चुदाई गन्ने के खेत में


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प्रेषक : राजू …

हैल्लो दोस्तों, वैसे तो आप सभी ने कामुकता डॉट कॉम पर बहुत सारी कहानियों को पढ़ा होगा, लेकिन मेरी यह कहानी बिल्कुल अलग है, जो किसी बेडरूम की ना होकर एक गन्ने के खेत में हुई एक सच्ची चुदाई पर आधारित है। दोस्तों यह तब की बात है, जब में अपने अपने चाचा के गाँव गया हुआ था, वहाँ पर उनके पड़ोस में जो दूसरा परिवार रहता था, उस औरत को में भी अपने और चचेरे भाई की पत्नी की तरह भाभी ही कहता। दोस्तों मैंने अपनी हॉट सेक्सी भाभी की पहली बार जंगल में कैसे चुदाई की थी? वो कहानी में आप सभी को पहले ही बता चुका हूँ। अब में आप सभी को मेरी भाभी और उनकी चुदाई के सच्चे अनुभव की कहानी आज बताने जा रहा हूँ। दोस्तों जब में इस बार अपने चचेरे भाई के पास उनके गाँव में गया, तब वहाँ पर मेरे बड़े चचेरे भाई की साली भी आई हुई थी, उसका नाम गीता है। दोस्तों गीता दिखने में एकदम मस्त पटाखा लगती है, वो दिखने में गोरी, चिकनी चमड़ी, पतली कमर, उसकी लम्बाई करीब 5.4 इंच, उसके बूब्स का आकार करीब 34-26-36 होगा। दोस्तों गीता मुझे ज़्यादा भाव नहीं दे रही थी, लेकिन वो मुझे बड़ी हमेशा स्टाइल मारती रहती और बात बहुत कम करती थी। अब में भाई साहब और भाभी की वजह से उसको कुछ नहीं कह सकता था और वैसे भी में लड़कियों के ज़्यादा नखरे नहीं झेल सकता था और इसलिए लड़कियाँ मुझे बड़ा सीधा समझती।

दोस्तों गीता शायद चाहती थी कि में उसके साथ बहुत बातें करूँ और उसकी तारीफ करूँ, लेकिन में ऐसा नहीं कर सका। फिर उसको शायद इसमे अपनी बेइज़्ज़ती लगी और वो अब मुझसे पंगा लेने के चक्कर में लगी रहती थी, लेकिन दोस्तों गीता माल जबरदस्त है और इसलिए में भी उसके सेक्सी बदन से अपनी नजरें नहीं हटा पाता था और अगर उसको यह लगता कि में उसको देख रहा हूँ। तब वो साली मुझे ज़रूर ताने मारती कि शहर के लोगों ने शायद लड़कियाँ देखी ही नहीं ऐसे देखते है जैसे चिड़ियाघर में आ गये हो। दोस्तों एक दिन शाम को में खेतों में अकेला जा रहा था और चलते-चलते में गन्ने के खेतों की तरफ पहुँच गया, तभी मेरी इच्छा गन्ना खाने की हुई तो में एक अच्छा सा गन्ना उखाड़ने के लिए खेत के अंदर घुस गया। अब वहाँ पर मुझे किसी मर्द और औरत की आवाज़ सी सुनाई दी, में उस आवाज की तरफ गया और वहाँ उस समय जो मैंने देखा मुझे अपनी आँखों पर बिल्कुल भी विश्वास ही नहीं हुआ। अब मैंने देखा कि गीता और पड़ोस का एक लड़का उसका नाम दिनेश था, वो एक दूसरे से अधनंगे चिपके हुए थे। अब दिनेश गीता की कमीज की चैन पीछे से खोलकर उसकी ब्रा के ऊपर से चुम्मा करता और नीचे सलवार को खोलकर उसकी जांघो पर मसाज भी वो लगातार कर रहा था।

फिर गीता कुछ मधहोश करने वाली सेक्सी आवाजे निकाल रही थी, लेकिन शायद वो भी मज़ा लेना चाह रही थी और दिनेश उसकी मर्ज़ी से ही उसके साथ मज़े ले रहा था। अब यह सब देखकर मुझे बड़ा ही गुस्सा आने लगा था और मैंने उन दोनों को चिल्लाकर डांटना शुरू किया और सबको यह बात बताने की धमकी भी में देने लगा था। फिर मेरी आवाज को सुनकर दिनेश वहाँ से डरकर उल्टे पैर भाग गया, जब मैंने अच्छी तरह से तसल्ली कर ली कि दिनेश अब वापस नहीं आएगा, तब में गीता को डांटने उसके पास चला गया। अब में उसकी वो सारी हरकतें अपनी भाभी को बताना चाहता था, लेकिन गीता की हालत को देखकर मैंने अपना इरादा बदल दिया और गीता अभी भी डर के मारे अधनंगी थी, में उसको उस हालत में देखकर कुछ भी नहीं कह सका। फिर वो मेरे सामने गिड़गिड़ाते हुए बोली कि प्लीज तुम दीदी और जीजा को यह सब मत बताना, में तो यहाँ ऐसे ही आई थी और पता नहीं वो दिनेश आकर मेरे साथ ज़बरदस्ती करने लगा। फिर मैंने उसको कहा कि तू मेरे सामने ज्यादा शरीफ मत बन और मुझे सच सच बता दे, नहीं तो में भाई साहब और भाभी को यह सब कुछ बता दूँगा। अब वो मेरी बात पर और भी ज्यादा डर गयी और बोली कि हाँ में दिनेश के साथ आई जरूर थी, लेकिन मुझे पता नहीं था कि दिनेश मेरे साथ यह सब करने लगेगा।

दोस्तों में अब तक उसके बदन को देखकर बड़ा ही मस्त हो चुका था और फिर मैंने उसी समय मन ही मन में सोचा कि बेटा इससे बढ़िया मौका किसी कुँवारी लड़की को चोदने का मुझे दोबारा मिलना बहुत मुश्क़िल है और इसलिए में भी उस मौके का पूरा पूरा फायदा उठाना चाहता था। अब गीता को क्या फ़र्क़ पड़ता? अगर में वहाँ नहीं पहुँचा होता तो दिनेश तो अब तक उसकी ठुकाई कर चुका होता और इसलिए में वो काम अब करूं या दिनेश उस बात से क्या फर्क पड़ने वाला था? लंड को जाना तो चूत के अंदर ही है, वो चाहे किसी का भी हो? फिर मैंने मन ही मन अब गीता की कुँवारी चूत के दर्शन करने की बात सोची। अब तक गीता अपने कपड़े ठीक कर चुकी थी, लेकिन अब मैंने उसको नंगा करने का इरादा पक्का कर लिया था। फिर में आगे बढ़ा और मैंने उसको अपनी बाहों में भरकर में उसको बोला कि में भाई साहब और भाभी को कुछ नहीं बताऊंगा, लेकिन तुम मेरा बस एक काम कर दो। अब गीता डरते हुए पूछने लगी कि वो क्या? तब मैंने कहा कि बस मुझे वो सब दे दो, जो तुम दिनेश को देना चाहती थी और में तुमको निराश नहीं करूँगा, में तुमसे पक्का वादा करता हूँ कि में तुम्हे दिनेश से भी ज़्यादा मज़ा दूँगा और इतना कहकर मैंने उसके होंठो पर अपने होंठ रखकर उसके होंठो को बंद कर दिया।

अब गीता मेरे मुहं से वो पूरी बात सुनकर एकदम सकपका गयी और वो कुछ बोल नहीं सकी, क्योंकि मैंने उसके होंठो जो बंद कर दिए थे। फिर जैसे ही मैंने अपने होंठो को हटाया, तब वो कहने लगी कि जीजाजी आप बहुत गंदे है, आपने ऐसी गंदी बात कैसे सोची? फिर मैंने कहा कि दिनेश के साथ तुम क्या अभी पूजा कर रही थी? अरे में तो फिर भी तुम्हारा नजदीक का हूँ और सोच लो में यह बात भाई साहब और भाभी से ही नहीं पड़ोस में भी बोलूँगा और तुम दोनों को पूरी तरह से बदनाम कर दूँगा। फिर मेरी इस बात का गीता पर बड़ा असर हुआ और वो बोली कि प्लीज ऐसा मत करना, प्लीज में वरना बदनाम हो गयी तो कहाँ जाउंगी? आप मुझ पर रहम करो प्लीज। फिर मैंने कहा कि सोच लो, या तो मेरा कहना मान लो, या फिर तुम्हारी बदनामी जिसके लिए तुम दोनों ज़िम्मेदार होंगे। अब गीता कहने लगी कि प्लीज जैसा तुम चाहो वैसा कर लो, लेकिन प्लीज मेरे कपड़े मत उतारना आप बाहर से जो चाहे कर लो, लेकिन मुझे कैसे भी करके बचा लो। अब मेरा तीर सही निशाने पर लग गया था और फिर मैंने गीता को अपनी बाहों में ज्यादा कस लिया था और मैंने देखा कि उसकी सलवार अभी तक खुली हुई थी, जिसको उसने एक हाथ से पकड़ रखा था।

फिर जैसे ही मैंने उसको अपनी बाहों में लिया, अब उसके हाथों से उसकी सलवार पहले से ज्यादा नीचे सरक गयी और मैंने ऊपर से उसकी कमीज की चैन को पीछे से खोल दिया और अब मैंने देखा कि उसने अंदर काले रंग की ब्रा पहनी हुई थी। अब में तो उसके गोरे बदन पर काले रंग की उस ब्रा को देखकर बड़ा मस्त हो गया था। दोस्तों वैसे तो में आराम से मस्ती के साथ मज़ा लेने वाला हूँ, लेकिन खेत में आराम ना होने और दूसरा गीता से पंगा होने की वजह से में उसको पूरी तरह से नंगा करके मसल देना चाहता था और इसलिए मैंने जल्दी से उसकी कमीज को उतार दिया। अब वो खेत के बीच में काले रंग की ब्रा और लाल रंग की पेंटी पहनकर आधी नंगी खड़ी थी। फिर मैंने उसको कमर से पकड़कर उसकी ब्रा के ऊपर से ही उसके बूब्स पर चूमना शुरू कर दिया। अब वो चिल्ला रही थी, लेकिन मैंने उसको डराते हुए कहा कि किसी ने सुन लिया तो तुम्हारी बहुत बदनामी होगी और इसलिए जैसा में करता हूँ मुझे करने दो। अब वो फिर भी हल्की आवाज से सिसकती रही, मुझे पता नहीं उसको मज़ा आ रहा था या नहीं, लेकिन मैंने तो उसके पूरे शरीर को बड़ी मस्ती से मसलना दबाना और उसको चूमना वैसे ही जारी रखा। फिर मैंने उसकी ब्रा का हुक भी खोल दिया और उसके बूब्स को में सहलाने लगा था।

अब गीता भी मस्ती में आने लगी थी, उसको जोश चढ़ने लगा था और मेरा ऐसा करना अच्छा लगने लगा था। अब वो मुझे बीच बीच में प्यार से मना करती और कभी-कभी चूमने लगती, लेकिन उसको इस बात का डर भी लगता कि आखिर कोई आ ना जाए। फिर थोड़ी देर के बाद मैंने उसकी पेंटी के अंदर अपना एक हाथ डाल दिया, जिसकी वजह से वो परेशान हो गयी और उसने जल्दी में अपनी पेंटी को अपने आप ही उतार दिया। दोस्तों उसके बाद का द्रश्य देखकर मेरा पागल हो चुका था, क्योंकि मेरे सामने उस समय वो सब था जिसको में किसी भी शब्दों में लिखकर नहीं बता सकता कि में क्या और कैसा महसूस कर रहा था? वाह उसकी चूत बड़ी ही मस्त कामुक थी, एकदम गुलाबी और उसके चारों तरफ हल्के भूरे रंग के बाल थे। दोस्तों देखकर मुझे लगा कि उसने अपनी चूत के बालों को साफ करना अभी शुरू भी नहीं किया था, क्योंकि उसकी चूत के बाल एकदम नरम-नरम थे, शायद उनको अभी तक काटा नहीं गया था, वो ज़्यादा लम्बे भी नहीं थे और वो ज्यादा से ज़्यादा दो-तीन सेंटीमीटर तक लंबे होंगे। अब उसकी चूत को देखकर तो वो 12-13 साल की लगती थी, उसके बूब्स भी एकदम टाईट और छोटे-छोटे आकार के थे, दोनों बूब्स की निप्पल जोश में आकर खड़ी हो चुकी थी।

अब उसके वो बूब्स ज़्यादा दिन उस आकार के रहने वाले नहीं थे, क्योंकि अब तो उन पर दो-दो लोगों का हाथ लग चुका था, लेकिन जहाँ तक उसकी चूत की बात थी शायदा दिनेश को अभी तक उसकी चूत तक हाथ फैरने का मौका नहीं लगा था, क्योंकि उसकी चूत देखकर लगता था कि वो अभी तक लंड की मार से बहुत दूर ही थी। दोस्तों वो एकदम नरम गुलाबी मस्त गुदगुदी मुलायम मख्खन जैसी थी, लेकिन मुझे पक्का पता था कि उसके बूब्स जरूर दिनेश दबा चुका है, क्योंकि मैंने पहले भी उन दोनों को एक साथ देखा था। फिर में उसकी मस्त कुँवारी चूत को देखकर अपने आपको रोक नहीं सका और अब में समझ गया था कि ऐसी चूत दोबारा से चोदने को शायद ही मिल पाए। फिर मैंने उसको जमीन पर लेटा दिया और अब में बिना देर किए उसके ऊपर चढ़ गया। अब मैंने अपने कपड़े नहीं उतारे और बस अपनी पेंट की चैन को खोलकर अपनी पेंट को नीचे कर लिया और फिर अपना लंड बाहर निकालकर में झट से गीता के ऊपर चढ़ गया। फिर मेरे लंड के स्पर्श से गीता बिल्कुल पागल सी हो चुकी थी और उसके शरीर के स्पर्श से मेरा लंड भी तनकर खड़ा होता चला गया।

अब में अपने लंड को उसके पूरे शरीर पर घिसने लगा था और वो शरमाते हुए चीखने लगी थी, लेकिन में बहुत अच्छी तरह से अब समझ चुका था कि वो मस्ती में यह सब कर रही थी। फिर अचानक से मुझे एक शरारत सूझी और मैंने उसके दोनों बूब्स को अपने दोनों हाथों में लेकर उसके बीच में अपना लंड रख दिया। अब मेरा लंड बूब्स के बीच में देखकर गीता ने शरमाते हुए अपनी दोनों आँखों को बंद कर लिया। फिर में उसके दोनों बूब्स के बीच में अपने लंड को सेट करके चुदाई वाले आसन में उसके बूब्स में अपने लंड को उसकी उभरी हुई गोरी छाती पर रगड़ने लगा। अब यह सब करने की वजह से मेरा लंड और गीता के बूब्स धीरे धीरे टाईट होते चले गये और अब हम दोनों उस खेल के मज़े लेने लगे थे। अब गीता तो मेरी इस हरकत से मचल उठी थी, वो 18-19 साल की कुँवारी कली थी, उसका और मेरा चुदाई का कोई ज़्यादा अनुभव नहीं था। फिर थोड़ी देर में मेरा लंड इतना टाईट हो गया कि उसका हिलना भी अब बड़ा मुश्किल हो रहा था। अब मुझे लगा कि यह गीता की चूत में जाने के लिए बिल्कुल फिट है। अब गीता अपनी दोनों आँखों को अभी भी बंद किए हुए थी, वो मेरा लंड देखकर घबरा गयी थी या फिर साली बहाना कर रही थी।

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फिर मैंने बिना देर किए गीता के दोनों पैरों को पूरा फैलाया और एक धक्के के साथ गीता की चूत को दोनों तरफ से फैलाकर अपना खड़ा लंड उसकी चूत में डाल दिया और एक ही झटके में मेरा पूरा लंड उसकी चूत में अंदर तक पहुंचा दिया। गीता की चूत बड़ी टाईट थी, उसकी चूत किसी दस साल की लड़की जितनी टाईट थी और मुझे उसकी चुदाई की शुरुवात में ही बहुत मेहनत करनी पड़ी थी। अब गीता तो मेरी हरकतों से मस्त होती जा रही थी और उसकी भूख बढ़ती जा रही थी और अब वो मुझे और अंदर डालने के लिए कह रही थी। फिर मैंने भी थोड़ी हिम्मत करके एक और धक्का लगा दिया, जिसकी वजह से मेरा पूरा लंड उसकी चूत में समा गया। अब गीता अपनी गांड को उठाकर और अपनी तरफ से धक्का लगाकर चुदवाने को बेताब हो उठी थी। अब वो सब देखकर मुझे बड़ा मज़ा आ रहा था, लेकिन गीता के धक्के से में पूरा हिल रहा था और मेरा लंड उसकी चूत में फँस गया था। फिर जब मेरा दर्द कुछ कम हुआ तब मैंने अपनी मर्दानगी दिखाने के लिए गीता को पकड़ लिया और एक ज़ोर का धक्का लगाकर में आगे पीछे करने लगा।

अब गीता तो मस्ती में उछल पड़ी और दर्द के बावजूद वो मुझसे बोली कि जीजू बस ऐसे ही आगे पीछे करो, आप मेरे दर्द की परवाह मत करो चाहे में कितना भी चिल्लाऊँ? फाड़ ही डालो, मुझे बड़ा मस्त मज़ा आ रहा है, ऐसा पहली बार हुआ है जब दर्द में भी मज़ा आ रहा है। अब गीता की तो हालत ही खराब हो चुकी थी, मैंने उसका मुँह बंद कर दिया था, जिसकी वजह से वो ज्यादा ज़ोर से चीख ना सके, लेकिन मेरे लंड के अंदर जाते ही गीता की मस्ती बढ़ गयी। अब मुझे दर्द हो रहा था, लेकिन वो दर्द के साथ-साथ मस्ती में मज़े कर रही थी और मुझे धक्के लगाने को कह रही थी। अब एक तरफ वो चिल्ला रही थी और दूसरी तरफ मुझसे धक्का लगाने को कह रही थी, जीजू ज़ोर से धक्का लगाओ ना आहह हाँ और ज़ोर से आज इसको फाड़ दो मज़ा आ रहा है, आप मेरे दर्द की परवाह मत करो और ज़ोर से धक्का लागाओ जल्दी जीजू, प्लीज तेज़ी से धक्के लागाओ ऊह्ह्ह्ह हाँ और ज़ोर से और तेज़ ऊफ्फ्फ मज़ा आ रहा है। अब में अपना लंड सरपट रफ़्तार से गीता की चूत में डालने लगा था और वो भी अपने कूल्हों को उठा उठाकर अपनी चुदाई के मज़े ले रही थी।

अब में उसके बूब्स को भी मसलता जाता तो कभी-कभी जोश में मैंने उसके दोनों बूब्स को पूरी ताकत से दबाकर मसल दिया, लेकिन उसके बूब्स जोश की वजह से इतने टाईट हो गये थे कि एकदम पत्थर से लगते, लेकिन मैंने भी उनको ऐसा मसला कि साली की हालत खराब हो गयी। दोस्तों एक तो उसकी चूत वैसे ही फट रही थी और ऊपर से मैंने उसके निप्पल भी पूरे ज़ोर से मसल दिए थे। अब गीता की मस्ती के साथ दर्द के मारे इतनी ज़ोर से चीख निकली कि खेत में अगर उस समय कोई और वहाँ होता, तो वो भी समझ गया होगा कि उस समय किसी कि जबरदस्त ठुकाई चल रही है, लेकिन मेरी यह ठुकाई ज़्यादा देर नहीं चल सकी। अब मेरी उस जोश की वजह से हालत खराब होने लगी थी, मैंने अपनी रफ़्तार को थोड़ा सा कम कर दिया और इसी बीच मेरे लंड में दबाव का लेवल ऊपर पहुँच गया और उसमे सरसराहट सी होने लगी। अब में तुरंत समझ गया था कि में झड़ने वाला हूँ, मैंने गीता के दोनों कूल्हों को पकड़कर अपने लंड को उसकी चूत के अंदर पूरा डालकर रोक दिया। अब उस वजह से मेरे लंड का सारा वीर्य गीता की चूत की गहराई में ही समा गया। फिर मैंने जैसे ही अपना लंड बाहर निकाला, तब गीता एकदम से उठी और वो फटाफट अपने कपड़े पहनने लगी।

अब मैंने देखा कि वो बड़ी ही घबराई हुई थी, लेकिन में समझ नहीं सका और ना ही उसको मैंने कुछ कहा, लेकिन जैसी उसकी हालत थी, उसमे उसकी इतनी फुर्ती दिखाना मुझे समझ में नहीं आया। फिर गीता ने मुझे मेरी पीठ की तरफ इशारा सा किया और वो जल्दी से अपनी सलवार का नाड़ा बाँधते हुए वहाँ से जाने लगी। अब मैंने उसको कुछ कहना चाहा, लेकिन में कह नहीं सका, क्योंकि उसी समय मेरी पीठ पर किसी ने पीछे से अपना हाथ रख दिया जिसको महसूस करके मेरी तो हालत ही खराब हो गयी। अब में गीता की उस घबराहट का मतलब अच्छी तरह से समझ चुका था और में बड़ा ही डर गया था, मैंने मन ही मन में सोचा कि कहीं भैया या भाभी ना हो, क्योंकि यह खेत उनका ही था और वही वहाँ पर आ सकते थे। अब में तो एकदम शरम से पानी-पानी सा हो गया और इतना घबरा गया था कि मेरा पूरा शरीर सुन्न हो गया था, लेकिन इतने में ही मुझे पड़ोस की भाभी जी की आवाज़ सुनाई दी। फिर वो मुझसे कहने लगी, अबे राजू के बच्चे तो साली के साथ ऐश चल रही है, तू तो सचमुच बड़ा ही समझदार हो गया है और इतना समझदार कि हम जैसी समझदार औरतों को भी चूतिया बनाने लगा है, बड़ा ज़ोर आ गया बे तेरे लंड में, चल अब अपने इस लंड की बरसात से मेरी चूत की गरमी भी शांत कर दे।

अब में थोड़ा सा शांत हुआ और मैंने पीछे मुड़कर देखा और कहा कि भाभी आप यहां, में तो बस गीता के साथ यहाँ से गुजर रहा था, प्लीज कहीं भैया भाभी ने ऐसी बातें सुन ली तो में तो कहीं का नहीं रहूँगा। फिर भाभी बिल्कुल बेशरम होकर बोली कि अबे साले बस इतने में ही फट गयी, यह तो मर्द और औरत का काम ही है, क्या तेरा भैया तेरी भाभी को नहीं चोदता? और अगर उसके भाई ने उसकी बहन की चुदाई कर दी तो कौन सी बड़ी बात है? फिर भाभी मुझसे बोली कि बेटा मुझे सब पता है कि तुम दोनों क्या-क्या कर रहे थे? मैंने तुम्हारी सारी फिल्म अकेले देख ली है, तू चिंता मतकर और अब इस पुरानी चूत को अपने जवान लंड से घायल कर दे, नहीं तो सोच ले इसमे तेरा ही फायदा है, मेरा क्या है? मुझे खुजली मिटाने के लिए तेरे भैया का पुराना लंड तो है ही, लेकिन मुझे तेरा भोलापन और तेरा नया लंड पसंद है। अब जल्दी से उसको तैयार कर और इतना कहकर भाभी ने मेरे लंड को अपनी मुठ्ठी में पकड़ लिया। दोस्तों उस समय मेरा लंड एकदम लटका हुआ था और उनके ऐसा करने से में तो कुछ समझ ही नहीं सका। फिर भाभी बोली कि अरे यह तो बहुत छोटा हो गया है, चलो में अभी इसको तैयार करती हूँ और फिर उन्होंने लंड को धीरे से पकड़ा और उसके टोपे पर अपनी जीभ से सहलाने लगी।

अब मुझमे बड़ी सरसराहट सी होने लगी थी, क्योंकि भाभी बीच-बीच में मेरे लंड के टोपे को अपने होंठो से भी दबा रही थी। फिर वो सब करने की वजह से मेरे लंड का आकार बढ़ने लगा था, तभी भाभी ने भी मेरे लंड को अपने मुँह के अंदर लेना शुरू कर दिया। अब मुझे यह सब बड़ा अजीब लग रहा था, मैंने ऐसा केवल हमेशा सेक्सी फिल्म में ही देखा था और में यह सब सोच भी नहीं सकता था कि किसी दिन मेरे साथ भी ऐसा ही होगा। दोस्तों में तो सेक्स का मतलब बस चुदाई तक ही समझता था और जब ऐसा द्रश्य मैंने पहली बार एक सेक्सी फिल्म में देखा था तब मुझे देखकर उल्टी सी आने लगी थी, लेकिन आज जब मेरे साथ यह सब हो रहा था तो मुझे बड़ा मज़ा आ रहा था, यहाँ तक कि मुझे इसमे अब गीता की चुदाई से ज़्यादा आनंद आ रहा था, क्योंकि इसमें मुझे कोई ताकत नहीं लगानी पड़ रही थी। फिर भाभी जैसे-जैसे मेरे लंड का आकार बढ़ाता गया वैसे-वैसे वो ज़्यादा मस्त होने लगी और फिर जब मेरा लंड पूरा खड़ा हो गया, तब वो मेरे लंड को जूस वाली टॉफी की तरह चूसने लगी।

दोस्तों जब वो मेरे लंड को अपने मुँह में लेकर आगे पीछे करती, तब मुझे तो उसमे अब तक की चुदाई से ज़्यादा मज़ा आने लगा था। अब में जोश में कभी-कभी भाभी के मुँह को उसकी चूत समझकर चुदाई वाले आसन में अपना लंड उसके मुँह में डाल रहा था। अब भाभी मेरे लंड को पूरा खाने वाले आसन में मुँह में लिए हुई थी और कभी अपने मुँह से बाहर निकाल देती और फिर से मेरा पूरा लंड अपने मुँह में ले लेती। अब वो मस्ती में कभी-कभी मेरे लंड को अपने दाँतों से भी दबा देती, तो ऐसे में मेरी तो चीख ही निकल गयी, भाभी घबराकर थोड़ी ढीली हो गयी। फिर भाभी ने मेरे लंड को जड़ से पकड़कर कभी चाटना, तो कभी अपने मुँह के अंदर लेकर चूसना शुरू कर दिया। फिर थोड़ी देर में भाभी ने मेरे लंड को अपने मुँह में लेकर उसको गन्ने की तरह चूसना शुरू कर दिया, कभी उसको अंदर तक ले जाकर चूसने लगी, कभी वो अपने मुँह से मेरा लंड बाहर निकालकर मेरे लंड के टोपे पर अपने होंठो को रखकर उसको चाटने लगी। अब ऐसे में तो मुझे ऐसा लगा जैसे मेरी साँसे ही बंद हो जाएँगी, लेकिन अगले पल में भाभी मेरे लंड को पूरा अपने मुँह में लेकर चाटने और चूसने लगती।

दोस्तों मेरे लिए सेक्स का यह सबसे अलग अनुभव था, लेकिन वो कुछ भी था बड़ा ही मज़ेदार अनुभव में से एक था। अब धीरे धीरे भाभी की मस्ती बढ़ती ही जा रही थी और वो मेरे लंड को अब आईसक्रीम की तरह चूस रही थी। अब मुझे भी थोड़े बहुत दर्द के बावजूद बड़ा मज़ा आ रहा था, दोस्तों सेक्स में पता नहीं क्यों दर्द में ही मज़ा आता है? जैसे किसी कड़वी दवाई से ही आराम मिलता है। फिर भाभी की मस्ती तो बढ़ रही थी, लेकिन अब मुझे मेरे लंड के अंदर से पानी बाहर का अहसास सा होने लगा, तब मैंने चिल्लाकर कहा कि भाभी अब नहीं रुकता, जरा रूको। अब भाभी तो बड़ी पुरानी खिलाड़ी थी, उन्होंने सुनकर समझकर तुरंत मेरे लंड से अपना मुँह हटाया और मेरे लंड के टोपे को अपने हाथ से दबाकर बोली कि लल्ला चिंता मतकर, में तो तुम्हारी यह आईसक्रीम खाने के लिए पूरी तरह से तैयार हूँ और फिर इसके बाद उसने मेरे लंड को पूरा अपने मुँह के अंदर ले लिया। फिर इसके तुरंत बाद मेरे लंड से सारी बरसात भाभी के मुँह के रास्ते उनके पेट में चली गयी, जब मेरा पूरा लंड झड़ गया, तब भाभी दोबारा से मेरे लंड को अच्छी तरह से चूसने लगी। अब भाभी ने मेरे लंड को सावधानी से चाटना शुरू कर दिया था और वो मेरे लंड के माल की एक-एक बूंद भी चाट लेना चाहती थी।

अब मेरा लंड दोबारा से सिकुड़कर छोटा हो गया था, लेकिन उतना नहीं जितना गीता की चुदाई के बाद हुआ था। फिर जब भाभी को लगा कि अब वो मेरे लंड का सारा माल चाट चुकी है, उसने अपना मुँह मेरे लंड से हटा लिया। अब भाभी को शायद बड़ा मज़ा आया, वो बड़ी खुश थी जैसे उसको अपनी मनचाही चीज बहुत दिनों के बाद मिली हो। फिर भाभी बोली कि लल्ला यह मेरा भी पहला अनुभव है, राजू तुने ऐसे करने पर बड़ा मज़ा दिया, मैंने तो एक बार टी.वी में तेरे भैया के साथ देखा था। फिर तेरे भैया मुझे छेड़ते हुए बोले थे कि उनका चूसेगी और मैंने साफ मना कर दिया था। फिर तेरे भैया भी बोले थे कि जो चीज चूत में डालने की है, उसको यह बहनचोद अपने मुँह में कैसे ले लेती है? लेकिन आज तेरा लंड देखते ही में मचल रही थी, मैंने सोचा कि एक बार ऐसा करके देखूं, लेकिन राजू सच में बड़ा मज़ा आया। फिर में उनको बोला कि हाँ भाभी मुझे भी बड़ा अच्छा लगा, लेकिन अब बहुत देर हो गयी है अब हमे चलना चाहिए। अब भाभी बोली कि वाह लल्ला ऐसे ना जान दूँगी तुमको, तुमको नहीं पता मेरी चूत कितने दिनों से प्यासी है? अब तो मेरे मुँह ने भी तुम्हारे लंड का स्वाद ले लिया है।

अब में बिना चुदवाए तुमको नहीं जाने दूँगी और इस समय यहाँ खेत पर कोई नहीं आने वाला है, तुम्हारे भैया-भाभी भी नहीं आएँगे और गीता को तुमने ऐसा ठोका है कि वो तो अब अपने कूल्हों को दबा रही होगी, या फिर मस्ती में अपनी चूत में उंगली कर रही होगी। अब लल्ला में तेरा ज़्यादा समय में नहीं लेने वाली, क्योंकि मुझे भी घर पर काम है, लेकिन आज तो तुमको मुझे पूरा चोदना होगा और अब मेरी चूत में भी एक बार अपने लंड की क्रीम को भर दो, तभी मेरी प्यासी चूत की प्यास बुझेगी, सोचो कब तक मेरा मोमबत्ती और उंगली से काम चलेगा? वैसे भी अब तो तेरे लंड को कुँवारी गीता की चूत का स्वाद लग गया है, तो पता नहीं मेरी बूढी चूत तुझे पसंद आए या नहीं। अब मैंने उनको कहा कि हाँ ठीक है भाभी आप ऐसा ना कहें, गीता और आप में कोई बराबरी नहीं वो तो अभी मेरी तरह नहीं है और तुम तो एक अनुभवी खिलाड़ी हो, वैसे भी आपने सुना होगा बीड़ी का मज़ा ठुड्डी में और चुदाई का मज़ा बूढी में है। अब भाभी कहने लगी वाह बेटा तुम भी अब नये नहीं रहे हो, तुम हम जैसे उस्तादों की भी ऐसी तैसी करने लगे हो, लेकिन राजू यहाँ पर काम थोड़ा ध्यान से करना, हमारे पास समय कम है।

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अब बस सीधे चोदने के लिए तैयार हो जाओ वरना कोई भी कभी आ सकता है और इसलिए कपड़े जैसे है वैसे ही रहने दो, में पहले तुम्हारे लंड को जरा इस लड़ाई के लिए तैयार कर दूँ, जिसकी वजह से यह सीधे चुदाई के मैदान में उतर सके। फिर मैंने भाभी की चुदाई के मज़े गन्ने के खेत में लिए और भाभी ने भी मेरे लंड के मजे लिए ।।

धन्यवाद …

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