आंटी और उसकी ग्राहक के साथ मजा


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प्रेषक : भरत …

हैल्लो दोस्तों, मेरा नाम भरत है और में आज आप सभी को अपने पहले सेक्स अनुभव के बारे में बताने जा रहा हूँ। में एक इंजिनियरिंग कॉलेज में पढ़ता हूँ, जो कि फरीदाबाद में है और मेरी उम्र 20 साल है और यह कहानी मेरी और मेरे दोस्त की माँ और उनकी ग्राहक की है और उन आंटी का नाम मंजू है, जो कि बहुत मटक मटक कर चलती है। आंटी का फिगर एकदम मस्त है, आंटी की उम्र करीब 42 साल है और वो दिखने में बिल्कुल हिरोईन लगती है। दोस्तों यह बात आज से एक महीने पहले की है जब में फरीदाबाद से अपने घर पर आ गया था। उस समय मेरे पेपर शुरू होने वाले थे, इसलिए मुझे अपनी कुछ किताब भी लेनी थी और फिर मैंने सोचा कि पेपर से पहले एक बार घर पर भी हो आता हूँ। फिर शाम को जब मैंने आंटी को देखा तो में एकदम पागल ही हो गया, वाह क्या मस्त लग रही थी। वैसे तो वो हमेशा से ही सेक्सी लगती है, लेकिन उस दिन कुछ ज्यादा ही मस्त लग रही थी। मैंने आंटी को नमस्ते किया तो आंटी ने मुझसे पूछा कि तुम कब आए? तो मैंने उनसे कहा कि में आज ही आया हूँ, मुझे मेरी कुछ किताबें लेनी थी और फिर में अपने घर पर आ गया।

दोस्तों अगले दिन छुट्टी का दिन था, इसलिए में 12 बजे सोकर उठा और फिर थोड़ा पढ़ने लगा, लेकिन मेरा बिल्कुल भी पढ़ने का मन ही नहीं कर रहा था और मुझे बार बार आंटी की याद आ रही थी तो मैंने अपनी किताब को एक तरफ रखा और अपनी दोनों आँखे बंद करके में आंटी के बारे में सोचने लगा। तभी अचानक से उसी समय आंटी मेरे घर पर आ गई और जैसे ही वो मेरे रूम में आई तो उनकी नज़र सीधा मेरे खड़े लंड पर पड़ी और वो चुपचाप दो मिनट तक वहीं पर खड़ी रहकर देखती रही और यह बात आंटी ने मुझे बाद में बताई। फिर आंटी ने मुझे आवाज़ लगाई और मैंने फटाफट अपना लोवर ठीक किया और अपने एक हाथ से लंड को छुपाने लगा तो आंटी हंसने लगी और वो मुझसे बोली कि क्यों तू पढ़ रहा था या किसी के सपनो में खोया हुआ था? मैंने बोला कि आंटी ऐसी कोई बात नहीं है, में पढ़ ही रहा था और में थोड़ा आराम करने के लिए पांच मिनट सो गया था। फिर आंटी तुरंत मुझसे बोली कि हाँ मुझे सब कुछ पता है कि तू कितना सो रहा था? फिर वो मुझसे बोली कि अच्छा चल अब तू यह बता कि तेरी मम्मी कहाँ है? फिर मैंने बोला कि वो मेरी चाची के घर पर गई है, उनकी थोड़ी तबियत खराब है। फिर मैंने उनसे पूछा कि कुछ काम है तो आप मुझे बताओ? तो उन्होंने बोला कि कुछ नहीं में सूट की कहने आई थी, चल में बाद में फिर से आ जाउंगी और तू अपनी पढ़ाई कर जो कर रहा था और वो चली गई। उसके बाद तो मेरा और भी दिमाग़ खराब हो गया और में उसे चोदने के बारे में सोचने लगा और फिर मैंने उसके नाम की मुठ मारी और उसी शाम को में अपने एक दोस्त के साथ बाहर घूमने चला गया और वापस आया तो मैंने देखा कि आंटी बाहर ही अपनी किसी ग्राहक के साथ खड़ी हुई थी, जो सूट के लिए आई थी और वो उनसे कुछ बातें कर रही थी और उन्हें मेरी आज की बात बता रही थी। फिर आंटी ने मुझे वहां पर बुलाया और उनसे कहा कि यह मेरे बेटे का दोस्त है और इंजिनियरिंग कर रहा है और यह सारा दिन पढ़ता ही रहता है, यहाँ तक कि यह सोते सोते भी उसी के बारे में सोचता रहता है और वो दोनों हंसने लगी। फिर मैंने भी मौके पर चौका मार दिया, आंटी यही तो समय है यह सब सोचने का, अब नहीं सोचूँगा तो आगे कैसे बड़ पाऊँगा और फिर काम कैसे पूरा होगा? तो वो कहती है अच्छा यह बात है। फिर अगले दिन वो मेरे घर पर आई और आते ही वो मुझसे बोली कि आज तू चुपचाप कैसे बैठा है, अब तुझे आगे नहीं बढ़ना क्या हुआ? मैंने बोला कि कुछ नहीं और फिर वो मम्मी को सूट देकर चली गई। अगले दिन मम्मी ने मुझसे बोला कि तू आंटी के घर पर चला जा और यह सूट आंटी को दे आ, मैंने आंटी को सब बोल दिया है। फिर में मम्मी के कहने पर आंटी के घर पर चला गया और मेरे जाते ही आंटी ने मुझसे कहा कि आ जा में आज तेरे ही लिए ही बैठी थी। दोस्तों मुझे आज आंटी का मूड कुछ अलग ही लग रहा था और उसने उस समय मेक्सी पहन रही थी, जो बिल्कुल पतली सी थी। मैंने उन्हे वो सूट दे दिया और जाने लगा तो आंटी मुझसे बोली कि तू दस मिनट रुक जा, में अभी इसे ठीक करके दे देती हूँ और में वहीं पर बैठ गया। आंटी मेरे लिए कोलड्रिंक्स लेकर आई और मेरे सामने रखने के लिए झुकी तो मुझे उनकी छाती साफ दिख रही थी और में तो बिल्कुल पागल ही हो गया और शायद आंटी ने भी यह देख लिया।

फिर वो मुझसे बोली कि ऐसे क्या देख रहा है? फिर मैंने कहा कि कुछ नहीं तो आंटी बोली कि तू घर से बाहर जाकर बहुत बदल गया है, मुझे लगता है तेरी भी कोई गर्लफ्रेंड बनवानी पड़ेगी, आज कल तू ज्यादा ही इधर उधर देखने लगा है। फिर मैंने भी बोल दिया कि हाँ आप ही 1-2 बनवा दो, आपकी दुकान में तो बहुत आती रहती है। फिर आंटी बोली कि क्यों तू क्या एक साथ दो को सम्भाल लेगा? तो मैंने बोला कि दो को तो क्या में उन दोनों के साथ आपको भी सम्भाल लूँ। फिर वो बोली कि अच्छा देख ले मुझे तो तेरे अंकल भी नहीं सम्भाल पाए। मैंने कहा कि आजमाकर देख लो पता लग जाएगा कि में कितनो को सम्भाल सकता हूँ और इतने में उनकी वो दोस्त जो उस दिन उनसे बात कर रही थी, वो आ गई। उनका नाम निशा था और वो आकर मुझसे बोली कि तू यहाँ पर क्या कर रहा है? तो मैंने बोला कि में मम्मी का सूट देने आया हूँ और फिर वो आंटी से बातें करने लगी। अब मैंने मन ही मन सोचा कि यह बीच में कहाँ से आ गई, हमारी अच्छी भली बातें चल रही थी, बीच में आकर सब मज़ा बिगाड़ दिया। फिर मंजू आंटी उनसे बोली कि तुम यहाँ पर बैठो, में अभी आती हूँ। फिर निशा आंटी मेरे पास में आकर बैठ गई और मुझसे बातें करने लगी। उन्होंने मेरे परिवार के बारे में मुझसे पूछा और फिर मुझसे बोली कि क्या तुम्हरी कोई गर्लफ्रेंड है? मैंने कहा कि नहीं? वो बोली ऐसा नहीं हो सकता, जब तू ऐसी हरकते करता है तो मैंने पूछा कि क्या किया मैंने? तो उन्होंने बोला कि मंजू ने मुझे सब कुछ बता दिया है और में तेरी और मंजू की बातें भी सुन रही थी, जो तुम अभी कर रहे थे। फिर में थोड़ा डर गया कि कहीं यह सब बातें मंजू आंटी मेरे घर पर ना बता दे, इतने में मंजू आंटी उनका सूट लेकर आई और बोली कि तू पहनकर देख ले तब तक में इसकी मम्मी के सूट को भी ठीक कर दूँ। फिर निशा आंटी उसी रूम में पर्दे के पीछे जाकर बदलने लगी, वहां पर एक कांच लगा हुआ था तो में वहीं बैठा था तो मुझे थोड़ा थोड़ा साईड में से दिखने लगा और वो पर्दा थोड़ा पंखे की हवा की वजह से उड़ रहा था और में उन्हें देखने लगा। उन्होंने जैसे ही अपनी कमीज़ उतारी तो में पागल ही हो गया और उन्होंने नीचे ब्रा नहीं पहन रखी थी। मुझे थोड़े साईड में से उनके बूब्स दिखे, वाह क्या मस्त सीन था वो? उन्हें भी शायद पता लग गया था तो वो भी जानबूझकर थोड़ा और साईड होकर और अपने शरीर पर हाथ फेरने लगी और फिर उन्होंने अपनी सलवार को भी उतार दिया और अब मेरे सामने उनकी बड़ी गांड थी, उन्होंने काली कलर की पेंटी पहन रखी थी और उसमें बिल्कुल सेक्सी लग रही थी और मेरा मन कर रहा था कि अभी जाकर उसको चोद दूँ, आंटी ने अपनी कमीज़ को नीचे गिरा दिया और जब वो कमीज़ उठाने के लिए नीचे झुकी तो उसकी गांड की दरार मुझे दिखने देने लगी। फिर उन्होंने कमीज़ उठाई और सलवार और कमीज़ दोनों पहन ली और फिर आकर आंटी को दिखाने लगी और कहती है कि यह थोड़ी टाईट लग रही है और अभी तो मैंने नीचे कुछ पहना भी नहीं है।

फिर मंजू आंटी उससे बोली कि तो वो नीचे कुछ पहनकर देख ले और उन्होंने अपनी आलमारी से अपनी ब्रा और पंटी उन्हें निकालकर दे दी और वो पहनने फिर से चली गई, में इस बार थोड़ा और साईड हो गया, ताकि मुझे अच्छी तरह से दिख जाए तो निशा आंटी ने ब्रा पहनी और मंजू आंटी को आवाज़ लगाई कि एक बार आना जरा मुझसे हुक बंद नहीं हो रहा है और मंजू आंटी भी मुझे देख रही थी कि कैसे में निशा को पीछे से देख रहा था तो उन्होंने मुझे आवाज़ दी, लेकिन मुझे सुनाई ही नहीं दिया, क्योंकि में तो उन्हें देखने में व्यस्त था। फिर आंटी ने मुझे ज़ोर से आवाज़ लगाई और बोली कि कहाँ खोया हुआ है जो सुनाई नहीं दे रहा है? तो निशा आंटी ने बोला कि यह अपने सपने में ही डूबा हुआ है, में कुछ नहीं बोला तो मंजू आंटी ने मुझसे कहा कि जा आंटी की मदद कर दे, में तो खुश ही हो गया और में जैसे ही खड़ा हुआ तो मंजू आंटी ने मेरे खड़े लंड को देखकर बोला कि निशा नीचे देख इसके सपने साफ साफ दिखाई दे रहे है और वो उस कांच से देखने लगी और फिर दोनों हंसने लगी और में पर्दे के पीछे गया तो आंटी ने मुझसे बोला कि यह हुक बंद कर दे।

दोस्तों आंटी के बूब्स इतने मोटे थे कि ब्रा बहुत ज्यादा टाईट हो रही थी तो में हुक बंद करने के बहाने उन्हे छूने लगा और मेरा लंड उनके शरीर पर रगड़ने लगा तो अचानक से मेरे हाथ से ब्रा छूट गई और नीचे गिर गई तो मुझे उनके पूरे बूब्स दिख गये, मेरा लंड तो जैसे पेंट फाड़कर बाहर आने को तैयार हो गया। अब आंटी नीचे ब्रा उठाने को झुकी तो मेरा लंड उनकी गांड पर छू गया। मैंने भी एक झटका मारा तो आंटी थोड़ा आगे हुई और गिरते गिरते बची और मुझे पीछे धक्का दिया और कहती है, तू क्या पागल हो गया है और वो मुझ पर गुस्सा होने लगी तो मंजू आंटी ने कहा कि कोई बात नहीं। फिर वो बोली कि मैंने इससे थोड़ा मजाक क्या कर लिया, यह तो मेरे ऊपर ही चढ़ गया, मेरा भी मूड अब बहुत खराब हो गया और में वहां से चला गया। उसके बाद में तीन दिन तक उनके घर नहीं गया। मंजू आंटी ने एक दो बार मुझे फोन भी किया, लेकिन मैंने नहीं उठाया और फिर अगले दिन उन्होंने मेरी मम्मी को फोन किया तो मम्मी ने मुझसे बोला कि जा उनके घर चला जा और मेरा सूट ले आ। फिर में आंटी के घर चला गया तो आंटी ने बोला कि तू फोन क्यों नहीं उठा रहा, तो मैंने कोई जवाब नहीं दिया। फिर वो मेरे पास आई और बोली कि क्या तू उस दिन की बात पर नाराज है? मैंने कुछ नहीं कहा तो आंटी बोली अब मान भी जा, मैंने तेरे लिए एक मस्त सी गर्लफ्रेंड भी ढूंड रखी है तो में झट से बोला क्या सच में? और में ख़ुशी में आंटी के गले लग गया, लेकिन दो मिनट के बाद मुझे पता लगा तो मैंने उन्हें छोड़ दिया। फिर आंटी कहती है कि कोई नहीं, आंटी के चेहरे पर उस समय अलग ही नशा सा झलक रहा था। फिर आंटी बोली में तो मजाक कर रही थी और में इतनी जल्दी कहाँ से ढूंढ लाती? तो मैंने कहा कि मुझे नहीं पता अब आपने बोला है तो मुझे गर्लफ्रेंड चाहिए नहीं तो आप खुद ही बन जाओ? तो आंटी बोली कि अच्छा बता तू मेरे बेटे का दोस्त है और में तेरी गर्लफ्रेंड कैसे बन सकती हूँ? तो मैंने भी बोल दिया कि अगर में आपके बेटे का दोस्त ना होता क्यों तब बन जाती मेरी गर्लफ्रेंड? अब आंटी बिल्कुल चुप हो गई और मुझे देखने लगी। फिर मैंने सोचा कि यही अच्छा मौका है और मैंने तुरंत आंटी का हाथ पकड़ लिया और बोला कि आंटी में आपसे बहुत प्यार करता हूँ, क्या आप मेरी गर्लफ्रेंड बनोगी? तो आंटी कुछ नहीं बोली और मुझे देखती रही और फिर उन्होंने कुछ सोचकर हाँ कर दिया और फिर में वहां से चला गया। दोस्तों ये कहानी आप कामुकता डॉट कॉम पर पड़ रहे है।

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अब आंटी और में फोन पर बातें करने लगे, में आंटी से सारा दिन मैसेज पर बात करता था और कभी कभी कॉल पर भी। फिर अगले दिन आंटी ने मुझे एक चुटकुला भेजा तो मैंने भी जवाब में एक चुटकुला भेज दिया। फिर आंटी ने बोला और भेज, तो मैंने एक सेक्सी चुटकुला भेज दिया, लेकिन आंटी ने कोई जवाब नहीं दिया। फिर मैंने उन्हें कॉल किया और पूछा कि क्या हुआ चुटकुला पसंद नहीं आया? जो जवाब नहीं कर रहे हो? फिर वो बोली कि नहीं ऐसी कोई बात नहीं है, तेरे अंकल के लिए खाना बना रही हूँ। फिर में और भी सेक्सी मैसेज आंटी को करने लगा तो आंटी बोली कि मैंने मना नहीं किया तो इसका मतलब यह नहीं है कि तू सारे ही सेक्सी मैसेज मुझे भेजता रहेगा। फिर मैंने कहा कि मुझे लगा आपको पसंद आ रहे है, इसलिए में भेज रहा हूँ। अब आंटी बोली कि बेटा मुझे सब पता है तो मैंने भी कहा कि जब आपको सब पता है तो इतना भाव क्यों खा रहे हो, सीधे सीधे दे दो ना? फिर आंटी बोली क्या बोला तूने? मैंने कहा कि कुछ नहीं बस में मजाक कर रहा था। फिर आंटी ने कहा कि ठीक है और मैंने सोचा कि ऐसे तो कुछ नहीं हो सकता, ऐसे तो सारा समय मैसेज में ही निकल जाएगा, मुझे कुछ और सोचना पड़ेगा। अब मैंने आंटी से बोला कि आंटी क्या हम फिल्म देखने चले? फिर वो बोली कि नहीं पागल किसी ने देख लिया तो गलत होगा। मैंने बोला कि ऐसा कुछ नहीं होगा, लेकिन वो नहीं मानी तो मैंने कहा कि में डीवीडी ले आता हूँ, आपके घर पर बैठकर देख लेंगे तो पहले उन्होंने मना कर दिया, लेकिन मेरे बार बार कहने पर वो मान गई। फिर आंटी ने मुझसे पूछा कि कौन सी फिल्म लायेगा? मैंने कहा कि इंग्लीश तो उन्होंने हाँ कह दिया और में एक थोड़ी सेक्सी फिल्म ले आया। फिर मैंने मन ही मन सोचा कि आज कुछ हो सकता है और में दस बजे उनके घर पर पहुंच गया और अंकल भी अपने काम पर जा चुके थे और उसका बेटा अपनी नौकरी पर। फिर मैंने उनके घर पर पहुंचकर देखा तो आंटी ने सूट पहन रखा था। फिर मैंने आंटी को हाए बोला तो आंटी बोली कि तू बैठ में तेरे लिए पानी लाती हूँ। दोस्तों आंटी की गांड आज उस सूट में बड़ी मस्त लग रही थी, क्योंकि उन्होंने बिल्कुल टाईट सूट पहन रखा था, शायद आंटी को पता था कि आज उनकी चुदाई होने वाली है और आज में भी रेडी था। अब आंटी ने मुझे पानी लाकर दे दिया तो वो मुझसे बोली कि में कुछ खाने के लिए लाती हूँ। मैंने बोला कि यहाँ पर बैठ मंजू। फिर वो बोली कि आंटी से सीधा मंजू क्या इरादा है? मैंने कहा कि अब गर्लफ्रेंड बनी हो तो मंजू ही बोलूँगा तो वो हंसने लगी। मैंने फिल्म लगाई तो वो बोली कि कौन सी है? मैंने उसका नाम बताया तो वो बोली कि है यह तो पुरानी है। मैंने पूछा क्यों आपने देख रखी है? तो वो बोली कि हाँ एक बार अर्जुन लाया था तो मैंने लेपटॉप पर उसके चले जाने के बाद देखी थी। अब मैंने पूछा कि फिर तो वो वाली भी फिल्म आपने जरुर देखी होगी? तो वो शरमा गई और बोली कि चुपचाप फिल्म लगा और हमने फिल्म देख़ना शुरू किया और फिर थोड़ी देर बाद फिल्म में जब एक लड़का एक लड़की को किस करता है तो मैंने आंटी के हाथ पकड़ा और उस पर किस किया और उन्हें गले लगा लिया।

फिर आंटी ने मुझे पीछे किया और बोला कि यह सब करने के लिए में तेरी गर्लफ्रेंड नहीं बनी हूँ, मैंने तो तुम्हारा दिल रखने के लिए हाँ कर दिया और यह सब तो अपनी गर्लफ्रेंड के साथ करना। फिर मैंने कहा कि ठीक है, मेरा दिल रखने के लिए ही कर लो, तो आंटी ने ना बोला तो फिर मैंने मुहं बना लिया और जाने लगा तो वो बोली कि रुक अच्छा सिर्फ़ में किस करने दूँगी और कुछ नहीं। फिर मैंने बोला कि ठीक है और फिर मैंने आंटी को गले लगा लिया। मैंने एक गाना चला दिया और आंटी को डांस के लिए कहा तो आंटी ने झट से हाँ कर दिया और में उनके साथ डांस करने लगा और फिर में उनके पीछे आ गया और उनकी गर्दन पर किस करने लगा और धीरे धीरे हाथ उनके शरीर पर घुमाने लगा और फिर उनके होंठो पर किस करने लगा, जिसकी वजह से आंटी गरम हो चुकी थी और हम स्मूच करने लगे, हमने कई देर तक स्मूच किया और फिर में आंटी के पूरे शरीर पर किस करने लगा और कपड़ो के ऊपर से ही उनके बूब्स को दबाने लगा। फिर मैंने उनकी कमीज़ को उतार दिया। उसके बाद सलवार भी और गर्दन पर किस करने लगा और उनके कानों पर किस करने लगा, जिसकी वजह से आंटी तो जैसे पागल ही हो गई। अब मैंने उनकी ब्रा को उतार दिया, वाह क्या मस्त बूब्स थे उनके, में उन्हें अच्छी तरह से चूसने लगा और आंटी मेरे बालों में हाथ घुमा रही थी और अपने होंठ भी काट रही थी। अब में आंटी की नाभि को किस करने लगा और साथ में आंटी की पेंटी के ऊपर से ही उनकी चूत को मसलने लगा और फिर मैंने उनकी पेंटी को उतार दिया, उनकी चूत एकदम साफ थी। फिर आंटी बोली कि आज ही साफ की है। में उनकी चूत देखकर बिल्कुल पागल हो गया और उसे चाटने लगा और उंगली करने लगा। आंटी मेरा मुहं अपनी चूत के अंदर दबाने लगी और सिसकियाँ ले रही थी और थोड़ी देर बाद आंटी झड़ गई और अकड़ने लगी और उन्होंने मुझे पकड़ लिया। मैंने उनका सारा रस पी लिया और फिर उन्हें किस करने लगा और अब आंटी मेरे ऊपर आ गई और मेरे लंड को मसलने लगी। उन्होंने मेरा लंड अपने मुहं में ले लिया और उसे चूसने लगी। में तो जैसे जन्नत के मज़े ले रहा था। फिर आंटी ज़ोर ज़ोर से मेरे लंड को हिलाने लगी और में झड़ गया और आंटी मेरा सारा वीर्य पी गई और हम फिर से किस करने लगे और आंटी अब बेड पर लेट गई और में उनके ऊपर आ गया तो आंटी ने मेरे लंड को पकड़ा और अपनी चूत के मुहं पर रख दिया और मैंने एक ज़ोर का धक्का मारा और मेरा आधा लंड उनकी चूत में चला गया और आंटी ने एक सिसकी ली। फिर मैंने एक और जोरदार झटका मारा और अब मेरा पूरा लंड उसकी चूत में चला गया और मुझे थोड़ा सा दर्द हुआ, क्योंकि मेरा वो पहला सेक्स था, लेकिन उस समय मज़े इतने आ रहे थे कि दर्द का पता ही नहीं चला। में लगातार धक्के देने लगा और वो भी गांड उठाकर मेरा साथ देने लगी। अब हर धक्के के साथ उसके बूब्स ऊपर नीचे हो रहे थे और वो आह्ह्ह्हह्ह उफ्फ्फफ्फ्फ़ हाँ और ज़ोर से कर रही थी, जिसकी वजह से मेरा जोश और भी बढ़ने लगा। फिर जब वो झड़ने वाली थी तो मुझसे बोलने लगी कि हाँ ज़ोर से और ज़ोर से सिसकियाँ लेने लगी और में भी उसे अपने पूरे दम से चोदने लगा और फिर हम दोनों एक साथ झड़ गये।

दोस्तों में अपना वीर्य उसकी चूत के बाहर टपकाना चाहता था, लेकिन मुझसे कंट्रोल ही नहीं हुआ और में उसकी चूत में ही झड़ गया और हम दोनों भी बिस्तर पर ही लेट गये। दस मिनट के बाद हम उठे और उसने चाट चाटकर मेरा लंड साफ किया और अपनी चूत को भी साफ किया और हमने अपने कपड़े पहने और में उसे एक किस करके घर के लिए निकल गया, क्योंकि अब उसके बेटे का आने का समय हो गया था और घर पर जाकर मैंने आंटी को एक मैसेज किया। फिर आंटी का पांच मिनट बाद कॉल आया तो वो बोली कि क्यों मज़ा आया अपनी गर्लफ्रेंड के साथ? तो मैंने बोला कि हाँ बहुत मज़ा आया। फिर वो बोली कि उसे भी बहुत मज़ा आया। अब मैंने आंटी से बोला कि कल फिर से करेंगे, तो आंटी ने कहा कि अब तो हम रोज़ करेंगे और फिर शाम को में उनके घर पर उनके बेटे को बुलाने गया तो वो सोया हुआ था और मैंने मौके का फायदा उठाया और आंटी को किस करने लगा और उनके बूब्स भी दबाने लगा। फिर थोड़ी देर तक किस करने के बाद हम अलग हुए, क्योंकि उसका बेटा घर पर ही था। फिर मैंने उसको उठाया और हम बाहर घूमने चले गये। हम जब घर पर आए तो आंटी ने बोला आ जा घर पर, लेकिन मैंने मना कर दिया। अब मेरे लंड में थोड़ा दर्द हो रहा था तो मैंने घर पर जाकर आंटी को मैसेज करके इस दर्द के बारे में पूछा। फिर आंटी ने बोला कि पहली बार चुदाई करने में थोड़ा बहुत लंड में दर्द होता है तो आंटी बोली कि में कल तुझे एक गिफ्ट दूँगी। फिर मैंने बोला कि क्या कल अपनी गांड दोगे? तो वो बोली कि चल पागल यह नहीं कोई और सर्प्राइज़ है, गांड क्या में तो पूरी ही तेरी हूँ, जब मन करे ले लेना। फिर मैंने पूछा कि बताओ क्या सर्प्राइज़ है? लेकिन वो बोली कि कल ही बताउंगी तो मैंने कहा कि ठीक है और फिर फोन कट कर दिया और में खाना खाकर सो गया। फिर अगले दिन मैंने अपनी मम्मी को बोला कि में पढ़ने अपने दोस्त के घर पर जा रहा हूँ और यह कहकर में आंटी के घर पर चला गया। आंटी ने मुझे देखा और हमने हग किया तो मैंने कहा कि जानू क्या बात है आज तो कुछ ज्यादा ही निखर रही हो? तो वो बोली कि तू भी तो आज बहुत खुश लग रहा है। फिर मैंने कहा कि आज आप गांड जो देने वाले हो और साथ में सर्प्राइज़ भी, वो बोली तू तो गांड के पीछे ही पड़ गया है, हाँ ले लेना वो भी। अब में आंटी की गांड पर हाथ घुमाने लगा, आज उसने मेक्सी पहन रखी थी। मैंने मेक्सी के अंदर हाथ डाल दिया तो वो बोली कि रुक जा में कहीं भागी थोड़ी जा रही हूँ, अपना सर्प्राइज़ तो ले ले। फिर मैंने कहा कि तुम ही तो मेरा सर्प्राइज़ हो और में नीचे बैठाकर उसकी चूत को चाटने लगा और वो मेरे बालों में हाथ घुमाने लगी और आह्ह्ह्हह्ह ऊह्ह्ह्हह् करने लगी।

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अब में उसकी चूत को चाटे जा रहा था और फिर कुछ देर बाद वो झड़ गई और में उसका सारा रस पी गया और उसके ऊपर आकर उसके बूब्स को दबाने लगा तो उसने मुझे रोका और बोला कि थोड़ा सब्र करो, अपना गिफ्ट तो ले लो और मुझे अंदर भेज दिया और पानी लेकर अंदर आई इतने में निशा आंटी ने आवाज़ लगाई तो मैंने बोला कि यह क्यों आ गई, सारा मज़ा खराब कर दिया। इतने में निशा अंदर आ गई तो मंजू आंटी मुझसे बोली इसने मज़ा खराब नहीं किया यही तो है तेरा गिफ्ट। फिर मैंने बोला कि क्या में समझा नहीं? तो मंजू आंटी बोली इसी ने सारा प्लान बनाया था और गर्लफ्रेंड वाली बात और यह सब करने का आईडिया भी इसी ने मुझे दिया था। दोस्तों में तो वो पूरी बात सुनकर एकदम से चकित हो गया। मैंने पूछा वो डांटना? तो आंटी ने कहा कि वो मैंने जानबूझ कर तुझे डांटा था ताकि तू नाराज हो जाए और गर्लफ्रेंड बनाने की बात करे। फिर मंजू आंटी बोली कि क्यों कैसा लगा सर्प्राइज़ और अब में देखता ही रह गया और वो मुझसे कहने लगी कि क्या अपने गिफ्ट के साथ खेलेगा? में तो मन ही मन बहुत खुश हो गया। निशा आंटी मेरे पास आई और मुझे किस करने लगी और में भी उन्हें किस करने लगा और मंजू आंटी ने मेरे कपड़े उतार दिए और साथ में अपने भी।

अब मैंने उन्हें बेड पर लेटा दिया और उनकी कमीज़, ब्रा उतारी, में अब उनके बूब्स को दबाने लगा, वाह क्या मस्त बूब्स थे, मंजू आंटी से भी मोटे और मेरा मन कर रहा था कि में उन्हें खा जाऊँ, उधर मंजू आंटी मेरा लंड चूसने लगी और में निशा के बूब्स चूस रहा और एक हाथ से उनकी सलवार को उतारने लगा और फिर पेंटी के ऊपर से चूत को सहलाने लगा और अब मैंने पेंटी को भी उतार दिया और पूरा नीचे आकर उनकी चूत चाटने लगा और उंगली करने लगा। मंजू आंटी और निशा आंटी अब किस करने लगी। फिर मैंने निशा की चूत पर अपना लंड रखा और एक ज़ोर का झटका मारा और मेरा पूरा लंड उसकी चूत में चला गया और में उसे चोदने लगा। मंजू आंटी उनके बूब्स को दबाने, चाटने लगी और में तेज तेज धक्के लगा रहा था और उन्हें चोद रहा था और वो आह्ह्ह्हह्ह आहअह कर रही थी और साथ में मंजू आंटी की चूत में भी उंगली कर रही थी और में आंटी को लगातार धक्के देकर चोदे जा रहा था और कुछ देर बाद आंटी झड़ गई और बिल्कुल ढीली पड़ गई। मैंने भी अपनी चुदाई की स्पीड बढाई और आंटी के अंदर ही झड़ गया। मंजू आंटी पांच मिनट बाद मेरे लंड को सहलाने लगी और वो एक बार फिर से खड़ा हो गया। मैंने मंजू आंटी से बोला कि मुझे अब आपकी गांड मारनी है तो वो बोली हाँ आ जा में पूरी तेरी हूँ, जो मन करे कर ले। मैंने उनको डॉगी पोजीशन में लाकर मैंने उनकी गांड पर लंड लगाया। फिर वो बोली ऐसे नहीं जाएगा, पहले वहां से क्रीम ला तो निशा आंटी क्रीम ले आई और मेरे लंड और आंटी की गांड पर लगाने लगी और में उनके बूब्स को दबाने लगा। फिर मैंने लंड उनकी गांड के मुहं पर रख दिया और एक ज़ोर का झटका मारा और मेरा लंड का सुपाड़ा उनकी गांड में चला गया और उन्हें थोड़ा दर्द हुआ। मैंने एक जोरदार झटका मारा और मेरा आधे से ज्यादा लंड उनकी गांड में चला गया और वो चिल्ला पड़ी, हाए में मर गई आह्ह्ह्हह्ह् उफ्फ्फ्फफ्फ मार दिया। फिर निशा आंटी उसके बूब्स को दबाने लगी और में दो मिनट रुक गया। फिर मैंने एक और धक्का मारा और मेरा पूरा लंड उसकी गांड में चला गया और उन्हें बहुत दर्द हुआ, लेकिन अब मुझसे नहीं रुका गया और में धक्के देने लगा और वो आवाज़े निकालने लगी। निशा आंटी उनके बूब्स को दबाने लगी और अपनी चूत में उंगली करने लगी, करीब दस मिनट गांड मारने के बाद में झड़ गया और हम दोनों लेट गये। फिर मैंने अगले दो दिन तक उन दोनों के साथ बहुत मज़े किए। फिर में पेपर के लिए फरीदाबाद चला गया, वहां पर मेरा मन पढ़ाई में नहीं लगता था तो मैंने उनके साथ सेक्स चेट भी शुरू की। अब मेरे पेपर खत्म हो गये है और अब में उन दोनों को बहुत चोदता हूँ ।।

धन्यवाद …

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