आंटी की डर्टी चुदाई आखों से देखी


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प्रेषक : अली …

हैल्लो दोस्तों, मेरा नाम अली है और मेरी उम्र 24 साल के करीब है। दोस्तों यह कहानी जिसको आज में आप सभी कामुकता डॉट कॉम के चाहने वालों की सेवा में लेकर आया हूँ। यह मेरी आंटी की सच्ची बड़ी मस्त चुदाई की घटना है, जिसमे मैंने अपनी चुदक्कड़ आंटी को अपने अंकल और उसके एक बड़े पक्के दोस्त के साथ चुदाई के मज़े लेते हुए देखा और वो सब कैसे हुआ अब आप इस कहानी को उसके मज़े ले, जैसे मैंने उस रात को देखकर लिए थे और अभी इस कहानी को लिखते हुए भी सोचकर मेरा लंड खड़ा हो चुका है। दोस्तों मेरी आंटी का नाम नाज़िश है और वो हम सभी घरवालों के साथ ही रहती है और शुरू से ही में उनको देखा करता था, क्योंकि मेरी आंटी दिखने में बहुत सुंदर गोरी थी। दोस्तों मेरे पापा मम्मी नौकरी करते थे इसलिए पूरे दिन घर में मेरी आंटी अकेली रहती थी और मेरे अंकल जिनका नाम अयाज़ है वो और मेरी आंटी दोनों बहुत बार अच्छा मौका देखकर सेक्स किया करते थे और में वो सब चोरीछिपे देखता रहता था। दोस्तों शादी के इतने साल गुजर जाने के बाद भी उनकी अपनी कोई औलाद नहीं थी इसलिए वो मुझे ही अपना बेटा मानते थे। दोस्तों मेरे अंकल की उम्र 40 साल होगी और उनका लंड करीब आठ इंच का था और मेरी आंटी की उम्र करीब 35 साल की होगी, लेकिन इस बढ़ती उम्र ने भी शायद उनकी मस्त जवानी पर कम ही असर डाला था।

दोस्तों इसलिए मेरी आंटी को जो भी देखता वो उनके इस हुस्न को देखकर पागल होकर अपनी ललचाई नजरों से घूरकर देखता रह जाता। दोस्तों मेरी आंटी का वो गोरा गठीला जिस्म बड़े आकार के बूब्स उनके गुलाबी नशीले होंठ रस से भरे गाल मानो खुदा ने उन्हें खुद अपने हाथों से बनाया था। फिर वक़्त के साथ साथ और अंकल की उस बेरहम चुदाई ने इस हसीन जवानी को और भी निखार दिया था। अब आंटी भी अपनी इस मस्तानी जवानी की नुमाइश बड़े शौक़ से करने लगी थी और आंटी के सुंदर गोरे बदन पर उनका झिलमिल सा नन्हा सा गहरे गले का ब्लाउज उनके बड़े आकार के एकदम सुडोल बूब्स को अपने पीछे आधा ही छुपा पाते थे और फिर उनकी गोरी चिकनी पीठ पर तो वो सिर्फ़ उनके रंगीन ब्रा के बेल्ट तक ही खत्म हो जाता था। दोस्तों आंटी उनकी नंगी गोरी बाहों के नीचे के बालों को अक्सर अंकल के रेज़र से साफ करती थी और में कई बार देख चुका था और इस मदहोश जिस्म पर नाभि के नीचे इतना नीचे कि जहाँ से चूत के बालों का सिलसिला शुरू होता है वो द्रश्य उनकी मस्त जवानी को और भी मदहोश बना देता था। दोस्तों जहाँ तक मुझे याद है बचपन से ही इस मस्त नशीले शबाब को मस्ती के हर रूप को में देखता आया हूँ और में जब छोटा था तब आंटी मुझसे कोई भी परदा नहीं करती थी।

दोस्तों ठंड के दिनों में आंटी आँगन में ही नहाती थी, वो बिल्कुल नंगी और उनकी चूत पर एक छोटी सी पेंटी होती थी, जो उनकी बड़ी आकार की चूत के गोरे होंठो को ही छुपा सकती थी। फिर नहाते समय आंटी की गोरी चिकनी पीठ पर उनका हाथ पूरा नहीं पहुँचता तो अंकल जब भी घर पर होते तब वो आंटी की मखमल जैसे गोरे बदन पर साबुन लगाने को काम करते थे। फिर वो बड़ी ही मस्ती से धीरे-धीरे आंटी के गोरे नंगे बदन पर अंकल साबुन रगड़ते और वो उनके बूब्स को भी मसलते और कभी वो आंटी के भीगे बदन को भी अपनी बाहों में जकड़ लेते और फिर धीरे से अंकल का हाथ आंटी की पेंटी के अंदर सरक जाता। अब आंटी शरमाते हुए कहने लगती ऊफ्फ्फ यह सब क्या है? तुम दिनों दिन बड़े ही बेशरम हो रहे हो घर में एक बच्चा भी तो है। फिर अंकल आंटी के पेंटी के अंदर हाथ रगड़ते हुए कहते, अरे मेरी जान अभी वो छोटा है उसे क्या पता यह कौन सा खेल है? अब आंटी सिसकियाँ भरते हुए कहती उूउइईईईईई आह्ह्ह अब बस भी करो, तुम्हारी यह बेसब्री कब खत्म होगी। अब अंकल आंटी के नंगे बदन को दबोचते हुए पेंटी के अंदर अपना हाथ और भी तेज़ी से रगड़ने लगते और कहते तुम्हारे मक्खन जैसे नंगे भीगे बदन को देखकर मेरा मन और भी बेकरार हो जाता है।

फिर आंटी आअहह ससईईईईई प्लीज अब छोड़ भी दो नहीं तो में झड़ जाउंगी और वो कहने लगते ऊओह मेरी जान मुझे बड़ा मज़ा आ रहा है और उसी समय आंटी के मुहं से अहह अब में झड़ी बस यह इतना सा बाहर निकलता और आंटी अंकल की बाहों में सिमटकर एक पल के लिए एकदम शांत हो जाती। फिर अंकल आंटी के बदन पर साबुन लगाकर उनको नहला देते और जब कभी अंकल घर पर नहीं होते थे तब आंटी मुझसे कहती कि बेटा ज़रा तुम मेरी कमर पर साबुन लगा दो, वहां तक मेरा हाथ ही नहीं पहुँचता। एक दिन साबुन लगाते वक़्त मुझे ध्यान आया कि अंकल जब आंटी की पेंटी के अंदर हाथ डालते है, तब आंटी बहुत खुश हो जाती है। फिर मैंने मन ही मन में सोचा क्यों ना में भी आज आंटी की पेंटी के अंदर हाथ डालकर आंटी को साबुन लगा दूँ हो सकता है कि मेरे ऐसा करने से आंटी खुश हो जाएँगी? अब मैंने साबुन को लगाते हुए अपना एक हाथ आंटी की पेंटी के अंदर सरका दिया। अब उनके मुहं से वो शब्द निकल गए ओउउउइ ऊऊऊओ यह तुम क्या कर रहे हो? तुम तो अपने अंकल की नक़ल कर रहे हो, मेरे बेटे तुम अभी बहुत छोटे हो अपनी आंटी के साथ इस तरह से नहीं करते और आंटी मुस्कुराने लगी। फिर में जैसे जैसे बड़ा होता गया आंटी के जिस्म पर कपड़ा बढ़ता चला गया, पहले तो उनके बड़े आकार के बूब्स पर ब्रा चढ़ गई।

फिर उसके बाद आंटी नहाते समय अब अपने बदन पर पेटिकोट को अपने बूब्स तक बाँध लेती थी और अब जब में बड़ा हो गया हूँ आंटी अब बाथरूम में नाहने लगी है। अब समय के साथ मेरे ऊपर भी जवानी का रंग चढ़ने लगा था और अब मेरे लंड के आसपास झांटे निकल गयी थी और जवान गोरी सुंदर लड़कियों को देखकर मेरे लंड में एक सनसनी होने लगी थी और हर कभी अपनी आंटी के ब्लाउज से झांकते आधे बूब्स को देखकर मेरा लंड सनसना जाता है। अब में मन ही मन में सोचता कि काश मुझे भी अपनी आंटी की तरह ही कोई मस्त जवानी हाथ में आ जाए तो ज़िंदगी का असली मज़ा आ जाए। फिर धीरे-धीरे आंटी के इस गोरे हुस्न में मेरी दिलचस्पी बढ़ने लगी थी। एक दिन अंकल घर पर नहीं थे और उस समय आंटी बाथरूम में नहा रही थी। फिर मेरे मन में एक विचार में सोचने लगा कि क्यों ना आज आंटी को बाथरूम में नहाते हुए ही में देख लूँ। फिर में यह बात सोचकर धीरे से बाथरूम के दरवाज़े के पास चला गया और दरवाज़े के उस छोटे से छेद से में बाथरूम के अंदर झांककर देखने लगा। अब मैंने देखा कि आंटी ने अभी नहाना शुरू ही किया था वो अपने कपड़े उतार रही थी और फिर उसने अपना ब्लाउज को खोलना शुरू किया।

अब आंटी ब्रा और पेटिकोट में मेरे सामने थी उनके बड़े आकार के गोरे गोरे बूब्स मानो ब्रा से बाहर निकलने के लिए बेताब हो रहे थे और फिर आंटी ने अपनी ब्रा को भी उतार दिया। अब आंटी के दोनों बूब्स आज़ाद हो गए थे और फिर आंटी ने अपना पेटिकोट भी उतार दिया जिसकी वजह से अब वो बिल्कुल नंगी थी। दोस्तों पहली बार में किसी औरत को पूरा नंगा देख रहा था और मेरी वो नंगी सेक्सी आंटी बड़ी ग़ज़ब की हसीन लग रही थी और आंटी के बूब्स से मेरी नज़र नीचे सरकती हुई अब उनकी चूत पर ठहर गई। दोस्तों मैंने देखा कि आंटी की चूत बहुत बड़ी उभरी हुई और गोरी थी उस पर हल्की सी झांटे भी उगी हुई थी। अब वो द्रश्य देखकर मेरे पूरे बदन में सनसनी होने लगी थी और मेरा लंड तनकर खड़ा हो गया। फिर मैंने देखा कि आंटी अब अपने दोनों बूब्स को अपने हाथों से दबाने लगी और इस तरह दबाते हुए जोश की वजह से आंटी पर जवानी की मदहोशी छाने लगी थी और आंटी के मुँह से हल्की हल्की सिसकियाँ निकलने लगी, ऊऊह्ह्ह्ह आअहह ससिईई और फिर उनका एक हाथ नीचे सरकता हुआ अब चूत पर चला गया। अब आंटी पहले तो अपनी चूत के होंठो को हल्के हल्के सहला रही और फिर उसने अपनी चूत में अपनी दो उँगलियों को डाल दिया उूउइईई माँ मेरी चूत की आग बुझा दे आह्ह्ह तूने मेरी चूत को इतना गरम क्यों बनाया कि इसकी आग जितना बुझाओ यह बढ़ती ही जाती है?

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फिर आंटी अपनी उँगलियों को बड़ी तेज़ी से अंदर बाहर करने लगी थी। फिर आंटी के पूरे बदन में थोड़ी देर तक एक सिहरन होती रही और उसके बाद फिर वो शांत हो गई, शायद आंटी की चूत से पानी निकल गया था। अब मेरे भी लंड में सनसनी होने लगी थी और में भी अपने लंड को पकड़कर अपने हाथ को ऊपर नीचे करने लगा था और थोड़ी ही देर के बाद मेरे लंड ने पानी छोड़ दिया। दोस्तों आंटी ने भी अब नहाना शुरू कर दिया उसी समय में दरवाज़े से हट गया और थोड़ी देर के बाद आंटी नहाकर बाथरूम से बाहर निकल गई। इस बार मुझे उनका हुस्न और भी लाजवाब लगा। दोस्तों आंटी का यह रंडी का रूप देखकर मुझे अपनी आंटी में दिलचस्पी लेने के लिए बड़ा बेकरार कर दिया था। एक रात मेरी जब नींद खुली तब मैंने सुना कि मेरी आंटी अंकल के कमरे से आवाज़े आ रही थी और में एक ही झटके से जाग उठा और मन ही मन सोचने लगा कि शायद आज भी मुझे आंटी का कोई मस्ताना रूप देखने को मिल जाए। अब में उनके कमरे के दरवाज़े पर उस एक छेद पर अपनी एक आंख को लगाकर देखने लगा, कमरे में एक छोटा सा बल्ब जल रहा था, इसलिए मुझे सब कुछ साफ दिखाई दे रहा था।

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दोस्तों उस कमरे में अंकल और हमारे पड़ोस के जमाल अंकल भी थे और उस समय आंटी पलंग पर बैठ थी और आंटी का आँचल उनकी गोद में था, जिसकी वजह से उनके दोनों अधखुले बूब्स ब्लाउज से बाहर निकलने को बेताब लग रहे थे। फिर जमाल अंकल ने देखते ही देखते आंटी को अपनी बाहों में भरकर उनके रसीले होंठो पर अपने होंठ रख दिया और वो अपने दोनों हाथों से उनके बूब्स को मसलने लगे थे। अब मेरे अंकल ने आंटी की कमीज़ को खींचकर खोलना शुरू कर दिया और जब वो कमीज़ खुली तब आंटी के मस्त बूब्स तुरंत बाहर आ गए, अंकल ने ब्रा को बूब्स के ऊपर से हटाया, लेकिन पूरा उतारा नहीं और अब वो एक बूब्स के निप्पल को अपने मुहं में लेकर चूसने लगे थे वो बारी बारी से दोनों बूब्स के हल्के भूरे को चूस रहे थे, जो अब खड़े होकर एकदम लाल हो चुके थे। अब इधर आंटी जमाल अंकल का भरपूर साथ देते हुए उनकी पेंट की चेन को खोलकर अंकल के लंड को अपने हाथ में ले लिया उन दोनों पर चुदाई का खुमार चढ़ने लगा था और फिर जमाल अंकल ने आंटी का नन्हा सा ब्लाउज फाड़कर उनके गोरे जिस्म को पूरा नंगा कर दिया और फिर ब्रा को भी खींच डाला और मेरे अंकल ने आंटी का सलवार को भी उतार दिया। दोस्तों ये कहानी आप कामुकता डॉट कॉम पर पड़ रहे है।

अब आंटी बिल्कुल नंगी हो चुकी थी, वो बला की हसीन लग रही थी और एक मादरचोद अनुभवी रंडी की तरह वो अपने गोरे जिस्म से दोनों मर्दों को चुदाई की दावत दे रही थी। फिर आंटी जोश में आ गई अपने दांतों से उँगलियों को दबाते हुए दूसरा हाथ बूब्स से सरकता हुआ चूत तक पहुंच गया, आज आंटी की चूत पर बड़ी बड़ी झांटे थी और उन झांटों के अंदर से झांकती हुई उनकी गोरी चूत। फिर मैंने अपनी आंटी की चूत को जब गौर से तो देखा तो एक सीधी लाइन थी और उसका ऊपरी हिसा बाहर निकला हुआ था। दोस्तों जिसको चूत का दाना कहते है यह मुझे बाद में पता चला, आंटी की चूत की होंठ इस तरह से चिपके हुए थे जैसे कि कभी किसी ने उनके साथ कुछ किया ही ना हो, लेकिन थोड़ा अँधेरा बाल होने की वजह से मुझे साफ दिखा ही नहीं था। अब में तो बस इस रंडी के अदा को देखकर बेकरार हो गया और इस बीच वो दोनों मर्द भी नंगे हो गए। फिर आंटी जमाल अंकल और मेरे अंकल दोनों के लंड को अपने हाथों में लेकर उनको सहलाने लगी थी और देखते ही देखते दोनों का लंड डॅंडी की तरह तनकर खड़ा हो गया। अब आंटी खुश होकर कहने लगी वाह कितना शानदार लंड है तुम दोनों का में तो कब से बस इस लंड की दीवानी हूँ और आंटी ने दोनों के लंड पर थोड़ा थोड़ा थूक लगाया और बारी बारी से उन दोनों हरामियों के लंड को लोलीपोप की तरह चूसने लगी थी।

अब उन दोनों के मुँह से सिसकियाँ निकलने लगी थी आआहह ऊफ्फ्फ हाँ थोड़ा दाँत बचाकर चूस मेरी रंडी वाह तू ग़ज़ब का चूसती है, वाह तेरी माँ की चूत की कसम तू बड़ी मस्त माल है। फिर आंटी कहने लगी कि अब देख तू कि तेरी कुतिया तेरे लंड को किस तरह से भरपूर मज़ा लेकर चूस रही है। अब जमाल अंकल बड़बड़ा रहे थे ऊओह्ह्ह्ह ऊफ्फ्फ्फ़ साली कुतिया तू तो आज मेरी जान ही ले लेगी। फिर दोनों मर्दों ने आंटी को एक खिलोने की तरह अपने हाथों में उठाकर बिस्तर पर पटक दिया ऊओईई साले मेरे कुत्ते अब शुरू हो जा, अपनी माँ की मस्तानी जवानी का यह असली मज़ा लूटने के लिए शुरू हो जा। अब आंटी बड़बड़ा रही थी आह्ह्ह सस्सईईईई क्यों तुम प्यास बढ़ा रहे हो अपनी रंडी माँ की चूत की अपनी माँ की चूत की कसम फाड़ डालो, तुम अब मेरी मस्त चूत को। फिर अंकल और जमाल अंकल ने मेरी रंडी आंटी को बिस्तर पर सीधा लेटाकर उनके दोनों हाथ और पैर पलंग के चारों पिल्लर से बाँध दिए और आंटी एक बेबस चिड़िया की तरह बँधी लेटी थी। फिर जमाल अंकल ने एक बाल साफ करने का जुगाड़ लिया और वो आंटी की चूत की झांटों पर क्रीम लगाने लगे। अंकल अयाज़ शायद अब कुछ ज्यादा ही गरम हो चुके थे, उन्होंने मेरी बेबस रंडी आंटी के मुँह में अपना लंड डाल दिया।

अब वो कहने लगे कि ले साली कुतिया की औलाद ले चूस अपने हरामी बाप का लंड साली रंडी अगर तेरी तरह मस्त मेरी माँ भी होती तो में उसको भी चोद देता और अंकल बिल्कुल पागल हो रहे थे। फिर इधर जमाल अंकल ने आंटी की चूत के बालों को साफ करना शुरू कर दिया और झांट के बाल साफ करने के बाद उन्होंने आंटी की बाहों के नीचे के बाल भी साफ किए। अब आंटी बिल्कुल ऊपर से नीचे तक चिकनी हो गयी थी, जमाल अंकल भी अब पीछे नहीं रहने वाले थे। फिर आंटी की चूत पर उन्होंने ढेर सारा थूक लगा दिया और वो कुत्ते की तरह चूत को चूसने लगे आहहह ऊऊईई मेरी मान ऑश वाह मुझे बड़ा मस्त मज़ा आ रहा है चूस ले हरामी, चूस ले अपनी रंडी माँ की चूत। अब आंटी जोश में आकर कहने लगी कि देख तो तेरी चुदक्कड़ माँ की चूत कितनी हसीन है आह्ह्ह आहहाइईईई खा जा तू तेरी रंडी माँ की मस्त चूत को और अब आंटी मदहोश होकर सिसकियों के बीच बोल रही थी। अब अंकल अपने मूसल से लंड को आंटी की हसीन नाज़ुक चूत में एक धक्के के साथ अपने लंड को डाल दिया ऊओइईई हरामी मार दिया रे तूने, आंटी ज़ोर से चिल्लाई। अब अंकल तेज़ी से अपने लंड को आंटी की चूत के अंदर बाहर करने लगे थे और आंटी नीचे से अपनी चूत को उछालकर उनके लंड को अपनी चूत में निगल रही थी और इधर अंकल आंटी के मुँह में ही अपना लंड डाले हुए चुदाई कर रहे थे।

अब आंटी एक बेबस चिड़िया की तरह दोनों मर्दो के बीच छटपटा रही थी और फिर जमाल अंकल की बारी थी। फिर जमाल अंकल ने आंटी के दोनों हाथ खोलकर बैठा दिया, आंटी के दोनों पैरों को उसी तरह फैलाकर बँधे थे, जमाल अंकल ने पीछे से आंटी को अपनी गोद में बैठा लिया और उनकी फैली गांड में अपना लंड डाल दिया और दूसरी तरफ अंकल अयाज़ ने आंटी की चूत में धच से अपने लंड को डाल दिया। फिर एक पल के लिए तो आंटी छटपटा गयी ऊऊओह साले कुत्ते मुझे बड़ा तेज दर्द हो रहा है तुम दोनों बड़े ही बेरहम हो, तुम दोनों मादरचोद की औलाद हो, तुमने आज मेरी चूत और गांड दोनों को ही फाड़ दिया है, ऊफ्फ्फ्फ़ आयाहह्ह्ह मेरी माँ मुझे बचा ले इन कुत्तों से आईईईईई ओह्ह्ह अब मेरी जान निकली जा रही है। अब अंकल अयाज़ और अंकल जमाल अपने अपने लंड को धक्के देकर अंदर बाहर कर रहे थे और अब चुदाई की रफ़्तार को उम दोनों ने बढ़ा दिया था। फिर कुछ देर बाद आंटी का दर्द मज़े में बदल गया और चिल्लाने लगी ऊऊऊहह आआहह अब मुझे बड़ा मज़ा आ रहा है, हाँ और चोदो, फाड़ दो तुम अपनी रंडी की हसीन चूत और गांड को, तुम्हे अपनी माँ की मस्त चूत की कसम जो आज मेरी चूत को फाड़ेगा उसको में अपनी माँ की चूत का मज़ा भी चखा दूंगी आईईइ।

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अब में जा रही हूँ ऊऊुउउइईई तुम हरामियों ने मुझे जन्नत में पहुंचा दिया, में अब झड़ गई और फिर आंटी एक झटके के साथ झड़ गयी। अब अंकल अयाज़ और जमाल अंकल ने अपना अपना लंड आंटी की चूत और गांड से बाहर निकाला और बड़ी ही बेदर्दी से एक साथ आंटी के मुँह में डाल दिया और मुँह की चुदाई शुरू कर दी। अब उन दोनों के मुहं से आअहह ओह्ह्ह तेज़ सिसकियाँ निकलने लगी थी और फिर दोनों ने अपना अपना रस आंटी के मुँह में निकाल दिया। दोस्तों आंटी अब छटपटाकर अपना मुँह पीछे हटाना चाह रही थी, लेकिन जमाल अंकल ने ज़बरदस्ती उनके चेहरे को पकड़कर अपना सारा रस आंटी को पिला दिया। फिर थोड़ी देर के लिए वो तीनों बिल्कुल निढाल होकर एक दूसरे पर तीनों गिर गये। फिर एकाएक आंटी ने उन दोनों के बालो को पकड़कर उनके मुहं अपनी चूत पर सटा लिए और वो मूतने लगी, वो दोनों मर्द प्यासे कुत्ते की तरह आंटी की चूत से निकल रही पेशाब की धार पर अपना मुँह लगाए उसको पी रहे थे और दो तीन लंबी पिचकारी के बाद पेशाब निकलना बंद हो गया। दोस्तों वो दोनों मर्द पेशाब की एक एक घूँट को अपने मुहं में लिए आंटी के मुँह में डाल रहे थे।

फिर वो दोनों खड़े हो गये और आंटी के मुँह पर पेशाब करना शुरू कर दिया, आंटी ने उन दोनों का पेशाब गटक लिया। दोस्तों उनकी चुदाई का यह खेल अब खत्म हो चुका था और अंकल अयाज़ ने आंटी के दोनों पैरों को खोल दिया और आंटी को गले लगते हुए होंठो को चूमने लगे और उनको कहने लगे, वाह मेरी जान तू मस्त रंडी है वाह क्या शानदार चूत है तेरी काश में उस चूत को चोद सकता जिसने तुम जैसी चूत की रानी को जन्म दिया है। अब अंकल अयाज़ ने पूछा क्यों जमाल, है ना मेरी रंडी ग़ज़ब की माल? फिर आंटी ने शिकायत करते हुए कहा कि जमाल भाई आज आप नसरीन भाभी को क्यों नहीं लाए वो रहती तो अपनी इस चुदाई में और भी मज़ा आता। अब अंकल ने मुस्कुराते हुए कहा कि भाभी माफ़ करना नसरीन की तबियत कुछ ठीक नहीं है और उसका इलाज चल रहा है इसलिए वो नहीं आ सकी, लेकिन में आपसे वादा करता हूँ अगर दोबारा हमे ऐसा मौका मिला तो में उसको अपने साथ जरुर लेकर आऊंगा। दोस्तों यह सब देखकर में बहुत चकित होकर अपने कमरे में आकर अपनी आंटी के नाम की मुठ मारकर सो गया ।।

धन्यवाद …

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