छोटे भाई की बीवी निशा


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प्रेषक : शिवम …

हैल्लो दोस्तों, में शिवम आप सभी कामुकता डॉट कॉम के पाठकों को अपने जीवन का एक सच बताने आप सभी के सामने प्रस्तुत हुआ हूँ और मुझे उम्मीद है कि यह सभी पढ़ने वालों को जरुर पसंद आएगी। दोस्तों निशा मेरे छोटे भाई रूपम की पत्नी है, निशा बहुत सुंदर महिला है और देखकर मुझे लगता है कि उसका बदन भगवान ने बड़ी तसल्ली से ध्यान से तराश कर बनाया है। दोस्तों में शिवम उसका जेठ हूँ, मेरी शादी को पूरे दस साल हो चुके है, निशा शुरू से ही मुझे बड़ी अच्छी लगती थी और वो मुझसे बहुत खुली हुई थी। दोस्तों रूपम अमेरिका की एक बहुत बड़ी प्राइवेट कंपनी में नौकरी करता है। दोस्तों में आप सभी को बताना तो भूल ही गया कि निशा का मयका नागपुर में है और हम सभी जालंधर से है और यह घटना आज से करीब पांच साल पहले की बात है, हुआ यह कि शादी के एक साल बाद ही निशा गर्भवती हो गयी। अब अपनी डिलीवरी के लिए वो अपने मयके गई हुई थी, वहां पर सात महीने में ही उसकी डिलीवरी हो गयी और उसका वो बच्चा शुरू से ही बड़ा कमजोर था। फिर दो सप्ताह के बाद ही उस बच्चे की मौत हो गयी, रूपम तुरंत छुट्टी लेकर नागपुर चला गया और फिर कुछ दिन वहाँ रहकर वो वापस आ गया, वो वापस अकेला ही आया था। अब उन दोनों में यह तय हुआ था कि निशा की हालत थोड़ी ठीक होने के बाद वापस आ जाएगी।

फिर एक महीने के बाद जब निशा को वापस लाने की बात आई, तब रूपम को छुट्टी नहीं मिली और फिर रूपम ने मुझसे निशा को लेने जाने के लिए कहा। अब में निशा को लेने ट्रेन से निकल गया, वैसे मैंने निशा को कभी गलत नजरों से नहीं देखा था, लेकिन उस सफर में हम दोनों में कुछ ऐसा हो गया कि मेरे सामने हमेशा घूँघट में घूमने वाली निशा अब बिल्कुल बेपर्दा हो गयी थी। दोस्तों हमारी टिकट Ist क्लास में बुक थी, अब चाट सीट की बर्थ में दो सीट पर कोई नहीं आया था, जब ऑफ-सीज़न था और इसलिए वो ट्रेन रास्ते में भी नहीं भरी थी। अब हम दोनों ट्रेन में चढ़ गये, जब गर्मियों के दिन थे। फिर जब तक ट्रेन स्टेशन से नहीं निकली तब तक वो मेरे सामने घूँघट में खड़ी थी, लेकिन दूसरों की आँखों से ओझल होते ही उसने अपना घूँघट उलट दिया और कहा कि अब आप चाहे कुछ भी समझें, में अकेले में आपसे घूँघट नहीं करूँगी, मुझे आप अच्छे लगते हो और आपके सामने तो में ऐसी ही रहूंगी। फिर में उसकी वो बात सुनकर ज़ोर से हंस पड़ा, क्योंकि में भी शुरू से घूँघट के समर्थन में कभी नहीं रहा था, मैंने पहली बार उसके बेपर्दा चेहरे को देखा था।

अब में उसके सुंदर चेहरे को देखता ही रह गया था, तभी अचानक से मेरे मुँह से निकल गया। अब घूँघट के पीछे इतना लाजवाब हुस्न छुपा है उसका पता कैसे लगता? फिर उसने मेरी तरफ देखा और फिर वो शरम से लाल हो गयी, उसने हरे रंग की एक शिफान की साड़ी पहनी हुई थी और उसने ब्लाउज भी मैचिंग का पहना था। अब तेज गरमी की वजह से बात करते हुए उसकी साड़ी का आँचल उसके ब्लाउज के ऊपर से सरक गया था। फिर उस समय मैंने जाना कि उसने ब्लाउज के अंदर ब्रा नहीं पहनी है, उसके स्तन दूध से भरे हुए थे और इसलिए वो बहुत बड़े-बड़े हो गये थे और उसके ब्लाउज का ऊपर का एक हुक टूटा हुआ था, इसलिए उसकी आधे बूब्स मुझे साफ-साफ दिख रहे थे। अब उसके पतले ब्लाउज से उसकी ब्रा नहीं होने की वजह से उसकी निप्पल और उसके चारों तरफ का काला घेरा मुझे साफ-साफ नजर आ रहा था। अब मेरी नजर जैसे उसकी छाती से चिपक गयी थी में उसके बूब्स को लगातार घूरकर देखे जा रहा था। फिर उसने बात करते-करते मेरी तरफ देखा और मेरी नजरों का अपनी नजरों से पीछा किया और मुझे अपने बाहर झलकते हुए बूब्स को देखता पाकर शरमा गयी और जल्दी से अपनी छाती को अपने आँचल से ढक लिया।

अब हम दोनों बातें करते हुए जा रहे थे, कुछ देर के बाद वो उठकर बाथरूम में चली गयी और कुछ देर के बाद वापस लौटकर आ गई बत मैंने देखा कि उसका चेहरा थोड़ा गंभीर था। अब हम वापस में बातें करने लगे थे, कुछ देर के बाद वो वापस से उठी और कुछ देर के बाद वापस से लौटकर आ गयी। फिर मैंने देखा कि वो बात करते-करते कसमसा रही है और अपने हाथों से अपने बूब्स को हल्के से दबा रही है। तभी मैंने उसको असमंजस में देखा और उसको पूछा क्या तुम्हे कोई परेशानी है? तब वो बोली कि नहीं-नहीं। फिर कुछ देर के बाद वो वापस से उठी, मैंने कहा कि तुम मुझे बताओ ना क्या परेशानी है? तब वो थोड़ा सा झिझकते हुए खड़ी रही और फिर बिना कुछ बोले बाहर चली गयी और फिर कुछ देर के बाद वापस आकर मेरे सामने बैठ गयी और बोली कि मेरी छाती में दर्द हो रहा है और उसने अपना चेहरा ऊपर उठाया। अब मैंने देखा कि उसकी आँखों से आँसू से निकल रहे थे, तभी मैंने पूछा कि क्यों? क्या हुआ? दोस्तों मर्द वैसे भी औरतों के मामले में थोड़े नासमझ होते है, तो मेरी भी समझ में कुछ नहीं आया था कि अचानक से उसको क्या हो गया है? तभी वो बोली कि जी वो क्या है? वो मेरे बूब्स भारी हो रहे है और अब वो समझ नहीं पा रही थी कि वो मुझे कैसे अपनी परेशानी को समझाए? आख़िर में उसका जेठ जो था।

तभी उसने अपनी नजरें नीचे करते हुए कहा कि मेरे बूब्स में दूध भर गया है, लेकिन निकल नहीं पा रहा है। फिर मैंने उसको पूछा कि बाथरूम जाना है क्या? तब वो बोली कि गयी थी, लेकिन वॉश बेसिन बहुत गंदा है इसलिए में वापस चली आई और बाहर के वॉश बेसिन में मुझे शरम आती है, कोई देख ले तो क्या सोचेगा? अब में सोचने लगा था कि फिर क्या किया जाए? और कुछ ऐसा करें जिससे तुम यही अपना यह दूध खाली कर सको, लेकिन किसमें खाली करोगी? नीचे फर्श पर गिरा नहीं सकती और यहाँ कोई बर्तन भी नहीं है जिसमें तुम अपना दूध निकाल सको। तभी उसने झिझकते हुए फिर से मेरी तरफ एक नजर डालकर अपनी नजरें झुका ली। फिर वो अपने पैर के नाखूनो को कुरेदती हुई बोली कि अगर आप गलत नहीं समझो तो में कुछ कहूँ? मैंने कहा कि बोलो। अब वो बोली कि आप इन्हें खाली कर दीजिए ना। तभी में हैरान होकर बोला कि में इन्हें कैसे खाली कर सकता हूँ? और फिर मैंने उसके बूब्स को निगाह भरकर देखा, वो बोली कि आप अगर इस दूध को पीलो और फिर उसने आगे कुछ नहीं कहा। अब में उसकी बातों से एकदम से चकित हो गया था, तभी मैंने उसको बोला कि लेकिन यह कैसे हो सकता है? तुम मेरे छोटे भाई की बीवी हो, में तुम्हारे बूब्स पर अपना मुँह कैसे लगा सकता हूँ?

तभी वो बोली कि जी आप मेरे दर्द को कम कर रहे है, इसमे गलत क्या है? क्या मेरा आप पर कोई हक नहीं है? और फिर उसने मुझसे कहा कि मेरा दर्द से बुरा हाल है और आप सही गलत के बारे में सोच रहे हो प्लीज। अब में बिल्कुल चुपचाप बैठा रहा, मुझे कुछ समझ में नहीं आ रहा था कि में उसको क्या कहूँ? दोस्तों अपने छोटे भाई की बीवी के निप्पल को अपने मुँह में लेकर उसका दूध पीना मेरे लिए एक बहुत बड़ी बात थी। अब उसने उसी समय अपने ब्लाउज के सारे बटन खोल दिए और उसने दोबारा से कहा कि प्लीज, लेकिन में अपनी जगह से नहीं हिला। तभी वो बोली कि जाइए आपको कुछ भी करने की जरूरत नहीं है, आप अपने रूढ़िवादी विचारों से घिरे बैठे रहिए, चाहे में दर्द से मर ही जाऊं, कहकर उसने वापस से अपने स्तनों को अपने आँचल से ढक लिया और अपने हाथ आँचल के अंदर करके अपने ब्लाउज के बटन बंद करने की कोशिश करने लगी, लेकिन दर्द से उसके मुँह से चीख निकल गयी आहह। तभी मैंने उसके बूब्स को थामकर उसके ब्लाउज से बाहर निकाल दिए और फिर एक झटके में उसके आँचल को उसकी छाती से हटा दिया, तभी उसने मेरी तरफ देखा। फिर मैंने अपनी जगह से उठकर कैबिन के दरवाजे को लॉक किया और में उसके पास में आ गया।

अब उसने अपना ब्लाउज उतार दिया था, उसके नंगे बूब्स जो कि मेरे भाई की अपनी अमानत थी, अब मेरे सामने मेरे होंठो को छुने के लिए बेताब थे। फिर में अपनी एक उंगली को उसके एक बूब्स के ऊपर से फैरते हुए उसके निप्पल के ऊपर लाया। अब मेरी उंगली का स्पर्श पाकर उसके निप्पल अंगूर के आकार के हो चुके थे। अब में उसकी गोद में अपना सर रखकर लेट गया, उसके बड़े-बड़े दूध से भरे हुए बूब्स मेरे चेहरे के ऊपर लटक रहे थे। फिर उसने मेरे बालों को सहलाते हुए अपने बूब्स को नीचे झुकाया, अब उसका एक निप्पल मेरे होंठों को छु रहा था, मैंने अपनी जीभ बाहर निकालकर उसके निप्पल को छुआ। फिर उसने ऊफफफ्फ जेठ जी, अब आप मुझे इतना मत सताओ, प्लीज इनका रस चूस लो कहकर उसने अपनी छाती को मेरे चेहरे पर टीका दिया। फिर मैंने अपने होंठ खोलकर सिर्फ़ उसके निप्पल को अपने होंठो में लेकर बहुत जमकर चूसा, मीठे दूध की एक तेज धार से मेरा मुँह पूरा भर गया। फिर मैंने उसकी आँखों में देखा, तो उसकी आँखों में शरम की परछाई तैर रही थी। फिर मैंने अपने मुँह में भरे दूध को एक घूँट में अपने गले के नीचे उतार दिया आहहहह। फिर उसने अपने सर को एक झटका दिया, मैंने फिर से उसके निप्पल को ज़ोर से चूसा और फिर से उसके दूध का एक घूँट दूध पीया। अब में उसके दूसरे निप्पल को अपनी उंगलियों से कुरेदने लगा था।

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अब उसके मुँह से सिसकियाँ निकल रही थी ऊह्ह्ह हाँ आह्ह्ह ज़ोर से चूसो और ज़ोर से प्लीज मेरे निप्पल को दाँतों से दबाओ बहुत खुजली हो रही है। अब वो मेरे बालों में अपनी उंगलियाँ फैर रही थी। फिर मैंने अपने दाँतों से उसके निप्पल को ज़ोर से दबाया जिसकी वजह से वो ऊऊईईईईइ की आवाज निकालकर उठ गयी। अब वो अपने बूब्स को मेरे चेहरे पर दबा रही थी, अब उसके हाथ मेरे बालों से होते हुए मेरी गर्दन से आगे बढ़कर मेरी शर्ट के अंदर घुस गये थे। अब वो मेरी बालों से भरी छाती पर अपना एक हाथ फैरने लगी थी और फिर उसने मेरे निप्पल को अपनी उंगलियों से कुरेदा, मैंने उसको पूछा तुम यह क्या कर रही हो? तब उसने कहा कि वही जो तुम मेरे साथ कर रहे हो। अब मैंने उसको छेड़ा और उसको कहा कि में तुम्हारे साथ क्या कर रहा हूँ? उसने कहा कि अपने छोटे भाई की बीवी के बूब्स से दूध पी रहे हो। अब मैंने कहा कि बहुत मीठा है, उसने धत कहकर अपना हाथ मेरी शर्ट से बाहर निकाल लिया और मेरे चेहरे पर झुक गयी। अब इससे उसका निप्पल मेरे मुँह से बाहर निकल गया और फिर उसने झुककर मेरे होंठो पर अपने होंठ रख दिए और मेरे होंठो के कोने पर लगे दूध को अपनी जीभ से साफ किया। फिर उसने अपने हाथों से वापस से अपने निप्पल को मेरे होंठो पर रख दिया।

अब मैंने अपने मुँह को पूरा खोलकर उसके निप्पल के साथ उसके बूब्स का एक पूरा भाग अपने मुँह में भर लिया और वापस से उसके दूध को चूसने लगा था। फिर कुछ देर के बाद उसके स्तन से दूध आना कम हो गया, तब उसने अपनी निप्पल को दबा दबाकर जितना हो सकता था अपना दूध निचोड़कर मेरे मुँह में डाल दिया और बोली कि अब दूसरा चूसो। अब मैंने उसके एक निप्पल को अपने मुँह से बाहर निकाल दिया और फिर अपने मुहं को उसके दूसरे निप्पल के नीचे सेट किया और उसके दूसरे बूब्स को पीने लगा। अब उसके हाथ मेरे पूरे बदन पर चल रहे थे, जिसकी वजह से अब हम दोनों ही बहुत उत्तेजित हो चुके थे। फिर उसने अपना एक हाथ आगे बढ़ाकर मेरी पेंट की चैन पर रख दिया और मेरे लंड पर कुछ देर तक अपना एक हाथ ऐसे ही रखे रखा और फिर उसको अपने हाथों से दबाकर लंड के आकार का जायजा लिया और फिर उसने शरमाते हुए कहा कि बहुत तन रहा है। अब मैंने उसको कहा कि तुम्हारी जैसी सुंदर परी पास में इस अंदाज में बैठी हो तो एक बार तो विश्वामित्र की भी नियत बिगड़ जाए। तभी उसने मेरी पेंट की चैन को खोलते हुए पूछा कि एम्म्म अच्छा और आप? आपके क्या हाल है? फिर मैंने कहा कि तुम इतने कातिल मुड में हो तो मेरी हालत ठीक कैसे रह सकती है?

तभी उसने अपना एक हाथ मेरी पेंट में अंदर करके मेरी अंडरवियर को हटाया और मेरे तने हुए लंड को बाहर निकालते हुए कहा कि देखूं तो सही कैसा लगता है दिखने में? तो वो मेरे मोटे लंड को देखकर बहुत खुश हुई और बोली कि अरे बाप रे कितना बड़ा लंड है आपका? दीदी कैसे लेती है इसे? फिर मैंने उसको कहा कि आ जाओ तुम्हे भी दिखा देता हूँ कि इसे कैसे लिया जाता है? तो उसने शरमाकर कहा कि धत मुझे कुछ नहीं देखना आप बड़े वो हो, लेकिन उसने अपना हाथ हटाने की कोई जल्दी नहीं की थी। फिर मैंने उसके सर को पकड़कर अपने लंड पर झुकाते हुए उसको कहा कि इस पर एक बार चुम्मा तो करो। अब उसने झिझकते हुए मेरे लंड पर अपने होंठ टीका दिए, अब तक उसका दूसरा स्तन भी खाली हो गया था, उसके झुकने की वजह से मेरे मुँह से उसका निप्पल बाहर आ गया। फिर मैंने उसके सर को हल्के से दबाया, उसने अपने होंठो को खोलकर मेरे लंड को जगह दे दी, जिसकी वजह से अब मेरा लंड उसके मुँह में चला गया। फिर उसने दो-तीन बार मेरे लंड को अंदर बाहर किया और फिर उसको अपने मुँह से बाहर निकाल लिया और बोली कि ऐसे नहीं, ऐसे मज़ा नहीं आ रहा है।

अब मैंने उसको कहा कि हाँ अब हमे अपने बीच की इन दीवारों को हटा देना चाहिए, मैंने अपने कपड़ों की तरफ इशारा किया और फिर मैंने उठकर अपने कपड़े उतार दिए। फिर उसको अपनी बाहों में पकड़कर उठाया और उसकी साड़ी और पेटिकोट को उसके बदन से अलग कर दिया, जिसकी वजह से अब हम दोनों बिल्कुल नंगे थे, तभी किसी ने दरवाजे को खटखटा दिया। अब मैंने सोचा कि कौन हो सकता है? फिर हम दोनों ने हड़बड़ी में अपने-अपने कपड़े एक थैली में भर लिए और निशा बर्थ पर सो गयी और मैंने उसके नंगे शरीर पर एक चादर को डाल दिया और इस बीच दो बार दरवाजा बजा। फिर मैंने दरवाजा खोला, तो देखा कि बाहर टी.टी खड़ा हुआ था, उसने अंदर आकर हमारा टिकट चैक किया और कहा कि यह दोनो सीटें खाली रहेंगी, इसलिए आप चाहें तो अंदर से लॉक करके सो सकते है और फिर वो बाहर चला गया। फिर मैंने दरवाजा बंद किया और निशा के बदन के ऊपर से चादर को हटा दिया। अब निशा शरम से अपनी जांघो के जोड़ को और अपने बूब्स को ढकने की कोशिश कर रही थी, मैंने उसके दोनों हाथों को पकड़कर हटा दिया, उसने अपने शरीर को सिकोड़ लिया और कहा कि प्लीज मुझे शरम आ रही है। फिर मैंने उसके ऊपर चढ़कर उसकी चूत पर अपना मुँह रखा, मेरा लंड उसके मुँह के ऊपर था और अब हम दोनों 69 के आसन में थे।

फिर उसने अपने मुँह और पैरों को खोला, तो मेरा लंड एक साथ उसके मुँह में अंदर चला गया और उसकी चूत पर मेरे होंठ सट गये। तभी उसके मुँह से जोर की एक सिसकी निकली आह्ह्ह शिवम जी, आप यह क्या कर रहे हो? मेरा बदन जलने लगा है, पंकज ने कभी इस तरह से मेरी चूत पर अपनी जीभ नहीं डाली है। अब उसके पैर छटपटा रहे थे, उसने अपने दोनों पैरों को हवा में उठा दिया था और मेरे सर को उत्तेजना में अपनी चूत पर दबाने लगी थी। अब में उसके मुँह में अपना लंड अंदर बाहर करने लगा था, मेरे होंठ उसकी चूत की फांकों को अलग कर रहे थे और मेरी जीभ उसकी चूत के अंदर घूम रही थी। अब वो पूरी तन्मयता से अपने मुँह में मेरे लंड को जितना हो सकता था उतना अंदर ले रही थी। अब बहुत देर तक इसी तरह से 69 आसन में एक दूसरे के साथ मुख मैथुन करने के बाद हम दोनों आखिर में एक साथ खल्लास हो गये थे। अब उसका मुँह मेरे रस से पूरा भर गया था, उसके मुँह से छुकर मेरा रस एक पतली धार के रूप में उसके गुलाबी गालों से होता हुआ उसके बालों में जाकर खो रहा था। फिर में उसके शरीर के ऊपर से उठा, तब वो भी उठकर बैठ गयी।

अब हम दोनों एकदम नंगे थे और हम दोनों का शरीर पसीने से लथपथ था, दोनों एक दूसरे से लिपट गये और हमारे होंठ एक दूसरे से ऐसे चिपक गये थे, मानो अब कभी भी ना अलग होने की कसम खाली हो। फिर हम दोनों कुछ मिनट तक ऐसे ही एक दूसरे के होंठो को चूमते रहे, हमारे होंठ एक दूसरे के बदन पर घूमने लगे थे। तभी मैंने निशा से कहा कि अब आ जाओ, वो बोली कि जेठ जी थोड़ा संभलकर, अभी अंदर नाज़ुक है और आपका बहुत मोटा है, कहीं कोई जख्म ना हो जाए। फिर मैंने उसको कहा कि हाँ ठीक है, चलो बर्थ पर अपने हाथों और पैरों के बल झुक जाओ इससे ज़्यादा अंदर तक जाता है और दर्द भी कम होता है। तभी निशा तुरंत उठकर बर्थ पर अपने हाथों और पैरो के बल हो गयी, मैंने पीछे से उसकी चूत पर अपना लंड सटाकर एक हल्का सा धक्का मार दिया। अब उसकी चूत गीली तो पहले से ही हो चुकी थी, मेरे एक धक्के में ही मेरे लंड के आगे का टोपा अंदर घुस गया। अब एक बच्चा होने के बाद भी उसकी चूत बहुत टाईट थी, वो दर्द से आआहह कर उठी थी। फिर में कुछ देर के लिए उसी पोजिशन में शांत खड़ा रहा, कुछ देर के बाद जब उसका दर्द कम हुआ तब निशा ने ही अपनी गांड को पीछे धकेला ताकि मेरा लंड पूरा अंदर चला जाए।

तभी उसने कहा कि डालो ना, रुक क्यों गये? फिर मैंने कहा कि तुम्हें दर्द हो रहा है इसलिए। अब उसने कहा कि इस दर्द का मज़ा तो कुछ और ही होता है, आख़िर इतना बड़ा है तो दर्द तो करेगा ही। अब वो भी मेरे धक्कों का साथ देते हुए अपनी कमर को आगे पीछे करने लगी थी, में पीछे से शुरू-शुरू में संभल संभलकर धक्के मार रहा था, लेकिन कुछ देर के बाद में ज़ोर-ज़ोर से धक्के मारने लगा था। अब मेरे हर धक्के से उसके दूध से भरे स्तन उछल-उछल जाते, मैंने उसकी पीठ पर झुकते हुए उसके दोनों स्तनों को अपने दोनों हाथों से थाम लिया, लेकिन मसला नहीं, नहीं तो उसके दूध की धार से पूरा बर्थ भीग जाता। फिर बहुत देर तक उसको वैसे ही लगातार धक्के मारने के बाद उसने अपने सर को ज़ोर-ज़ोर से झटकना चालू किया आहह, शिवम तुम इतने दिनों से कहाँ थे? ऊऊह्ह्ह्ह आईईई में मर जाउंगी, मुझे मार डालो ऊओफ्फ्फ्फ़ मुझे मसल डालो। अब उसकी चूत से रस की पिचकारी निकलने लगी थी, कुछ देर तक धक्के मारने के बाद मैंने उसको सीधा लेटा दिया और अब में ऊपर से धक्के मारने लगा था। तभी उसने कहा कि अह्ह्ह अब मेरा गला सूख रहा है, उस समय उसका मुँह खुला हुआ था और उसकी जीभ लगातार अंदर बाहर हो रही थी।

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फिर मैंने अपना एक हाथ आगे बढ़ाकर पानी की बोतल उठाई और उसको दो घूँट पानी पिलाया, उसने पानी पीकर मेरे होंठो पर एक चुम्मा किया और बोली कि चोदो शिवम और जोर से चोदो, जी भरकर चोदो मुझे आज तुम मेरी इस आग को शांत कर दो कर दो इसको आज तुम पूरी तरह से ठंडा इसने मुझे बड़ा परेशान किया है। अब में ऊपर से जोर-जोर से धक्के लगाने लगा, बहुत देर तक धक्के मारने के बाद मैंने रस में डूबे अपने लंड को उसकी चूत से बाहर निकाला और सामने वाली सीट पर अपनी पीठ के बल लेट गया और उसको बोला कि आजा मेरे ऊपर। फिर निशा उठकर मेरी बर्थ पर आ गयी और उसने अपने घुटने मेरी कमर के दोनों तरफ रखकर अपनी चूत को मेरे लंड पर सेट करके धीरे-धीरे मेरे लंड पर बैठ गयी। अब वो मेरे लंड की सवारी कर रही थी, मैंने उसके निप्पल को पकड़कर अपनी तरफ खींचा, वो मेरे ऊपर झुक गयी। फिर मैंने उसके निप्पल को सेट करके दबाया, तब उसके बूब्स से दूध की एक धार मेरे मुँह में जा गिरी। अब वो मुझे चोद रही थी और में उसका दूध निचोड़ रहा था और बहुत देर तक मुझे चोदने के बाद वो चीखकर मुझसे कहने लगी कि शिवम मेरा अब निकलने वाला है, तुम मेरा साथ दो, मुझे भी अपने रस से भीगो दो और फिर हम दोनों साथ-साथ झड़ गये।

फिर वो बहुत देर तक मेरे ऊपर लेटी हुई लंबी-लंबी साँसे लेती रही उसका पूरा शरीर पसीने से भीगा हुआ था और हम दोनों ही बड़े थके हुए थे। फिर जब वो कुछ देर बाद शांत हुई तब वो उठकर सामने वाली सीट पर लेट गयी। दोस्तों हम दोनों पूरे रास्ते नंगे ही एक दूसरे को प्यार करते रहे, लेकिन उसने दुबारा से मुझे उस दिन और चोदने नहीं दिया। अब उसकी बच्चेदानी में हल्का-हल्का दर्द हो रहा था, लेकिन उसने मुझे आश्वासन दिया कि आज तो में आपको दोबारा अपनी चुदाई करने का मौका नहीं दे सकती, लेकिन मुझे दुबारा जब कभी भी कोई अच्छा मौका मिलेगा, तब में आपको अपने अंदर निचोड़ लूँगी और हाँ अगली बार मेरे पेट में देखते है दोनो भाइयों में से किसका बच्चा आता है? फिर उस यात्रा के दौरान कई बार मैंने उसके दूध की बोतल पर जरूर अपना हाथ साफ किया और बड़े मज़े से उसके निप्पल को चूस चूसकर खाली किया मैंने उस पूरे सफर में उसके साथ बड़ा मज़ा किया। दोस्तों मुझे उम्मीद है कि सभी पढ़ने वालों को मेरा यह सच्चा चकित कर देने वाला सेक्स अनुभव जरुर पसंद आएगा और अब मुझे जाने की आज्ञा दे में दोबारा जरुर आप सभी के लिए अपना दूसरा अनुभव लेकर जरुर आऊंगा ।।

धन्यवाद …

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