लंड का टोपा भाभी की चूत में


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प्रेषक : राकेश …

हैल्लो दोस्तों, में राकेश एक बार फिर से अपनी एक नई कहानी के साथ आप सभी कामुकता डॉट कॉम के चाहने वालों के सामने पेश हुआ हूँ, क्योंकि यह आप लोगों का प्यार ही है जिसकी वजह से हम लोगों को अपने मन की बात को लिखकर मौका मिलता है, इसलिए आप सभी को बहुत बहुत धन्यवाद और अब अपनी आज की इस कहानी को में आप लोगों पर समर्पित करता हूँ। अब में आप लोंगो का ज्यादा समय ना लेते हुए सीधा अपनी आज की कहानी पर आता हूँ। दोस्तों यह बात आज से करीब एक साल पहले की है, मेरे एक दोस्त थे जो अध्यापक थे और उनकी पत्नी भी एक सरकारी ऑफिस में बहुत अच्छे पद पर थी। दोस्तों मेरा उनके घर बहुत आना जाना था, मेरा दोस्त अपने कॉलेज और उसके काम में बहुत ज्यादा व्यस्त रहता, उसके पास अपनी पत्नी के लिए ज्यादा समय नहीं था और वो हर दिन शाम को करीब पांच घर आ जाती थी, लेकिन मेरे दोस्त को कॉलेज से आने के बाद बच्चों को पढ़ाना भी होता थी और इसलिए वो ज्यादातर समय व्यस्त ही रहता था। दोस्तों मेरे उस दोस्त को कई बार उसकी पत्नी ने कहा कि मुझे बाजार जाना है या मुझे फिल्म देखने जाना है। फिर वो हमेशा उसकी बात को टाल दिया करता और कहता कि मेरे पास समय नहीं है और क्योंकि में उनके घर बहुत बार आता-जाता।

एक दिन जब में उसके घर गया, तब मैंने देखा कि उसकी पत्नी उस समय घर में अकेली थी। फिर मैंने उनको पूछा कि कहाँ गये आपके पति देव? तब वो बोली कि वो कॉपी चैक करने कहीं बाहर गये है और दो दिन के बाद आएँगे। फिर उन्होंने मुझे बैठने को कहा और वो मेरे लिए ठंडा लेने जाने लगी, लेकिन उसी समय मैंने उनको मना किया और कहा कि भाभी रहने दो, मुझे अभी बाजार जाना है, क्योंकि अगर वो घर में नहीं है तो में बाजार का अपना काम ही निपटा लेता हूँ। फिर उसी समय उन्होंने मुझसे कहा कि अरे बाजार तो मुझे भी जाना है, तुम किससे आए हो मोटरसाईकिल से या कार से? तब मैंने कहा कि मेरे पास तो मोटरसाईकिल है। फिर वो मुझसे पूछने लगी क्या तुम मुझे भी अपने साथ बाजार ले जा सकते हो? तब मैंने कहा कि अगर आप मोटरसाईकिल पर बैठ सकती है तो चलिए। अब वो तुरंत बोली कि तुम दस मिनट इंतजार करो, में अभी तैयार हो जाती हूँ। फिर में वहीं पर बैठकर उनका इंतजार करता रहा, वो करीब 15 मिनट के बाद बहुत अच्छी तरह से तैयार होकर आ गई। फिर मैंने उनको देखा तो देखता ही रह गया, क्योंकि उन्होंने उस समय बिना बाह के ब्लाउज के साथ पीले रंग की साड़ी पहनी थी। दोस्तों मैंने पहली बार देखा कि भाभी बहुत सुंदर है, क्योंकि उसके पहले मैंने उनको उस नजर से कभी देखा ही नहीं था।

अब में आप सभी को यह बता दूँ कि भाभी के कोई भी बच्चा नहीं था, उनकी शादी को पूरे पांच साल हो चुके थे, लेकिन तब भी उनके कोई बच्चा नहीं था। फिर मैंने उनको अपने साथ मोटरसाईकिल पर बैठाया और कहा कि आराम से पकड़कर बैठना और उनको में अपने साथ बाजार ले गया। अब वो मेरे कंधे को अपने एक हाथ से पकड़कर बैठी हुई थी, रास्ते में दो चार बार ब्रेक लगाने पर उनके गोलमटोल बूब्स मेरी कमर से टकराए, जिसकी वजह से मुझे बहुत मज़ा आया और मुझे पता चला कि उनको बाजार में कुछ ब्रा-पेंटी लेने थे। फिर में उनको एक दुकान पर छोड़कर अपना काम ख़त्म करने चला गया और उन्हें यह मैंने बोल दिया कि में बीस मिनट में वापस आता हूँ। फिर उसके बाद जब में उनको लेने वापस उस दुकान पर गया, उस समय भाभी अपना काम खत्म करके मेरा ही इंतजार कर रही थी और मेरे पहुंचते ही वो दोबारा से मोटरसाईकिल पर बैठ गयी। फिर मैंने जैसे ही मोटरसाईकिल को उनके घर की तरफ घुमाया, तब वो बोली कि राकेश तुमको कोई काम तो नहीं है ना क्यों तुम फ्री होना? तब मैंने कहा कि हाँ भाभी में फ्री हूँ, आपको कोई काम है तो बताईए। तब वो बोली कि नहीं आज में बहुत दिनों के बाद किसी के साथ मोटरसाईकिल पर बैठी हूँ और मुझे मोटरसाईकिल से घूमना बहुत पसंद है, चलो तुम मुझे आज कहीं घुमाकर लाओ।

फिर मैंने उनको पूछा कि आप मेरे साथ कहाँ घूमने चलेगी? तब वो कहने लगी कि कहीं ऐसे रोड़ पर चलो जहाँ ज्यादा भीड़ ना हो। अब मैंने उनका जवाब सुनकर कहा कि हाँ ठीक है और फिर में उनको शहर से बाहर हाइवे पर ले आया और लखनऊ से देव रोड़ की तरफ चल पड़ा। अब वो बहुत अच्छे मुड में थी, वैसे भी में उनके साथ बहुत बार हंसी मज़ाक किया करता था, मैंने ऐसे ही उनको बोला कि भाभी इस समय कोई भी हमे देखेगा तो आप जानती है वो क्या कहेगा? तब भाभी ने पूछा कि क्या कहेगा? फिर मैंने कहा कि वो लोग देखकर कहेंगे कि कोई लड़का अपनी गर्लफ्रेंड को घुमा रहा है, लेकिन लगता है कि इन दोनों के बीच में लड़ाई हुई है तभी तो गर्लफ्रेंड थोड़ी दूर बैठी है, चिपककर नहीं बैठी है। अब वो मेरे मुहं से यह बात सुनकर बहुत ज़ोर से हंस पड़ी और तुरंत मेरी कमर में अपनी बाहें डालकर मुझसे चिपक गयी और बोली क्यों अब तो कोई भी नहीं बोलेगा ना कि गर्लफ्रेंड नाराज है और फिर हम दोनों ज़ोर ज़ोर से हँसने लगे। फिर मैंने कहा कि चलो आज आपने खुद ही यह काम करके मान लिया कि आप आज से मेरी बहुत अच्छी गर्लफ्रेंड बन गयी है। फिर थोड़ी देर तक हम ऐसे ही हंसी मज़ाक करते रहे और फिर उसके बाद हम दोनों अब घर की तरफ जाने लगे थे।

फिर मैंने उनको घर पर छोड़ दिया और अब उनसे पूछा कि भाभी आज आपकी अपने बॉयफ्रेंड के साथ पहली यह मोटरसाईकिल की सवारी कैसी रही? तभी वो बोली कि राकेश मुझे तो बहुत मज़ा आया और वैसे में जानती हूँ कि तुमको भी बहुत मज़ा आया होगा। अब मैंने उनको पूछा कि आपको कैसे पता कि मुझे भी मज़ा आया होगा? तब वो बोली कि अगर मज़ा नहीं आ रहा था तो तुम बार-बार ब्रेक क्यों लगा रहे थे? में सब समझती हूँ कि तुम बिना बात के ब्रेक क्यों लगा रहे थे? फिर इस तरह से हम दोनों हंसी मज़ाक करने लग गये और हमारा यह सिलसिला अब शुरू हो चुका था। अब जब भी उनका मन होता था, तब हम दोनों मोटरसाईकिल से ऐसे ही घूमने चले जाते और में उनके साथ मज़ाक करते हुए कहता था कि भाभी मज़ा नहीं आ रहा है। फिर वो समझकर तुरंत मेरी पीठ पर अपने बूब्स दबा देती और उसके बाद वो पूछती थी कि क्यों अब तो आया ना मज़ा या नहीं? फिर धीरे-धीरे हम दोनों ऐसे ही दिन निकलने के साथ साथ आपस में बहुत करीब हो गये। अब में उनके साथ सेक्स की बातें भी करता था और उनसे पूछता कि उनका उनके पति के साथ सेक्स कैसे होता? तब वो बताने लगी कि सेक्स ठीक ही होता है, लेकिन वो काम बहुत कम समय के लिए होता और इसलिए मुझे ज्यादा मज़ा नहीं आता।

दोस्तों में अब अपनी भाभी की वो बातें सुनकर अच्छी तरह से समझ गया था कि यह सेक्स की भूखी है और अगर में थोड़ी सी मेहनत कर लूँ, तो वो मेरे नीचे जरुर आ जाएगी, मुझसे अपनी चुदाई करवाने के लिए ज्यादा नखरा या मना नहीं करेगी। एक दिन मुझे याद है कि जब बहुत गरमी थी और में बस अपने ऑफिस पहुँचा ही था कि उनका मेरे पास फोन आ गया और वो मुझसे पूछने लगी राकेश क्या तुम आज फ्री हो? तब मैंने पूछा कि क्यों भाभी आपको क्या काम है? तब वो बोली कि मुझे किसी काम से कानपुर जाना है, अगर तुम फ्री हो तो मुझे अपने साथ कानपुर ले चलो। अब मैंने उनको कहा कि भाभी अगर आज मेरे साथ कानपुर गयी तो आप बहुत परेशान हो जाओगी, क्योंकि आज मेरे पास कार नहीं है, में मोटरसाईकिल से आया हूँ और अगर आपको मोटरसाईकिल पर चलना हो तो बताओ? तब वो बहुत खुश हो गयी और कहने लगी कि अरे में तो तुमको खुद बोलने वाली थी कि मोटरसाईकिल से चलना, क्योंकि मेरी इतने लम्बे सफर पर मोटरसाईकिल से जाने की बहुत इच्छा है, क्योंकि तुम्हारे दोस्त तो कभी मुझे मोटरसाईकिल पर बैठाते ही नहीं।

फिर मैंने कहा कि ठीक है बताओ में आपके पास कितनी देर में आ जाऊं? तब वो बोली कि तुम अभी आ जाओ, में भी तैयार होने जा रही हूँ और तुम जब तक आओगे में भी तैयार हो जाउंगी और फिर वो मुझसे पूछने लगी कि अच्छा तुम बताओ कि आज तुम्हारी गर्लफ्रेंड कौन से कपड़े पहने? तब मैंने तुरंत ही उनको कहा कि भाभी गर्लफ्रेंड तो कुछ ना पहने तो तब ज्यादा अच्छी लगती है। अब वो मेरा यह जवाब सुनकर हँसने लगी और बोली कि ठीक है में ऐसे ही चलती हूँ, अगर तुम मुझे अपने साथ ले जा सको। फिर मैंने कहा कि अरे आप साड़ी पहनो आप साड़ी में बहुत सेक्सी लगती हो। तो उन्होंने कहा कि तुम आओं, में तैयार हो जाती हूँ। फिर जब में उनके घर पहुँचा तब मैंने देखा कि वो पहले से ही तैयार खड़ी थी, हल्के नीले रंग की साड़ी में उनका वो दूध जैसा गोरा रंग और भी खिलकर निखर गया था।  अब वो मेरे साथ मोटरसाईकिल पर पीछे बैठ गयी और फिर हम दोनों कानपुर की तरफ निकल पड़े। फिर हम जैसे ही शहर से बाहर निकले उसी समय उन्होंने मेरी कमर में अपना एक हाथ डाल लिया और बोली कि लो अब आ गयी तुम्हारी गर्लफ्रेंड।

फिर मैंने भी उनको कहा कि भाभी आज आप पूरे रास्ते मुझे ऐसे ही मज़ा देती हुई चलना और फिर उन्होंने यह बात सुनकर अपने बूब्स को मेरी पीठ पर ज्यादा दबा दिए। अब मैंने उनसे हंसी मज़ाक करते हुए ऐसे ही कहा कि भाभी सच्ची आपकी शादी नहीं हुई होती, तो में आपको भगा ले जाता। फिर वो कहने लगी कि मतलब क्या है तुम्हारा? क्या शादी के बाद में इस लायक नहीं बची कि तुम मुझे भगाकर अपने साथ ले जाओ? अब मैंने कहा कि नहीं यह बात नहीं है, मुझे अपने दोस्त का ध्यान आ जाता है कि उनको तो अब कोई मिलेगी नहीं, अगर आप मेरे साथ भाग गयी तो उनका क्या होगा? तब वो बोली कि अरे उनको किसी की जरूरत है भी नहीं, तुम मुझे भगा ले जाओ। फिर मैंने कहा कि ठीक है में भगा ले जाता हूँ, लेकिन मुझसे परेशान तो नहीं हो जाओगी ना? तब वो पूछने लगी कि तुम्हारा क्या मतलब है? मैंने कहा कि में तो बहुत ज्यादा देर तक जमकर सेक्स करूँगा, जिसकी वजह से हमेशा आपके दोनों पैर फैले ही रहेंगे। अब वो हँसते हुए बोली कि अरे इससे अच्छी क्या बात होगी? और फिर हम ऐसे ही बातें करते हुए कानपुर पहुँच गये।

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दोस्तों मुझे पता चला कि उनको वहाँ पर सिर्फ़ एक घंटे का काम था, उन्होंने अपना काम निपटाया और जैसा कि मैंने पहले भी बताया है कि उस दिन गरमी बहुत तेज थी। फिर वो मुझसे बोली कि राकेश आज तो हालत बहुत खराब हो गयी, मेरा मन कर रहा है कि में कहीं पानी मिलते ही उससे नहा लूँ, मुझे इतनी ज्यादा गरमी लग रही है। अब मैंने उनको कहा कि भाभी नहाने का मन तो मेरा भी कर रहा है, लेकिन यहाँ हम लोग किसके घर जाएँगे? यहाँ तो कोई अपना है नहीं कि जहाँ जाकर थोड़ा आराम भी कर लें। फिर उसी समय वो कहने लगी कि हम दोनों किसी होटल में चलते है, उनकी वो बात सुनकर में हँसने लगा और बोला कि होटल में जाएँगे, तो आपको आज गर्लफ्रेंड के साथ-साथ मेरी पत्नी भी बनना पड़ेगा, क्योंकि होटल में हम क्या बताएँगे कि हमारा रिश्ता क्या है? तब वो बोली कि अरे तुम तो वैसे ही मुझे भगाकर ले जाने वाले थे और में भी भागने के लिए तैयार थी, तो चलो आज देख भी लेते है कि तुम पति के रूप में कैसे लगते हो? में तुम्हारी पत्नी बन जाती हूँ। फिर में उनको लेकर पास के एक अच्छे से होटल में चला गया और फिर हम दोनों ने वहाँ पर लिखते समय खुद को पति-पत्नी लिखवाया और फिर हम कमरे में आ गये।

अब हम दोनों कमरे में जाते ही ए.सी को चालू करके सोफे पर बैठ गये और थोड़ी देर पसीना सुख जाने के बाद वो मुझसे कहने लगी कि में नाहऊँगी कैसे? मेरे पास कपड़े तो है ही नहीं। अब मैंने उनको बड़ा सा एक टावल दे दिया और बोला कि आप अपनी इस साड़ी को यहीं पर उतार दो और नहाकर यह टावल लपेट लेना। तभी वो बोली कि हटो, में तुम्हारे सामने टावल में आऊंगी क्या? तब मैंने हँसते हुए कहा कि भाभी इस समय हम दोनों पति-पत्नी है, आपने खुद ही होटल के रजिस्टर में यह सब लिखा है और पति से कैसी शरम? और अगर आपको ज्यादा शरम आ रही है तो लाओ में भी अपने कपड़े उतार देता हूँ और आपके सामने टावल में आ जाता हूँ और अब इससे पहले कि वो कुछ कहती मैंने अपने कपड़े उतार दिए थे और मैंने सिर्फ़ अंडरवियर पहनकर ऊपर से टावल लपेट लिया था। तभी वो उठी और बिना कुछ कहे हल्का-हल्का मुस्कुराते हुए अपनी साड़ी को उतारने लगी और अब वो मेरे सामने सिर्फ़ पेटीकोट ब्लाउज में आ गयी और दूसरा टावल लेकर बाथरूम में चली गयी, उसके बाद वो नहाने लगी। फिर कुछ देर नहा लेने के बाद भाभी ने टावल को अपने बूब्स के ऊपर छाती पर लपेट लिया, वो बाहर आ गयी।

फिर जब वो बाथरूम से बाहर आई, में उस समय पलंग पर बैठा हु था और मैंने उतनी देर में बहुत ठंडी-ठंडी बियर मंगवा ली थी और में उसको गिलास में डालकर उसके मज़े ले रहा था। अब उसके बाहर आते ही में उनको चकित होकर घूरते हुए देखने लगा था, क्योंकि मैंने पहली बार अपनी भाभी को उस हालत में देखा था उनका वो रूप मेरे होश उड़ाए जा रहा था और उनका चेहरा भी शरम की वजह से लाल हो चुका था। फिर भाभी ने मुझसे पूछा कि तुम ऐसे क्या देख रहे हो? मुझे शरम आ रही है। अब में हल्का-हल्का सा मुस्कुराता हुआ पलंग से उठा और उनके सामने जाकर खड़ा हो गया और अपने गिलास से एक एक घुठ लेता रहा। फिर मैंने उनसे पूछा क्या आपको गरमी से कुछ आराम मिला? तब वो बोली कि हाँ अब मुझे बड़ा अच्छा लग रहा है। अब मैंने कहा कि ज्यादा ही अच्छा महसूस करना है तो लो यह बियर का घुट लो और फिर मैंने तुरंत ही पास जाकर उनके होंठो से बियर का गिलास लगा दिया। फिर भाभी ने भी मेरे गिलास से बड़े-बड़े दो घुट ले लिए और वो मेरी तरफ देखकर मुस्कुराने लगी थी। दोस्तों उसी समय मैंने अचानक से उनको बाहों में भरते हुए अपनी छाती से लगा लिया और उन्होंने भी शरम की वजह से मेरी छाती में अपना मुँह छुपा लिया।

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अब में ऐसे ही उनकी पीठ को सहला रहा था और फिर ऐसे ही सहलाते हुए मैंने सही मौका पाकर उनका टावल ढीला कर दिया और उस टावल को नीचे गिरने दिया। फिर उसके बाद में उनसे थोड़ा दूर हटकर खड़ा हुआ और उनके नंगे गोरे जिस्म को बड़े प्यार से देखने लगा। अब वो मुझसे पूछने लगी कि ऐसे क्या देख रहे हो? तब मैंने कहा कि आज तुम मेरी पत्नी बनी हो और हम अब अपनी सुहागरात मनाने जा रहे है, तो जरा में तुमको जी भरकर नंगा देख तो लूँ। अब वो एक भी शब्द नहीं बोली और भागकर मेरी छाती से लग गयी, उसी समय मैंने अपना टावल भी खोल दिया और अपने एक हाथ से अपना अंडरवियर भी उतार दिया। अब में भी उनके सामने पूरा नंगा हो चुका था और में उनको अपनी बाहों में लेकर ताजे सेक्सी बदन को महसूस करने लगा था और फिर मैंने उनको अपनी गोद में उठा लिया और तुरंत ही पलंग पर ले आया। फिर मैंने उनको पलंग पर लाकर सीधा लेटा दिया और उन पर थोड़ा सा  झुककर मैंने उनके एक निप्पल को तुरंत अपने मुँह में ले लिया और फिर हल्का-हल्का चूसना शुरू कर दिया। फिर उन्होंने भी अपने एक हाथ से मेरे लंड को पकड़कर उसकी लम्बाई को नापना शुरू कर दिया और वो कुछ देर बाद कहने लगी कि तुम्हारा तो बहुत लंबा और मोटा भी है।

अब मैंने भी झट से कहा कि भाभी यह हर एक चूत की चुदाई भी बहुत अच्छी तरह से करता है और पूरी तरह से संतुष्टि भी देता है। फिर में उनके सर की तरफ खड़ा हुआ और अपना एक हाथ उनके सर के नीचे लगाकर उनको थोड़ा उठाया और अपना लंड मैंने उनके मुँह में दे दिया और अब मैंने देखा कि भाभी ने मेरे लंड को बिल्कुल लोलीपोप की तरह अपने मुहं में भरकर चूसना शुरू कर दिया। दोस्तों मुझे अपनी भाभी के साथ वो सब करने में बड़ा मज़ा आ रहा था, क्योंकि वो बिना कोई नाटक नखरे दिखाए मेरा पूरा पूरा साथ देते हुए मेरे साथ मज़े ले रही थी। फिर करीब दस मिनट तक अपने लंड को चुसवाने के बाद हम दोनों 69 आसन में आ गए और अब मैंने खुश होकर उनकी चूत को चाटना चूसना शुरू किया और अभी मैंने सिर्फ पांच मिनट ही मैंने भाभी की चूत को चाटा और चूसा था कि भाभी झड़ गयी और वो बड़ी लंबी-लंबी साँसे लेने लगी थी। अब में उनके पास में लेट गया और में उनको बाहों में भरकर उनके होंठो को चूसने लगा था और अपने एक हाथ से उनके बूब्स को भी मसल रहा था।

अब ऐसे करते हुए में अचानक से उनके ऊपर आ गया और पूछने लगा क्यों भाभी तैयार होना अब मेरा लंड खाने के लिए? तब वो हंसते हुए बोली कि राकेश इसमे भी कोई पूछने की बात है क्या? आज तुम मुझे इतना जमकर चोदो कि में इस चुदाई की वजह से गर्भवती हो जाऊं, क्योंकि में तुम्हारे बच्चे की माँ बनना चाहती हूँ। फिर मैंने बिना देर किए उनके दोनों पैरों को पूरा फैलाया और पैरों को उनके सर की तरफ मोड़कर उनके हाथ में पकड़ा दिए और कहा कि आप अपने पैरों को ऐसे ही पकड़ो। अब मैंने अपने एक हाथ से अपना लंड पकड़ा और दूसरे हाथ से उनकी चूत के होंठो को खोलकर फैलाकर अपने लंड का टोपा उनकी चूत के छेद पर रख दिया। फिर जैसे ही मेरे लंड ने उनकी चूत का पहला चुम्मा लिया, उसकी वजह से भाभी के पूरे शरीर ने एक झटका खाया और मैंने वैसे ही अपने लंड को पकड़कर थोड़ा सा अंदर घुसाया। अब भाभी को थोड़ा सा दर्द हुआ, उन्होंने अपने होंठो को ज़ोर से दबाकर बंद कर लिया। फिर मैंने उनके ऊपर झुककर उनके कंधे पकड़कर एक धक्का मार दिया, जिसकी वजह से मेरा आधा लंड अंदर चला गया। अब भाभी के मुहं से दर्द की वजह से एक चीख निकल गयी और वो बोली कि आअहह ऊईईईई राकेश क्या आज तुम इसको फाड़ ही दोगे क्या?

तब मैंने वैसे ही रुककर उनके निप्पल को चूसना शुरू किया और फिर जब वो थोड़ी शांत हुई, तब मैंने उनके होंठो को अपने होंठो में दबाकर एक आखरी धक्का मार दिया, जिसकी वजह से मेरा पूरा लंड उनकी चूत को चीरता हुआ अंदर चला गया और फिर मैंने उन्हें ज़ोर-ज़ोर से धक्के देकर चोदना शुरू कर दिया। अब भाभी को भी बड़ा मस्त मज़ा आने लगा था, मुझे महसूस हुआ कि उनकी चूत बहुत कसी हुई थी और इसलिए में धक्के देने में बड़ा सुख मिल रहा था। फिर कुछ देर बाद उन्होंने भी अपनी गांड को उठा-उठाकर मेरा साथ चुदवाना शुरू कर दिया और में उनको ऐसे ही करीब दस मिनट तक चोदता रहा। अब इतनी देर में भाभी एक बार फिर से झड़ चुकी थी, लेकिन जब वो झड़ने वाली थी तब उन्होंने मेरी पीठ पर अपने लम्बे नाख़ून से रगड़ दिया था और अपने शरीर को बिल्कुल टाईट कर लिया था। अब उसके बाद उनकी चूत कुछ ज्यादा ही गीली हो चुकी थी, क्योंकि उनका बहुत ज्यादा माल निकला था। अब चूत के गीली होकर चिपचिपी होने पर मुझे उतना मज़ा नहीं आ रहा था और तभी मैंने अपना लंड उनकी चूत से बाहर निकाला और उनको घोड़ी बनने को कहा, वो तुरंत पलंग पर घोड़ी बन गयी। फिर मैंने उनकी चूत को फैलाकर टावल से थोड़ा साफ किया और फिर पीछे से उनकी चूत में अपना लंड डालकर उनको बहुत बुरी तरह से धक्के देकर चोदने लगा।

अब मेरा लंड चूत में भिचता हुआ जा रहा था ज्यादा तेज रगड़ की वजह से दर्द ज्यादा हुआ उनके मुँह से उस वजह से चीखे निकल रही थी, लेकिन में उसकी चूत पर कोई रहम नहीं कर रहा था। फिर मैंने एक तरफ से अपने हाथ को डालकर उनके दोनों बूब्स जो मेरे धक्कों की गति की वज़ह से बुरी तरह से हिल रहे थे, उनको पकड़ लिया और में बुरी तरह से दोनों बूब्स को मसलने लगा था। अब भाभी की चीखे तेज निकलने लगी थी और वो बोली कि राकेश में दोबारा से झड़ने वाली हूँ। फिर मैंने कहा कि हाँ भाभी में भी अब आने वाला हूँ। तभी वो मुझसे कहने लगी कि तुम मेरी चूत को अपने लंड के अनमोल रस से पूरा भर दो और फिर इतना बोलते ही वो फिर से झड़ गयी और में भी उनके साथ उनकी चूत में अपने लंड की पिचकारी मारते हुए झड़ने लगा। अब वो वैसे ही पलंग पर लेट गयी और में भी उनके ऊपर ही लेट गया था। फिर थोड़ी देर के बाद हम शांत हुए, उसके बाद में उठा और में उनको अपनी गोद में उठाकर बाथरूम में पहुंच गया। अब वहाँ पर हम दोनों ने साथ में नहाने का भी मज़ा लिया और फिर मैंने उनको साबुन लगाया और उन्होंने मुझे भी मेरे पूरे शरीर पर साबुन लगाया।

फिर उन्होंने नीचे बैठकर मेरे लंड को चूसा, जिसकी वजह से मेरा लंड कुछ देर में फिर से खड़ा हो गया और अब मैंने उनको वहीं नहाने के टब में खड़ा किया और आगे की तरफ झुकाकर फिर से मैंने उनकी चूत में अपना लंड डाल दिया। अब हम दोनों के ऊपर ठंडा पानी गिर रहा था और उस ऊपर से गिरते हुए पानी में ही में उनको बुरी तरह से धक्के देकर चोद रहा था। फिर करीब बीस मिनट तक चोदने के बाद हम फिर से हम दोनों झड़ गये और वापस कमरे में आ गये। फिर थोड़ी देर आराम करने के बाद मैंने एक बार उनकी गांड भी मारी और उस पूरे दिन में मैंने होटल के उस कमरे में उनको करीब चार बार चोदा और एक बार उनकी गांड भी मारी। फिर उसके बाद हम दोनों पूरे मज़े मस्ती लेकर वापस अपने घर के लिए निकल गए और हम दोनों बड़े खुश था, क्योंकि मुझे उनकी चूत और उसको मेरा दमदार लंड लेने का मौका जो पहली बार मिला था और उस चुदाई की पूरी संतुष्टि से उनका चेहरा खुशी से खिल उठा था। दोस्तों अभी भी जब कभी भी हमारे टीचर जी कहीं बाहर होते, तब वो मौका पाकर मुझे अपने घर में बुलाकर मुझसे बहुत मस्त मज़े लेकर अपनी चुदाई करवाती और में भी अपनी तरफ से चुदाई के कोई भी कसर नहीं छोड़ता खुश होकर उनकी मस्त चुदाई करके उनकी चूत को शांत करके ठंडा करता हूँ।

दोस्तों अभी कुछ दिनों पहले मुझे पता चला कि मेरी चुदाई की वजह से मेरी वो चुदक्कड़ भाभी अब गर्भवती भी हो चुकी है और बहुत जल्दी वो मेरे बच्चे की माँ बनने वाली है और इस वजह से आजकल में उनको चोदता नहीं हूँ सिर्फ़ में उनकी गांड मारता हूँ और अपना लंड चुसवाता हूँ। दोस्तों मुझे उम्मीद है कि मेरी यह अपनी भाभी के साथ मज़े मस्ती वाली सच्ची घटना जरुर पसंद आएगी और अगर आगे भी मेरे पास कोई ऐसा कुछ लिखने के लिए हुआ तो में जरुर आप सभी की सेवा में उसको पेश करूंगा ।।

धन्यवाद …

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