झोपड़ी में बहन की गन्दी चुदाई


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प्रेषक : सुशील …

हैल्लो दोस्तों, मेरा सुशील है और में भी कुछ सालों से आप सभी की तरह कामुकता डॉट कॉम पर इन सभी सच्ची घटनाओ के मज़े लेता आ रहा हूँ। दोस्तों आज में आप सभी की सेवा में मेरी एक सच्ची घटना को लेकर प्रस्तुत हुआ हूँ और इसको शुरू करने से पहले में अपनी परिचय आप सभी को दे देता हूँ। दोस्तों में अभी कुछ सालों से अपनी एक सरकारी नौकरी की वजह से मुंबई में रह रहा हूँ और वैसे में राजस्थान के बीकानेर का रहने वाला हूँ मेरा बचपन यहीं पर बीता और जब में 10th की पढ़ाई कर रहा था तभी एक सड़क हादसे में मेरी मम्मी पापा की म्रत्यु हो गई और उसके बाद मुझे मेरे परिवार के लोगों ने एक बोर्डिंग स्कूल में डाल दिया। मैंने अपनी पूरी पढ़ाई वहीं की और मेरे घर पर मेरी जमीन की देखरेख की जिम्मेदारी मेरे मौसाजी और मौसी को दे दी गई और में अपनी पढ़ाई करता रहा। दोस्तों मेरी एक बहन भी है, वो मुझसे दो साल छोटी है और वो गाँव में ही रहती है। दोस्तों में आज अपने गाँव करीब पांच साल के बाद जा रहा था, मेरी अभी कुछ दिनों पहले नई नई नौकरी लगी थी और इस खुशी की बात की वजह से में सभी के लिए कुछ ना कुछ उपहार लेकर चला था। फिर ऑटो से उतरकर में अपने घर पहुँचा और सबसे पहले मुझे मेरी मौसी मिली, लेकिन चेहरे से देखने पर वो मुझे बहुत ही शांत लगी और मुझे ऐसा लगा कि जैसे मेरे आने की उन्हे कोई खुशी नहीं हुई हो और अब वो मुझसे पूछने लगी।

मौसी : क्यों बेटा कैसा है? और फिर वो मुझसे इधर उधर की बातें करने लगी थी।

दोस्तों अब मेरी नजरे इधर उधर अपनी बहन को खोज रही थी, मैंने अब अपनी मौसी से पूछ लिया चेतना कहाँ है? वो मुझे कहीं नजर नहीं आ रही है। अब मौसी ने एक आवाज़ लगाई और कुछ देर बाद पर्दे के पीछे से एक लड़की प्रकट हुई और उसको देखकर मेरी ऑंखें फटी की फटी रह गई। फिर मैंने उसको कहा कि अरे तू तो अब इतनी बड़ी हो गयी है और वो मुझसे भैया कहते हुई मेरे गले से लग गयी। दोस्तों में उसके इस तरह से गले लगने की वजह से बड़ा चकित था। उसके बड़े और भारी बूब्स मेरी छाती से दब रहे थे। फिर मैंने भी उसको अपनी बाहों में भर लिया और मैंने अपनी मौसी से कहा कि चेतना को मैंने जब पिछली बार देखा था तब वो छोटी सी बच्ची जैसी थी। अब मौसी मुझसे कहने लगी कि देखा कितनी बड़ी हो गयी है यह पूरी औरत हो गयी है, लेकिन अक्ल इसमे ढेले भर की भी नहीं है। फिर मैंने उनको कहा कि मौसी आप ऐसे क्यों बोल रही हो यह अभी भी बच्ची ही है, लेकिन चेतना मेरे आने से बहुत खुश थी और वो मेरा सामान लेकर मेरे कमरे में चली आई। अब वो मेरे साथ बैठकर बातें करनी लगी और मैंने देखा कि उसके खुशी की वजह से आँखों से आंसू तक भी निकल रहे थे।

फिर मैंने उसको कहा कि चेतना तुम कितनी बड़ी हो गयी हो? और वो बोली कि हाँ भैया आप भी ना कितने अच्छे लगने लगे हो। दोस्तों सचमुच चेतना जवान होने के साथ ही बहुत सुंदर हो चुकी थी और उसके बूब्स गांड तो बहुत ही कमाल की हो गयी थी और उसकी सुंदरता को में किसी भी शब्दों में लिखकर नहीं बता सकता। फिर मैंने उसको पूछा कि मौसी को क्या हो गया है? तभी चेतना उदास होकर कहने लगी कि बाद में बताउंगी। अब मैंने उसको पूछा क्या बताएगी बोला ना? वो कहने लगी कि में रात को बताउंगी यह बहुत लम्बी कहानी है। फिर मैंने उसको ढेर सारे उपहार दिए जिनको देखकर वो बहुत खुश थी और वैसे उसको लहंगा चुन्नी बहुत पसंद आया और उसी के साथ ब्रा पेंटी भी थी और उन्हें देखकर वो शरमा गयी और मुझसे पूछने लगी भैया यह। अब मैंने उसको कहा क्यों क्या हुआ? वैसे भी यह गाँव में कहाँ मिलते होंगे और वैसे भी यह लहंगा के साथ फ्री मिले है इसलिए अब में इनको कहीं फेंक कर तो नहीं आ सकता था इसलिए ले आया। दोस्तों मेरे मुहं से वो पूरी बात सुनकर उसका वो गोरा मुहँ एकदम लाल हो गया और फिर वो मुझसे कहने लगी हाँ चलो ठीक है भैया आपको मेरे लिए यह इतना सुंदर उपहार लाने के लिए धन्यवाद।

फिर हम सभी ने खाना खाया रात को मेरे मौसा जी भी आ गये, वो उस समय दारू पिए हुई थे और मुझे उनका भी व्यहवार कुछ अच्छा नहीं लगा। दोस्तों उनके चेहरे को देखकर मुझे ऐसा लगा जैसे कि उन्हें मेरा आना अच्छा नहीं लगा। फिर रात को चेतना मेरे कमरे में आ गई और फिर उसने रोते हुए मुझे बताया कि मौसी मौसाजी की नज़र हमारी जमीन पर है और उसने मुझे बताया कि एक दिन वो दोनों आपस में बात कर रहे थे कि अगर सुशील (में) जब पढ़कर वापस आएगा और वो अपनी जमीन के लिए कुछ कहेगा तो हम उसको मार देंगे और साली इस लोंडिया को फार्म पर रखेल बनाकर रखूँगा और फिर उसने मुझे बताया कि मौसाजी की मेरे ऊपर गलत नजर है, वो अक्सर मुझे अपने पास बुलाकर मेरे बदन पर इधर उधर अपने हाथ फेरते है और मौसी भी इस खेल में उनके साथ शामिल है और आपको तो पता है कि मौसी बांझ है, एक बार वो मुझसे कह रही थी कि तू मौसा से मुझे एक बच्चा दे दे में तुझे रानी बनाकर रखूँगी। अब भैया आप ही मुझे बताओ में क्या करूं में अब इस नर्क में एक पल भी नहीं रहूंगी। फिर मैंने उसको कहा कि हाँ चेतना अब इस नर्क में तो में भी तुझे एक भी पल नहीं रहने दूँगा, लेकिन पहले इन लालची लोगो को सबक तो सिखाना पड़ेगा।

दोस्तों उस समय मेरा गुस्से से बड़ा बुरा हाल था, मैंने शांत रहकर कुछ विचार अपने मन में बनाया और अब अपनी मौसी मौसाजी को भागने का सारा सब मन में सोचकर में तैयार हो गया कि कैसे अब मुझे क्या करना है? फिर अगले दिन मैंने ऑफिस में फोन करके अपनी कुछ दिनों की छुट्टियाँ बढ़ा ली और अगले दिन में और चेतना शहर चले गये। वहाँ पर मेरे एक दोस्त का भाई पुलिसकर्मी है। फिर मैंने उसको अपनी सारी कहानी बताई और उसको कहा कि मेरे मौसाजी मौसी से हम दोनों को जान से मारना चाहते है, हमें उनसे ख़तरा है। फिर हमने वहीं पर एक वकील को बुलाया और हमारे सारे जमीन के पेपर तैयार करवाए और फिर एक एजेंट को बुलाकर हमारी जमीन की कीमत उससे मालूम करवाई और फिर उसको कहा कि कोई हमारी जमीन खरीदने वाला वो देखे। दोस्तों वो सब कुछ इतना जल्दी हुआ कि पता ही नहीं चला और वो सारा काम खत्म होते होते रात हो गयी। हमारा गाँव करीब 100 किलोमीटर की दूरी पर था और हम दोनों उस समय मोटरसाइकिल पर थे। फिर हमने सारे पेपर और हमारे लिए कुछ खाने का सामान एक बेग में रख लिया और मैंने चुपके से एक विस्की की बोलत भी ले ली। फिर हम जैसे ही निकले वैसे ही बारिश शुरू हो गयी और वो बारिश धीरे धीरे तेज हो गयी दूरी बहुत ज्यादा थी और वो रास्ता भी सही नहीं था, हम दोनों बारिश की वजह से पूरे भीग चुके थे।

अब चेतना ने मुझे ज़ोर से पकड़ लिया था, इसलिए उसके कठोरे बूब्स मेरी पीठ से टकरा रहे थे और मेरा बड़ा बुरा हाल था। फिर कुछ देर बाद रास्ते में मैंने सड़क के किनारे अपनी गाड़ी को रोक दिया और अब मैंने चेतना से कहा कि वो अब अपने पैर दोनों तरफ करके बैठ जाए, जिसकी वजह से गाड़ी का संतुलन ठीक रहेगा। अब मेरी नजर उस पर पड़ी, उसकी वो सफेद रंग की सलवार कमीज पानी की वजह से एकदम जालीदार हो गयी थी और वो उसके बदन से चिपक चुकी थी और उसके बड़े आकार एकदम गोलमटोल बूब्स मेरी आँखों के सामने जैसे पूरे खुले हुए थे और वो सब देखकर मेरा बड़ा बुरा हाल हो रहा था। अब वो द्रश्य देखकर मेरा लंड खड़ा हो चुका था, चेतना ने मुझे ज़ोर से कसकर पकड़ लिया, जिसकी वजह से उसके दोनों बूब्स मेरी कमर से दब रहे थे और मुझे ऐसा महसूस हो रहा था कि जैसे उसके बूब्स मेरे शरीर को उर्जा दे रहे थे। फिर मैंने मन ही मन विचार बना लिया कि में भी उसको गरम करूंगा और उसके बाद आगे का काम होगा, क्योंकि दोस्तों सहमती से ही संभोग करने में असली मज़ा आता है और आप अंदाज भी नहीं लगा सकते कि में उस समय कितने मज़े में था। अब मेरा लंड अपने पूरे ताव पर था।

फिर उसी समय अचानक से चेतना का हाथ मेरे लंड पर चला गया, जिसकी वजह से मेरा तो बड़ा बुरा हाल था, लेकिन वो भी ताड़ गयी कि उसके भैया बहुत जोश में है। फिर कुछ देर बाद बारिश पहले से भी ज्यादा तेज होने लगी थी और चेतना के लंड छूने की वजह से मेरे लंड में और जवानी आ गयी थी, उस समय में तो जैसे स्वर्ग में था। तभी सड़क पर बाढ़ का पानी आ गया, जिसकी वजह से हमारी गाड़ी पूरे पानी में चली गयी और वो बंद भी हो गई, क्योंकि अब गाड़ी के इंजन में भी पानी चला गया था। दोस्तों उस समय मेरी तो गांड फट गयी, क्योंकि एक तो बहुत सुनसान सड़क, तेज बारिश और साथ में इतनी सुंदर लड़की और वो पानी कमर तक आ चुका था। फिर मैंने किसी तरह अपने उस बेग को सम्भाला और सारा सामान लेकर मोबाइल फोन और पेपर सब उसमे डाल दिए, उसके बाद मैंने अपनी गाड़ी को थोड़ी ऊंचाई पर ले जाकर खड़ा किया और अब में हमारे लिए कोई मदद देखने लगा। दोस्तों मैंने देखा कि दूर दूर तक गहरा अंधेरा था और चेतना तो पानी से गीली होने की वजह से ठंड के मारे काँपने लगी थी, इसलिए वो मुझसे चिपक गयी। फिर वो मुझसे पूछने लगी भैया अब क्या होगा? मैंने उसको दिलासा देकर कहा कि तुम चिंता मत कर में हूँ ना, हम कुछ ना कुछ जुगाड़ करते है और तभी मेरी नज़र पास की एक छोटी सी झोपड़ी पर पड़ी।

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अब उसको देखकर मेरी आँखों में खुशी सी छा गयी और वो थोड़ी ऊँची पहाड़ी पर थी, इसलिए उस में पानी का भी डर नहीं था। अब मैंने चेतना का हाथ पकड़ा और उसको झोपड़ी में ले गया, मैंने उसके अंदर जाकर देखा कि झोपड़ी में एक छोटी सी खटिया पड़ी थी और फिर मैंने तुरंत ही आस पास से कुछ लकड़ियाँ और कागज उठाकर एक जगह रखे और लाइटर की मदद से में आग लगाने की कोशिश करने लगा। फिर उस आग में मैंने थोड़ी सी विस्की डाली जिसकी वजह से आग भड़क गयी, जिसकी वजह से झोपड़ी में थोड़ी सी गरमी आ गई, क्योंकि अब तक चेतना ठंड से बुरी तरह काँप रही थी। अब मैंने उसको कहा कि उसके कपड़े गीले हो गये है वो उन्हे उतार दे और मैंने भी अपनी शर्ट और जींस को उतार दिया और फिर मैंने देखा कि चेतना अब वैसे ही खड़ी थी। अब मैंने दोबारा से उसको कहा कि भाई तुम यह गीले कपड़े उतार दो नहीं तो तुम्हे सर्दी की वजह से निमोनिया हो जाएगा, लेकिन वो शरमा रही थी। अब वो मुझसे कहने लगी कि नहीं भैया मुझे शरम आ रही है में आपके सामने अपने कपड़े नहीं उतार सकती, उसी समय मैंने उसको समझाते हुए बड़े प्यार से कहा कि जिंदा रहोगी तभी शरमाओगी ना? तुम इस हालत में तो सुबह तक मर ही जाओगी। दोस्तों ये कहानी आप कामुकता डॉट कॉम पर पड़ रहे है।

फिर मुझे झोपड़ी में एक बोरी दिखी, मैंने उसको कहा कि तुम यह कपड़े उतार दो और यह बोरी लपेट लो शरमाओ मत और वैसे भी हमने बचपन में एक दूसरे को बहुत बार नंगा देखा है और में तुम्हारा भाई हूँ कोई गैर नहीं अभी सवाल हमारी ज़िंदगी और मौत का है। अब उसने मुझसे कहा कि आप अपना मुहँ दूसरी तरफ फेर लो, मैंने कहा कि हाँ ठीक है, उसने मेरे मुहं फेरते ही अपने कपड़े उतार दिए और उस बोरी को लपेट लिया। दोस्तों आप सभी अंदाज़ लगा सकते है कि उस एक बोरी से चेतना का कितना शरीर ढक सकता था? अब मुझे उसकी बड़े आकार के बूब्स साफ नजर आ रहे थे और नीचे से वो बोरी केवल उसकी कमर तक थी। अब आप लोग भी अंदाज लगा सकते है कि अगर वो उस बोरी को नीचे खींचती है तो उसके बूब्स नंगे हो जाते है नहीं तो मुझे उसकी चूत नंगी नजर आने लगे, इसलिए वो बड़ी ही असमंजस की स्थिति थी और ठीक ऐसा ही हाल कुछ मेरा था। दोस्तों अब मेरे बदन पर भी केवल एक छोटा सा टावल था और उसमे मेरा लंड पूरा खड़ा साफ नजर आ रहा था और आप लोग समझ सकते है कि उस समय मेरी क्या हालत होगी? चलो फिर मैंने किसी तरह उस स्थिति का सामना किया।

अब चेतना उस ठंड की वजह से छींकने लगी थी और मैंने विस्की को एक गिलास में डाला और उसमे बारिश का पानी मिलाया और वो गिलास मैंने चेतना को दे दिया उसको कहा कि तुम इसको पी लो इसकी वजह से तुम्हारी ठंड दूर हो जाएगी। अब वो मुझसे कहने लगी कि नहीं भैया में शराब नहीं पियूंगी, उसी समय मैंने उसको प्यार से समझाया और कहा कि यह शराब नहीं है दवाई है और इस समय हम दोनों इसकी बड़ी सख़्त ज़रूरत है। फिर यह बात उसको कहकर मैंने वो गिलास उसके मुहं से लगा दिया और इसके बाद मैंने दो पेग उसको और पिलाए और दो तीन मैंने भी पिए। दोस्तों उसकी वजह से अब चेतना को अच्छा ख़ासा नशा हो गया था वो नशे में झुमने लगी थी और अब वो मुझसे बोली कि भैया मुझे भूख लगी है। अब मैंने वहीं इधर उधर देखा कि आलू पड़े हुए थे, मैंने वही आलू आग में डाल दिए और उन्हें भूनकर हम दोनों ने खा लिए। फिर वो मुझसे बोली कि भैया मज़ा आ गया और हम दोनों को अच्छा ख़ासा नशा हो गया था और फिर में एक गाना गुन गुनाने लगा था, रूप तेरा मस्ताना प्यार मेरा दीवाना भूल कोई ना हमसे हो जाए। दोस्तों उस गाने को सुनकर वो शरमा गयी, लेकिन वो पूरे शबाब में थी और उस पर शराब का नशा भी था और हम दोनों उस समय पूरे दिन की भागादोड़ी की वजह से बेहद थके हुए थे।

अब हमे नींद भी आने लगी थी, लेकिन बाहर बारिश और तूफान अब भी बंद होने का नाम नहीं ले रहा था और एक तूफान और भी था जो हम दोनों के शरीर के अंदर चल रहा था, हमारे सारे शरीर की नसों में एक तनाव था और मेरा लंड कब से 90% पर खड़ा था। अब चेतना मुझसे बोली कि भैया मुझे अब नींद आ रही है, मैंने उसको कहा कि हाँ ठीक है और मैंने दो बोरी निकाली चेतना को खटिया पर लेटा दिया और उसको सोने के लिए कहा और वो अपनी दोनों आँखों को बंद करके लेट गई। अब वो लेट गयी, में उसके सिरहाने बैठकर प्यार से उसका सर सहलाने लगा था और फिर मैंने उसको चूम लिया। फिर उसने कुछ देर बाद अपनी आंखे खोली और मुझसे कहा क्या आप नहीं सोएंगे? मैंने कहा कि नहीं में अभी सो जाऊंगा पहले तू सो जा हो सका तो आज में रात को जागकर ही बिता दूंगा। अब वो मुझसे कहने लगी नहीं आप प्लीज लेट जाओ नहीं तो आपकी तबीयत खराब हो जाएगी और आपसे सुबह उठकर गाड़ी भी नहीं चलेगी और वो इतना कहकर खटिया पर थोड़ा सा सरक गयी और कहने लगी कि देखो नीचे कितना गीला है आप भी यहाँ पर लेट जाओ वैसे भी केवल एक रात की बात है। अब में चेतना के पास में लेट गया खटिया, वैसे आप जानते हो कि एक खटिया में जगह कितनी होती है आप अच्छे से समझ सकते है।

अब हम दोनों का शरीर एक दूसरे से रगड़ रहा था उस झोपड़ी में बहुत ठंड हो रही थी और लेटने की वजह से चेतना के शरीर से वो बोरी हट गयी और मेरा टावल भी खुल गया था और जिसकी वजह से हम दोनों के शरीर नंगे हो गये थे। अब उसका गोरा नंगा शरीर मेरे शरीर से टकरा रहा था और मेरी समझ में बिल्कुल भी नहीं आ रहा था कि में क्या करूँ? और अब चेतना भी कसमसा रही थी, क्योंकि मेरा लंड अब उसकी गांड के आसपास घूम रहा था और उसके मुलायम गदराए हुए कूल्हों पर मेरे लंड से हुई गुदगुदी से वो इठला रही थी, लेकिन में अब अपने आपको किसी तरह से कंट्रोल किए हुए था, लेकिन मेरा मन बहुत दहाड़े मार रहा था। फिर मुझे मेरे लंड पर कुछ गीला गीला सा लगने लगा था और मैंने हाथ लगाकर देखा तो वो खून था जिसकी वजह से में एकदम से डर गया। अब मैंने चेतना से पूछा यह क्या हो गया यह खून कहाँ से आ गया? वो शरमाते हुई कहने लगी कि कुछ नहीं भैया इन दिनों मेरे पीरियड चल रहे यह उसका खून है और वो शायद आपको लग गया होगा। फिर मेरा माथा ठनका और यह बिल्कुल निश्चित हो गया कि आज में इसकी चूत नहीं मार सकता, क्योंकि इस हालत में चुदाई करने से लंड को नुकसान होता है और बच्चा ठहरने के भी ज्यादा मौके खतरा बहुत होता है।

दोस्तों में दोनों काम नहीं चाहता था और मेरा मन इधर उधर हो रहा था, लेकिन इस मौके को भविष्य में चुदाई की भूमिका के लिए काम में भी ले सकता था। फिर मैंने धीरे से अपनी बाहें निकाली और चेतना ने अपना सर उस पर रख दिया और वो सीधे होकर लेट गयी, उसी समय मैंने उसके गाल पर एक बार चूम लिया, जिसकी वजह से वो थोड़ी सी शरमा गई। अब मैंने उसको अपनी बाहों में लेकर उसे अपने शरीर से सटा लिया और अब हम दोनों के बीच बस सूत भर कपड़ा भी नहीं था। मेरा तना हुआ लंड साँप की तरह उसकी चूत के आसपास ठोकर मार रहा था और चेतना को मेरे लंड का अच्छा ख़ासा अहसास हो रहा था। अब चेतना कसमसा रही थी मुझसे नहीं रहा गया और मैंने हिम्मत करके धीरे से उसके बूब्स पर हाथ फेर दिया, जिसकी वजह से उसके मुहँ से ज़ोर से आहह्ह्ह की आवाज निकल गई। अब वो मुझसे कहने लगी कि भैया आप यह क्या कर रहे हो? और वो सिहर गयी थी, में उसके गालों को चूमने लगा था और फिर तो में जमकर उसके बूब्स को मसलने लगा था। फिर वो मुझसे कहने लगी कि भैया प्लीज छोड़ दो, यह अच्छी बात नहीं है और उस समय चेतना पर शराब और शबाब का असर था और मेरे पर भी वो नशा था हम दोनों नशे में काम कर रहे थे।

अब मैंने आव देखा ना ताव और उसके बूब्स पर अपना मुहँ रख दिया और में उन्हें चूसने लगा, जिसकी वजह से अब चेतना का बड़ा बुरा हाल था, जिसकी वजह से उसकी सासें तेज तेज चलने लगी और वो मुझसे कहने लगी थी भैया प्लीज में मर जाउंगी, यह क्या कर रहे हो हे भगवान। अब भी मैंने उसके बूब्स को नहीं छोड़ा मेरे इतना सब करने की वजह से चेतना के बूब्स की घुंडी खड़ी हो गई थी जो यह मुझे बता रही थी कि उसको भी बड़ा मज़ा आ रहा है। दोस्तों में तो अब आनंद के सागर में गोते लगा रहा था और अब चेतना ने भी जोश में आकर मुझे अपनी बाहों में भर लिया था और अब मेरा लंड तो जैसे लोहे का हो गया था। एक बार मेरा मन हुआ कि में चेतना की उसी अवस्था में ही चुदाई कर दूँ और फिर मैंने उसको कहा कि जान मेरा बहुत मन कर रहा है प्लीज कुछ करो ना। अब वो मुझसे कहने लगी कि में क्या करूँ? यह सब कुछ अब तुम कर ही निर्भर है। अब मैंने उसको कहा कि चेतना प्लीज आज तू मुझे चुदाई करने दे में यह तेरा अहसन ज़िंदगी भर नहीं भूलूंगा। फिर वो मुझसे कहने लगी कि भैया आप मेरी इस अवस्था में कैसे यह सब मेरे साथ कर सकते है? और अब आपने मेरे साथ इतना सब कुछ कुछ कर ही लिया, पता नहीं भगवान को क्या मंजूर है?

अब तो लगता है आप ही मेरे मालिक बनोगे, लेकिन भैया अपने इस रिश्ते का आगे चलकर अंजाम क्या होगा? अब मैंने उसको कहा कि तू सवाल बहुत करती है तुझे मेरे पर भरोसा है ना, में हूँ ना में सब सम्भाल लूँगा। दोस्तों जैसे में उसको हमेशा बचपन में समझाता था और वो मान जाती थी, लेकिन वो समझने को बिल्कुल तैयार नहीं थी। अब वो मुझसे कहने लगी नहीं भैया, आज नहीं, इस समय यह सब करने से मुझे बहुत खून निकलेगा और आपका यह प्यारा लंड जो अब मेरा है वो भी इसकी वजह से परेशानी में पड़ सकता है। फिर मुझसे इतना कहकर उसने मेरा लंड अपने हाथ में ले लिया और वो उसको चूमने प्यार करने लगी थी, जिसकी वजह से मेरा तो बड़ा बुरा हाल था। दोस्तों उस समय मुझे कितना मज़ा आ रहा था। में किसी भी शब्दों में लिखकर नहीं बता सकता। फिर मेरे कुछ कहे बिना ही मेरी प्यारी बहाना ने मेरा लंड चूमने के बाद ही अपने मुहं में डाल लिया और वो उसको चूसने लगी थी। उसके यह सब करने की वजह से सचमुच मुझे बहुत मस्त मज़ा आ रहा था। दोस्तों हम दोनों सारी रात मस्ती करते रहे और कुछ देर के बाद में झड़ गया और फिर हम दोनों वैसे ही उसी हालत में एक दूसरे से चिपककर पूरी रात सोए रहे और में जब भी रात को मेरी नींद खुलती चेतना के दोनों बूब्स को बारी बारी से किसी छोटे बच्चे की तरह चूसता रहा और पूरी रात अपनी बहन के गरम गोरे जिस्म के मज़े लेता रहा ।।

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धन्यवाद …

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