माँ को लंड पर नचाने की रिश्वत


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प्रेषक : रामजी …

हैल्लो दोस्तों, में आज आप सभी लोगो को अपनी जिंदगी की एक सच्ची घटना सुना रहा हूँ जिसको में बहुत समय से आप लोगों तक लाने के बारे में सोच रहा था, लेकिन आज बहुत हिम्मत करके ले आया और आज सुनाने जा रहा हूँ। वैसे में पिछले कुछ सालों से कामुकता डॉट कॉम की सेक्सी कहानियाँ पढ़ता आ रहा हूँ, जिनको पढ़कर मुझे अपनी कहानी लिखकर आप तक पहुँचाने की हिम्मत मिली। अब में कहानी शुरू करने से पहले अपनी माँ के बारे में बताता हूँ। दोस्तों मेरी माँ बहुत ही सेक्सी थी और उसका बदन, फिगर बहुत ही आकर्षक 38-30-40 था। अब मुझे भी जवानी का नशा छाने लगा था और में भी लड़कियों की तरफ आकर्षित होता था में अपने घर में अपनी माँ को भी देखता था और उनका उभरा हुआ, सुडोल बदन बड़े बड़े बूब्स मस्त थे और जब भी वो चलती थी तो उनके बूब्स और कूल्हों को हिलते हुए देखकर बड़ा मज़ा आता था।

दोस्तों मेरी माँ जब साड़ी पहनकर चलती तब उसके बड़े बड़े गोल गोल तरबूज से कूल्हे मटकते थे, जिनको देखकर में पागल होता था और में हमेशा उनके बारे में सोचता था। दोस्तों मेरी माँ दिखने में बहुत ज़्यादा सुंदर थी और कई बार तो मेरे पापा उनको चिढाते भी थे कि क्या कहर बरसा रही हो जानेमन और क्या तुम्हे बाहर कोई देखकर परेशान तो नहीं करता, तुम कहो तो में तुम्हारे साथ यहीं पर रहा करूँ? तो वो उनको डांट देती थी उनके लंबे लंबे बाल काली काली बड़ी आँखे काजल लगाने के बाद तो वो और भी सुंदर दिखती, उनकी लम्बाई भी अच्छी होने की वजह से उनका मोटापा नज़र नहीं आता था। दोस्तों कई बार छाती से उनका आँचल सरकने पर मैंने उनके उभरे हुए गोरे बूब्स की गोलाईयाँ देखी, जिसकी वजह से मेरे पूरे बदन में एक अजीब सी सनसनी होती थी।

एक बार मैंने बाथरूम के एक छोटे से छेद से माँ को नहाते हुए देखा, जब वो अपनी ब्रा उतारकर नंगी खड़ी थी और बहुत ही सेक्सी लग रही थी। फिर मैंने देखा कि माँ के बूब्स बड़े आकार के और गोलाइयाँ लिए हुए थे और फिर वो अपने बूब्स को अपने ही हाथों से ज़ोर से दबा दबाकर मज़े ले रही थी, जिसको देखकर मेरे बदन में सनसनी हो रही थी। एक बार रात को मैंने माँ के साथ पापा को सेक्स करते हुए देखा, तो उस दिन से मेरा लंड माँ को देखकर उनके बारे में सोचने से ही खड़ा हो जाता था और में सोचता था कि में भी अपनी माँ के साथ ऐसा ही करूँ। फिर टीवी पर मैंने एक बार देर रात को एक फिल्म भी देखी थी और में हमेशा माँ के सेक्सी बदन के बारे में सोचता था, एक बार पापा कोई काम से दो दिनों के लिए बाहर चले गये, जिसकी वजह से अब घर पर में और मेरी माँ अकेले ही थे। उस दिन में माँ के कूल्हों को देखता रहा कि वो कैसे उनके कूल्हें मटकाती है? और मौका लगाने पर बूब्स को भी देखता, मैंने एक दो बार माँ से चिपकने और उनको धक्के देने की कोशिश भी की तो माँ हंस देती। अब में अपनी माँ की तरफ बहुत आकर्षित हो रहा था और में माँ के बूब्स, जांघे, कूल्हें और उनकी चूत को चोदने के लिए पागलों की तरह उत्तेजित हो रहा था। एक दिन रात को टीवी पर एक सेक्सी फिल्म आ रही थी और उसमें एक बलात्कार का द्रश्य था और वो बड़ा लंबा था, करीब बीस मिनट से ज़्यादा ही दिखाया था और उसमे बलात्कार को पूरी तरह दिखाया गया था कि गुंडा कैसे हेरोईन के कपड़े एक एक करके ज़ोर जबरदस्ती करके उतार रहा था और उस लड़की ने बहुत भाग दौड़ विरोध किया उसके बावजूद भी उसका बलात्कार कर दिया और उसने अपनी काम वासना को पूरा किया था। में इससे बहुत ही चकित हो गया था और तभी मैंने देखा कि मेरी माँ बाथरूम से नहाकर अपने बेडरूम में सिर्फ़ गाउन पहनकर चली गई और वो गाउन उनकी गांड के बीच की दरार में फँसा हुआ था, जिसे देखकर मुझे और सेक्स इच्छा बढ़ गयी और माँ का वो भीगा हुआ बदन मुझे बड़ा ही सेक्सी लग रहा था। फिर वो अपने रूम में चली गयी और वो मुझसे बोली कि तुम लाइट को बंद करके सो जाना, लेकिन मेरी आखों के सामने तो अब भी वो बलात्कार का द्रश्य ही घूम रहा था। फिर मैंने सोचा कि आज माँ के साथ ऐसे ही करके मज़ा लिया जाए और मेरे दिमाग़ में शैतानी और सेक्स का भूत सवार हो गया जिसकी वजह से अब में सोच रहा था कि माँ सो जाए तो में आगे कुछ करूँ, जब बहुत देर हो गयी और मुझे लगा कि अब माँ सो गयी होगी। फिर मैंने भी सभी लाइट को बंद किया और में माँ के रूम में चला गया और मैंने उस फिल्म की तरह एक बड़ी रस्सी भी अपने साथ रख ली, ताकि में माँ को उस द्रश्य की तरह बाँध दूँ, मैंने बेडरूम का दरवाजा बंद कर दिया, जिससे आवाज़ बाहर नहीं जाए और सभी खिड़कियाँ भी पहले से ही बंद थी, क्योंकि अंदर ए.सी. चल रहा था।

अब में माँ को सोते हुए देख रहा था रूम में लाल रंग का छोटा बल्ब जल रहा था, जिसकी रोशनी में सब कुछ साफ दिख रहा था और गहरी नींद में सोते समय माँ का गाउन कुछ ऊपर उठा हुआ था जिससे उनकी गोरी गोरी सेक्सी जांघे मुझे साफ दिख रही थी और जब वो सांस ले रही थी तो उनके बूब्स ऊपर नीचे उठ रहे थे, जिसकी वजह से उनके बूब्स और भी ज्यादा सेक्सी लग रहे थे। अब में माँ के पास में बेड पर जाकर लेट गया और सोचने लगा कि कैसे क्या करूं? मैंने धीरे से माँ के ऊपर अपना एक हाथ रख दिया और बूब्स को सहलाया जिसकी वजह से मेरे बदन में करंट सा लगने लगा और माँ ने कुछ देर बाद मेरा हाथ हटा दिया। फिर में वापस नींद का बहाना करके में के ऊपर पैर रखकर सोने लगा और उनसे एकदम चिपक गया। फिर मैंने उनका गाउन थोड़ा और ऊपर कर दिया, जिसकी वजह से वो अब उनकी जाँघो से ऊपर था। फिर मैंने अपने एक हाथ को एक बार फिर से उनके बूब्स पर रख दिया और गाउन का एक बटन भी खोल दिया, तभी माँ की नींद खुली तो उन्होंने पूछा क्या हुआ? और उन्होंने मुझे अपने से दूर कर दिया, लेकिन में फिर से उनसे चिपक गया और बोला कि मुझे तुम्हारे साथ सोना है और मैंने उनके बूब्स को भी ज़ोर से दबा दिया, उसके बाद में उनके गाउन को और भी ऊपर करने लगा।

तभी वो जल्दी से उठी और बोली कि यह क्या कर रहे हो? मैंने कहा कि कुछ नहीं, जो सब करते है, माँ ने अपने गाउन को नीचे किया और बोली तुम यहाँ पर क्या कर रहे हो? तो में हंसते हुए बोला कि वही जो एक आदमी को एक औरत के साथ करना चाहिए और तुम जैसे पापा के साथ मस्ती करती हो। अब माँ बोली कि नहीं यह सब ग़लत है, तो में बोला कि क्या ग़लत है और क्या सही यह मुझे ना बताओ, अब बस चुपचाप तैयार हो जाओ, पापा के साथ भी रोज करती हो तब तुम्हे कुछ नहीं होता और आज में तुम्हारे साथ मज़ा लूँगा और में जैसा कहता हूँ तुम वैसा करती जाओ समझी। फिर मेरे मुहं से ऐसे शब्द सुनकर माँ तो बिल्कुल डर गई और माँ बोली कि तुम मेरे बेटे हो और में तुम्हारी माँ हूँ। यह काम माँ बेटे के बीच में नहीं हो सकता, जब तुम बड़े हो जाओगे तब तुम्हारी शादी होगी और तब यह सब तुम्हे मालूम होगा, यह गंदी बात है। फिर मैंने कहा कि में आज करूँगा और फिर मैंने माँ को बेड पर धक्का देकर लेटा दिया और माँ अपने पैरों को खींचने लगी, तभी में माँ के ऊपर चढ़कर लेट गया और उनको अपनी बाहों में भर लिया।

अब वो एक बार फिर से मुझे अपने ऊपर से उतारकर अलग हो गई और मेरे ऊपर भी अब पूरा जोश आ गया और मैंने उनके दोनों पैरों को खींचकर बेड पर सीधा लेटा दिया, लेकिन वो अब विरोध करने लगी थी और में उनके ऊपर चढ़कर बैठा हुआ था और वो अपने आपको मेरे चंगुल से छुड़ाने के लिए हर एक कोशिश करने लगी, लेकिन उनकी वो हर कोशिश नाकाम हो रही थी। फिर मैंने उनके नाइट गाउन को थोड़ा ऊपर करने के बाद पैरों पर बैठ गया और उनके नाइट गाउन को ऊपर उठाने लगा। उधर माँ विरोध करने लगी और इस तरह से उनके विरोध करने से मेरे ऊपर कोई असर नहीं पड़ रहा था, क्योंकि में भी आज़ अपना काम पूरा करना चाहता था। अब मैंने उनके नाइट गाउन के बटन खोले तो विरोध करने की वजह से उनके बटन टूट गये और ऊपर से गर्दन के पास से वो गाउन फट गया। वो मुझसे बड़ी थी इसलिए उनमे ताक़त भी ज़्यादा थी और उन्होंने मुझे धक्का दे दिया। फिर में बेड से नीचे गिर गया और मुझे चोट तो नहीं आई थी, लेकिन में नाटक करने लगा और तब वो घबराकर मेरे पास आई और मुझे देखने लगी और बोली कि ऐसे बुरे काम का यही फल होता है। फिर मौका देखकर नींद का बहाना बनाकर मैंने उसको अपनी बाहों में बाँध लिया और अपनी छाती से पूरी ताक़त से भींच लिया। फिर जैसे ही वो चिल्लाने लगी तो मैंने अपने होंठ से उनके होंठ बंद कर लिए और चूसने लगा। वो बुरी तरह से छटपटा रही थी और मुझसे छूटने की पूरी कोशिश कर रही थी। फिर मैंने अपना पूरा बदन उन पर रख दिया और उनकी बड़े से बूब्स को दबाने लगा। कुछ देर उनके होंठ चूसने के बाद जब में थक गया तो मैंने उनके होंठ छोड़ दिए, लेकिन मुझे बहुत ही आनंद मिल रहा था और में साथ में डर भी रहा था।

तभी उन्होंने अचानक मुझे ज़ोर से एक तमाचा मेरे गाल पर मारा और वो मुझसे बोली कि बेशर्म नहीं आती क्या? और अब मुझे भी गुस्सा आ गया और मैंने उनका गाउन उतारकर अलग कर दिया जो बहुत विरोध के कारण चर्रर्ररर की आवाज़ के साथ फट गया था। वो अब सिर्फ़ ब्रा और पेंटी में थी और वो दूर जाकर बेड के एक कोने में खड़ी हो गयी और वो उस समय क्या मस्त सेक्सी लग रही थी? उनके बड़े बड़े बूब्स ब्रा से बाहर आने को तड़प रहे थे और उनकी गोरे गोरे पैर बहुत सेक्सी लग रहे थे और इस तरह से उनके विरोध करने से मेरे ऊपर कोई असर नहीं पड़ रहा था। अब वो चिल्लाई बोली कि तू अपनी माँ के साथ ज़बरदस्ती कर रहा है, कमीने तुझे बहुत पाप लगेगा, छोड़ दे मुझे भगवान तुझे कभी भी माफ़ नहीं करेगा, प्लीज छोड़ दे। तब मैंने कहा कि तुम राज़ी हो जाओ ना, में कोई भी ज़बरदस्ती नहीं करूँगा और हम मिलकर सेक्स का आनंद लेंगे, प्लीज़ तुम्हारे साथ में पापा की तरह सेक्स का खेल खेलने के लिए मेरा मन बहुत तड़प रहा है और मैंने तुम दोनों को सेक्स का मज़ा लेते हुए देखा है, प्लीज़ मुझे अब ज्यादा ना तड़पाओ और तुम मेरे साथ क्यों नहीं कर सकती? मैंने तो तुम्हारे बूब्स बचपन में बहुत बार चूसे है और मेरा यह सारा शरीर भी तो तुम्हारी इस सुंदर चूत से ही तो बाहर आया है तो शर्म किस बात की? में अब उनकी तरफ बढ़ा और मैंने उनके बूब्स को दबा दिए।

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दोस्तों माँ क्योंकि मुझसे कुछ तगड़ी थी और उन्होंने मुझे पकड़कर पलंग पर गिरा दिया और कमरे में पड़ी उस रस्सी से बाँध दिया, लेकिन जल्दी में वो ठीक तरह से बँधी नहीं थी इसलिए मेरे हाथ कुछ ही देर बाद खुल गए। अब तो में भी पूरे जोश में आ गया और मैंने उनकी ब्रा को एक झटके में खोल दिया जिसकी वजह से उनके बूब्स बाहर उछलकर आ गये, वाह क्या बड़े बूब्स थे? उनको देखकर मज़ा आ गया और आज आपने इनके दर्शन कराए है, बचपन में दूध भी पिलाया था, प्लीज आज एक बार फिर से पीने दो ना मेरी डार्लिंग माँ प्लीज। माँ अब फिर से बेड के एक कोने में खड़ी होकर अपने दोनों हाथों से दोनों बूब्स को ढककर खड़ी थी और मैंने उनको बेड पर पटक दिया और उन पर चड़ गया। मुझमें सेक्स की ताक़त आ गयी और में उनके पैरों पर चड़कर बैठ गया में बोला कि अब बोल क्या करेगी? मेरी बात मान जा में यह बात किसी से नहीं कहूँगा और में अपने हाथों को उनके पेट पर फेरने लगा और बूब्स को दबाकर मज़ा ले रहा था। बूब्स को दबाने पर वो ज़ोर की चीख मार रही थी और उनके दोनों बूब्स को जो कि बिल्कुल ही तने हुए थे, में उनको चूसने के लिए उनके ऊपर लेट गया और मैंने उनके बड़े आकार के बूब्स को अपने मुहं में ले लिया और उनके दूध को पीने का आनंद लेने लगा और में उसकी पेंटी को जांघों से सरकाकर नीचे की तरफ करने लगा। वो जिसकी वजह से वो बुरी तरह से मचलने लगी, लेकिन वो ज़्यादा कुछ कर नहीं कर रही थी। दोस्तों ये कहानी आप कामुकता डॉट कॉम पर पड़ रहे है।

फिर मैंने अब तक करीब उसकी पेंटी को जांघों से पूरी तरह से हटा दिया था और अब उनकी गुलाबी चूत मुझे साफ नज़र आ रही थी और उस पर काले काले बाल बहुत सुंदर लग रहे थे। मैंने अपना एक हाथ उसकी चूत पर रख दिया और तब महसूस किया कि उसकी चूत बहुत गरम हो चुकी थी और वो अपने पैरों को एक दूसरे के पास करके चूत को छुपाने की कोशिश कर रही थी, लेकिन उसका बस नहीं चल पा रहा था। फिर वो कहने लगी कि कुत्ते कमीने तुझे पाप लगेगा छोड़ दे मुझे में एक पतिव्रता औरत हूँ और भगवान तुझे कभी भी माफ़ नहीं करेगा प्लीज छोड़ दे मुझे हरामी। दोस्तों जब मैंने देखा कि वो तब भी चिल्ला रही थी तो मैंने एक बार फिर से उसके होंठो को अपने होठों से भर लिया और चूसने लगा। उसको अपनी बाहों में लेकर लेट गया जिसकी वजह से अब मेरा वजन पूरी तरह से उसके बूब्स पर आ गया था वो आअह्ह्ह्हहहह उफफ्फ्फ्फ़ कर रही थी और गिड़गिड़ा भी रही थी कि प्लीज बेटा मुझे अब छोड़ दो, में तेरे आगे हाथ जोड़ती हूँ, लेकिन मेरे सर पर चुदाई का जुनून चढ़ा हुआ था, इसलिए मैंने बिना कुछ सुने अपना एक हाथ उसके बड़े बड़े बूब्स पर रख दिया और में बड़ी बेरहमी से दबाए जा रहा था।

फिर उनके मुहं से आहह्ह्ह्हह उूफफफ्फ़ की आवाज निकल पड़ी और में उनके बूब्स को दबाता रहा, जिसकी वजह से उनकी चीखने की आवाजें ज्यादा तेज़ होती जा रही थी। तभी मैंने अपनी अंडरवियर को उतारकर अपना लंड उसकी जाँघो और चूत पर फेरने लगा तभी अचानक से उसने मेरे लंड को अपनी जाँघो के बीच में लेकर बहुत ज़ोर से दबा दिया, जिसकी वजह से दर्द की एक तेज़ लहर मेरे बदन में उठती चली गयी और मेरा गुस्सा एक बार फिर से भड़क गया। फिर में अपने लंड को उसकी जाँघो के बीच से छुड़ाकर सहलाने लगा और उससे बोला कि मान जाओ और उसके बूब्स के निप्पल को ज़ोर से दबा दिया और दर्द की वजह से माँ चीख पड़ी। फिर मैंने कहा क्यों अब आया मस्त मज़ा? अब चुपचाप चुदाई करवा ले वरना इस गोरे बदन में कई खरोंच आ जाएगी, क्योंकि आज तो में तेरी चुदाई जरुर करूँगा और अब मुझे रोकना नहीं, आज तू भी जमकर मज़ा ले।

दोस्तों मुझे इस तरह भड़कते हुए देखकर शायद माँ डर गई थी, इसलिए वो बोली कि अच्छा तुम पहले वादा करो किसी को नहीं बताओगे और ऊपर आराम आराम से करोगे? अब मैंने उसको लाइन पर आते देखा तो तुरंत हाँ भर दी, लेकिन मेरे दिल में तो आज उसको रगड़कर चोदने की इच्छा थी उसने मुझे कई बार थप्पड़ भी मारे थे। फिर वो बोली कि अच्छा तुम सबसे पहले मेरे हाथ खोल दो। फिर मैंने बोला कि मुझे बेवकूफ़ नहीं बनना है, में पहली बार तो ऐसे ही करूँगा, लेकिन अगली बार हाथ जरुर खोल दूँगा कहीं आप मुकर गयी तो? फिर मैंने अपने सारे कपड़े उतार दिए और अपने फनफनाते हुए लंड को बाहर निकाला, जिसको देखकर माँ बोली कि अरे तेरा यह तो बहुत मोटा है और मैंने जल्दी से अपने लंड को उसकी चूत से सटा दिया और दबाने लगा। उसके बाद में अपने लंड को उसकी चूत के मुहं पर घुमाने लगा। अब वो अहहह्ह्ह्ह उफ्फ्फ्फ करने लगी और बोली कि नहीं नहीं मत कर यार। अब अपने लंड के टोपे को उसकी चूत के मुहं पर फेरते रहा और हल्का सा धक्का दिया, तो मेरा लंड फिसलकर अंदर चला गया और में बोला क्या मारूं धक्का, बड़ा नखरा करती है तब तक उसकी चूत में मेरा लंड आधा जा चुका था। अब माँ धीरे से चीखने लगी आईईईईइ माँ मर गई ऊउईईईईईई माँ यह कैसा दर्द है? और उसके बाद दूसरे ही धक्के में मेरा पूरा लंड उसकी चूत के अंदर था और माँ आहह्ह्ह्हह उहह्ह्ह्हह्ह्ह करने लगी। माँ को ऐसे आहे भरते हुए सुनकर में बोला कि अभी तो सिर्फ़ थोड़ा ही हुआ है और अभी से इस तरह से क्यों चीख रही हो मेरी रानी, अभी तो पूरा मज़ा बाकि है? आज में तुम्हे रात भर ऐसे ही बहुत जमकर चोदूंगा। अब मैंने उसके दोनों पैरों को अपने हाथ से पकड़कर पूरा फैलाया और एक बार फिर से ज़ोर के झटके के साथ जब मैंने अपनी कमर को आगे की तरफ हिलाया तो माँ के मुहं से आआअहहहह आअहह ईईईईईई की आवाज़ के साथ वो अपने सर को उठा उठाकर हर एक झटके के साथ सिसकने लगी, जिसकी वजह से मेरा जोश और भी बढ़ गया। अब में अपनी स्पीड को बढ़ाने लगा और उनके बूब्स को भी दबाने लगा, उसकी आह्ह्ह्हहह उईईईईईईईई की आवाज़ से मुझे बड़ा आनंद मिल रहा था आईईईईईईई माँ मार डाला कमीने उउउफफफफफ्फ़ साले बदमाश आआह्ह्हहह, लेकिन मुझे कुछ भी सुनाई नहीं दे रहा था और मैंने एक धक्का फिर से मारा और इस बार मेरा पूरा लंड उसकी चूत में पूरा अंदर तक समा चुका था।

फिर वो चिल्लाने लगी और कहने लगी उफफ्फ़ मार डाला, बाहर निकाल अपना लंड मेरी चूत से आह्ह्हहह शैतान भड़वे ऊऊईईईईईई आआआआहह और में उनकी बूब्स पर पहुंचकर उनको मुहं में भरकर ज़ोरदार धक्के मार रहा था। फिर कुछ देर मुझे गालियाँ देने के बाद वो अब बिल्कुल शांत हो गयी और मैंने जब उनको शांत देखा तो मैंने अपने धक्के देने की रफ़्तार को अब अचानक से बढ़ा दिया, जिसकी वजह से उनका शौर एक बार फिर से शुरू हो गया आहहह उूउउफफफफ्फ़ ऊऊऊऊहह राजा मार डाला माँ रे आईईईईई क्या तू धीरे नहीं कर सकता? उनके मुहं से यह शब्द सुनकर मेरा जोश, मर्दानगी और ज़ोर ज़ोर से उफान मारने लगा। में अब दोनों बूब्स को मसलने लगा और वो नहीं आईईईईईईई उूफफफ ऊऊह्ह्हह की आवाज़ निकाले जा रही थी। फिर मैंने पूछा बोल जानेमन मज़ा आ रहा है ना? अब देख में तेरी चूत को उधेड़कर रख दूँगा मेरी जान, अभी तो पूरी रात बाकी है और में पूरी मस्ती दूँगा, तूने आज मुझे बहुत तंग किया। अब वो घबराकर बोली कि बेटा तूने मुझसे वादा किया था और अब देखो जब तुमने मुझे चोद ही लिया है तो यह बेरहमी कैसी? लेकिन में फिर भी नहीं माना और धड़ाधड़ धक्के मारने लगा।

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फिर कुछ देर बाद माँ को भी मज़ा आने लगा, वो भी कहने लगी ऊउईई लगा और ज़ोर से बेटा जितनी तेरे में ताक़त हो, लेकिन अब मुझे टॉयलेट जाना है। फिर मैंने उनके हाथ खोल दिए और बोला कि अच्छा, लेकिन कोई बदमाशी मत करना और अब में माँ के हाथ को पकड़कर उनको बाथरूम में लेकर गया और सबसे पहले मैंने अपने लंड को नल खोलकर पानी के नीचे लाकर धोया और फिर माँ से बोला क्या चूसोगी मेरे इस गन्ने को, क्या बोलती है? इसके बाद माँ जैसे ही पेशाब करने के लिए नीचे बैठी तो मैंने माँ के मुहं में अपना लंड डाल दिया और उसके सर के बाल को पकड़कर लंड को और अंदर कर दिया और बोला कि चूस ना, ज्यादा नखरे क्यों दिखाती है? आज तो जैसे में बोलता हूँ करती जा मेरी जान।

अब माँ मेरे लंड को चाटने और चूसने लगी, जिसकी वजह से मेरे पूरे शरीर में एक करंट सा दौड़ गया और मुझे बड़ी ज़ोर की मस्ती आ रही थी और मेरे भी मुहं से आह्ह्ह्ह ओह्ह्ह्हह मेरी जान हाँ और ज़ोर से चूसो, चाटो प्लीज वाह मज़ा आ गया। फिर कुछ देर वैसे ही करने के बाद मैंने देखा कि मेरा लंड एक बार फिर से तैयार हो गया था, इसलिए मैंने उनको बेड पर चलने को कहा और वो बोली कि अब क्या करेगा, अब तो तू मुझे छोड़ दे? अब मैंने कहा कि आओ ना जानू और उनकी चूत पर अपने लंड को सटाकर मैंने एक ज़ोर से झटके के साथ अपनी कमर को हिलाया तो उनके मुहं से ज़ोर से चीख निकली और मेरा लंड उसकी चूत में चला गया और माँ अब आहह उूउऊहहहहहह उउईईईईईई की आवाज़ निकाल रही थी और में माँ की सिसकियों को सुनकर बोला कि अभी तो सिर्फ़ टोपा ही अंदर गया है, अभी तो पूरा लंड बाहर ही है और अभी से इस तरह से क्यों चीख रही हो मेरी रानी? आज में तुम्हे रात भर चोदता रहूँगा और यह कहते हुए मैंने एक ज़ोर से झटके के साथ जब धक्का लगाया तो माँ अहह आओउूउईईईईईई अरे अंदर तक गया रे उूउउहहहह की आवाज़ के साथ अपनी गांड को उठा उठाकर हर एक झटके के साथ सिसकने लगी।

फिर मेरा जोश और ज्यादा बढ़ गया और में माँ की गरम गरम चूत में अपने लंड को अंदर बाहर कर रहा था और अब माँ को भी मस्ती भी आ रही थी। फिर कुछ देर के बाद मैंने उनकी चूत में अपने लंड को पूरी तरह से अंदर डालने के लिए एक और झटका मारा, तो माँ चुदाई के साथ ही दर्द की वजह से तड़प उठी, लेकिन फिर भी मस्त थी और वो बोली कि तू बड़ा बेरहम है और तू तो बहुत ज़ोर से धक्के देकर चोदता है और फिर मैंने माँ के होंठो को चूस लिया और बोला कि रानी अब तुम मेरी हो चुकी हो, मैंने माँ के होंठो को जब चूसना शुरू किया तो में और भी ज़ोर ज़ोर से अपनी कमर को हिलाने लगा। अब माँ भी कुछ देर के बाद धीरे धीरे शांत होने लगी थी और वो आहहह्ह् उह्ह्ह कर रही थी। फिर में तुरंत समझ गया कि अब उसको भी मज़ा आ रहा था और में अब झड़ गया था और मेरे लंड से वीर्य निकल चुका था जो अब लंड के अंदर चूत से अंदर बाहर आने जाने की वजह से बाहर आकर गोरी गोरी जांघो पर बह रहा था और में भी धीरे धीरे शांत हो गया।

फिर कुछ देर तक माँ के ऊपर वैसे ही लेटे रहने के बाद जब मैंने अपने लंड को निकालते हुए में अपनी माँ के ऊपर से हटा तब माँ बोली कि बेटे तुम मुझसे वादा करो कि यह घटना बुरी तो थी, लेकिन किसी से कहना नहीं और तुम इसको हमेशा राज ही रखना और कभी अपने पापा से भी नहीं कहना, यह मेरी इज़्ज़त का सवाल है प्लीज तुम मुझसे यह वादा करो। फिर मैंने कहा कि हाँ माँ आपका कहना सब ठीक है, लेकिन इस राज को राज बनाकर रखने की आपको मुझे कुछ तो रिशवत देनी पड़ेगी ना और यह बात कहते हुए मैंने उनका एक जोरदार किस कर लिया और उन्होंने भी मेरा साथ दिया, लेकिन तभी वो कुछ देर बाद मुस्कुराते हुए अपने गुलाबी होंठो को साफ करते हुए मुझसे बोली कि चल अब दूर हट, दिनभर उल्टी सीधी फिल्मे देखकर तू बड़ा बदमाश हो गया है चल अब चुपचाप अपनी जगह पर जाकर सो जा। अब मैंने माँ को कसकर अपनी बाहों में भर लिया और फिर हम दोनों ऐसे ही एक दूसरे से चिपककर सो गए। दोस्तों यह थी मेरी वो सच्ची घटना और में उम्मीद करता हूँ कि आप सभी को इसको पढ़कर जरुर मज़ा आया होगा ।।

धन्यवाद …

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