब मुझे थोड़ी सी मुश्किल हो रही थी, क्योंकि मधु की तरफ से कोई भी साथ मुझे नहीं मिल रहा था, लेकिन फिर भी धीरे-धीरे डालते हुए करीब-करीब मैंने अपना पूरा लंड अंदर मधु की चूत के छेद में डाल दिया था।

अब मधु ने होश में आकर अपनी दोनों आंखे खोलकर मुझसे कहा कि जान तुम यह क्या कर रहे हो?  प्लीज़ अब छोड़ भी दो, लेकिन में उसकी बातों पर ध्यान दिए बिना ही आगे बढ़ता गया, लेकिन मुझे अब भी मधु के साथ बिना वो मज़ा नहीं आ रहा था। फिर मैंने अपनी गति को थोड़ा सा बढ़ा दिया और थोड़ी देर के बाद में झड़ गया। अब मैंने तुरंत ही उसकी चूत से अपना लंड बाहर निकाल लिया, उसके बाद मैंने सोचा कि कहीं में चूत के अंदर ही झड़ गया तो कोई गड़बड़ ना हो जाए। फिर में तुरंत उठकर बाथरूम जाकर वापस कमरे में आ गया और देखा कि मधु अभी तक भी वैसी ही नंगी लेटी हुई थी। फिर में उसके पास में लेट गया और फिर मुझे नींद आ गई। फिर में सुबह के करीब पांच बजे उठा और मैंने देखा कि अब तक मधु की भी नींद खुल चुकी थी और फिर उसने अपनी वो हालत देखी, तब उसको तुरंत ही सब कुछ अच्छे से समझ में आ गया। अब उसने मुझे अपनी शिकायत भरी नजर से देखा और तब मैंने उसको प्यार से समझाकर कहा कि तुम रात को बहुत नशे में थी और मैंने तुम्हारे साथ ऐसा कुछ नहीं किया। अब भी वो पूरी तरह से नंगी थी और बहुत शरमा रही थी, लेकिन मैंने उसको कहा कि अब में तुम्हारे साथ कुछ करना चाहता हूँ।

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फिर उसी समय मधु ने तुरंत ही मना करते हुए कहा कि कोई जरूरत नहीं है, मुझे सब पता है कि कल रात को मेरे साथ क्या-क्या हुआ है? फिर मैंने उसको कहा कि जब तुम्हे सब कुछ पता है तो उस समय मना क्यों नहीं किया? और मैंने यह बात कहते हुए मधु को तुरंत पकड़ लिया। अब में भी बिना कपड़ो के था और वो भी मेरे सामने पूरी नंगी थी और अब में उसके होंठो को चूमने साथ ही अपने एक हाथ से उसके पूरे गोरे बदन को सहलाने लगा था। फिर ज़ोर-ज़ोर से में उसके बूब्स की निप्पल को अपने मुहं में भरकर चूसने लगा था। अब मैंने देखा कि जोश मज़े मस्ती की वजह से मधु पागल हुए जा रही थी उसके निप्पल तनकर खड़े थे और मुझे वो अपनी तरफ खीच रही थी और मेरे बालों को पकड़कर अपनी तरफ खींच रही थी। अब में भी उसको पागलों की तरह चूमने लगा था और उसके पूरे बदन को चाटने लगा था। दोस्तों इतना सब होने की वजह से मधु पूरी तरह से गरम हो चुकी थी, उसकी साँसे बड़ी तेज होती जा रही थी और वो मज़े मस्ती की वजह से झटपटा रही थी। फिर मैंने सोचा कि इसको अब ज्यादा तड़पाना नहीं चाहिए और फिर मैंने अपना खड़ा लंड उसकी चिकनी रसभरी चूत में दोबारा से डाल दिया।

अब मधु मुझे अपनी बहुत ही सेक्सी नजरों से देख रही थी और उसकी आँखों में एक शरारत भी थी। तभी अचानक से कुछ देर बाद उसने मुझे नीचे कर दिया और वो खुद मेरे ऊपर आ गई और वो अपने दोनों पैरों को पूरा फैलाकर मेरे ऊपर चढ़ गई और अब वो मुझे चोदने लगी थी। फिर कुछ देर के बाद उसने मुझसे पूछा कि अब तुम्हे कैसा लग रहा है? तब मैंने उसको कहा कि जान मुझे बहुत मस्त मज़ा आ रहा है। फिर उसने हंसते हुए मुझसे कहा कि कल रात को तुम इसी तरह से मेरे ऊपर सवार थे ना? अब वो वहीं पर बैठ गई। दोस्तों मेरा लंड अभी भी उसकी चूत में था और अब वो खड़े लंड के ऊपर उछलते हुए घुड़सवारी का असली मज़ा लेने लगी थी और अब मुझे भी उसके साथ वो सब करते हुए बहुत मस्त मज़ा आ रहा था। अब में लगातार मधु के बूब्स को मसल रहा था और वो अपनी उसी गति से उछलते हुए अब अपनी मज़िल की तरफ बढ़ रही थी और फिर कुछ देर के बाद वो मेरे ऊपर गिर गई और फिर मैंने झटके से उसको नीचे किया और उसके में तुरंत ऊपर चढ़कर उसकी चुदाई करने लगा था और अब में ज़ोर-ज़ोर से धक्के मारने लगा था।

अब वो दर्द की वजह से चिल्ला रही थी और मुझसे कहने लगी कि प्लीज जल्दी से करो ऊईईईईई माँ मर गई ऊफफ्फ्फ्फ़ अब जल्दी करो आह्ह्ह मुझे बहुत दर्द हो रहा है, लेकिन में उसकी सभी बातों को अनसुना करते हुए अपना काम करता रहा और में जोश में आकर लगातार धक्के देकर उसकी चुदाई करता रहा। फिर कुछ देर बाद ही में भी झड़ गया और इस बार भी मैंने आखरी समय पर अपना लंड उसकी चूत से बाहर निकाल लिया और में तुरंत उठकर सीधा बाथरूम में जाकर घुस गया और फिर जब में वापस लौटा, तब मैंने देखा कि मधु मेरी तरफ देखकर बड़ी ही मुस्कुरा रही थी। अब उसने मेरे पास जाते ही मुझसे कहा कि यार तुमने ऐसा क्यों किया? तब मैंने उसको कहा कि यार होना था वो तो अब सब हो गया, अब तुम सोचकर क्या करोगी? अब उसको अपने उन दोस्तों पर बहुत गुस्सा आ रहा था, जिन्होंने उसको शराब पिलाई थी और फिर हम दोनों नहाधोकर तैयार होकर साथ ही वापस अपने शहर आ गये, लेकिन उस दिन के बाद हमारे बीच दोस्ती के सिवाए यह और एक नया रिश्ता बन गया था। अब मधु आज भी यहीं रहती है और आज भी हमारे बीच यह सब रिश्ते वैसे ही बरकरार है।

अब जब कभी भी उसकी मम्मी कहीं बाहर जाती है, तब में उसके कहने पर उसके घर में ही जाकर उसकी चुदाई करता हूँ और हम दोनों एक दूसरे का साथ देते हुए बड़े मस्त मज़े करते है। दोस्तों यह था, मेरी दोस्त मधु के साथ उसकी पहली चुदाई का सच उसका जन्मदिन का उपहार, जिसके बाद हम दोनों का यह जीवन अब बड़े मज़े से हंसी खुशी बीत रहा है और अब में उम्मीद करता हूँ कि सभी पढ़ने वालों को जरुर मेरा यह अनुभव पसंद आएगा ।।

धन्यवाद …

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