कुत्ता और ननद, मैं और ससुर जी


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प्रेषक : गुमनाम
मेरी उम्र छबीस वर्ष है, विवाहित हूँ, विवाह को एक वर्ष से ऊपर बीत चुका है, इस समय मैं दो माह के गर्भ से हूँ, शादी के बाद प्रथम गर्भ खुशियों भरा होता है, मगर मुझे इस गर्भ ने बड़ी उलझन में डाल दिया है, समझ नहीं पा रही हूँ की गर्भ ठहरने की ख़ुशी मनाऊं या गम, निसंदेह आप यह जान कर चक्कर में पड़ गये होंगे, मैं कोई
सस्पेंस ड्रामा नहीं लिख रही हूँ, यह मेरी अपनी समस्या है जिसकी वजह से आज मैं बहुत परेशान हूँ, जब तक मैं सारी बात विस्तार नहीं नहीं लिखूंगी आप ढंग से कुछ नहीं समझ पायेंगे, मेरी ससुराल में पांच सदस्य हैं, दो मेरे सास ससुर, दो ननदें, जिनमे एक सोलह वर्ष की है दूसरी ग्यारह वर्ष की है, पांचवे मेरे पति, अब छठी मैं हूँ, इससे पहले ससूराल में एक सदस्य और था, मेरे पति का छोटा भाई जो मेरी शादी से पहले ही एक कार एक्सीडेंट में मारा गया था, जब मेरी शादी हुई थी निक्की (मेरी बड़ी ननद) पंद्रह वर्ष की किशोरी थी, उसके यौवन के फूल खिलने शुरू हुवे थे, मगर एक साल में ही वह काफी फुल फाल कर जवान लड़की दिखती थी, पति का कारोबार ऐसा है की उन्हें महिना महिना भर बाहर रुकना पड़ जाता है, ऐसे में मै अकेली उनको याद कर के बैचैन होती रहती, तीन महीने पहले पति काम के सिलसिले में इंग्लेंड जा रहे थे, कोई महिना चालीस दिन का टुर था, वे मुझे भी साथ ले जाना चाहते थे मगर मैनें ही इनकार कर दिया, मेरी सास की एक बहन बम्बई में रहती है, पति को फ्लाईट बम्बई से पकड़नी थी, तब सास अपनी छोटी बेटी को लेकर मेरे पति के साथ बम्बई के लिये रवाना हो गई, यह सोच कर की उनका बेटा जाते समय उन्हें छोड़ जायेगा और आते समय भी वह उन्ही के साथ वापस आ जायेगी,घर से तीन लोग चले गये और तीन लोग रह गये, मैं, मेरी ननद और ससुर जी, यहाँ मैं अपने ससुर जी के बारे मैं बताती चलूँ, उनकी उम्र पैंतालिस के उपर हो गई है मगर पैंतीस साल के पुरुष की तरह दीखते हैं, देखने मैं कुछ सांवले हैं मगर पर्सनेलिटी बहुत अच्छी है, कभी किसी बात का गम नहीं करते सदा खुश रहते हैं, शायद यही उनकी सेहत का राज भी है, शखशियत अच्छी है तो तबियत भी रंगीन है, सबके साथ हंसी मजाक कर लेते हैं, यहाँ तक की मेरे सामने भी नहीं हिचकते, मेरे साथ इस तरह हंसी ठिठोली करते हैं जैसे मैं उनकी बहु ना होकर भाभी होऊं, बल्कि मैं ही झेंप जाती हूँ, पत्नी और बेटे के जाने के बाद वे वक्त गुजारने के लिये बाहर चले जाते थे, कभी कभी दोपहर में आ जाते और कभी शाम को ही लौटते थे,

उस दिन दोपहर को मैं ऊपर बने अपने बैडरूम में सोने के लिए चली गई, मगर जब काफी देर तक नींद नहीं आई तो मैं निचे उतर आई, इन दिनों रात में भी मैं भरपुर नींद ले रही थी तो दिन में नींद कहाँ से आ जाती, पति होते थे तो दिन में खुब सोती थी, उसकी वजह तो आप समझ ही गए होंगे, जी हाँ, वे मुझे आधी आधी रात तक जगाते जो थे, अब ऐसा नहीं था, रात भर आराम ही आराम था, बहरहाल मैं निचे आ गई, ननद को मैं निचे ही छोड़ कर गई थी, वह मुझे कहीं दिखाई ना दी, मैंने सोचा किसी कमरे में जाकर सो गई होगी, वह कुछ संकोची स्वभाव की थी, जब किसी बात पर मैं उसे छेड़ती तो वह शर्मा जाती थी, मुझे लगा वह अभी हर बातों से अंजान है, मगर आज मेरा यह भ्रम टूट गया, वह अंजान और भोली भाली दिखाई जरूर देती थी, मगर अन्दर से बिलकुल भुनी हुई थी, यह मैंने आज ही जाना, तब जब मैं उसे तलाश करती करती एक कमरे से कुं-कुं तथा सिसकीयों की आवाजें सुनी, ड्राइंगरूम नुमा वह कमरा पूरी तरह बंद नहीं था, दरवाजे और दीवार के बिच थोडी सी झिरी बन रही थी, अन्दर से निकलते रहस्यमई स्वर ने मुझे होशियार कर दिया था अतः मैंने ननद को आवाज देने या दरवाजा एकदम से खोलने के बजाये दरवाजे में थोड़ी और दरार बनाई की देखूं अन्दर से ये कैसी आवाजें आ रही हैं?

अन्दर का नजारा देख मेरा मारे हैरत के बुरा हाल हो गया, कमरे के अन्दर मेरी ननद थी, मगर पुरी तरह नंगी, शरीर पर चिंदी मात्र भी कपडा नहीं था, उसके सेव आकार के नंगे उरोज, झिलमिलाती जांघें और गुदाज कुल्हे मेरी आँखों के सामने कामुकता बिखेर रहे थे, वह भी कोई चौंकने की बात नहीं थी, मगर अन्दर मेरी ननद के साथ हमारा वह विदेशी नस्ल का कुत्ता भी था जिसे पति विदेश से लेकर आये थे, लंबे लंबे बालों वाला वह ऊँचा कुत्ता ननद के सामने खड़ा उसकी जाँघों के बिच में मुंह दिये अपनी लंबी जीभ से चपड़ चपड़ उसकी योनी चाट रहा था, साथ ही वह कूं- कूं करके दुम भी हिला रहा था, और ननद अपनी जांघें फैलाये योनी चटवाती जोर जोर से अपने उरोज मसल रही थी, उसके चहरे पर बला की कामुकता झलक रही थी,वह सी सी करके अपने उरोज बुरी तरह रगड़ती जा रही थी, जैसे उरोजों के साथ उसकी खानदानी दुश्मनी चली आ रही हो, और वह विदेशी कुत्ता हिन्दुस्तानी योनी को ऐसे चाट रहा था जैसे रसमलाई खा रहा हो, लग रहा था वह योनी चाटने में बड़ा एक्सपर्ट है, यह सब देख मेरे शरीर में सनसनी दौड़ गई, तभी ननद ने अपनी टांगें सिकोड़ी उरोज मसलना रोक कर वह झुकी, कुत्ते ने बैचैनी से कूं-कूं करके योनी की ओर देखा, उसकी योनी एकदम चिकनी थी जो कुत्ते की खुरदुरी जीभ से चाटने की वजह से ऐसे लाल हो रही थी जैसे की उसके शरीर का सारा खून वहीँ सिमट आया हो, वही हाल उरोजों का भी था, निक्की ने निचे बैठ कर कुत्ते का लिंग झाँका जो दो इंच की लाल बत्ती जैसा बाहर निकल आया था, उसकी मोटाई आधा इंच से अधिक नहीं थी, निक्की ने हाँथ निचे ले जाकर खाल में धंसा हुआ कुत्ते का लिंग पकड़ लिया, लिंग देख कर निक्की की आँखें और भी लाल हो गई थी, कुत्ते ने कूं – कूं करके अपना शरीर कमान की तरह तान लिया,

निक्की ने लिंग की खाल को पीछे किया तो बत्ती चार पांच इंच लंबी निकल आई, निक्की उसे गौर से देखने के बाद लिंग छोड़ कर सीधी हुई, कुत्ते की कमर थपथपा कर उसे पुचकारा तो कुत्ते ने मुंह घुमा कर उसकी जांघ को चाट लिया, ” सब्र कर मेरे शेर,” निक्की वासना से कंपकंपाते स्वर में कुत्ते से बोली ” अभी तुझे तेरे मुकाम पर पहुंचाती हूँ ” कुत्ते ने इस तरह गर्दन हिलाई जैसे सब समझ गया हो, उसी छण निक्की ने घुटने और कुहनियाँ फर्श से टिका कर अपने कुल्हे उपर उठा लिये, मेरे दिमाग में तगड़ा झनाका हुआ, मैं समझ गई की वह कुत्ते से अपनी आग बुझवाना चाहती है, उसकी पीछे की ओर उभरी हुई योनी उत्तेजना की अधिकता से कभी होंठ खोल रही थी कभी बंद कर रही थी,

कुत्ता भी जैसे इस क्रिया में सधा हुआ था, उसके निचे झुकते ही वह मुंडी उठा कर निक्की की योनी सुंघने लगा, कुत्ते हर मामले में बड़े संवेदनशील होते हैं, वह योनी की उत्तेजना भांप रहा था की वह अब तैयार है या नहीं, निक्की के ” कम् ऑन ” कहते ही उसने अपनी अगली टाँगे उठा कर उसके कूल्हों पर चढ़ा दी, निक्की ने अपना सारा भार अपने घुटनों पर रोका और हांथों से कुत्ते की टाँगे पकड़ कर थोड़ा और ऊपर खिंच लिया ताकि लिंग को योनी प्रवेश में परेशानी ना हो, एकबारगी मैंने सोचा निक्की को यह सब करने से रोक लूँ, मगर उस छण उसे रोकना मैंने मुनासीब नहीं समझा, बस आश्चर्य में डूबी एक लड़की और एक कुत्ते का अनोखा मिलन देखती रही, धड़ पे चढ़ने के बाद कुत्ते ने अपना पिछला धड़ आगे उछालना शुरू कर दिया, उसका लिंग योनी के आस पास चुभ कर इधर उधर हो जाता, वह सही निशाना नहीं ढूंड पा रहा था, मेरा दिल हुआ की मैं आगे बढ़ कर मैं उस बेचारे की मदद कर दुं, कुत्ता कांय कांय करके जोर जोर से धड़ पटक रहा था,

मेरी मदद की आवश्यकता नहीं पड़ी, निक्की ने खुद हाँथ पीछे लाकर उसका लिंग पकड़ा और अपनी योनी के छोटे से छिद्र पर लिंग की बारीक नोंक टीका दी, कुत्ते ने जरा भी देरी किये बिना झट से कुल्हे उछाल कर सटाक से लिंग अन्दर घुसा दिया, निक्की ने सिसकी भर कर हाँथ हटा लिया, मेरा दिल बुरी तरह धक धक कर रहा था, आधा इंच मोटा और पांच इंच लंबा कुत्ते का चिकना लिंग सरसराता हुआ निक्की की योनी में घुस गया, इधर मेरे मुंह से भी सिसकारी निकल गई, मैंने तगड़ी झुरझुरी लेकर वहाँ से नजरें हटा ली, अब अन्दर देखने काबिल कुछ नहीं था, अन्दर कुत्ते तथा निक्की के सहयोग से कुत्ते एवं इंसान के अनोखे मीलन का अंतिम चरण चल रहा था,

मेरा शरीर बुरी तरह सनसना रहा था, मैनें किचन में जा कर कई गिलास पानी से अपना खुश्क हो चला हलक तर किया, तब कुछ तस्सली मिली, मैं बाहर आकर बैठ गई, कोई दस मिनट बाद पहले कुत्ता बाहर आया, अब वह बिलकुल शांत था जैसे पेट भर के लौटा हो, वह एक कोने में जाकर लम्बा लम्बा पड़ गया, थोड़ी देर बाद निक्की बाहर आई, उसके चेहरे पर भी शान्ति थी, मगर रंग उड़ा हुवा था, पसीने की बूंदें अभी तक उसके माथे पर चमक रही थी, मुझे बाहर बैठा देख कर वह चौंकी जरूर मगर रुके बिना बाथरूम की और बढ़ी, मैनें कनखियों से उसे देख कर कहा, ” निक्की बाथरूम से निबट कर जरा मेरी बात सुनना,”

” ज …जी…..” वह अचकचा गई और शक भरी नजरों से मेरी ओर देखा, परन्तु मैंने अपने चेहरे पर ऐसा कोई भाव नहीं आने दिया जिससे वह कुछ आइडिया लगाती, वह शान्ति भरी सांस लेकर, ” जी भाभी जी ” कह कर बाथरूम की ओर बढ़ गई, लौट कर मेरे बराबर में बैठती हुई बोली, ” हाँ अब बताइये भाभी जी ” मैनें उसे गौर से देखने के बाद प्रेम से पूछा ” तुं मुझे अपनी क्या समझती है?” ” भाभी ओर क्या?”वह हंसी ” और तुझे यह भी पता होगा की मैं जो कुछ भी कहूँगी तेरे भले के लिये कहुंगी,” ” हाँ…मगर…”उसके स्वर में हल्का सा कंपन उभर आया, ” बात क्या है?”

मैनें एक गहरी सांस लेकर नपे तुले शब्दों में कहा ” यह जो तुं अन्दर कुत्ते के साथ कर रही थी वह सब गलत है,” इतना सुनते ही निक्की का चेहरा फक्क पड़ गया, उसके नेत्रों में घबराहट और लज्जा का समावेश एक साथ हुवा, जैसे किसी चोर को रंगे हांथों पकड़ लिया गया हो, वह हकलाई “भ…भाभी …व …वो …”
” बस मैं समझ गई, सफाई देने की आवशयकता नहीं है, और तुं घबरा भी मत, मैं यह बात अपने तक ही सीमित रखूंगी ” मैंने अपनी मोहक मुस्कान के जरिये उसे कुछ राहत प्रदान की, ” मैं जानती हूँ पागल की इस उम्र में ऐसा होता ही है, मन पर काबू नहीं रहता, हर समय कामुकता भरे विचार रहते हैं मन में, उल्टे सीधे काम मैंने भी किये हैं, पता है जब मैं तेरी ही बराबर थी तो अपनी योनी में मोमबत्ती डाल कर अपना कुमारी पर्दा फाड़ लिया था, बहुत खून निकला था, योनी इतनी सुज गई थी,” मैनें हांथों को ऊपर निचे करके बताया तो निक्की के चेहरे पर रंग वापस लौटा और हल्की सी मुस्कान भी तैर गई,

” यही हाल तो मेरा होता है भाभी इसिलिये….” कहते कहते उसने शर्मा कर गर्दन नीची कर ली,
” मुझे मालुम है, मगर देख कुत्ते के साथ ये सब करना उचित नहीं, वो जानवर है, अगर तुझे कोई बिमारी लग गई तो? इसके साथ ये भी सोच की अगर तेरे पेट में कुत्ते का गर्भ ठहर गया तो?” मैनें उसे झूठ मुठ डराया, सुन कर वाकई उसका चेहरा उतर गया, वो फंसे फंसे स्वर में बोली, ” व …वो सब तो में भी जानती हूँ भाभी, मगर अपने उपर काबू नहीं रहता,”

” तो क्या इंसान तेरे लिये मर गये हैं. किसी लड़के के साथ कर ले.” मैंने कहा ” उससे तुझे पुरा आनन्द भी मिलेगा और कोई खतरा भी नहीं,” मेरी बात सुन कर एकाएक निक्की घबराहट भरे स्वर में बोली ” ना भाभी…मर्द के साथ ना…बाबा…ना,” ” क्यों क्या हुआ ” मैंने मुस्कुरा कर पूछा, ” आप बड़ी हो इसलिए आपको कुछ नहीं लगता, मगर में नहीं….मर्द का इतना लंबा चौड़ा लिंग कभी भी नहीं झेल पाउंगी,” ” क्या?” मैं चौंकी ” तुं कितना बड़ा समझती है मर्द के लिंग को? ” जवाब में वो अपनी कुहनी से जरा निचे हाँथ रख कर बोली ” इतना लंबा और इतना ( दो उँगलियों को फैला कर ) मोटा ” उसने झुरझुरी सी ली,

” पागल हुई है क्या ” मैनें उसकी मजाक उड़ाई, ” यह घोड़े के लिंग का साइज है जो तुं बता रही है, मर्द का तो इससे आधा भी नहीं होता, तुझे किसने बहका दिया,” ” बहका तो मुझे आप रही हो,” वो फौरन बोली, मैनें खुद अपनी आँखों से मर्द का लिंग देखा है, एक बार नहीं बल्कि दसियों बार ” “क …किसका देख लिया तुने?” मेरा स्वर बहक गया, उसकी बात बड़ी चौंकाने वाली थी, ” डैडी का, वो मम्मी के साथ करते हैं तो मैनें कई बार देखा है,” वो अपनी लय में बता तो गई मगर फिर एकदम से शर्मा कर निगाह निचे कर ली,

“ओह ” मेरे होंठ सिकुड़ गये, मगर जितना बता रही थी उस पर मुझे विस्वाश नहीं हुआ,मैं बोली, ” तुम्हें गलतफहमी हुई है ” ” नहीं भाभी मैं सच कह रही हूँ, ” बाई गोड ” उसने मेरी बात काट कर कहा तो मैंने सोचा उसके दिल में गलतफहमी है, खैर मैनें अधिक बहस ना करके उससे कहा, ” ठीक है हो सकता है उनका कुछ बड़ा हो मगर मेरी बन्नो सारे मर्दों के लिंग एक आकार के नहीं होते, जैसे तेरे भईया का लिंग इतना बड़ा है (,मैनें अपने पति के लिंग का वास्तविक साइज बताया, जो की उसके बताए साइज से आधा ही था ) तथा लिंग इससे भी कम होते हैं, कुछ लड़कों के तो चार पांच इंच से अधिक नहीं होते,” मेरी बात सुन कर उसके चेहरे पर अविस्वाश के भाव आये, ” रियली भाभी आप झूठ तो नहीं बोल रही हैं?” ” क्यों भला, तुमसे झूठ बोल कर मुझे क्या मिलेगा?” मैनें उसे विस्वाश दिलाया, तुं किसी और का लिंग देखेगी तो खुद तुझे विस्वाश आ जायेगा,” निक्की के चेहरे पर कुछ विस्वाश की झलक उभरी, वह गहरी सांस लेकर बोली, ” अगर ऐसा है तो मैं राकेश का लिंग खुलवा कर देखूंगी,” ” राकेश कौन? ” मैनें फिर पूछा, उसने बताया राकेश उसका सबसे अच्छा बॉयफ्रेंड है और उसने कई बार निक्की के साथ संबंध बनाने की चेष्टा की मगर उसने अपने दिल में बैठी लिंगों की दहशत की वजह से उसे अपना शरीर नहीं छूने दिया, मैं गहरी सांस लेकर बोली, ” जरूर देखना और अगर दिल करे तो खा भी जाना, प्रथम सम्भोग में थोडी बहुत तकलीफ होती है, तुझे वह भी नहीं होगी क्योंकि तुने कुत्ते द्बारा अपना कौमार्य पहले ही भंग करवा लिया है, बेस्ट ऑफ़ लक्, सब कुछ करना मगर सावधानी के साथ, कोई गड़बड़ ना होने पाये, बल्कि जब भी तुझे संभोग कराने की जरूरत पड़े मुझसे पूछ लिया कर, मैं तुझे ऐसी दवा दूंगी जिससे तुझे कभी गर्भ नहीं ठहरेगा,”

” अच्छा तो आप भी वही दवा खाती हो ” उसने आँख मटकाई ” तभी तो मैं भुवा नहीं बनी, ” उसके गाल पर थपकी देकर बोली “काफी समझदार हो गई हो, तुझे भुवा बनने की इच्छा है तो आज से ही गोली का इस्तेमाल बंद, पूरा पैकेट रखा है, तूं ले लेना, तेरे काम आयेगा’ इस तरह निक्की को मैनें सब तरह से तसल्ली दे दी, मैं जानती थी की लड़की को इस तरह बहका कर मैं गलत कर रही हूँ, लेकिन यह भी जानती थी की निक्की मानने वाली नहीं है, वह कभी ना कभी तो कुछ करेगी ही, तो क्यों ना उस सबका पता मुझे रहे ताकि परिवार की इज्जत को कोई बट्टा भी ना लगे, और समय समय पर मैं उसे सही राय देती रहूँ,

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उसे तो मैनें जो समझाना था समझा दिया लेकिन खुद उलझन में फंस गई, जैसा कि निक्की ने अपने डैडी यानी मेरे ससुर के लिंग का वर्णन किया था, वह अकल्पनीय था, मगर निक्की इतना भी झूठ नहीं बोल सकती थी, चाहे उतना ना सही मगर ससुर का लिंग बड़ा जरूर होगा, पर कितना? क्या मेरे पति के लिंग से भी बड़ा? जबकि मैं अभी तक पति के लिंग को ही बहुत बड़ा मानती थी, निक्की ने मेरी इस धारणा को ही बदल दिया, उसके हिसाब से मेरी कल्पना में लंबा चौड़ा बन्बु जैसा लिंग लहराता हुआ घुम रहा था, मैनें तय कर लिया कि मैं ससुर का लिंग एक बार देखूंगी जरूर, मगर कैसे? इस समय तो सास भी घर में नहीं थी जो मैं उन्हें संभोग करते देख लेती, मैं दिनभर तरकीब भिडाती रही कि किस तरह उनके लिंग को देखूं? रात होते होते मैनें अपने दिमाग में उनका लिंग देखने के लिये एक योजना बना डाली, अपनी योजना के मुताबिक मैं उनके दूध में नींद कि दो गोलियां डाल कर उनके कमरे में रख आई, ससुर सोने से पहले दूध पिने के आदि थे, निक्की अपने अलग कमरे में सोती थी, वह अपने कमरे में जाकर लेट गई, और मैं अपने कमरे में, रात साढ़े ग्यारह बजे तक इन्तजार करने के बाद मैं उठी, अब मैं निश्चिंत थी कि ससुर जिन्हें मैं भी डैडी कहती थी वह भी नींद कि गोलियों के प्रभाव से सो चुके होंगे, जहां वह सो रहे थे मैनें उस कमरे का दरवाजा खोल कर देखा,

मेरा मन मारे खुशी के उछल पड़ा, ससुर खर्राटे भर रहे थे, मैनें दबे पाँव अन्दर जाकर दरवाजा बंद कर लिया और उनके पास जाकर पहले डैडी डैडी कहके धीमे से पुकारा, मगर उन्होंने सांस भी ना ली, वो बेखबर सोते रहे, नींद कि गोलियों का उन पर पूरा प्रभाव था, मैनें धीरे से उनकी धोती के पट इधर उधर पलट दिये, उन्होंने निचे नेकर नहीं पहन रखा था, उनका लटका हुआ लिंग उन्ही कि भाँती चैन की नींद सो रहा था, सिकुड़ी हुई हालत में भी वह करीब तीन चार इंच लंबा था, एक छोटे से केले जितना, मुझे निक्की की बात में कुछ सच्चाई दिखाई दी, मगर इस हालत में उसकी पूरी लंबाई चौडाई का आइडिया लगाना एकदम नामुमकिन था, लिंग की असली हालत जानने के लिये जरूरी था लिंग को खड़ा किया जाना,

मगर यह भी एक समस्या थी, भला उत्तेजित किये बिना लिंग खडा कैसे होता, डैडी को जगा कर तो उत्तेजित कर नहीं सकती थी, काफी देर सोचने के बाद मैनें धीरे से लिंग पर अपना हाँथ रख दिया, मेरा दिल धड़क उठा, ससुर की ओर देखा, उनके चेहरे पर कोई भाव ना उभरा, तब मैनें हिम्मत कर के लिंग पर धीरे धीरे हाँथ फेरा फिर भी जब लिंग की स्थिति में कोई परिवर्तन नहीं आया तो मैनें उँगलियों का दायरा बना कर लिंग पकड़ लिया और हाँथ को धीरे धीरे हिलाया तो लिंग में थोड़ी सी सुरसुराहट पैदा हुई, मैं जल्दी जल्दी उसे सहलाने लगी, लिंग धीरे धीरे फूलने लगा, काफी देर की मेहनत के बाद जब लिंग झटके खाता हुआ उठा तो मैनें घबराहट में उसे छोड़ दिया, मारे हैरानी के मेरा बुरा हाल हो गया, निक्की की बात में बहुत सच्चाई थी, लिंग का साइज सचमुच गधे के लिंग जैसा था, वही आकार प्रकार रूप रंग, सब कुछ वही, देखने वाले को धोखा हो जाये की कहीं मेरे ससुर गधे तो नहीं हैं, यह मेरे लिए ही नहीं बल्कि किसी के लिये भी आश्चर्य ही बात हो सकती थी, मैनें देखा ससुर अभी तक नींद के प्रभाव में हैं और वे अभी जल्दी से जागेंगे भी नहीं तो कुछ अधिक हिम्मत पर उतर आई, उनके लंबे लिंग को देख कर कोई और भावना तो नहीं आई लेकिन यह भावना जरूर थी की मेरी सास ने अब तक इस लिंग को कैसे झेला होगा,

मेरे मन की स्थिति खराब हो गई, मेरे मन में एक जिज्ञाशा उठी, मैनें लिंग को दबा कर देखा, उसकी कठोरता में भी कोई कमी नहीं थी, मैं उपर चढ़ गई, ससुर की टांगों को बीच में लेकर मैं धीरे धीरे घुटनों के बल बैठी और सरक कर लिंग के पास आई, मैनें अपने कुल्हे ससुर की तंदरुस्त जाँघों पर टिका दिये, पर भार नहीं डाला, ससुर को चेक किया वे सो रहे थे, मैं निश्चिंत होकर अपना काम करने लगी, मेरा इरादा केवल लिंग को नाप कर देखने का था, घुटने मुड़ने की वजह से मेरी साड़ी और पेटीकोट लिंग के आगे आ गये, मैनें फिर धीरे से उठ कर पेटीकोट समेत साड़ी को उपर तक समेट लिया, मेरी जांघें पुरी नंगी हो गई, मगर कोई बात नहीं, ससुर मुझे देख थोड़े ही रहे थे, इसलिये मैनें नंगी जाँघों की परवाह किये बगैर दुबारा धीरे से जाँघों पर बैठ गई, एक हाँथ से लिंग पकड़ा और सीधा करके अपने पेट पर लगाया, गर्म गर्म चिकना लिंग पेट पर सटा गुदगुदी कर रहा था, मैनें जो उपर तक उसका साइज देखा तो दिल धक्क से रह गया, हालांकि मैं कद में लंबी थी फिर भी उनका लिंग मेरी पसलियों से इंच भर निचे तक आ रहा था,

” ब…बाप…..रे ” मैं सास की हिम्मत की दाद दिये बिना ना रह सकी, जिनकी योनी के रास्ते से लिंग घुस कर पसलियों तक पहुँच जाता होगा, कैसे बर्दास्त करती होंगी वे इस गधे सामान लिंग को, चौड़ाई भी कम नहीं थी, एक टेनीस की बोल से जरा सा कम चौड़ाई वाला सुपाड़ा सास की योनी में घुसता कैसे होगा? यह बात तो और भी आश्चर्य में डालने वाली थी,

मैं उसी प्रकार धीरे से घुटनों पर खड़ी हो गई, लंबाई नाप चुकी थी अब चौड़ाई नापनी थी, मैनें अपनी साड़ी और पेटीकोट को कूल्हों से उपर तक उठा कर एक हाँथ से साड़ी और पेटीकोट संभाला तथा दुसरे हाँथ से लिंग पकड़ कर अपनी जाँघों के बीच में ले आई, इस समय मैं धड़ तक पूरी नंगी थी, मेरी छोटे छोटे बालों युक्त योनी अपने निचे विकराल लिंग को देख कर घबरा उठी थी, उसे डर लग रहा था की कहीं उछलता कूदता लिंग उसे फाड़ ना डाले, योनी ने सनसना कर चेताया की मैं खतरा मोल ले रही हूँ, मगर मैनें उसे दिल ही दिल में तस्सली दी बस एक मिनट अभी हट जाउंगी जरा लिंग का साइज नाप लूँ, मेरी योनी ने इजाजत तो ना दी मगर मैनें उसकी सुने बगैर थोड़ा निचे होकर लिंग अपनी योनी पर रख लिया, लिंग की मोटाई हौलाने वाली थी, मेरी जांघें फैली हुई थी फिर भी लिंग का चौडा सुपाड़ा मेरी जाँघों के सिरे पर टच कर रहा था, मैनें झुक कर निचे झाँका,

” उफ,” दिल धक् से रह गया, लिंग मुंड ने मेरी योनी को उपर तक ढक लिया था, अब तक मेरी योनी उसकी गर्मी से झुलसने लगी थी, यहाँ एक गड़बड़ चल रही थी जो मुझे पता नहीं थी, ससुर जिन्हें मैं नींद की गोलियों के प्रभाव में बेखबर सोता समझ निश्चिंत होकर ये सब कुछ कर रही थी यह नहीं जानती थी की वे शराब पिने के आदि हैं और शराब पिने वालों पर नींद की गोलियां कुछ ख़ास असर नहीं दिखाती, वे तो कभी के जाग चुके थे, और मुझे लिंग की नाप तौल करते हुवे भी देख रहे थे, उस और से बेखबर एक बारगी मेरा मन हुवा जोर लगा कर देखूं की इतना बड़ा लिंग घुसेगा कैसे, पर योनी ने फौरन घबरा कर इनकार कर दिया, खुद मुझे भी अपना यह विचार पूरी तरह जंचा नहीं, इससे पहले की मैं उत्तेजना में पागल होकर कोई उलटा सीधा कदम उठाती मैनें विचलित होकर उठना चाहा, मगर तभी ससुर ने आँखें खोल कर धीरे से कहा, “इस तरह क्या पता लगेगा बहु, अन्दर करा कर देख लो ”

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“आं” मैं इस तरह उछल पड़ी जैसे बिच्छू ने डंक मार दिया हो, मैनें घबरा कर ससुर की ओर देखा, उन्हें जागते देख मेरे शरीर से इस तरह हवा निकल गई जैसे गुब्बारे में से हवा निकल जाती है, शरीर स्वयं ढीला होकर उनके लिंग पर भार बनता जा रहा था, तभी उन्होंने मेरी जांघें पकड़ ली और सहलाते हुवे बोले ” लाओ मैं ही अन्दर कर देता हूँ,” उनके इरादे जान कर मुझ पर बला का खौफ हावी हो गया और पहली बार एहसास हुआ की मेरा भार उनके लिंग पर बहुत बढ़ गया है, लिंग योनी के होंठों को फैला कर योनिमुख में चुभ रहा था, मैनें घबराहट में वहाँ से उछल कर दूर हट जाना चाहा परन्तु ससुर पहले ही वार कर चुके थे,

मेरी जाँघों को पकडे पुरी ताकत से शरीर को निचे खींचते हुवे उन्होंने निचे से जोर की उछाल भरी, एक झटके में लिंग ने योनी को बुरी तरह चौडाया और अगले झटके में तडाक से अन्दर भी घुस गया, उनके बल के आगे मैं लिंग को प्रवेश होने से ना रोक सकी, मारे दर्द के मेरा मुंह खुले का खुला रह गया, आवाज जैसे गले में ही अटक गई, लगा जैसे मेरी जाँघों समेत योनी को चिर दिया गया हो, मेरे हाँथ से पेटीकोट समेत साड़ी छुट गई, लिंग और योनी साड़ी के अन्दर ढँक गये, अब आड़ में लिंग अन्दर को बढ़ने की नाकाम चेष्टा कर रहा था क्योंकि मैनें किसी तरह कोशिश कर के अपने भार को निचे गिरने से रोक साड़ी के उपर से लिंग को पकड़ लिया और चिल्लाई,

” ना…नहीं….डैडी….म…मर जाउंगी. हाय….मेरी…योनी….फटी…मैं बर्दास्त नहीं कर सकती …..छ…छोड़, दो…..मुझे…ज…जोर मत लगाओ डैडी…आई…ई …इई…. डैडी अब मानने वाले नहीं थे, वे तरंग में भर कर उठ बैठे, मैं पीछे उनकी टांगों पर गिरी, लिंग हांथों से छुट गया,, गिरने की वजह से लिंग जोर से हिला तो मेरे मुख से चीख निकल गई, डैडी ने फटाक से मेरे हाँथ पकड़ कर वासनायुक्त क्रूर स्वर में कहा, ” अब तो कर ही दिया हूँ बहु, भलाई इसी में है कि शोर वोर मत मचाओ, आराम से सीधी लेट कर लिंग अन्दर करा लो वरना जबरदस्ती में तुम हार जाओगी, मैं जबरदस्ती करूंगा तो तुम्हे बहुत दर्द होगा, सोच लो मैं जबरदस्ती करूँ या तुम आराम से लेटती हो?’ डैडी कि बात सुन कर मैं और भी सनांटे में आ गई, बात भी सच थी. मैं कमजोर सी औरत पहाड़ जैसे आदमी के आगे क्या कर सकती थी, लिंग मुंड घुस ही चूका था, बाकी का लिंग भी वे घुसा ही देते अतः मैनें जल्दी से कहा, ” ना…नहीं डैडी….जबरदस्ती मत करना, ठीक है मैं लेट रही हूँ, सीधी लेट रही हूँ, कुछ नहीं कहूँगी, ” मेरे कहने का अंदाज बिलकुल मजबूरी वाला था, तब डैडी ने विजयी मुस्कान के साथ मेरे हाँथ छोड़े और सीधे बैठ गये, उस समय मेरा दिल हुवा कि मैं इसी मौके का लाभ उठा कर उनकी पकड़ से छुट जाऊं, मगर मेरा यह विचार खोखला था, वे पुरी तरह होशियार बैठे थे, बेबसी और दर्द के मारे मेरी आँखों में आंसू आ गये, ससुर ने मुझे समझाया, ” देखो दिल छोटा करने से कोई फायदा नहीं, अब तुम मेरा सहयोग करो और देखो मैं सारा लिंग अन्दर डाल दूंगा और तुम्हे तकलीफ भी नहीं होगी,”

” सा….सारा….?” मेरा कलेजा मुंह को आ लगा, ” अच्छा चलो सारा नहीं डालूँगा, जितना तुम कहोगी उतना ही डालूँगा, बस अब तुम रिलेक्स हो जाओ,” उनकी बात पर विश्वाश करके मैनें अपने आंसु पी लिये और दया मांगती आँखों से उनकी ओर देख कर बोली, ” बहुत लम्बा मोटा है आपका डैडी, जरा आराम से करना, मैं आपके हाँथ जोड़ती हूँ, आह…” जवाब में उन्होंने आश्वासन भरी मुस्कान मेरी ओर उछाल दी, डैडी ने मेरी साड़ी और पेटीकोट को दोबारा उठा कर मेरे पेट पर किया, वे मेरी जाँघों के बीच में देख रहे थे, उनकी आँखों में गहरी चमक थी, मैनें भी सीर उठा कर उधर देखा, ” उफ ” गधे समान लिंग मेरी योनी को बुरी तरह चौडाए अन्दर अटका पड़ा था, मेरी योनी की खाल ऊपर तक सिमट गई और पेडू कुछ फुल गया था, इसलिए क्योंकि वहाँ तक उनका लिंग चढ़ आया था, डैडी ने मेरी टांगें उठा कर अपने कन्धों पर चढा ली और मेरी योनी के उपरी हिस्से तथा जांघों को सहलाते हुवे बोले, ” तुम्हारी योनी और जांघें बड़ी चिकनी हैं बहु, दीपक (मेरे पति) तो मर मिटा होगा तुम पर,”

” हा…हाँ… डैडी संभल कर ” मैनें उनकी बात पर ध्यान दिये बिना उन्हें फिर से चेताया, अब दर्द कुछ कम हो गया था, ” तुम चिंता क्यों कर रही हो बहु, तुम भी तो आखिर मेरी अपनी हो,” ससुर ने मीठी बातों के जरिये मुझे आश्वस्त किया और धीरे धीरे लिंग अन्दर बढाने लगे, मुझे फिर तकलीफ होने लगी, दो इंच लिंग और उपर आते ही मैं दर्द से बिलबिला कर बोली, ” र…रुक… जाओ….डैडी…….बस….बस….करो…..” वे रुक गये और थोड़ा लिंग वापस खिंच कर उतने ही लिंग को आगे बढाया फिर खींचा फिर बढाया, इस तरह लिंग को दो तीन बार आगे पीछे करने के बाद थोड़ा सा लिंग और आगे ठेल दिया, मुझे फिर दर्द हुवा तो फिर रुक कर उतने ही लिंग द्बारा घर्षण करने लगे, इस तरह आधा लिंग उन्होंने मेरी योनी को पिला दिया, उसके बाद रुक कर पूछा
” अब बोलो बहु, अब तो दर्द नहीं है?” दर्द सचमुच नहीं था, वे लिंग प्रवेश के साथ ही साथ दर्द मिटाते जो आये थे, बल्कि अब मेरी योनी में उत्तेजना आ रही थी, मैनें इनकार में गर्दन हिलाई तो बोले,

” आधा बाकी रह गया है उसे भी डाल दूँ,”

मैनें अपना पेट टटोला, लिंग अलग ही पता लग रहा था, वह मेरी नाभी तक आ चूका था, मैनें सोचा जब यहाँ तक आ गया है तो थोड़ा सा और भी उपर आ जायेगा अतः मैं उत्तेजना से कंपकंपाते स्वर में बोली,

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” बड़ा विकराल लिंग है आपका डैडी, खैर पहले की भाँती डाल कर देखो शायद थोड़ा सा और उपर आजायेगा,” इस पर डैडी हंसते हुवे बोले, ” थोड़ा सा नहीं बहु, तुम हिम्मत करोगी तो पूरा झेल जाओगी,” ” हिम्मत तो कर ही रही हूँ डैडी, तभी तो इतना झेल गई मगर पूरा नहीं झेल सकुंगी,” ” तुम्हारी सास भी ऐसा ही बोलती थी, मगर पहली ही रात में पूरा पेल दिया था,” ” वे हिम्मत वाली हैं डैडी, खैर देखुंगी,” मैनें उन्हें हरी झंडी दिखाई, तो वे फिर पहले वाले स्टाइल में लिंग ठेलने लगे, लगभग एक चौथाई लिंग बाहर रह गया तो मुझ पर उत्तेजना का बेहद नशा सवार हो गया और यह बात सच है कि जब औरत पर उत्तेजना आती है तो उस समय उसकी योनी में चाहे पुरा मुसल ही क्यों ना ठुंस दो वह मजे मजे में झेल जायेगी, अब मुझे लगा की मेरी योनी में जगह ही जगह है, सो खुद कुल्हे उठा उठा कर ससुर का पुरा लिंग अन्दर ले गई,

” देखो मैं कहता था ना पुरा ले जाओगी, एक इंच भी बाहर नहीं छोड़ा,” ससुर चहकते स्वर में कह कर शरारत से मुस्कुराए, ” हाँ डैडी झेल गई मैं आपका पुरा लिंग,” मैनें भी कामुकता में उनका पुरा साथ दिया, ” पता नहीं आपका इतना लम्बा चौड़ा लिंग किधर जाकर अड़ गया है,” ” इधर ही है, दिखाऊं, ” उन्होंने शरारत में भर कर पुरा लिंग बाहर खींच लिया, मेरा पेट एकदम खाली खाली हो गया तो मैनें बुरी तरह विचलित होकर उनके योनी रस से लिथडे लिंग को पकड़ कर योनी में ठुंसा तो उन्होंने जोरदार धक्कों से लिंग पुरा अन्दर पेल दिया, अब दर्द के बजाये योनी में मीठी मीठी झनझनाहट हो रही थी, ससुर और मैं पुरे जोश में आ चुके थे, उन्होंने टांगें सीधी करके धक्के लगाने शुरु कर दिये तो मैनें भी निचे से उनका भरपुर सहयोग किया, लिंग देखने भालने में भले ही डरावना लग रहा था और योनी के अन्दर लेने में मुझे तकलीफ भी हुई थी, मगर उनके लिंग ने मुझे जो मजा दिया वो मेरे जीवन में अब तक के संभोग सुख का सबसे अच्छा सुख था, ससुर की मर्दानगी पर मैं कुर्बान हो गई, मन में ये सोच भी उभरी की काश पति का लिंग भी ऐसा होता तो मैं हर रोज ऐसा ही सुख पाती, खैर ये लिंग भी घर में ही था, अंतिम चरण में पहुँच कर ससुर ने इतना वीर्य मेरी योनी में उगला की मेरी योनी लबालब भर गई, मजे मजे में आकर मैनें उस रात तीन बार ससुर के साथ संभोग किया, मेरा शरीर थक कर चकनाचुर हो गया तब मैं अपने बैडरूम में आकर सोयी, अब तक मैनें फेमिली प्लानिंग अपनाई हुई थी, संभोग से पहले या संभोग के बाद गर्भ निरोधक गोलियां खा लिया करती थी परन्तु ससुर की मर्दानगी में ऐसी बावरी हुई की समय पर गोलियां खाने का ध्यान ही नहीं रहता, ससुर को अब घर में दिल बहलाने का साधन मिल गया था, वे अब घर से नहीं जाते थे, रात दिन घर में ही पड़े रहते और जब मौका मिलता मुझसे संभोग कर डालते, स्वयं भी संभोग का पुरा मजा लुटते और मुझे भी भरपुर सुख देते, इस तरह महिना कब बीत गया मुझे पता भी नहीं चला, इस बीच एक बार भी पति को याद नहीं किया, बल्कि यही दिल हो रहा था की पति एक महीने की बजाये दो महीने बाद लौटें ताकि मैं ससुर की मर्दानगी का पुरा पुरा आनन्द ले सकूँ, सास और पति के आ जाने के बाद तो हमारा मिलना मुमकिन ही नहीं था और फिर मौका मिला भी नहीं, पति सास तथा छोटी बहन के साथ लौट आये, यहाँ मैं आपको अपना मासिक क्रम बता दूँ ताकि आप जान जाएँ की मेरे पेट में ठहरा गर्भ किसका हो सकता है, जब पति गये थे तब उनके जाने के दो तीन दिन पहले ही मैं मासिक धर्म से निपटी थी. मासिक धर्म के बाद पति ने मेरे साथ संभोग भी किया था, यहाँ यह भी उल्लेखनीय है की मैं पति की मौजूदगी में गर्भ निरोधक गोलियों का नियम से सेवन कर रही थी, पति के जाने के बाद जैसा मैं ऊपर लिख चुकी हूँ ससुर से सम्बन्ध बने, गर्भ निरोधक गोलियों का सेवन तो मैनें किया मगर नियम से नहीं किया, तीन – तीन चार – चार दिन के बाद एक बार याद आती तो गोली खा लेती वरना गोलियां खाए बगैर ही ससुर के साथ खूब सम्भोग किया, इस हिसाब से मेरी माहवारी अगली बार पति के लौटने से पहले ही होनी थी मगर नहीं हुई, उस तरफ अधिक ध्यान नहीं दिया, पति के लौट आने के बाद ससुर के साथ संबंध ख़त्म हो गये, पति ने संभोग किया मगर जब उनके लौटने के बाद भी एक हफ्ते तक माहवारी के कोई आसार नहीं दिखे तब मैं चौंकी, डाक्टर के पास जाकर चेकअप कराया तो पता लगा की मैं एक माह की गर्भवती हूँ, मैं सोच में पड़ गई की आखिर मेरे पेट में ठहरा गर्भ है तो किसका, ससुर की ओर का पलड़ा भारी था, क्योंकि उस बीच मैनें गोलियों का ठीक से सेवन नहीं किया था, मुझे तो पुरा विस्वाश है पेट में ठहरा गर्भ ससुर का ही हो सकता है, मैं करूँ तो क्या करूँ, बच्चा रहने दूँ या गर्भपात करा लूँ, इसी ऊहापोह में एक महिना और बीत गया, इस समय मैं दो माह की गर्भवती हूँ, अभी अपने गर्भवती होने की बात मैनें किसी को नहीं बताई है, पति को भी पता नहीं है,

धन्यवाद

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