चुदक्कड़ माँ बेटी की चूत का कबाड़ा


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प्रेषक : कमल …

हैल्लो दोस्तों, आज में आप सभी को अपनी जो सच्ची घटना सुनाने आया हूँ। यह मेरे साथ तब घटित हुई जब में 30 साल का था। दोस्तों वैसे तो मुझे भी आप सभी की तरह कामुकता डॉट कॉम पर सेक्सी कहानियों को पढ़ने में बड़ा मस्त मज़ा आता है और अब तक आप लोगों के बहुत सारे अनुभव के मज़े ले भी चुका हूँ। अब आज में अपना भी एक सच्चा सेक्स अनुभव आप सभी की सेवा में लेकर हाजिर हुआ हूँ और मुझे उम्मीद है कि यह आप सभी को जरुर पसंद आएगा और अब में ज्यादा बोर ना करते हुए वो सब सुनाना बताना शुरू करता हूँ कि किस तरह से मैंने मेरे किराए से रहने वाली एक आंटी और उसकी बेटी को जमकर अपने लंड के मज़े दिए? दोस्तों यह उन दिनों मेरे घर में एक परिवार किराए पर रहता था। दोस्तों उस परिवार में तीन सदस्य थे, एक आदमी जिसका नाम अशोक था उसकी उम्र 45 साल थी और उसकी पत्नी जिसका नाम उमा था, जो 38 साल की थी और उसकी बेटी निशा जो 20 साल की थी। दोस्तों निशा दिखने में ज्यादा सुंदर तो नहीं थी, लेकिन उसके बूब्स और उसका वो गोरा बदन दिखने में बहुत ही आकर्षक था, उसके बूब्स का आकार 36-26-34 था और उसका रंग कुछ साफ था, लेकिन हाँ उसकी माँ उमा बहुत सेक्सी और सुंदर औरत थी, जो मुझसे बहुत हंस हंसकर बातें किया करती थी।

दोस्तों जब भी उसका आदमी घर में नहीं होता था वो मुझसे कुछ ज्यादा ही करीब आने की कोशिश किया करती थी और में पहली बार में ही उसके मन की बात को बहुत अच्छी तरह से समझ चुका था। दोस्तों अब में सबसे पहले उमा की चुदाई के बारे में बताना शुरू करता हूँ। दोस्तों उसको अभी मेरे घर आए बस 15-20 दिन ही हुए थे और शुरू से ही वो मुझसे बहुत बातें करती थी और जब में मेरी नौकरी से वापस आया तब मैंने देखा कि वो उस दिन घर में अकेली ही थी। फिर मैंने उनको पूछा क्यों उमा जी क्या आज आप घर में अकेली है? वो कहने लगी हाँ आज में घर में अकेली ही हूँ और वो दोनों बाजार गये है और उनको वापस आने में देर हो जाएगी। फिर में मेरे कमरे में जाने लगा, तभी वो एक बार फिर से मुझसे कहने लगी कि कमल तू आज मेरे पास ही चाय पी लेना, जल्दी से फ्रेश होकर मेरे पास आ जा। दोस्तों उसकी उस बात को कहने के तरीके में आज बहुत ही सेक्स था और में तुरंत समझ गया कि उमा आज बहुत गरम है। फिर मैंने झट से उनसे कहा कि उमा में तो फ्रेश ही हूँ अगर कोई कमी है तो वो तुम ठीक कर देना।

अब वो मेरे मुहं से यह जवाब सुनकर बड़ी खुश होकर मुस्कुराते हुए मुझसे कहने लगी अच्छा कमल तो क्या यह बात है? अब मैंने उसको कहा कि उमा पहले तो तुमने ही यह बात शुरू की है में उसका जवाब भी तो दूंगा ना। फिर वो हंसते हुए कहने लगी हाँ ठीक है चल अब आ जा मेरे पास और फिर मैंने उसको कहा कि हाँ ठीक है उमा और में उसके कमरे में चला गया और जाकर सीधा पलंग पर बैठ गया। फिर उसके बाद वो हम दोनों के लिए चाय बनाने रसोई में चली गई और कुछ देर बाद वो वापस आ गई उसके बाद हम दोनों ने साथ में बैठकर चाय पी और चाय को पीते समय ही मैंने सही मौका देखकर उसकी जांघ पर अपने एक हाथ को रखकर महसूस किया, लेकिन उसने मेरी उस हरकत का कोई भी ऐतराज नहीं किया। फिर तुरंत ही चाय को खत्म करके मैंने उसके चेहरे को अपने दोनों हाथों के बीच में लेकर उसको चूमना शुरू किया और उसने मेरा पूरा पूरा साथ दिया। दोस्तों वो तो पहले से ही मुझसे अपनी चुदाई करवाने के लिए तैयार थी उसको बस मेरी तरफ से पहल करवानी थी और अब मैंने कुछ ही देर में उसको अपने सामने पूरा नंगा कर दिया और वो भी मेरे कपड़े उतारने लगी थी।

फिर मैंने उसको उसी समय बिना देर किए पलंग पर लेटाकर उसके दोनों पैरों को अपने कंधे पर रखकर, पलंग से नीचे खड़े होकर उसकी खुली कामुक गीली चूत में अपने लंड को एक ही जोरदार धक्के में पूरा अंदर डालकर उसकी चुदाई करना शुरू किया। दोस्तों पहली बार लंड के थोड़ा सा अंदर जाने से उसके मुहं से हल्की सी ऊईईइ माँ की आवाज निकली, लेकिन उसके बाद उसने अपने कूल्हों को ऊपर उठा उठाकर मुझे अपनी चुदाई में पूरा पूरा साथ दिया। अब वो मुझसे कह रही थी हाँ और ज़ोर से लगा तू धक्के आह्ह्ह हाँ जाने दे पूरा अंदर ऊफ्फ्फ हाँ ऐसे ही आज तू मेरी इस प्यासी चूत को चोद चोदकर शांत कर दे इसकी प्यास को बुझा दे यह तेरे लंड को लेने के लिए बहुत दिनों से तरस रही है। दोस्तों इस तरह से मैंने उसको उस दिन रुक रुककर दो बार चोदा और दोनों बार ही अपने वीर्य को मैंने उसकी चूत की गहराईयों में निकाल दिया। फिर जब तक उसका पति अशोक और उसकी बेटी बाजार से वापस नहीं आ गये तब तक वो मुझसे अपनी चुदाई करवाकर बहुत खुश और पूरी तरह से संतुष्ट थी। दोस्तों चुदाई के समय उसने मुझसे कहा था कि मेरी बेटी निशा तो काली है, पता नहीं उससे कौन शादी करेगा?

फिर उस समय मैंने उसको कुछ भी जवाब नहीं दिया, लेकिन हाँ मैंने उसकी दूसरी बार भी बहुत जमकर चुदाई करके उसकी चूत को पूरी तरह से शांत करके उमा को बहुत खुश कर दिया था। फिर उसी रात को जब अशोक और निशा सो गए। उसके बाद वो सही मौका देखकर मेरे पास चली आई और एक बार फिर से वो मुझसे चुदी, तब भी उमा बहुत खुश थी। अब उसने मुझसे कहा कि कमल तेरे जैसे लंड की मुझे बहुत दिनों से तलाश थी और आज पहली बार मेरी बहुत मस्त चुदाई हुई है वाह मज़ा आ गया, तुम्हारे लंड में बहुत दम है इसको लेकर हर चूत इसकी गुलाम होने को तैयार हो जाएगी। फिर वो मेरी तारीफ करके वापस चली गई और करीब दो महीनो तक में उसको हर कभी जब भी हमारे पास कोई अच्छा मौका आता हम चुदाई के इस खेल का मज़ा लेने लगते में उसको हर बार जमकर चोदता रहा और वो मेरे पास हर रात को आती। फिर उसके बाद दोस्तों असली चुदाई की कहानी शुरू होती है। दोस्तों अब निशा के पेपर में बस तीन महीने रह गए थे और उसको अपनी तैयारी पूरी करने के लिए ट्यूशन लगानी थी। फिर एक दिन मुझसे अशोक ने पूछा कोई अच्छा सा अध्यापक मिल जाए जो निशा को घर में आकर पढ़ा सके, तुम्हारी नजर में हो तो बताओ। दोस्तों ये कहानी आप कामुकता डॉट कॉम पर पड़ रहे है।

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अब मैंने उससे कहा कि आपको मुझसे अच्छा कौन मिलेगा जो निशा को ठीक तरह से पढ़ा दे और वो मेरी उस बात को मान गया और में उसी शाम से निशा को पढ़ाने लगा था। दोस्तों पहले दिन ही मैंने कुछ बातो से महसूस किया कि वो भी अपनी माँ की तरह चुदाई में बहुत रूचि रखती है और फिर मैंने किसी ना किसी बहाने से उसकी गांड और गालों को छुआ, लेकिन उसने मेरा बिल्कुल भी विरोध नहीं किया। फिर करीब दो घंटे उसको पढ़ाने के बाद में मेरे कमरे में चला गया और मैंने अशोक को कहा कि अंकल जी अगर कुछ भी समझ ना आए या कोई समस्या हो तो आप निशा को मेरे कमरे में भेज देना, में उसको और भी समझा दूँगा। फिर करीब चार पांच दिनों तक में निशा को उसके कमरे में जाकर पढ़ाता था और फिर मैंने उसको कहा कि अंकल जी आप निशा को मेरे कमरे में ही भेज दिया करो ना, में अच्छे से उसको पढ़ा दूँगा और फिर रात के समय पढ़ाई अच्छे से होगी। अब वो मेरी उस बात को मान गया और कहने लगा कि हाँ कमल तुम ठीक कहते हो, आज से यह रात को तेरे पास ही आ जाएगी। फिर उसी रात वो मेरे कमरे में पढ़ने आ गई और में उसको पढ़ाने लगा। फिर मैंने हिम्मत करके खुलकर पहली बार उसकी गांड में अपनी ऊँगली को डाल दिया और वो मुस्कुरा गई। दोस्तों अब तो जब भी वो कोई भी गलती करती तब में उसके कूल्हों पर थप्पड़ मारता और कभी कभी तो में उसके गालों को भी सहला देता और इस तरह से में उसको बहुत देर तक पढ़ाया करता था और मैंने देखा कि वो भी मेरे साथ खुलकर मस्त होने लगी थी। फिर में नीचे जाकर उसके माँ बाप को देखकर आया और मुझे पता चला कि वो दोनों सो चुके थे। दोस्तों में बहुत खुश था, मैंने हिम्मत करके अपने कदम को आगे बढ़ाने का पूरा विचार बना लिया था और अब मैंने मेरी शर्ट को उतार दिया औट पजामा और बनियान में उसके सामने आ गया। दोस्तों मैंने अंडरवियर नहीं पहना था, इसलिए मेरा तनकर खड़ा लंड साफ दिखाई दे रहा था और उसके टॉप पर कुछ पानी भी लगा था। अब निशा ने मेरे खड़े लंड को घूरकर देखा और वो मुस्कुराते हुए मुझसे कहने लगी, भैया आपका पजामा तो अभी से गीला हो गया क्या बात है? फिर मैंने उसी समय खुलकर उसको कहा कि निशा यह तो तेरे लिए ही है, आज मुझे अच्छा मौका मिला है तो में यह तुझे ही दे देता हूँ।

अब निशा हंसते हुए मुझसे कहने लगी कि भैया में भी तो बहुत दिनों से आपके लिए तैयार हूँ। मुझे भी किसी अच्छे मौके की तलाश थी। फिर मैंने उसके मुहं से यह बात सुनकर खुश होकर निशा को उसी समय अपनी बाहों में जकड़ लिया और मैंने उसके गालों को चूमना शुरू किया और उसने भी मेरा साथ देते हुए मुझे चूमना शुरू किया। फिर मैंने कुछ देर बाद जब हम दोनों गरम हो गए और उसके बाद निशा की कमीज़ को उतार दिया और तुरंत ही उसकी ब्रा को भी खोल दिया और फिर मैंने उसके बाद उसकी सलवार को भी उतार दिया और निशा ने मेरा पजामा उतार दिया। अब मेरे लंड की लम्बाई उसके आकार को देखकर निशा बहुत चकित हो गई और वो डरते हुए घुर घूरकर मेरे लंड को देखने लगी थी। फिर वो डरते हुए मुझसे कहने लगी ऊह्ह्ह भैया आपका लंड तो गधे के लंड से भी ज्यादा मोटा लंबा है इसको अंदर लेकर मेरी इस छोटी चूत का तो कबाड़ा ही हो जाएगा, में इसको लेकर मर ही जाउंगी। अब में उसको बड़े ही प्यार से समझाने लगा, अरे निशा नहीं ऐसा कुछ भी होगा जैसा तुम सोच रही हो, तुम एक बार इसको अपने मुहं में भरकर चूसकर लो, तब देखना तुम्हे कितना मस्त मज़ा आएगा। फिर उसको यह बात कहकर में बेड पर लेट गया और निशा मेरे ऊपर आकर 69 की पोज़िशन में हो गई।

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दोस्तों अब में उसकी कुंवारी चूत को चूसकर अपनी जीभ से उसकी चुदाई करने लगा था और वो मेरे लंड को अपने मुहं में पूरा अंदर भरकर चूसने लगी थी। फिर कुछ देर बाद जब वो जोश में आ चुकी थी और उसी समय मैंने सही मौका देखकर उसको पलंग पर सीधा किया और अब उसके दोनों पैरों को उठाकर मैंने उसकी गीली कामुक चूत में मेरा तनकर खड़ा सात इंच लंड का टोपा रख दिया। में उसकी चूत को सहलाने लगा था। अब वो मेरा इरादा समझकर मुझसे कहने लगी कि भैया आपका तो बहुत मोटा है यह मेरी तो आज फाड़ ही देगा, प्लीज मुझे बड़ा दर्द होगा कहीं में मर ना जाऊँ? अब मैंने उसको कहा कि नहीं फटेगी, बस दो चार मिनट का दर्द होगा उसके बाद तुम्हे मज़ा आने लगेगा और अब मैंने मेरे लंड से एक जोरदार धक्का उसकी चूत पर मार दिया। अब वो दर्द की वजह से ज़ोर से चिल्ला गई, लेकिन मैंने तुरंत ही उसके होंठो को मेरे होंठो से बंद कर दिया और तीन चार धक्के में मेरा पूरा लंड उसकी चूत में चला गया। दोस्तों कुछ देर तक तो वो उस दर्द की वजह से रोई, लेकिन फिर उसके बाद उसको मज़ा भी आने लगा था और अब वो मुझसे बड़ी मस्ती में आकर चुदाई करवाने लगी थी। अब वो मेरा पूरा पूरा साथ देकर अपनी कुंवारी चूत में मेरे लंड को लेने लगी थी और में उसका वो जोश देखकर बड़े मज़े से उसकी जमकर चुदाई करता रहा।

दोस्तों उस रात को मैंने निशा को सोने नहीं दिया और चार बार मैंने उसकी चुदाई के मज़े लिए और सुबह वो बहुत थकी हुई थी और चेहरे से बहुत खुश भी थी ख़ुशी की वजह से उसके पैर ज़मीन पर नहीं टिक रहे थे। दोस्तों यह बात छुप तो नहीं सकती थी, सबसे पहले उमा को पता चला कि में निशा को भी चोदता हूँ। फिर उसने मेरे सामने अपनी नाराज़गी जताई और बाद में मैंने उसको मना भी लिया था, लेकिन फिर एक रात अशोक ने भी मुझे निशा की चुदाई करते हुए रंगे हाथों पकड़ लिया और इस तरह से में निशा और उमा को करीब पांच महीनो तक वैसे ही चोदता रहा और फिर उसके बाद अशोक ने अपनी पत्नी बेटी की मेरे साथ चुदाई होने की वजह से हमारा मकान खाली करके उनके रहने के लिए कोई दूसरा मकान देख लिया और फिर वो लोग चले गए। दोस्तों यह था मेरा वो सच्चा सेक्स अनुभव जिसको में बताने के लिए आज आप सभी की सेवा में हाजिर हुआ हूँ, लेकिन कुछ भी कहो मुझे उन दिनों जब तक वो हमारे घर रहे बड़े मज़े आए। में कभी माँ की चुदाई करता तो कभी अच्छा मौका देखकर उसकी बेटी का बेंड बजाने लगता और अब में भगवान से प्राथना करता हूँ कि ऐसे चुदक्कड़ किराएदार वो सभी को दे जिनकी वजह से हम सभी का काम ऐसे ही चलता रहे ।।

धन्यवाद …

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