लाईफ मे कभी कभी – 2


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प्रेषक : करन

“लाईफ मे कभी कभी – 1” से आगे की कहानी …

दोस्तों आपने मेरी पहले की कहानी जरुर पढ़ी होगी। आज में उसका दूसरा पार्ट आपके सामने लाया हूँ। ये वही पिछली कहानी है, जिसमे मेरी दीदी अपने ससुर जी से चुदी थी। दीदी और ससुर जी कि भूख आज भी शांत नही हुई थी, वो दोनो हर वक्त चुदाई में ही लगे रहते थे और में उन्हें देखकर अपने लंड को शांत कर लेता था और दूसरी रात को जब फिर से में उनके रूम के पास गया तो वो दोनों पहले से ही चुदाई करने में लगे थे, में उन्हें देखकर वहीं पर रुक गया और मजे लेने लगा।

आज फिर से हरिलाल जी तेज़ी से दीदी कि चुदाई कर रहे थे और कहने लगे बहू देख तेरी चूत मे मेरा लंड कितना अच्छा लग रहा है। अब दीदी कुछ नहीं बोली बस अपनी आँखों को बंद कर लिया और सिसकारियां लेती रही। अब हरिलाल जी ने करीब 10 मिनट बाद लंड को दीदी कि चूत से बाहर निकाल लिया था। हरिलाल जी फिर दीदी से कहने लगे कि चल मेरी रानी अब दूसरे तरीके से चुदाई का मजा लेते है, बोल कर दीदी के हाथो को पकड़ कर उन्हें बिस्तर से उठा दिया। अब मुझे कुछ समझ नहीं आया, लेकिन मेरी उलझने अब जल्दी दूर हो गई थी।

हरिलाल जी ने दीदी को घुटने के बल कुत्ते कि तरह अपने पैरो के बल बैठा दिया और दीदी अपनी चूत को एक हाथ से सहला रही थी और हरिलाल जी उसके पीछे आ गये थे। फिर दीदी की चूत मे लंड के मुहं को डालकर अपने हाथो से दीदी की कमर को कसकर पकड़ा और एक ज़ोर का धक्का लगा दिया, हरिलाल जी का लंड दीदी कि चूत मे आधा दाखिल हो गया था। दीदी आहह बाबूजी कि आवाज ही निकाल रही थी और हरिलाल जी ने एक के बाद एक धक्के लगाते हुए पूरे लंड को अंदर तक डाल दिया था और दीदी के मुँह से अहह कि आवाज शायद पहले से भी ज्यादा ज़ोर से बाहर निकल पड़ी थी।

अब दीदी थोड़ा उठते हुए कहने लगी कि बाबूजी प्लीज हमे छोड़ दीजिये और अब हरिलाल जी लंड को थोड़ा बाहर निकालते हुए और एक ज़ोर का धक्का देते हुए बोले नहीं मेरी जान आज हम नहीं रुकने वाले, तुम जितना चाहो मना करो, हमारे लंड ने एक हफ्ते से इस चूत का पानी नहीं चखा है और हरिलाल जी हर बार धक्के के साथ ही दीदी से बात भी कर रहे थे। फिर दीदी बोली तो क्या आप हमे आज मार देंगे बाबूजी। हरिलाल जी नहीं, बहू इसमे भी तुम्हारा ही दोष है, अगर तुम इस लंड को अपनी चूत का पानी रोज नहीं पिलाओगी तो ये तो पागल है, इसी तरह तुम्हारी चूत की चुदाई करेगा।

फिर दीदी प्लीज़ बाबूजी आप थोड़ा तो रहम कीजिये हम पर और यहाँ पर ऊपर से करन भी है, कहीं इन सब मे वो जाग गया तो क्या होगा ये तो सोचिये, हरिलाल जी दीदी की बात काटते हुए कहा क्या होगा, अब करन को भी तो यहीं रहना है, उसे भी पता चलना ही चाहिए की उसकी दीदी कितनी बड़ी रंडी है और आपकी चूत मे लंड डालने का मौका किस्मत से ही मिलेगा और फिर दीदी भी हरिलाल जी कि बात को काटते हुए बोली तो क्या करन के सामने आप हमारी चुदाई करेंगे। बाबूजी – हाँ इसमे क्या गलत है, भई वो हमारी मज़बूरी को एक दिन समझ ही जाएगा, आख़िर वो भी तो एक मर्द है।

अब मेरी रंडी बहन और वो तेज़ी से लंड को अंदर बाहर करने लगे। अब दीदी ने अपना सर सामने के तकिये पर रख दिया और अपने हाथो से अपनी चूचीयों को मसल रही थी। करीब 10 मिनट तक ऐसे ही चुदाई करते रहे, फिर हरिलाल जी ने एक हाथ से दीदी के बालो को पकड़ लिया और दीदी कि चुदाई करने लगे, ऐसा लग रहा था मानो कोई घोड़े कि सवारी कर रहा हो। दीदी भी मज़े से आहह बाबू जी आप बहूत जालिम है।

आप देख लेना एक दिन आपका ये लंड हमारी जान लेकर रहेगा, आहह हरिलाल जी और आपकी चूत हमारी जान बहू आहह कमरे मे अहह फहत्त्तत्त आवाज़ सी गूँज उठी थी। दोनो एक दूसरे कि चुदाई मे इतने खो से गये थे, मानो कोई घर पर है ही नहीं और फिर दीदी कहने लगी आज जितना मन मर्ज़ी कर लीजिये बाबूजी, आगे से आपकी ऐसी मन मर्ज़ी नहीं चलेगी, आआअहह और फिर बाबूजी हरिलाल जी क्यों हमारी मन मर्जी क्यों नहीं चलेगी बहू रानी, तभी दीदी कहने लगी क्योंकि अब थोड़े ही दिन मे करन भी हमारे शहर में ही रहेगा हमारे साथ में यहीं पर और उसके घर में रहते हुए आप ये सब नहीं कर पाएँगे।

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हरिलाल जी कहने लगे करन बेटा होगा तो क्या हुआ, हम तुम्हे शहर के होटलो मे ले जाकर चोदेंगे बहू। तभी दीदी कहने लगी नहीं नहीं, सोचो किसी को पता चल गया तो बाबूजी आहह हरिलाल जी किसी को क्या पता चलेगा ये शहर है यहाँ पर कोई किसी कि तरफ ध्यान नहीं देता है और फिर शहर मे इतने होटल है, हम हर रोज नये नये होटल मे जाएँगे बहू।

फिर दीदी कहने लगी अपनी गर्दन को घुमा कर, अच्छा लोग कहेंगे कि देखो खूबसूरत औरत अपने साथ यहाँ बुड्ढा लाई है, हम आपके साथ नहीं जाने वाले, कहीं पर भी और दीदी के चेहरे मे एक हल्की मुस्कान थी। हरिलाल जी अच्छा तो में बुड्ढा हूँ रुको अभी दिखाता हूँ में तुझे रंडी और दीदी के बालो को कसकर अपनी और खींचते हुए दीदी अहह ये ले देख मेरी बुढापे कि ताक़त को रंडी और जितनी हो सके उतनी तेज़ी से दीदी कि चुदाई करने लगे थे।

उनके धक्के इतने तेज थे कि पूरा का पूरा बेड ही हिल उठा था, पहले उनके कमरे से आहहह और फच-फच की आवाज आ रही थी और अब उसके साथ साथ बेड की आवाज ने भी अपनी जगह बना ली थी, हरिलाल जी दीदी कि ऐसे चुदाई कर रहे थे कि सच में सामने कोई रंडी हो।

वो बोले अब ले मेरी रानी अब बोल तुझे हम बुड्ढे नज़र आते है, दीदी के चूतड़ो पर चार पांच चांटे लगते हुए, बोलो कुछ तो बोलो बहू बोलो हम कैसे चुदाई करते है, दीदी हाँ बाबू जी, आप तो 100 जवानो पर भी भारी पड़ोगे, आहह… करीब 15 मिनट ऐसे ही चुदाई करने के बाद दीदी आहह बाबू जी आअहह हम झड़ने वाले है और वो झड़ गई और उसका पूरा बदन ढीला हो चुका था।

करीब 5 मिनट बाद हरिलाल जी भी – बहू हम भी झड़ने वाले है बोलकर पूरा वीर्य दीदी की चूत के अंदर ही डाल दिया था और दीदी के ऊपर ही लेट गये। दीदी पेट बिस्तर की और करके लेटी थी और हरिलाल जी पेट के बल दीदी के ऊपर थे।

उनका लंड अब भी दीदी की चूत में था, करीब पांच मिनट बाद हरिलाल जी लंड को दीदी की चूत से बाहर निकाल कर पास मे ही लेट गये थे। दीदी अब भी वैसे ही लेटी हुई थी। उसकी चूत से वीर्य बाहर टपक कर बिस्तर पर गिर रहा था, अब दोनो लम्बी लम्बी साँसे ले रहे थे।

अब दीदी के चूतड़ो पर चुदाई के निशान थे। उनके बड़ी बड़ी गोरी गांड लाल हो चुकी थी। दीदी थोड़ी देर बाद उठकर बाथरूम में चली गई और फिर वापस आकर सो गई। मेरा मन कर रहा था कि में अंदर जाकर दोनो कि चुदाई कि जमकर खबर लूँ, पर ना जाने मन मे सोचता हुआ वापस अपने कमरे मे आकर लेट गया था। कमरे मे मेरी आखों के सामने बार बार दीदी और हरिलाल जी कि वो चुदाई ही घूम रही थी, बिस्तर पर में वही पड़ा था और मुझे कब नींद आई और कब सुबह हो गई मुझे कुछ पता ही नहीं चला था।

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सुबह करीब 7 बजे मेरे कमरे मे दीदी आई, दीदी ने एक पीले रंग की साड़ी पहन रखी थी। दीदी को देखकर साफ पता चल रहा था कि वो अभी अभी नहा कर आई है और चहरे पर हल्का सा मेकप था, में दीदी को ऊपर से नीचे की और देख रहा था। दीदी मेरे पास आकर कहने लगी – उठ गया है तू। में बोला – हाँ दीदी क्या हुआ में एक टक फिर से दीदी को घूरे जा रहा था, दीदी ने फिर से कहा – क्या हुआ क्या देख रहा है तू। दीदी ऐसा कुछ नहीं आप इतनी सुबह सुबह नहा चुकी हो, आपको तो आदत नहीं थी ना। घर पर आप कभी इतनी सुबह सुबह नहीं नहाती थी वो मुझे अच्छे से याद है।

दीदी मुस्कुराते हुए अरे पगले समय के साथ साथ सब बदलना पड़ता है, यहाँ पर बाबूजी बिना नहाए मुझे रसोई में जाने नहीं देंगे। दीदी चल सुबह सुबह क्या सब सोचने बैठ गया है। फिर दीदी फिर से मुस्कुराते हुए बोली – तेरा ज्यादा पढ़ाई करने से दिमाग़ खराब हो गया है। चल जल्दी से बाहर आजा में तेरे लिए चाय बनाती हूँ और दीदी वापस जाने लगी तभी मेरी नज़र दीदी के मटकते चूतड़ो पर गई। दीदी के चूतड़ क्या गजब ढा रहे थे और कल तो मैने इन्हे नंगे देखा था। में उठकर कमरे के बाहर आया, बाहर हॉल मे हरिलाल जी बैठ कर न्यूज पेपर पढ़ रहे थे, में जैसे ही हॉल मे आया हरिलाल जी बोले – अरे बेटा नींद पूरी हो गई आपकी। मैने बोला जी बाबू जी, चलो अच्छा है तुम नहा धोकर तैयार हो जाओ हमे कॉलेज चलना है और में बाथरूम से फ्रेश होकर नहाकर बाहर आ गया। फिर हम सभी साथ बैठकर नाश्ता करने लगे।  दीदी और हरिलाल जी ऐसा कर रहे थे जैसे कुछ हुआ ही ना हो, सब नॉर्मल। दीदी ने सर पर पल्लू ले रखा था, मैने गौर किया हरिलाल जी दीदी को देख भी नहीं रहे थे और ना दीदी, दोनो नज़रे झुकाए हुए ही एक दूसरे से बात कर रहे थे और फिर नाश्ता करने के बाद में और हरिलाल जी कॉलेज चले गये । दोस्तों ये थी मेरी कहानी जो की दीदी और उनके ससुर के बीच ही खत्म हो गई। वो दोनों चुदाई से आज भी कभी भी बाज नहीं आते है ।।

धन्यवाद …

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