दीदी ने माँ को जीजाजी से चुदवाया


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प्रेषक : रोहित …

हेल्लो दोस्तों, यह कहानी मेरी माँ, बहन, जीजाजी और मेरी है। मेरी माँ की उम्र 40 साल है। दोस्तों मेरी माँ के बूब्स बहुत ही बड़े आकार के है, जिनमें अभी भी दूध आता था, लेकिन मुझे यह बात बाद में उस घटना के बाद पता चला और फिर उस समय यह हुआ कि मेरी बड़ी बहन शादीशुदा है, उसकी शादी को अभी तीन साल हुए थे और उसके पहला बच्चा पैदा हुआ था, इसलिए वो कुछ दिन हमारे घर पर बिताने के लिए आई हुई थी और मेरी बहन का शरीर भी मेरी माँ की तरह भरा हुआ है और उसके बूब्स भी बड़े बड़े है, लेकिन मेरी बहन बहुत आलसी किस्म की है, इसलिए उसको अपने बच्चे को ठीक तरह से दूध पिलाना भी नहीं आता और ना ही उसने कभी उस बात पर इतना ध्यान दिया था, वो जब भी बच्चे को पकड़कर उसको अपना दूध पिलाती तो वो कुछ मिनट में ही उस बच्चे को मेरी माँ को वापस पकड़ा देती और वो बहाना बनाकर कहती कि घर में गर्मी बहुत है, जिसकी वजह से बच्चा हमेशा भूखा रह जाता था। दोस्तों हमेशा घर में मेरी दीदी और माँ ढीले कपड़े पहना करती थी। माँ तो फिर भी ठीक थी, लेकिन मेरी दीदी तो बहुत ही ज्यादा लापरवाह किस्म की थी, जैसे उसने घर में सिर्फ़ ढीला सा कोई भी गाउन पहन लिया या ब्लाउज पेटीकोट और वो भी बिना ब्रा, पेंटी के जिनमें उसके बड़े आकार के लटके हुए बूब्स साफ साफ नजर आते और उसके बूब्स के निप्पल उन कपड़ो से हमेशा दिखते थे। दोस्तों अब में आप सभी कामुकता डॉट कॉम पर सेक्सी कहानियों को पढ़कर उनके मज़े लेने वालों को अपनी उस सच्ची घटना की तरफ ले चलता हूँ, जिसके लिए में आज यहाँ पर आया हूँ और जिस घटना ने मेरा पूरा बिल्कुल जीवन बदलकर रख दिया।

एक दिन रात को खाना खाने के बाद में अपने कमरे में चला गया, तब मेरी माँ और मेरी दीदी अपने कमरे में थी। अब में भी अपने कमरे में जाकर पूरा नंगा हो गया और अपने लंड को बाहर निकालकर हाथ में लेकर में उसको सहलाने लगा था और कुछ देर बाद में मुठ मारने लगा था। उस समय मेरा लंड पूरी तरह जोश में आकर खड़ा हो चुका था। फिर उसी समय मेरे मन में अपनी दीदी की चूत की याद आने लगी। फिर मैंने तुरंत लंड को छोड़कर लूँगी पहनी और फिर में अपने कमरे से बाहर निकल गया। तब मैंने देखा कि उस समय मेरी माँ के कमरे की लाईट जल रही थी और में उसके पास चला गया और  तब मेरे कानों में माँ की वो आवाज़ मुझे कुछ बातें सुनाई देने लगी। तब माँ दीदी से कुछ कह रही थी, में खिड़की के बिल्कुल पास चला गया और मैंने अंदर झांककर देखा तो मेरी माँ दीदी से कह रही थी कि तू मुन्ना को अपना दूध ज्यादा पिलाया कर देख यह कितने बड़े हो गये है। फिर दीदी कहने लगी कि माँ देखो तुम्हारे भी तो बूब्स कितने बड़े है, आप भी इनका कुछ किया करो। अब माँ बोली कि चल पागल तू यह कैसी बातें करती है? और तभी दीदी बोली कि माँ तुम्हारे जवाई को मेरे बूब्स को दबाने में बहुत मज़ा आता है और वो बड़े मज़े से इनको दबाकर मुझे बड़ा खुश कर देते है, लेकिन यह सब किए हुए मुझे बहुत दिन हो गये है, इसलिए मेरा मन कुछ करने को करता है। तभी मुन्ना नींद से उठकर ज़ोर ज़ोर से रोने लगा और उसी समय तुरंत ही दीदी ने ऐसे ही अपने ब्लाउज को उतार दिया, जिसकी वजह से उसके दोनों बूब्स नंगे हो गए, मुझे तो यह सब देखने में मज़ा ही आ गया और अब मुन्ने के मुँह में दीदी ने अपने बड़े आकार के निप्पल को डाल दिया और वो बिल्कुल शांत होकर दूध पीने लगा। अब माँ दीदी से पूछने लगी कि तूने यह ब्लाउज क्यों पूरा उतार दिया? तब दीदी बोली कि मुझे बहुत गर्मी लग रही है, इसलिए मैंने ऐसा किया। अब माँ उससे बोली कि तू बच्चे को दूध तो सही तरीके से पिला, तो दीदी बोली कि में तो हमेशा ऐसे ही इसको दूध पिलाती हूँ। फिर माँ ने दीदी का वो जवान सुनकर कहा कि ला में तुझे बताती कि कैसे बच्चे को दूध पिलाया जाता है और अब यह बात कहकर माँ ने अपना भी ब्लाउज उतार दिया और माँ भी ऊपर से पूरी नंगी हो गयी और वो मुन्ने को अपनी गोद में लेकर उसको वो अपने बूब्स का निप्पल मुहं में डालकर दूध पिलाने लगी थी और अब वो दीदी से कहने लगी कि देख ध्यान से ऐसे पिलाते है बच्चे को दूध, जिससे उसका पेट पूरा भरता है। फिर दीदी कुछ देर बड़े ध्यान से चकित होकर देखकर बोली कि माँ मुन्ना तुम्हारे निप्पल को देखो कैसे लगातार चूस रहा है, क्या तुम्हारे बूब्स से अभी भी दूध निकलता है? तभी माँ ने अपने दूसरे बूब्स को अपने एक हाथ से पकड़कर दबा दिया, जिसकी वजह से उसमें से दूध की एक पिचकारी बाहर निकल गई और वो सीधे जाकर दीदी के मुँह पर गिर गई।

फिर दीदी ने चकित होकर कहा कि माँ तुम्हारे तो बूब्स से अभी भी बहुत दूध आता है और वो बोली कि बचपन में तो मैंने बहुत बार दूध पिया होगा, लेकिन आज में एक बार फिर से अपनी माँ का दूध पीना चाहती हूँ और इतना कहकर दीदी ने माँ के दूसरे बूब्स की निप्पल को अपने मुँह में लेकर वो उसको चूसने लगी और यह सब देखकर मेरा तो कमरे से बाहर खड़े हुए बड़ा बुरा हाल हो रहा था। में बड़ा चकित होकर वो सब घूर घूरकर देख रहा था और तभी मेरे लंड से एक पिचकारी बाहर निकल गयी, जिसकी वजह से कुछ देर में मेरा लंड धीरे धीरे ठंडा होकर छोटा हो गया। फिर मैंने दोबारा से अंदर देखा तो दीदी अब अपने बूब्स को दबा रही थी। फिर कुछ देर बाद दीदी ने माँ का एक हाथ पकड़कर उसको अपने बूब्स के ऊपर रख दिया और माँ से कहा कि आप इन्हें ज़ोर ज़ोर से दबाओ मसल दो। अब माँ दीदी के बूब्स को उनके कहने पर ज़ोर से मसलने और दबाने लगी थी, जिसकी वजह से दीदी गरम होकर उसी समय अपना एक हाथ अपनी चूत पर ले गई और अब वो अपने पेटीकोट के ऊपर से ही अपनी कामुक गरम चूत को रगड़ने लगी थी और तभी माँ ने मुन्ना को एक तरफ लेटा दिया और उन्होंने झट से दीदी के एक बूब्स को अपने मुँह में ले लिया, लेकिन माँ के ऐसा करने से दीदी अब पहले से ज्यादा जोश में आकर बिल्कुल पागल होकर और भी ज़ोर से अपनी चूत को रगड़ने लगी थी।

दोस्तों अब मेरा बाहर खड़े खड़े ही एक बार फिर से लंड खड़ा हो गया और तभी माँ दीदी की चूत पर अपना एक हाथ रखकर मसलने सहलाने लगी थी। फिर दीदी ने अपने पेटीकोट का नाड़ा खोल दिया और अब माँ ने उसको नीचे कर दिया। दीदी अब पूरी नंगी हो चुकी थी। तब मैंने ध्यान से देखा कि उनकी चूत पर एक भी बाल नहीं था, वो बिल्कुल चिकनी, गोरी, उभरी हुई जोश से भरी हुई, कामुक नजर आ रही। फिर दीदी ने माँ का पेटीकोट भी उतार दिया और तब मैंने देखा कि मेरी माँ की चूत पर भी कोई बाल नहीं था, उनकी चूत में भी सुंदरता की कोई भी कमी मुझे नजर नहीं आ रही थी, एकदम मस्त मजेदार रसभरी चूत मुझे अपनी माँ की नजर आ रही थी। अब वो दोनों एक दूसरे के बूब्स को मसलने दबाने लगी थी और फिर कुछ देर बाद वो दोनों 69 की पोजीशन में आ गयी और अब वो एक दूसरे की गीली चूत को अपनी जीभ से बड़े मज़े लेकर चाटने और उसका रस चूसने लगी थी और यह मस्त सेक्सी द्रश्य देखकर में कमरे से बाहर खड़ा होकर अपने लंड को हाथ में लेकर ज़ोर ज़ोर से हिलाने लगा था और धीरे धीरे मेरी स्पीड बढ़ने लगी थी। फिर मैंने मन ही मन में सोचा कि आज यह दोनों पूरी तरह से गरम हो चुकी है, अगर में ऐसे ही नंगा होकर इनके सामने कमरे के अंदर चला गया तो हो सकता है कि मुझे आज इन दोनों की चूत चुदाई के लिए जरुर मिल सकती है और यह बात सोचकर में अंदर जाने ही वाला था कि उसी समय बाहर से दरवाजे पर लगी घंटी बज गई, उसकी आवाज को सुनकर में जल्दी से अपने कमरे की तरफ भाग गया। दोस्तों ये कहानी आप कामुकता डॉट कॉम पर पड़ रहे है।

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फिर थोड़ी देर बाद माँ ने उठकर दरवाज़ा खोल दिया तो मैंने देखा कि वो मेरे जीजा जी थे। वो अब अंदर आ गए और उन्होंने अंदर आकर बताया कि वो अपने बॉस को लेने आए थे, लेकिन किसी वजह से उनकी फ्लाईट लेट हो गयी है, इसलिए वो अब कल सुबह तक आयेंगे, इसलिए मैंने सोचा कि एक रात किसी होटल में क्या सोना? में आज रात को यहीं पर सो जाऊंगा और अपने बच्चे बीवी और आपसे भी मिल लूँगा। फिर दीदी बोली कि हाँ आपने यह बहुत अच्छा किया और अब दीदी ने उनसे पूछा कि क्या आपको कुछ खाना है तो में अभी बना देती हूँ? तो जीजा जी ने कहा कि नहीं में बस दो चार पेग लगाना चाहता हूँ और इतना कहकर मेरे जीजा जी ने अपने बेग से एक बोतल बाहर निकाली और दीदी से सामान लाने को कहा। मेरी माँ और दीदी सामान लेने चली गई। दोस्तों हमारे घर का किचन मेरे कमरे के बिल्कुल साथ था, जिसकी वजह से में उनकी आवाज साफ साफ सुन रहा था। मेरी माँ दीदी से कहने लगी कि इसको भी अभी ही आना था, हमारा सारा मज़ा इसने बीच में आकर खराब कर दिया। फिर दीदी बोली कि तुम भी उनसे मज़े ले लो और तब माँ बोली क्या तू पागल है, में उसकी माँ समान हूँ, ऐसा कैसे हो सकता है? दीदी बोली कि तो क्या हुआ वो जब अपनी सग़ी माँ को चोद सकते है तब, तुम तो फिर भी उनकी सास हो? माँ ने पूछा क्या तुम सच कह रही हो? लेकिन में नहीं दूँगी। फिर दीदी ने कहा कि वो तो तुम्हारी इच्छा है, में तो दूँगी और फिर जीजा जी ने कुछ देर बाद वो बोतल पूरी खत्म कर दी। उसके बाद माँ वहां से उठकर अपने कमरे में चली गयी और उसके बाद दीदी जीजा जी को एक तरफ ले जाकर उनसे बोली कि आज आपको एक नहीं बल्कि दो चूत को चोदकर शांत करना है। अब जीजा जी चकित होकर पूछने लगे कि वो दूसरी कौन है? तब दीदी मुस्कुराते हुए बोली कि एक आपकी सास है, जिसको आज आपको अपने लंड का पूरा मज़ा देना है और शांत करना है। अब जीजा जी पूछने लगे कि क्या तुम सच बोल रही हो, क्या वो तैयार है मेरे साथ अपनी चुदाई के मज़े लेने के लिए? तो दीदी बोली कि हाँ, लेकिन वो थोड़ा सा नाटक नखरा जरुर करेगी, लेकिन आपको तो पता है कि उसके साथ आपको कैसे क्या करना है? इतनी बातें करने के बाद वो दोनों भी हंसी ख़ुशी मेरी माँ के कमरे में चले गये और अब उन्होंने अंदर से दरवाजे को बंद कर लिया। तभी में एक बार फिर से अपने कमरे से बाहर आकर उस कमरे की खिड़की से अंदर देखने लगा और मैंने मन ही मन में सोचा कि आज तो जीजा जी माँ की चूत को फाड़कर ही दम लेंगे। तभी मैंने देखा कि मेरी माँ बाथरूम से बाहर निकली। उस समय उन्होंने सिर्फ़ गाउन ही पहना हुआ था और मेरी दीदी ने ब्लाउज, पेटीकोट पहना हुआ था। अब माँ ने जीजा जी को पहनने के लिए लूँगी दे दी और देखते ही देखते जीजा जी ने अपने सारे कपड़े एक एक करके उतार दिए और वो पूरे नंगे हो गये। फिर मैंने देखा कि उस समय जीजा जी का लंड अभी तक सोया हुआ ही था। फिर जीजा जी बाथरूम में चले गये और दीदी मेरी माँ से कहने लगी कि देखा माँ तुम्हारे जवाई का लंड जब तनकर खड़ा हो जाता है तो वो पूरे पांच इंच का हो जाता है, जिससे चुदाई का बड़ा मस्त मज़ा आता है, उन्होंने मुझे हमेशा अपनी चुदाई से पूरी तरह संतुष्ट किया है और में उनकी चुदाई से बहुत खुश हूँ।

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तभी जीजा जी बाथरूम से बाहर आ गये और उन्होंने कहा कि में नीचे ही सो जाता हूँ। तब माँ उनसे कहने लगी कि नहीं बेटा में नीचे सो जाती हूँ और तुम ऊपर सो जाओ, लेकिन तभी उन दोनों के बीच में मेरी दीदी बोल पड़ी, नहीं आज हम तीनों ही नीचे सो जाते है। फिर जीजा जी ने कहा कि हाँ ठीक है और वो तीनो ही अब नीचे लेट गये। थोड़ी देर बाद दीदी ने अपने एक हाथ को माँ के बूब्स पर कपड़ो के ऊपर से ही रखकर उनको मसलना शुरू किया और एक तरफ जीजाजी भी दीदी के बूब्स को मसलने लगे थे। फिर दीदी ने माँ से कहा आप ऐसे ही रहना, में आपके लिए अभी एक लंबी मोमबत्ती लेकर आती हूँ, पीछे से वो मेरी चूत में अपना पांच इंच का लंड डालेंगे और में आपकी चूत में उस मोमबत्ती को डालकर मज़े दूंगी। फिर माँ ने कहा कि हाँ ठीक है तुम जाओ और उसी समय दीदी ने माँ से कहा कि अपना यह गाउन उतार दो और दीदी ने उनसे कहते समय ही अपने भी कपड़े उतार दिए और अब जीजा जी उन दोनों के बीच में आ गये और वो मेरी माँ के बूब्स को मसलने लगे, जिसकी वजह से माँ धीरे धीरे गरम होने लगी थी। फिर दीदी नीचे झुककर जीजाजी का लंड चूसने लगी। फिर जीजाजी ने कुछ देर बाद माँ के एक पैर को घुमा दिया था, उस वजह से माँ की चूत और गांड साफ साफ दिखने लगी थी और उसी समय जीजाजी ने बिना देर किए अपनी एक उंगली को माँ की चूत में डाल दिया और वो अपनी ऊँगली को अंदर बाहर करने के साथ साथ माँ के बूब्स को भी वो ज़ोर से मसलने लगे थे। फिर दीदी ने उसी समय जीजाजी का लंड अपने मुँह से बाहर निकाला और जीजाजी ने अपना वो लंड मेरी माँ की चूत के मुहं पर रखकर एक ज़ोर के धक्के में पूरा अंदर कर दिया, ताकि माँ को संभलने का मौका भी ना मिले। अब माँ अचानक से हुए उस जोरदार प्रहार के दर्द की वजह से एकदम चीख पड़ी और वो दर्द से छटपटाने लगी, उनको बड़ा दर्द हुआ, क्योंकि उन्होंने बहुत दिनों के बाद एक लंड अपनी चूत में लिया था, जो ज्यादा मोटा होने की वजह से आज उनकी चूत को चीरता, फाड़ता हुआ पूरा अंदर जा पहुंचा था और तभी माँ उस दर्द की वजह से उठकर बैठ गयी और वो सिसकियाँ लेते हुए कहने लगी आह्ह्हह्ह ऊईईईईई बेटा तुम यह क्या कर रहे हो? तो जीजा जी बोले कि माँ क्या हुआ अभी आपको भी कुछ देर बाद मज़ा आने लगेगा, यह सब दुःख दर्द भूल जाओगी? माँ ने कहा कि नहीं यह सब जो भी हमारे बीच में हो रहा है, यह बिल्कुल ग़लत है और तभी दीदी अपनी ऊँची आवाज से बोली कि चुपकर रंडी साली अब तू ज्यादा नखरा मत दिखा, बड़ी सती सावित्री बनती है, छिनाल साली कुतिया चल अब जल्दी से सीधी नीचे लेट जा देख आज मेरे पति का लंड तुझे जन्नत की कैसे सेर करवाएगा, तुझे असली चुदाई के मज़े देगा। फिर माँ कहने लगी कि नहीं तुम अब बस करो आऊऊऊ स्स्सीईईईइ में इस दर्द से मरी जा रही हूँ मुझे बड़ा अजीब सा दर्द महसूस हो रहा है। फिर दीदी जीजाजी से कहने लगी कि यह साली रंडी मुझे लगता है कि ऐसे नहीं मानेगी, आप इसको चोदना शुरू करो में इसको देखती हूँ कि यह क्या करती है? और अब जीजा जी ने अपना लंड बाहर निकालकर में के मुँह के पास कर दिया और उनको कहा कि इसको तुम अब अपने मुहं में लेकर चूसना शुरू करो। फिर माँ ना ऐसा करने से मना करने लगी, लेकिन उसी समय दीदी ने मेरी माँ का मुँह पकड़कर जबरदस्ती अपने पति का लंड मेरी माँ के मुहं के अंदर डाल दिया और फिर माँ उसको चूसने लगी। माँ थोड़ी देर तक उस मोटे दमदार लंड को लोलीपोप की तरह चूसती रही। फिर उन्होंने लंड को बाहर निकालकर कहा कि में अब तैयार हूँ, लेकिन तुम थोड़ा आराम से करना, तुम्हारा लंड बहुत बड़ा है और इतना कहकर माँ एकदम सीधी होकर लेट गयी।

फिर दीदी ने अपनी चूत को माँ के मुँह पर रख दिया और वो उनके मुहं पर बैठ गयी और माँ अपनी बेटी की रसभरी चूत को अपनी जीभ अंदर डालकर चूसने लगी थी और दीदी जोश में आकर आऊऊऊ आईईई करके सिसकियाँ लेने लगी थी। उन दोनों का वो जोश देखकर जीजा जी ने माँ की चूत के मुहं पर अपना लंड रख दिया और उन्होंने अपनी तरफ से एक हल्का सा झटका मार दिया, जिसकी वजह से जीजाजी का आधा लंड माँ की चूत में फिसलता हुआ अंदर चला गया और उसके बाद जीजा जी ने एक बार फिर ज़ोर से धक्का मार दिया और उस वजह से उनका पूरा लंड माँ की चूत में चला गया और अब जीजाजी माँ के ऊपर ही लेट गये और वो उनके बूब्स को दबाने उनका रस निचोड़ने लगे थे और साथ ही साथ वो ज़ोर ज़ोर से धक्के भी मारने लगे थे और माँ अपनी चुदाई के मज़े लेने लगी थी और वो जोश में आकर कहने लगी उफ्फ्फ्फ़ हाँ और ज़ोर से दो आह्ह्ह्ह हाँ तुम जाने दो पूरा अंदर हाँ ऐसे ही धक्के देकर चोदो मुझे आज तुम मेरी इस चूत को शांत कर दो, में बहुत समय से इसकी वजह से बहुत परेशान हूँ और आज तुम इसकी पूरी भूख प्यास को मिटाकर मुझे वो मज़े दो जिसके लिए में अब तक तरस रही हूँ, लेकिन दोस्तों थोड़ी ही देर धक्के देने के बाद माँ अब झड़ चुकी थी और उनकी चूत से चूत का बहुत सारा रस बहकर बाहर आने लगा था। अब दीदी यह सब देखकर बिल्कुल सीधी होकर लेट गयी और जीजा जी ने अपने लंड को मेरी माँ की चूत से बाहर निकालकर अपनी पत्नी की गीली कामुक चूत के मुहं पर रखकर एक ही जोरदार झटके में अपना पूरा का पूरा लंड दीदी की चूत में डाल दिया जिसकी वजह से दीदी के मुहं से बस एक आईईईईई की आवाज बाहर आई और उसके बाद वो चुपकर मज़े लेने लगी थी और अब वो अपनी तरफ से दीदी को ज़ोर ज़ोर से धक्के मारने लगे थे और उसी समय माँ ने उठकर अपने बूब्स की निप्पल को जीजाजी के मुँह में डाल दिया और वो बोली कि बेटा मेरा दूध बहुत मेहनत करने पर बाहर आता है आज तुम इसका भी स्वाद चखकर मुझे बताओ कि यह तुम्हे कैसा लगा आज तुम इसका पूरा रस निचोड़ दो। फिर करीब दस मिनट में दीदी भी झाड़ गयी, लेकिन जीजाजी का लंड अब भी वैसे ही तनकर खड़ा था इसलिए अब उन्होंने माँ को अपने सामने घोड़ी बनाया और फिर एक ही ज़ोर के झटके में माँ की चूत में उन्होंने अपना लंड डाल दिया और वो ज़ोर से धक्के देकर चोदने लगे थे। फिर तभी उसी समय जीजाजी ने अपनी एक उंगली को माँ की गांड में डाल दिया, जिसकी वजह से माँ को थोड़ा सा दर्द हुआ। फिर माँ ने कहा कि बेटा इसे मत छेड़ो, मैंने कभी गांड नहीं दी, दीदी बोली कि माँ इसमे आपको बहुत मज़ा आएगा और यह बहुत प्यार से आपका यह काम भी जरुर पूरा कर देंगे। फिर माँ मेरी दीदी की वो बातें सुनकर थोड़ा सा शांत होकर अपनी गांड में लंड का मज़ा लेने लगी थी, क्योंकि कुछ देर बाद उनका वो दर्द अब मज़े मस्ती में बदल चुका था। अब जीजाजी ने कुछ देर धक्के देने के बाद अपना लंड तुरंत गांड से बाहर निकालकर माँ के मुँह में डाल दिया, क्योंकि वो झड़ने वाले थे और मेरी छिनाल माँ ने जीजा जी के लंड से बाहर निकला वो सारा वीर्य पी लिया और वो तीनों थककर वैसे ही पूरे नंगे एक दूसरे से लिपटकर लेट गये और वो तीनों ही उस मज़े मस्ती की वजह से अपने अपने चेहरे से बहुत ही खुश और मेरी माँ पूरी तरह से संतुष्ट नजर आ रही थी। दोस्तों यह था अपनी आखों से देखा हुआ वो सच जिसे मैंने इतनी मेहनत करके इसको आप तक पहुंचाया ।।

धन्यवाद …

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